चंडीगढ़ में चारों बड़े ऐप निलंबित, और आदेश में दर्ज है कि रैपिडो ने शहर के नियमों की जगह केंद्र के दिशानिर्देश माँगे थे
राज्य परिवहन प्राधिकरण ने उबर और रैपिडो के एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए। ओला जून में और इनड्राइव अगस्त में जा चुकी थीं। एक एग्रीगेटर लाइसेंस अपने साथ किराया, बीमा, प्रशिक्षण और दफ़्तर की जो शर्तें लाता है, यह लेख उन्हीं को दस्तावेज़ दर दस्तावेज़ पढ़ता है।

रैपिडो ने अनुपालन का जवाब भेजने के बजाय यह माँगा कि चंडीगढ़ के अपने नियमों की जगह केंद्र के मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 लागू कर दिए जाएँ।
यह बात कंपनी के किसी बयान में नहीं, उस आदेश में दर्ज है जिसने रैपिडो का एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किया। द ट्रिब्यून में नितिन जैन की रिपोर्ट आदेश का हवाला देकर यही लिखती है।
उसी दिन उबर का लाइसेंस भी निलंबित हुआ। ओला जून में बाहर हो चुकी थी, इनड्राइव अगस्त में। ट्राइसिटी में चलने वाले चारों बड़े एग्रीगेटर अब निलंबित हैं, और शहर में ऐप से बुक होने वाली सवारी का एक ही ज़रिया बचा है: सहकारी टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड का भारत टैक्सी।
आदेश किस नियम के सहारे निकला
निलंबन चंडीगढ़ प्रशासन मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम, 2025 के नियम 17 के तहत हुआ। आदेश पर राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव और लाइसेंसिंग प्राधिकारी नितीश सिंगला के हस्ताक्षर हैं। अवधि छह महीने है और यह तत्काल प्रभाव से लागू हुआ, जिससे दोनों मंच मार्च 2027 तक केंद्रशासित प्रदेश में कैब और बाइक-टैक्सी नहीं चला सकते। बिज़नेस टुडे ने 8 सितंबर 2026 को इसे दर्ज किया, ट्रिब्यून ने अगले दिन ब्योरे के साथ। दोनों में एक ही वजह है: बार-बार भेजे गए नोटिसों पर ज़रूरी दस्तावेज़ न देना या असंतोषजनक जवाब देना।
उबर की फ़ाइल में क्या दर्ज है
आदेश के मुताबिक़ उबर ने 7 जुलाई 2025 को अधिसूचित किराया दरें लागू नहीं कीं और यात्रियों से ज़्यादा वसूला, जो नियम 14(iii) का उल्लंघन है। यह उपनियम किराये को प्रशासन की तय दर पर सीमित करता है। अनुपालन का पहला अनुरोध 8 जुलाई 2025 को गया, कारण बताओ नोटिस 10 अक्तूबर 2025 को। मई 2026 के तीनों निरीक्षणों में सेक्टर 47-सी का दफ़्तर बंद मिला। मंच से ग़ैर-व्यावसायिक वाहन जुड़े पाए गए। चालकों पर सदस्यता और रिचार्ज का ढाँचा थोपे जाने की शिकायत चंडीगढ़ कैब ड्राइवर यूनियन ने 7 सितंबर 2026 को उठाई।
रैपिडो की फ़ाइल में क्या दर्ज है
रैपिडो के मामले में सबसे ठोस आपत्ति बीमे की है। कंपनी ने बाइक-टैक्सी चालकों के लिए जो कवर दिया, वह सिर्फ़ दुर्घटना में मृत्यु और चोट तक सीमित था, जबकि 2025 के नियम इससे आगे का कवर माँगते हैं। सेक्टर 32-डी का दफ़्तर भी मई 2026 के तीनों निरीक्षणों में बंद मिला। ज़्यादा किराया वसूलने और ग़ैर-व्यावसायिक वाहन जोड़ने की बात दर्ज है। सदस्यता ढाँचे की शिकायत ट्राइसिटी कैब ड्राइवर्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन ने 3 सितंबर 2026 को की थी, यानी उबर वाली शिकायत से चार दिन पहले।
कंपनियों की तरफ़ से चुप्पी
ट्रिब्यून, बिज़नेस टुडे, लेटेस्टली और न्यूज़24 ऑनलाइन, इन चारों की रिपोर्टों में उबर या रैपिडो का कोई बयान नहीं है। लेटेस्टली ने अपनी ही ख़बर पर तीन का विश्वसनीयता अंक लगाया और लिखा कि इसमें आधिकारिक दस्तावेज़ी पुष्टि नहीं है। पिछले दोनों निलंबनों पर भी यही स्थिति रही: ओला और इनड्राइव, किसी की प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। जो पक्ष उपलब्ध है वह प्रशासन का है और चालक संगठनों का। किसी रिपोर्ट में कंपनियों ने आदेश को चुनौती देने की बात नहीं कही।
लाइसेंस माँगने वाले को क्या साबित करना पड़ता है
नियमों की पात्रता शर्तें ऐसी हैं कि निलंबन की आधी वजहें उन्हीं से निकलती हैं। इंडिया लॉ के विश्लेषण के मुताबिक़ आवेदक या तो कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंपनी हो, या सहकारी समिति। भारत में एक चालू पंजीकृत कार्यालय चाहिए और चंडीगढ़ में एक उप-कार्यालय। सरकार का कोई बक़ाया न हो। सिम्युलेटर के साथ ड्राइविंग टेस्ट की सुविधा हो, या किसी अधिकृत तीसरे पक्ष से करवाई जाए। लाइसेंस मिलने के छह महीने में कारोबार शुरू करना अनिवार्य है। बंद मिला दफ़्तर इसीलिए शर्त का उल्लंघन बन जाता है।
चालक की पात्रता की शर्तें
मंच पर जुड़ने वाले चालक के लिए भी सूची लंबी है। वैध पहचान और ड्राइविंग लाइसेंस, कम से कम दो साल का गाड़ी चलाने का अनुभव, पिछले तीन साल में कोई आपराधिक दोषसिद्धि नहीं, चिकित्सा परीक्षण और पुलिस सत्यापन। वाहन के सारे लंबित चालान चुकाने के बाद ही उसे मंच से जोड़ा जा सकता है। सुरक्षा उपकरण अलग से अनिवार्य हैं: पैनिक बटन और वाहन लोकेशन ट्रैकर। बच्चों वाला ऑटोमैटिक लॉक मना है, सिर्फ़ हाथ से खुलने वाला चलेगा। ऐप में किराया अंग्रेज़ी और हिंदी, दोनों में दिखाना होता है।
बीमा और प्रशिक्षण, और जो रक़म कहीं नहीं छपी
नियम एग्रीगेटर से चालकों के लिए स्वास्थ्य बीमा और टर्म बीमा, दोनों माँगते हैं। साथ में शुरुआती प्रशिक्षण और हर साल पुनश्चर्या प्रशिक्षण। इन चारों निलंबन आदेशों में यही शर्त सबसे ज़्यादा बार लौटती है। जो किसी देखी गई रिपोर्ट में नहीं मिला, वह है इन दोनों बीमों की तय रक़म। ट्रिब्यून की अधिसूचना-रिपोर्ट, मसौदा नियमों की रिपोर्ट और इंडिया लॉ का विश्लेषण, तीनों शब्द दोहराते हैं और अंक नहीं देते। रैपिडो पर आपत्ति भी रक़म की नहीं, कवर के दायरे की है।
किराया प्रशासन तय करता है, ऐप नहीं
11 अक्तूबर 2025 की ट्रिब्यून रिपोर्ट में उस किराया ढाँचे का ब्योरा है जिसे लागू न करने पर कार्रवाई हुई। 7 जुलाई 2025 से प्रभावी इस ढाँचे में पहली बार एसी और ग़ैर-एसी टैक्सी का किराया एक कर दिया गया। शुरुआती 3 किलोमीटर के लिए एक सपाट दर तय हुई और न्यूनतम किराया 90 रुपये रखा गया। शुरुआती दूरी जोड़ने की वजह मसौदे में लिखी थी: खाली चली दूरी और ईंधन की भरपाई। किराया तय करने का अधिकार प्रशासन के पास है, मंच के एल्गोरिदम के पास नहीं।
चालक के हिस्से का आँकड़ा हर दस्तावेज़ में अलग
यहाँ सूत्र आपस में नहीं मिलते। ट्रिब्यून की 11 अक्तूबर 2025 की रिपोर्ट कहती है कि अधिसूचित ढाँचे में चालक को सवारी के किराये का 90 फ़ीसदी मिलना है। इंडिया लॉ का विश्लेषण उन्हीं नियमों को पढ़कर कहता है कि चालक को कम से कम 80 फ़ीसदी मिलेगा, बाक़ी एग्रीगेटर का। 2024 के मसौदे की रिपोर्ट में तीसरा पाठ है: हर सवारी के कुल किराये का 2 फ़ीसदी राज्य के ख़ज़ाने में जाएगा और बचे हुए में से कम से कम 80 फ़ीसदी चालक का होगा। इनमें कौन सा अंतिम अधिसूचित पाठ है, यह किसी उपलब्ध रिपोर्ट से तय नहीं होता, इसलिए यहाँ तीनों जस के तस दर्ज हैं।
सर्ज पर चंडीगढ़ और केंद्र की दूरी
निलंबन आदेश जिस नियम 14(iii) का हवाला देता है, वह किराये को प्रशासन की तय दर पर बाँधता है। इंडिया लॉ के मुताबिक़ एग्रीगेटर अधिसूचित किराये से 20 फ़ीसदी तक कम वसूल सकता है, यानी छूट की गुंजाइश है, बढ़ोतरी की नहीं। केंद्र के 2025 दिशानिर्देश उलट चलते हैं: वहाँ किराया आधार दर के 50 फ़ीसदी से 200 फ़ीसदी तक जा सकता है। रैपिडो ने जिस दस्तावेज़ को लागू करने की माँग की, उसमें व्यस्त समय की दोगुनी दर की छूट मौजूद है।
एक ही उपनियम पर दो पाठ
24 जून 2025 की ट्रिब्यून रिपोर्ट, जो अधिसूचना से एक दिन पहले छपी, चंडीगढ़ के नियमों में अधिकतम सर्ज 1.5 गुना और न्यूनतम आधार दर से 50 फ़ीसदी नीचे बताती है। 1 अगस्त 2024 की मसौदा रिपोर्ट में भी यही दोनों आँकड़े हैं। पर निलंबन आदेश और इंडिया लॉ का विश्लेषण किराये की छत को प्रशासन की अधिसूचित दर पर रखते हैं, सर्ज की किसी गुंजाइश के ज़िक्र बिना। यह अंतर मसौदे और लागू नियम के बीच आया या रिपोर्टिंग में, उपलब्ध सूत्रों से तय नहीं होता।
छह दिन के भीतर दो दस्तावेज़
चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने एग्रीगेटर नियम 25 जून 2025 को अधिसूचित किए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने संशोधित मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 1 जुलाई 2025 को जारी किए, अधिसूचना संख्या आरटी-16011/9/2019-टी (भाग)। दोनों के बीच छह दिन का फ़ासला है। किराया ढाँचा उसके ठीक छह दिन बाद, 7 जुलाई 2025 को अधिसूचित हुआ। रैपिडो की माँग इसी झिरी में बैठती है: शहर का नियम केंद्र के नए दस्तावेज़ से छह दिन पुराना है, और कंपनी चाहती थी कि नया वाला उसकी जगह ले ले।
केंद्र के दिशानिर्देश सलाह हैं, आदेश नहीं
एससीसी ऑनलाइन के विश्लेषण के मुताबिक़ ये दिशानिर्देश परामर्शी हैं। राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि वे 1 अक्तूबर 2025 से पहले इन्हें अपना लें, यानी तीन महीने की समयसीमा सुझाई गई, थोपी नहीं गई। एससीसी ऑनलाइन इन्हें मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 88 के तहत जारी बताता है; टीमलीज़ रेगटेक अधिसूचना संख्या देता है पर धारा नहीं बताता। किसी राज्य ने अपने नियम पहले से अधिसूचित कर रखे हों तो सलाह उन्हें अपने आप नहीं बदलती।
बीमा की रक़म पर भी दो आँकड़े
केंद्रीय दिशानिर्देशों में चालक के बीमे को लेकर दो अलग पाठ सामने आते हैं। एससीसी ऑनलाइन लिखता है कि चालक का कवर सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुसार कम से कम 5 लाख रुपये होगा, और यात्री का बीमा प्रति यात्रा कम से कम 5 लाख रुपये। टीमलीज़ रेगटेक उन्हीं दिशानिर्देशों को पढ़कर लिखता है कि चालकों के लिए 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य और टर्म बीमा अनिवार्य है। दोनों एक ही 1 जुलाई 2025 के दस्तावेज़ की बात कर रहे हैं, और यहाँ दोनों आँकड़े जस के तस दर्ज हैं।
लाइसेंस की बाक़ी शर्तें और उनकी क़ीमत
केंद्रीय दिशानिर्देशों में लाइसेंस पाँच साल का है। आवेदन और लाइसेंस शुल्क 5 लाख रुपये, नवीनीकरण शुल्क 25 हज़ार रुपये। आवेदन पर फ़ैसला 90 दिन में और मंज़ूरी के 15 दिन के भीतर लाइसेंस जारी। चालक के लिए 40 घंटे का शुरुआती प्रशिक्षण तय है और कम रेटिंग वालों के लिए तिमाही प्रशिक्षण। पहचान, लाइसेंस और चिकित्सा फ़िटनेस के साथ मनोवैज्ञानिक जाँच भी सूची में है। सवारी रद्द करने पर शुल्क 100 रुपये से ऊपर नहीं जा सकता, यही सीमा चंडीगढ़ के मसौदे में भी थी।
पहला निलंबन ओला का
17 जून 2026 की शाम प्राधिकरण ने ओला कैब्स चलाने वाली एएनआई टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड का लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किया। आदेश में पाँच बातें गिनाई गईं: चालक कल्याण के प्रावधानों का पालन न होना, अधिसूचित किराया ढाँचे से हटकर वसूली, चालकों पर प्रीपेड रिचार्ज वाला सदस्यता ढाँचा, तय समय में नोटिसों का जवाब न देना, और चंडीगढ़ का पता क़रीब एक साल पहले बिना सूचना दिए छोड़ देना। प्राधिकरण ने ओला से जुड़े वाहन मालिकों को शहर में बुकिंग लेने से मना किया और यात्रियों से कहा कि वे इस मंच से सवारी बुक न करें।
दूसरा निलंबन इनड्राइव का
इनड्राइव चलाने वाली कंपनी के निलंबन की तारीख़ पर दो सूत्र अलग हैं। पंजाब न्यूज़लाइन इसे 10 अगस्त 2026 बताता है, ट्रिब्यून की रिपोर्ट 11 अगस्त 2026 की है। कंपनी का नाम भी दो तरह छपा है: ट्रिब्यून में इंडसिस्टम्स आईटी प्राइवेट लिमिटेड, पंजाब न्यूज़लाइन में इंडसिस्टम्स आईटी प्रा. लि.। आपत्तियाँ वही हैं: स्वास्थ्य और टर्म बीमा तथा प्रशिक्षण के प्रावधान लागू न करना, अनुपालन रिपोर्ट न भेजना, निरीक्षण में मिली गड़बड़ियाँ, और तय किराया ढाँचे से हटना। प्राधिकरण ने चालान और वाहन ज़ब्ती की चेतावनी भी दी।
अक्तूबर 2025 के नोटिस, और बंद दफ़्तर

चारों कंपनियों को एक साथ कारण बताओ नोटिस अक्तूबर 2025 में गए थे। ट्रिब्यून की 11 अक्तूबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये नोटिस राज्य परिवहन प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव अमित कुमार ने जारी किए और जवाब के लिए 15 दिन दिए। दफ़्तरों की हालत अलग-अलग थी: ओला अपना दफ़्तर क़रीब छह महीने पहले छोड़ चुकी थी, उबर दर्ज पते पर मौजूद नहीं थी, रैपिडो का दफ़्तर निरीक्षण में बंद मिला, और इनड्राइव के दफ़्तर में इतना ही स्टाफ़ था कि सवालों का जवाब न दे सके।
चार आदेश, एक ही सूची
ग्यारह महीने में चार आदेश निकले और उनमें दर्ज ख़ामियाँ लगभग एक जैसी हैं। हर आदेश में शहर में दफ़्तर की अनुपस्थिति है, अधिसूचित किराये से हटकर वसूली है, चालकों के स्वास्थ्य और टर्म बीमा तथा प्रशिक्षण का ज़िक्र है, और नोटिसों का जवाब समय पर न आने की बात है। ओला, उबर और रैपिडो, तीनों पर चालकों से सदस्यता या रिचार्ज कराने की शिकायत भी दर्ज है, जो नियमों की किसी एक धारा से नहीं, चालक संगठनों की अर्ज़ियों से आदेश में पहुँची। नोटिस अक्तूबर 2025 में गए और पहला निलंबन जून 2026 में हुआ। बीच के आठ महीनों में प्राधिकरण ने मई 2026 के निरीक्षणों को छोड़कर और क्या किया, यह उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं खुलता।
नियम 17 आगे क्या करने देता है
इंडिया लॉ के पाठ के अनुसार लाइसेंस व्यवस्थागत विफलता, वित्तीय गड़बड़ी या अनुपालन में चूक पर निलंबित किया जा सकता है। बार-बार निलंबन हो या गंभीर श्रेणी का अपराध हो, तो लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और जमा सुरक्षा राशि ज़ब्त की जा सकती है। चारों कंपनियों पर अभी पहला निलंबन है। छह महीने बाद वही ख़ामियाँ दोहराई गईं तो अगला क़दम निलंबन नहीं, रद्दीकरण की श्रेणी में जाता है। सुरक्षा राशि किसी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।
अब शहर किस पर चल रहा है

चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग के पास कुल 603 बसें हैं, जिनमें 436 शहर के भीतर चलती हैं और 167 अंतरराज्यीय मार्गों पर। यह संस्था 1 नवंबर 1966 को 30 बसों से शुरू हुई थी। बसों के साथ ऑटो-रिक्शा और पारंपरिक टैक्सियाँ हैं, जिनकी पंजीकृत संख्या किसी देखे गए सूत्र में नहीं मिली। ऐप से बुक होने वाली सवारी में सिर्फ़ भारत टैक्सी बची है। ओला के निलंबन की रिपोर्ट में ट्राइसिटी के लगभग 50 हज़ार रोज़ाना यात्रियों के प्रभावित होने का अनुमान दर्ज है।
भारत टैक्सी का ढाँचा

सहकारिता मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक़ भारत टैक्सी को गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 5 फ़रवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू किया। इसमें हर चालक, जिसे सारथी कहा गया है, अधिकतम 500 रुपये की अंश-पूँजी पर सदस्य बनता है। हर पाँच साल पर चुनाव होकर सारथियों के दो प्रतिनिधि बोर्ड में बैठेंगे। मंच चार पहिया, तीन पहिया और दो पहिया वाहनों को जोड़ता है। दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस, डीएमआरसी, विमानपत्तन प्राधिकरण, इफ़्को टोकियो बीमा और भारतीय स्टेट बैंक समेत नौ संस्थाओं से समझौते हुए हैं।
दावे किसके हैं
विज्ञप्ति में शाह का कथन है कि सहकार टैक्सी कुल मुनाफ़े का सिर्फ़ 20 फ़ीसदी अपने पास रखेगी, और उस 20 रुपये के मालिक भी सारथी ही होंगे। गुजरात शुभारंभ की रिपोर्ट में भारत टैक्सी के अध्यक्ष डॉ. जयेन मेहता का कथन है कि ग्राहक का ख़र्च किया हर रुपया सीधे सारथी के बैंक खाते में जाना चाहिए। सारथियों के लिए 5 लाख रुपये तक के मुफ़्त इलाज, बीमा और सस्ते क़र्ज़ की बात भी विज्ञप्ति में है। ये मंच चलाने वालों के अपने दावे हैं, किसी स्वतंत्र लेखा-परीक्षा के निष्कर्ष नहीं।
मंच का आकार और उसका लक्ष्य
27 जून 2026 को गांधीनगर के महात्मा मंदिर में गुजरात के लिए शुभारंभ हुआ। द हंस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ तब तक देश भर में लगभग सात लाख सारथी जुड़ चुके थे और ऐप पर 38 से 40 लाख ग्राहक पंजीकृत थे; अकेले गुजरात में डेढ़ लाख से ज़्यादा चालक। राज्य में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, आणंद, भावनगर, जामनगर और वलसाड से शुरुआत हुई। लक्ष्य पर दो पाठ हैं: रिपोर्ट मार्च 2027 तक 125 से ज़्यादा शहरों और 30 राज्यों की राजधानियों की बात कहती है, मेहता का उद्धृत कथन "एक साल के भीतर" का है।
शहर कितना बड़ा है
चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश है और पंजाब तथा हरियाणा, दोनों की साझा राजधानी। 2011 की जनगणना में इसकी आबादी 10 लाख 55 हज़ार 450 थी और क्षेत्रफल क़रीब 114 वर्ग किलोमीटर। सीमा से लगे मोहाली और पंचकूला के साथ मिलकर ट्राइसिटी बनती है, और सवारी का बाज़ार प्रशासनिक सीमा पर नहीं रुकता। निलंबन आदेश सिर्फ़ केंद्रशासित प्रदेश की सीमा में लागू होता है, जिससे ट्राइसिटी के बाक़ी दो हिस्सों की स्थिति उपलब्ध रिपोर्टों से साफ़ नहीं होती।
दो तारीख़ें जो एक जगह मिलती हैं
उबर और रैपिडो का निलंबन मार्च 2027 में ख़त्म होगा। भारत टैक्सी का घोषित विस्तार लक्ष्य भी मार्च 2027 का है: 125 से ज़्यादा शहर और 30 राज्यों की राजधानियाँ। चंडीगढ़ में इस बीच जो सवारियाँ ऐप से बुक होंगी, वे उसी एक मंच से होंगी जिसे सहकारिता मंत्रालय ने शुरू कराया और जिसका दावा है कि उसमें कमीशन नहीं कटता। नियम 17 के तहत निलंबित लाइसेंस अपने आप बहाल होता है या नए सिरे से अनुपालन साबित करना पड़ता है, यह किसी उपलब्ध रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।
स्रोतद ट्रिब्यून, नितिन जैन की रिपोर्ट, 9 सितंबर 2026 — उबर और रैपिडो के निलंबन आदेश का ब्योरा, बिज़नेस टुडे, 8 सितंबर 2026 — निलंबन की पहली रिपोर्ट, द ट्रिब्यून, 11 अक्तूबर 2025 — चारों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस और अधिसूचित किराया ढाँचा, द ट्रिब्यून, 25 जून 2025 — चंडीगढ़ प्रशासन मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम, 2025 की अधिसूचना, द ट्रिब्यून, 1 अगस्त 2024 — मसौदा एग्रीगेटर नियमों के आँकड़े, द ट्रिब्यून, 24 जून 2025 — अधिसूचना से एक दिन पहले नियमों का ब्योरा, इंडिया लॉ, विधिक विश्लेषण — चंडीगढ़ एग्रीगेटर नियम 2025 की शर्तें, एससीसी ऑनलाइन, 4 जुलाई 2025 — केंद्र के मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2025 का विश्लेषण, टीमलीज़ रेगटेक — केंद्रीय दिशानिर्देशों की अधिसूचना संख्या और प्रावधान, द ट्रिब्यून, 17 जून 2026 — ओला के निलंबन की रिपोर्ट, द ट्रिब्यून — ओला निलंबन के कारणों का विस्तृत ब्योरा, द ट्रिब्यून, 11 अगस्त 2026 — इनड्राइव का निलंबन, पंजाब न्यूज़लाइन — इनड्राइव निलंबन की तारीख़ और चेतावनी, पत्र सूचना कार्यालय, सहकारिता मंत्रालय, 5 फ़रवरी 2026 — भारत टैक्सी के शुभारंभ की विज्ञप्ति, द हंस इंडिया, 27 जून 2026 — भारत टैक्सी का गुजरात शुभारंभ और आँकड़े, विकिपीडिया — चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग का बेड़ा, विकिपीडिया — चंडीगढ़ की आबादी और क्षेत्रफल