H-1B पर एक लाख डॉलर की शर्त एक साल और बढ़ी है, जबकि उसे वसूलने वाले दसों सरकारी काग़ज़ 8 जून को अदालत रद्द कर चुकी है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर को सितंबर 2025 के उस हुक्मनामे की मियाद 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दी, जिसके तहत H-1B याचिका के साथ एक लाख डॉलर की अदायगी होने पर ही विशेष पेशे के विदेशी कामगार अमेरिका में दाख़िल हो सकते हैं। उसी दिन इसी कार्यक्रम पर दूसरा आदेश भी निकला, जिस पर ख़बरें लगभग नहीं बनीं।

अमेरिका में काम करने के लिए H-1B याचिका आज दाख़िल हो, तो उसके साथ एक लाख डॉलर नहीं जाते। शर्त काग़ज़ पर मौजूद है। उसे वसूलने का ढाँचा मौजूद नहीं है। मैसाचूसेट्स की संघीय ज़िला अदालत ने 8 जून 2026 को उन दसों सरकारी दस्तावेज़ों को रद्द कर दिया, जिनके सहारे यह रक़म ली जा रही थी, और 24 जुलाई को अपील अदालत ने सरकार की रोक की अर्ज़ी ख़ारिज कर दी।
इसके बावजूद शुक्रवार, 18 सितंबर को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उसी शर्त को एक साल और बढ़ाने वाले हुक्मनामे पर दस्तख़त किए।
18 सितंबर को दस्तख़त दो काग़ज़ों पर हुए
हुक्मनामे का नाम वही है जो पिछले साल था, "रिस्ट्रिक्शन ऑन एंट्री ऑफ़ सर्टेन नॉनइमिग्रेंट वर्कर्स"। इसकी प्रस्तावना कहती है कि सितंबर 2025 की उद्घोषणा 10973 को बारह महीने और बढ़ाना अमेरिका के हित में है, यानी 21 सितंबर 2027 को रात 12:00 बजे तक। धारा 1(a) उसी मियाद को दूसरे तरीक़े से लिखती है: रोक इस उद्घोषणा के लागू होने की तारीख़ से बारह महीने बाद ख़त्म होगी, और वह तारीख़ 21 सितंबर 2026 की रात 12:01 है। दोनों वाक्य एक ही दस्तावेज़ में हैं। फ़र्क़ एक मिनट का है।
क़ानूनी आधार वही है। आव्रजन एवं राष्ट्रीयता अधिनियम की धाराएँ 212(f) और 215(a)। 19 सितंबर तक यह उद्घोषणा फ़ेडरल रजिस्टर में छपी नहीं थी, इसलिए न उसका रजिस्टर हवाला है और न कोई उद्घोषणा संख्या। पिछली बार दस्तख़त 19 सितंबर 2025 को हुए थे और प्रकाशन 24 सितंबर को।
उसी दिन, उसी कार्यक्रम पर, दूसरा आदेश भी निकला। उस पर ख़बरें लगभग नहीं बनीं। "एनहांसिंग प्रोग्राम इंटेग्रिटी एंड इंटरएजेंसी कोऑर्डिनेशन" नाम का यह कार्यकारी आदेश विदेश, श्रम और गृह सुरक्षा विभागों से कहता है कि वे H-1B याचिकाओं, श्रम शर्त आवेदनों और वीज़ा पर फ़ैसला लेते वक़्त वाणिज्य विभाग, शिक्षा विभाग और लघु व्यवसाय प्रशासन से सलाह करें। धारा 3(a) कहती है कि अधिकारी यह भी देखें कि प्रायोजक नियोक्ता ने पिछले एक साल में छँटनी की है या आगे करने वाला है। धारा 3(b) श्रम विभाग के वेज एंड ऑवर डिवीज़न को आदेश की तारीख़ से तीस दिन के भीतर पुराने श्रम शर्त आवेदनों की जाँच शुरू करने को कहती है, धारा 212(n)(2)(G) के तहत। धारा 3(c) राष्ट्रपति की 215(a) वाली शक्ति चार मंत्रियों को सौंप देती है। यह आदेश पैसा नहीं माँगता, जाँच बढ़ाता है।
आदेश की प्रस्तावना में एक वाक्य ऐसा है जिसका स्रोत उसमें नहीं है। उसमें लिखा है कि "एक विदेशी देश के विदेश मंत्री ने तो सार्वजनिक रूप से माना" कि H-1B "आउटसोर्सिंग वीज़ा बन चुका है"। आदेश न उस मंत्री का नाम देता है, न देश का, न तारीख़ का। इस रिपोर्ट के लिए वह बयान किसी प्राथमिक स्रोत में नहीं मिला, इसलिए यहाँ सिर्फ़ यह दर्ज है कि आदेश ऐसा कहता है।
पिछले हुक्मनामे और इस हुक्मनामे का फ़र्क़
दोनों पाठ आमने-सामने रखने पर चार बदलाव दिखते हैं। धारा 1(a) में सिर्फ़ साल बदला है। धारा 1(b) में 2025 का वह वाक्य हटा दिया गया है जो विदेश मंत्री से बी वीज़ा के दुरुपयोग पर मार्गदर्शन जारी करने को कहता था। धारा 2(b) में 2025 का पाठ कहता था कि विदेश विभाग सिर्फ़ उन्हीं "वीज़ा याचिकाओं" को मंज़ूर करे जिनके लिए अदायगी हुई है; 2026 का पाठ "वीज़ा आवेदनों" कहता है। विदेश विभाग याचिका मंज़ूर करता ही नहीं, वह आवेदन पर फ़ैसला लेता है। एक शब्द बदलने से वह विसंगति दूर हो गई।
चौथा बदलाव धारा 3(a) में है और वही सबसे भारी है। 2025 का पाठ इतना ही कहता था कि रोक उन्हीं पर लागू होगी जो लागू होने की तारीख़ के बाद अमेरिका में दाख़िल हों या दाख़िल होने की कोशिश करें। 2026 के पाठ में एक नया वाक्य जुड़ा है: यह रोक उन लोगों पर लागू होती है जिन्हें याचिका की मंज़ूरी को अमल में लाने के लिए अमेरिका में प्रवेश माँगना पड़ता है, "जिसमें कांसुलर सूचना, प्रवेश बिंदु पर सूचना, उड़ान-पूर्व निरीक्षण या प्री-क्लीयरेंस शामिल है"।
इससे एक बात साफ़ होती है। यह हुक्मनामा हर याचिका पर लगने वाली फ़ीस नहीं है। यह विदेश में बैठे लाभार्थी के अमेरिका में दाख़िल होने पर लगी रोक है, और रक़म उस रोक से छूट की क़ीमत है।
2025 की उद्घोषणा में धारा 4 भी थी, जो श्रम विभाग से प्रचलित वेतन स्तर बदलने और गृह सुरक्षा विभाग से ऊँचे कौशल और ऊँची तनख़्वाह को प्राथमिकता देने के लिए नियम बनाने को कहती थी। 2026 के पाठ में वह धारा नहीं है। दोनों नियम बन चुके हैं। प्रस्तावना ख़ुद बताती है कि गृह सुरक्षा विभाग का अंतिम नियम 29 दिसंबर 2025 को फ़ेडरल रजिस्टर के खंड 90, पन्ना 60864 पर छपा और वित्त वर्ष 2027 की कैप प्रक्रिया में लागू रहा, और श्रम विभाग का प्रस्तावित नियम 27 मार्च 2026 को खंड 91, पन्ना 15454 पर।

प्रस्तावना अपने असर के आँकड़े भी गिनाती है। ये सरकार के अपने दावे हैं। सबसे बड़ी आईटी स्टाफ़िंग और आउटसोर्सिंग कंपनियों के संयुक्त पंजीकरण 24,946 से घटकर 2,055 रह गए, यानी 92 फ़ीसदी की गिरावट। कांसुलर प्रक्रिया की अर्ज़ियों में वित्त वर्ष 2025 से 2027 के बीच "क़रीब 97 फ़ीसदी" की कमी आई। अमेरिकी मास्टर्स डिग्री वाले पंजीकरणकर्ताओं का हिस्सा 45.1 से बढ़कर 66.1 फ़ीसदी हुआ। दो सबसे ऊँचे वेतन स्तरों ने चयनों का 46.3 फ़ीसदी लिया और सबसे नीचे वाले स्तर ने 17.8 फ़ीसदी।
और प्रस्तावना में एक वाक्य ऐसा है जो इस पूरी कहानी की धुरी है: "2025 की उद्घोषणा 21 सितंबर 2025 को लागू हुई, और तब से एक लाख डॉलर की अदायगी 700 से ज़्यादा याचिकाओं के लिए की जा चुकी है।"
8 जून: बॉस्टन की अदालत ने दस काग़ज़ रद्द किए
मुक़दमा बीस राज्यों ने दायर किया था, 12 दिसंबर 2025 को। कैलिफ़ोर्निया, मैसाचूसेट्स, एरिज़ोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनॉय, मेरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवाडा, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलाइना, ओरेगन, रोड आइलैंड, वरमॉन्ट, वॉशिंगटन और विस्कॉन्सिन। उनका तर्क अदालती दस्तावेज़ में इस तरह दर्ज है कि एक लाख डॉलर की शर्त उनके सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों में भर्ती को मुश्किल बनाती है।
जज लियो टी. सोरोकिन ने 29 मई 2026 को बहस सुनी और 8 जून को 42 पन्नों का आदेश दिया। आदेश के साथ निकला निर्णय गिनती करके बताता है कि क्या रद्द हुआ: प्रशासनिक प्रक्रिया क़ानून के तहत दस एजेंसी कार्रवाइयाँ, "इस हद तक ग़ैर-क़ानूनी घोषित कि वे H-1B याचिकाओं पर एक लाख डॉलर की अदायगी का दायित्व डालती हैं"। सूची में मैथ्यू एस. डेविस का 20 सितंबर 2025 का ज्ञापन है, कांसुलर मामलों के ब्यूरो का 19 सितंबर का ईमेल और 20 सितंबर की कार्रवाई अर्ज़ी, विदेश विभाग का 21 सितंबर का "H-1B FAQ" और उसी दिन का वेबपन्ना, नागरिकता एवं आव्रजन सेवा का 20 सितंबर का ज्ञापन और 21 सितंबर का "H-1B FAQ", उसका 15 अक्टूबर का "H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशंस" पन्ना, और 20 अक्टूबर का जी-1055 शुल्क तालिका तथा अदायगी वेबसाइट। उसी दिन दाख़िल हुए 42 पन्नों के आदेश में इसी पन्ने की तारीख़ 20 अक्टूबर लिखी है, निर्णय की सूची में 15 अक्टूबर।
रद्द उद्घोषणा नहीं हुई। रद्द वे काग़ज़ हुए जिनसे उद्घोषणा ज़मीन पर उतरती थी। दोनों बातें साथ चल सकती हैं। हुक्मनामा बढ़ा और अदायगी फिर भी नहीं हो रही।
अदालत ने घोषणात्मक निर्णय दिया। स्थायी निषेधाज्ञा देने से उसने इनकार कर दिया। आदेश कहता है कि पूरी नीति रद्द कर देना ही वादियों को पूरी राहत देता है, और इसके लिए वह मॉन्सेंटो बनाम गीर्टसन सीड फ़ार्म्स का हवाला देता है। पाद टिप्पणी 14 में एक शर्त दर्ज है: अगर अपील में सरकार यह मनवा ले कि प्रशासनिक प्रक्रिया क़ानून के तहत वैकेचर उपलब्ध ही नहीं है, तो निषेधाज्ञा बनती है। न्याय विभाग, श्रम विभाग और उनके मंत्रियों के ख़िलाफ़ दावे पक्षकारों के अनुरोध पर बिना पूर्वाग्रह ख़ारिज हुए।
अदालत के मुताबिक़ उद्घोषणा से पहले H-1B याचिका पर कुल नियामक और वैधानिक शुल्क 960 से 7,595 डॉलर के बीच बैठता था। एक लाख डॉलर उसके सबसे ऊँचे सिरे का तेरह गुना है।
सरकार ने 11 जून को अपील दायर की और रोक माँगी। पहले सर्किट की अपील अदालत ने 24 जुलाई 2026 को वह अर्ज़ी ख़ारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश बैरन और न्यायाधीश गेल्पी तथा रिकेलमन के आदेश में सबसे तीखा वाक्य यह है कि प्रतिवादी इस बात पर विवाद नहीं करते कि धारा 212(f) या 215(a) का इस्तेमाल इस क़िस्म की फ़ीस या अदायगी लगाने के लिए पहले कभी नहीं हुआ। अदालत ने सरकार के दो तर्कों के बीच का अंतर्विरोध भी पकड़ा। सरकार एक तरफ़ कह रही थी कि नीति अपने आप में अंतिम एजेंसी कार्रवाई है ही नहीं, और दूसरी तरफ़ यह कि "हर बीतते दिन" और विदेशी याचिका दाख़िल कर देश में आ सकते हैं। आदेश कहता है कि दूसरी बात पहली के साथ बैठती नहीं, और सरकार ने इस घेरे को पूरा करने की कोई कोशिश नहीं की।

अपील पर गुण-दोष का फ़ैसला अभी नहीं आया है।
वॉशिंगटन की अदालत का उलटा फ़ैसला
इसी उद्घोषणा को अमेरिकी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स और असोसिएशन ऑफ़ अमेरिकन यूनिवर्सिटीज़ ने वॉशिंगटन डीसी की संघीय ज़िला अदालत में चुनौती दी थी। चैंबर के क़रीब तीन लाख सीधे सदस्य हैं और असोसिएशन में 69 अमेरिकी शोध विश्वविद्यालय हैं।
जज बेरिल ए. हॉवेल ने 23 दिसंबर 2025 को 56 पन्नों का अभिमत दिया और चुनौती ख़ारिज कर दी। अभिमत का निष्कर्ष कहता है कि "प्रासंगिक विश्लेषण संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों पर केंद्रित है, आर्थिक नीति पर नहीं", और आगे, "यहाँ कांग्रेस ने राष्ट्रपति को व्यापक वैधानिक अधिकार दिया है"। उसी पैराग्राफ़ में जज हॉवेल 1905 के लॉकनर मुक़दमे में जस्टिस होम्स की असहमति उद्धृत करती हैं कि संविधान किसी एक आर्थिक सिद्धांत को धारण करने के लिए नहीं बना।
अपील वहाँ भी हुई। उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील 31 दिसंबर 2025 को डीसी सर्किट में दायर हुई, नंबर 25-5473। वह अभी लंबित है।
दो संघीय ज़िला अदालतें, एक ही उद्घोषणा, उलटे निष्कर्ष, और दोनों फ़ैसले आज भी क़ायम हैं।
रद्द हो चुके पन्ने अब भी सरकारी वेबसाइटों पर हैं
अदालत ने जिन दस काग़ज़ों को रद्द किया, उनमें से पाँच इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक अमेरिकी सरकार की वेबसाइटों पर उसी शक्ल में पढ़े जा सकते थे।
विदेश विभाग का "H-1B FAQ", state.gov पर, तारीख़ 21 सितंबर 2025। वह आज भी कहता है कि उद्घोषणा "21 सितंबर 2025 की पूर्वी दिवालोक बचत समय रात 12:01 के बाद जमा की गई किसी भी नई H-1B वीज़ा याचिका के साथ एक लाख डॉलर की अदायगी की माँग करती है। इसमें 2026 की लॉटरी शामिल है"। अदालत का ज़िक्र उस पन्ने पर नहीं है।
नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के पन्ने पर वही पाठ है, पर उसके ऊपर एक चेतावनी जुड़ी है। चेतावनी 8 जून के आदेश और 24 जुलाई की अस्वीकृति दोनों का ज़िक्र करती है और फिर कहती है कि विभाग अदालत के आदेश से असहमत है, उसका पालन करेगा, और "अगर यह आदेश बाद में हटा, तो डीएचएस अब भी यह अदायगी वसूलने की योजना रखता है"। इसी पाठ वाली चेतावनी जी-1055 शुल्क तालिका के पन्ने पर भी है।
निदेशक जोसफ़ बी. एडलो का 20 सितंबर 2025 का ज्ञापन, सूची में क्रम (vi), एक पन्ने की पीडीएफ़ है और uscis.gov पर उसी पते पर मौजूद है। उस पर कोई चेतावनी नहीं है। उसमें लिखा है कि उद्घोषणा उन लोगों पर लागू नहीं होती जो "लागू होने की तारीख़ से पहले दाख़िल की गई याचिकाओं के लाभार्थी हैं, मौजूदा मंज़ूरशुदा याचिकाओं के लाभार्थी हैं, या वैध रूप से जारी H-1B ग़ैर-आप्रवासी वीज़ा रखते हैं", और यह कि "उद्घोषणा किसी मौजूदा वीज़ाधारक की अमेरिका आने-जाने की क्षमता पर असर नहीं डालती"।
"H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशंस" पन्ना सबसे विचित्र है। ऊपर अदालत वाली चेतावनी है और नीचे अदायगी के निर्देश, वर्तमान काल में। वह pay.gov का रास्ता बताता है, कहता है कि याचिका दाख़िल करने से पहले अदायगी करनी होगी, और यह भी कि सबूत के बिना दाख़िल हुई याचिकाएँ ख़ारिज कर दी जाएँगी। छूट के लिए [email protected] पर अर्ज़ी भेजने को कहा गया है, "असाधारण रूप से दुर्लभ परिस्थिति" के लिए। छूट की न कोई प्रकाशित कसौटी है, न कोई फ़ॉर्म।
18 सितंबर की उद्घोषणा के बारे में इन पन्नों पर कुछ भी नहीं है।
1,03,265 डॉलर की फ़ीस और उसका अलग क़ानूनी आधार
जो चीज़ वाक़ई बदल रही है, वह उद्घोषणा नहीं है। वह 25 अगस्त 2026 को फ़ेडरल रजिस्टर के खंड 91, पन्ने 54817 से 54839 पर छपा गृह सुरक्षा विभाग का प्रस्तावित नियम है, RIN 1615-AD20। तेईस पन्नों का यह प्रस्ताव कैप वाली हर H-1B याचिका पर, उन्नत डिग्री छूट वाली याचिकाओं समेत, दाख़िले के वक़्त देय 1,03,265 डॉलर की फ़ीस लगाना चाहता है, और वह "सभी अन्य लागू शुल्कों या अदायगियों के अतिरिक्त" होगी। राय देने की मियाद 24 सितंबर 2026 को बंद होती है।
फ़र्क़ रक़म का नहीं है। फ़र्क़ आधार का है।
उद्घोषणा धारा 212(f) और 215(a) पर टिकी है, जो राष्ट्रपति को प्रवेश रोकने की शक्ति देती हैं। यह नियम आव्रजन एवं राष्ट्रीयता अधिनियम की धारा 286(j) और (m) पर टिका है, जो गृह सुरक्षा मंत्री को अपनी सेवाओं की पूरी लागत वसूलने लायक़ शुल्क तय करने देती हैं। पहला रास्ता अदालत में इस तर्क पर गिरा कि कांग्रेस ने कर लगाने की शक्ति स्पष्ट शब्दों में नहीं सौंपी। दूसरा रास्ता नोटिस और टिप्पणी की पूरी प्रक्रिया से गुज़र रहा है।
रक़म कहाँ से आई, यह नियम की पाद टिप्पणी 5 में लिखा है। वसूली जाने वाली कुल लागत 8,77,74,88,035 डॉलर मानी गई और उसे 85,000 के अनुमानित आयतन से भाग दिया गया, जिससे 1,03,264.57 डॉलर निकले। विभाग ने उसे निकटतम पाँच डॉलर पर पूर्णांकित कर 1,03,265 कर दिया। 85,000 का आँकड़ा क़ानूनी सीमा से आता है: 65,000 सामान्य कैप और अमेरिकी मास्टर्स डिग्री वालों के लिए 20,000 की अतिरिक्त छूट। तालिका 10 इसी से सालाना राजस्व 8,77,75,25,000 डॉलर निकालती है, यानी क़रीब 878 करोड़ डॉलर, जो वसूली जाने वाली लागत से 36,965 डॉलर ज़्यादा है। यह अंतर पूर्णांकन का है।
पैसा कहाँ जाएगा, यह तालिका 11 में है। नागरिकता एवं आव्रजन सेवा 34.2 फ़ीसदी, आव्रजन समीक्षा कार्यालय 33.7 फ़ीसदी, श्रम विभाग 13.8 फ़ीसदी, आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन 11.9 फ़ीसदी, विदेश विभाग 5.5 फ़ीसदी और सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा 0.9 फ़ीसदी। नियम ख़ुद मानता है कि विभाग ने पहले कभी किसी एक आव्रजन उप-समूह पर दूसरी एजेंसियों का ख़र्च नहीं डाला। छूट वाली याचिकाओं पर फ़ीस नहीं लगेगी। वे ज़्यादातर ग़ैर-लाभकारी शोध संस्थानों, सरकारी शोध संगठनों और शिक्षण संस्थानों की होती हैं।
दोनों रक़में साथ भी लग सकती हैं। नियम का पाठ कहता है कि अगर कोई याचिकाकर्ता उद्घोषणा वाली अदायगी और इस नई फ़ीस, दोनों के दायरे में आता है, तो उसे दोनों देनी होंगी। पाद टिप्पणी 4 इस पर एक अनुमान लगाती है: "राष्ट्रपति उद्घोषणा 10973, जब तक बढ़ाई न जाए, इस नियम में प्रस्तावित फ़ीस के लागू होने से पहले ख़त्म हो जाएगी।" 18 सितंबर को वह अनुमान ग़लत हो गया।
एक और बात नियम अपने बारे में मानता है। विभाग को उम्मीद है कि कैप वाली याचिकाओं का सालाना आयतन पिछले पाँच बरस के औसत 96,750 से घटकर 85,000 रह जाएगा। माँग का अनुमान विभाग ने जॉर्ज जे. बोर्हास के फ़रवरी 2026 के एनबीईआर कार्य-पत्र 34793 से लिया है, जिसका आकलन है कि नियोक्ता H-1B कामगारों को तुलनीय अमेरिकी कामगारों से 16.1 फ़ीसदी कम देते हैं, और इसीलिए एक लाख से दो लाख डॉलर तक की एकमुश्त फ़ीस देने को तैयार रहेंगे।
10 सितंबर को इसी प्रस्ताव का शुद्धिपत्र छपा, पन्ना 57516 पर। पूरा शुद्धिपत्र तालिका 13 दोबारा छापने के लिए है, और उसमें बदला सिर्फ़ एक शब्द है: पंक्ति का नाम "तीन साल का सालाना औसत" था, अब "पाँच साल का सालाना औसत" है। आँकड़े वही हैं। 4,83,750 को पाँच से भाग देने पर 96,750 ही आता है।
2,83,772 मंज़ूरियाँ और दो सरकारी रिपोर्टों का अलग जोड़
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा ने वित्त वर्ष 2025 की "कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ़ H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन वर्कर्स" रिपोर्ट 24 अप्रैल 2026 को कांग्रेस को सौंपी। आँकड़ा अक्टूबर 2025 में निकाला गया था।
उस रिपोर्ट के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2025 में मंज़ूर हुई कुल 4,06,348 याचिकाओं में से 2,83,772 उन लोगों की थीं जिनका जन्म भारत में हुआ, यानी 69.9 फ़ीसदी। चीन दूसरे नंबर पर है, 49,161 और 12.1 फ़ीसदी। इसके बाद फ़िलीपींस 5,546, कनाडा 4,382, दक्षिण कोरिया 4,195, मेक्सिको 3,390, पाकिस्तान 3,380, ताइवान 3,161, ब्राज़ील 2,876 और नाइजीरिया 2,420। रिपोर्ट की "अन्य देश" वाली पंक्ति 43,628 है, और वह जोड़ कुल से 437 कम बैठता है; रिपोर्ट ख़ुद कहती है कि उसके चित्र में सभी देश नहीं दिखाए गए।

रिपोर्ट में एक विभाजन और है जो ज़्यादा कुछ बताता है। भारत और चीन में जन्मे लाभार्थी मौजूदा नौकरी जारी रखने वाली मंज़ूरियों का 88 फ़ीसदी हैं, पर नई नौकरी वाली मंज़ूरियों का 66 फ़ीसदी। शिक्षा के हिसाब से 58 फ़ीसदी मंज़ूरियाँ मास्टर्स डिग्री वालों की थीं, 31 फ़ीसदी स्नातकों की, 8 फ़ीसदी पीएचडी वालों की और क़रीब 4 फ़ीसदी पेशेवर डिग्री वालों की। बहुमत स्नातक से ऊपर का है।
यहाँ एक गुत्थी है जिसे सुलझाया नहीं जा सकता। उसी एजेंसी की दूसरी रिपोर्ट, "फ़िस्कल ईयर 2025: H-1B पिटीशंस", 11 फ़रवरी 2026 को कांग्रेस को गई थी। उसकी तालिका 1 कहती है कि वित्त वर्ष 2025 में 4,56,725 याचिकाएँ दाख़िल हुईं और 3,28,185 मंज़ूर हुईं। एक ही वित्त वर्ष, एक ही एजेंसी, मंज़ूरियों के दो जोड़: 3,28,185 और 4,06,348। अंतर 78,163 का है। दोनों रिपोर्टें अपनी-अपनी पद्धति बताती हैं, फ़रवरी वाली "पहले न्यायनिर्णयन फ़ैसले" के आधार पर गिनती है और अप्रैल वाली अक्टूबर 2025 के डेटा पर, पर कोई रिपोर्ट दूसरी का ज़िक्र नहीं करती। यहाँ दोनों आँकड़े दर्ज हैं और यह भी कि वे मेल नहीं खाते।
छोटा अंतर एक और है। प्रस्तावित नियम की शुद्ध की गई तालिका 13 वित्त वर्ष 2025 की कुल प्राप्तियाँ 4,56,726 बताती है, फ़रवरी की रिपोर्ट से एक ज़्यादा।
पंजीकरण की तरफ़ गिरावट पहले से दर्ज है। वित्त वर्ष 2025 के लिए 4,70,342 पात्र पंजीकरण आए थे, वित्त वर्ष 2026 के लिए 3,43,981, यानी 26.9 फ़ीसदी कम। यह गिरावट उद्घोषणा से पहले की है, और एजेंसी इसे लाभार्थी-केंद्रित चयन प्रक्रिया से जोड़ती है।
दिल्ली के दो बयान
इस बढ़ोतरी पर भारत सरकार का कोई बयान इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक नहीं मिला। रिकॉर्ड पर दो पुराने बयान हैं।
पहला विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता का है, नई दिल्ली, 20 सितंबर 2025, चार पैराग्राफ़। उसमें लिखा है कि उपाय के पूरे निहितार्थ भारतीय उद्योग समेत सभी संबंधित पक्ष पढ़ रहे हैं, कि कुशल प्रतिभा की आवाजाही ने दोनों देशों में तकनीक, नवाचार और आर्थिक वृद्धि में बड़ा योगदान दिया है, और अंत में: "यह उपाय परिवारों के लिए पैदा होने वाले व्यवधान के रूप में मानवीय परिणाम लाने की संभावना रखता है। सरकार उम्मीद करती है कि इन व्यवधानों का समुचित समाधान अमेरिकी अधिकारी कर सकेंगे।"
दूसरा 27 मार्च 2026 का है। लोकसभा में तिरु डी. एम. कथिर आनंद के प्रश्न संख्या 5690 का उत्तर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने दिया। उत्तर की पहली पंक्तियाँ नीति का ढाँचा तय कर देती हैं: "वीज़ा संबंधी नीतियाँ और उनसे जुड़े फ़ैसले संप्रभु मामले हैं। अमेरिकी सरकार का घोषित रुख़ यह है कि हर वीज़ा निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा का निर्णय है और अमेरिकी वीज़ा अधिकार नहीं, विशेषाधिकार है।"
उत्तर में एक तथ्य और है। वह कहीं और दर्ज नहीं मिलता। मंत्री ने बताया कि दिसंबर 2025 में अमेरिकी विदेश विभाग ने सभी H-1B आवेदकों और उनके आश्रितों की ऑनलाइन मौजूदगी की जाँच का ऐलान किया, और इसके बाद दिसंबर 2025 में तय कई H-1B और H-4 आवेदकों की कांसुलर मुलाक़ातें 2026 की नई तारीख़ों पर टाल दी गईं, "जिससे बड़ी संख्या में आवेदक भारत में ही रह गए"।
18 सितंबर की उद्घोषणा की प्रस्तावना कांसुलर अर्ज़ियों में क़रीब 97 फ़ीसदी की गिरावट को अपनी नीति की कामयाबी बताती है। लोकसभा का उत्तर उसी दौर में मुलाक़ातें टलने की बात करता है। दोनों दस्तावेज़ एक-दूसरे का ज़िक्र नहीं करते, और यहाँ दोनों वैसे ही रखे गए हैं।
आगे की तारीख़ें
सबसे नज़दीकी तारीख़ 24 सितंबर है। उस दिन 1,03,265 डॉलर वाले प्रस्ताव पर टिप्पणी की मियाद बंद हो जाएगी। टिप्पणियाँ regulations.gov पर डॉकेट USCIS-2026-0298 में जाती हैं और अंग्रेज़ी में ही ली जाती हैं।
अगली तारीख़ 18 अक्टूबर के आसपास बैठती है। कार्यकारी आदेश की धारा 3(b) श्रम विभाग को तीस दिन के भीतर पुराने श्रम शर्त आवेदनों की जाँच शुरू करने को कहती है।
तीसरी तारीख़ अभी तय नहीं है। उद्घोषणा की धारा 3(b) कहती है कि इसके बाद होने वाली H-1B लॉटरी पूरी होने के तीस दिन के भीतर चार मंत्री मिलकर राष्ट्रपति को सिफ़ारिश भेजेंगे कि रोक और बढ़ाई जाए या नहीं।
अदालतों में दोनों अपीलें लंबित हैं, पहले सर्किट में नंबर 26-1699 और डीसी सर्किट में नंबर 25-5473। जब तक उनमें से कोई फ़ैसला नहीं आता, एक लाख डॉलर की शर्त काग़ज़ पर चलती रहेगी और वसूली नहीं जाएगी।
चौथी तारीख़ किसी के हाथ में नहीं है। गृह सुरक्षा विभाग ने अपने पन्नों पर लिख रखा है कि आदेश हटते ही वह यह अदायगी वसूलेगा। उद्घोषणा की अपनी प्रस्तावना के मुताबिक़ सितंबर 2025 के बाद 700 से ज़्यादा याचिकाओं के लिए एक लाख डॉलर दिए जा चुके हैं। वह पैसा अब किसके पास है और उसका क्या होगा, यह किसी सरकारी दस्तावेज़ में दर्ज नहीं मिला।
स्रोतव्हाइट हाउस, प्रेसिडेंशियल एक्शंस, 18 सितंबर 2026: उद्घोषणा 'रिस्ट्रिक्शन ऑन एंट्री ऑफ़ सर्टेन नॉनइमिग्रेंट वर्कर्स', पूरा पाठ; 19 सितंबर तक फ़ेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नहीं, व्हाइट हाउस, प्रेसिडेंशियल एक्शंस, 18 सितंबर 2026: कार्यकारी आदेश 'एनहांसिंग प्रोग्राम इंटेग्रिटी एंड इंटरएजेंसी कोऑर्डिनेशन इन द ऐडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ द H-1B नॉनइमिग्रेंट वीज़ा प्रोग्राम', फ़ेडरल रजिस्टर, खंड 90, पन्ना 46027, 24 सितंबर 2025 को प्रकाशित: उद्घोषणा 10973, दस्तख़त 19 सितंबर 2025, फ़ेडरल रजिस्टर, खंड 91, पन्ने 54817-54839, 25 अगस्त 2026: गृह सुरक्षा विभाग का प्रस्तावित नियम 'फ़ी फ़ॉर सर्टेन H-1B पिटीशंस', RIN 1615-AD20, डॉकेट USCIS-2026-0298, टिप्पणी की मियाद 24 सितंबर 2026, फ़ेडरल रजिस्टर, खंड 91, पन्ना 57516, 10 सितंबर 2026: उसी प्रस्तावित नियम की तालिका 13 का शुद्धिपत्र, संयुक्त राज्य ज़िला अदालत, मैसाचूसेट्स ज़िला, सिविल नंबर 25-13829-LTS, 8 जून 2026: जज लियो टी. सोरोकिन का निर्णय, रद्द किए गए दस काग़ज़ों की सूची, संयुक्त राज्य ज़िला अदालत, मैसाचूसेट्स ज़िला, 8 जून 2026: 42 पन्नों का ज्ञापन और आदेश, स्थायी निषेधाज्ञा से इनकार सहित, संयुक्त राज्य अपील अदालत, पहला सर्किट, नंबर 26-1699, 24 जुलाई 2026: मुख्य न्यायाधीश बैरन तथा न्यायाधीश गेल्पी और रिकेलमन का आदेश, संयुक्त राज्य ज़िला अदालत, डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया, सिविल एक्शन नंबर 25-cv-3675 (BAH), 23 दिसंबर 2025: जज बेरिल ए. हॉवेल का 56 पन्नों का ज्ञापन अभिमत, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा, 'कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ़ H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन वर्कर्स', वित्त वर्ष 2025 की कांग्रेस को रिपोर्ट, 24 अप्रैल 2026, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा, 'फ़िस्कल ईयर 2025: H-1B पिटीशंस', कांग्रेस को वार्षिक रिपोर्ट, 11 फ़रवरी 2026, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा, निदेशक जोसफ़ बी. एडलो का ज्ञापन, 20 सितंबर 2025; अदालत के 8 जून के निर्णय में क्रम (vi) पर दर्ज, अमेरिकी विदेश विभाग, 'H-1B FAQ', 21 सितंबर 2025; अदालत के निर्णय में क्रम (iv) पर दर्ज और 19 सितंबर 2026 तक बिना किसी सूचना के प्रकाशित, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा, 'H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशंस' पन्ना, अदालत के आदेश की चेतावनी और एक लाख डॉलर की अदायगी के निर्देश साथ-साथ, विदेश मंत्रालय, आधिकारिक प्रवक्ता का वक्तव्य, नई दिल्ली, 20 सितंबर 2025; इंटरनेट आर्काइव की 7 अक्टूबर 2025 की प्रति से पढ़ा गया, विदेश मंत्रालय, लोकसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 5690, उत्तर 27 मार्च 2026, राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह