सरकारी विज्ञप्ति में शास्त्री की मृत्यु का साल ग़लत छपा है, और हिंदी वाली में भी वही ग़लती है
पीआईबी की विज्ञप्ति कहती है कि ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री का निधन 1965 में हुआ था। वे 11 जनवरी 1966 को गए थे। उसी विज्ञप्ति में इसे साठवीं बरसी भी कहा गया है, जो 1965 से नहीं बनती।
प्रधानमंत्री 29 और 30 अगस्त को उज़्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर थे। ताशकंद में उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस पर जो सरकारी विज्ञप्ति जारी हुई, उसमें लिखा है कि इस वर्ष ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री के निधन की साठवीं बरसी है, और निधन का साल 1965 बताया गया है।
शास्त्री का निधन 11 जनवरी 1966 को हुआ था।
यह कोई विवादित तारीख़ नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय की अपनी वेबसाइट पर उनका कार्यकाल 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 दर्ज है।
और वाक्य ख़ुद अपने से उलझ रहा है। अगर 2026 में साठवीं बरसी है, तो निधन 1966 में ही हुआ होगा। 1965 मानें तो यह इकसठवीं बरसी होती।
हिंदी वाली विज्ञप्ति में भी वही 1965 छपा है।
यह इसलिए मायने रखता है कि हिंदी के डेस्क सरकारी हिंदी विज्ञप्ति को अक्सर ज्यों का त्यों उठा लेते हैं। जो भी ऐसा करेगा, उसके यहाँ 1965 छपेगा।
उसी यात्रा की एक दूसरी विज्ञप्ति में, आधिकारिक वार्ता वाली, यही बात बिना साल लिखे कही गई है और वहाँ "साठवीं बरसी" सही बैठती है।
16 नतीजे, जिनमें 11 पर दस्तख़त हुए
यात्रा के बाद हर जगह 16 नतीजों की बात हो रही है।
सरकार की जारी की गई सूची में सचमुच 16 पंक्तियाँ हैं। पर उनमें से 11 ही ऐसे दस्तावेज़ हैं जिन पर दस्तख़त हुए या जिनका आदान-प्रदान हुआ। बाक़ी पाँच को सूची में ही अलग से "घोषणाएँ" शीर्षक के नीचे रखा गया है।
उन पाँच में एक भारत की तरफ़ से दी गई सहायता है, एक भारत की छात्रवृत्ति योजना है, एक राजनीतिक घोषणा है, और एक दो भुगतान कंपनियों के बीच का कारोबारी क़रार।
अब उन 11 को देखिए, जिन पर दस्तख़त हुए।
उनमें एक भी संधि नहीं है। छह समझौता ज्ञापन हैं, यानी एमओयू। एक आशय पत्र है। दो कार्यक्रम हैं। एक मंत्रालय स्तर का समझौता। और एक गुजरात राज्य तथा समरकंद क्षेत्र के बीच का करार, जो दो देशों के बीच का दस्तावेज़ है ही नहीं।
एमओयू और संधि में फ़र्क़ है। संधि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत बाध्यकारी होती है। एमओयू ज़्यादातर इरादे का बयान होता है।
इन ग्यारह में से किसी का पूरा पाठ सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यूरेनियम वाला समझौता सूची में नहीं है
कई जगह छपा है कि भारत और उज़्बेकिस्तान ने यूरेनियम की लंबी अवधि की आपूर्ति का समझौता किया।
सरकार की जारी की गई नतीजों की सूची में यूरेनियम शब्द कहीं नहीं आता।
पाँच अरब डॉलर, और उससे पहले वाला लक्ष्य
बातचीत में दोनों देशों ने 2030 तक पाँच अरब डॉलर के आपसी व्यापार का लक्ष्य तय किया।
संयुक्त बयान में व्यापार का कोई आँकड़ा नहीं है और कोई लक्ष्य भी नहीं है। वह सिर्फ़ इतना कहता है कि दोनों नेताओं ने व्यापार की स्थिर बढ़त पर संतोष जताया। लक्ष्य वाली बात अलग विज्ञप्तियों में है।
अब उसके पीछे का हिसाब।
विदेश मंत्रालय के अपने ब्योरे के मुताबिक़ 2024 में दोनों देशों का व्यापार 98 करोड़ डॉलर था, और मंत्रालय ख़ुद उसे क्षमता से कहीं नीचे बताता है। उज़्बेकिस्तान के आँकड़ों में 2025 में यह लगभग 1.3 अरब डॉलर हुआ।
यानी पाँच अरब का लक्ष्य पाँच साल में लगभग पौने चार गुना बढ़त माँगता है।
और यह पहला लक्ष्य नहीं है। अक्टूबर 2018 में दोनों देशों ने 2020 तक एक अरब डॉलर का लक्ष्य रखा था। 2020 में असल व्यापार 44 करोड़ डॉलर रहा, यानी लक्ष्य का आधा भी नहीं। एक अरब का आँकड़ा 2025 में जाकर पार हुआ, पाँच साल देर से।
इसी साल के दस हफ़्तों में तीन अलग लक्ष्य घोषित हुए हैं। जून में दोगुना करने का, 3 अगस्त को तीन अरब का, और 30 अगस्त को पाँच अरब का।
और वह सम्मान
उज़्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री को विदेशी नेताओं को दिया जाने वाला अपना सर्वोच्च सम्मान दिया। उसका नाम सरकारी हिंदी विज्ञप्ति में "ओली दाराजली दोस्तलिक" लिखा गया है, और अंग्रेज़ी में उसका अर्थ "सर्वोच्च मैत्री का आदेश" बताया गया है।
शंघाई सहयोग संगठन पर एक ज़रूरी बात
प्रधानमंत्री 30 अगस्त को बिश्केक पहुँचे। वहाँ शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन होना है।
यह अंक तैयार होते समय वह सम्मेलन हुआ नहीं था। संगठन के सचिवालय के अपने पन्ने पर सबसे नया सम्मेलन अब भी 2025 का तियानजिन वाला दर्ज है, और राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक 1 सितंबर के लिए तय बताई गई है। 27 अगस्त को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि दस्तावेज़ों पर बातचीत अभी चल रही है।
इसलिए इस अंक में सम्मेलन का कोई नतीजा नहीं है, क्योंकि अभी कोई नतीजा है ही नहीं।
एक चेतावनी और, जो पढ़ने वालों के काम की है। पिछले साल तियानजिन का सम्मेलन भी 31 अगस्त और 1 सितंबर को ही हुआ था। इन दिनों जो "एससीओ घोषणापत्र" खोजने पर मिलेगा, वह बहुत मुमकिन है कि पिछले साल का हो।
तारीख़ देखकर पढ़िएगा।
स्रोतप्रधानमंत्री कार्यालय, नतीजों की सूची, प्रधानमंत्री कार्यालय, संयुक्त बयान, प्रधानमंत्री कार्यालय, पूर्व प्रधानमंत्रियों की सूची