शी जिनपिंग सात साल बाद दिल्ली आ रहे हैं, इस बीच चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा दोगुने से ज़्यादा हो गया
चीनी विदेश मंत्रालय ने 10 सितंबर की दोपहर पुष्टि की कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। सुबह की ब्रीफ़िंग में प्रवक्ता ने यही सवाल टाल दिया था। वाणिज्य मंत्रालय के अपने आँकड़े बताते हैं कि उनकी पिछली यात्रा के बाद से चीन से आयात दोगुना हो चुका है।

बीजिंग में गुरुवार सुबह की नियमित प्रेस ब्रीफ़िंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति इस सप्ताहांत ब्रिक्स बैठक के लिए भारत जा रहे हैं। उनका जवाब था, "आपके उठाए सवाल पर देने के लिए मेरे पास कोई जानकारी नहीं है।"
उसी दिन दोपहर बाद वही मंत्रालय सोशल मीडिया पर लिख रहा था: "भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।"
सात साल में यह उनकी पहली भारत यात्रा है।
पिछली बार वे कब और कहाँ आए थे
शी अक्टूबर 2019 में चेन्नई के पास ममल्लपुरम आए थे, प्रधानमंत्री मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए। द हिंदू ने उस मुलाक़ात की जो तस्वीर छापी है उस पर तारीख़ 11 अक्टूबर 2019 दर्ज है। उससे पहले वे अक्टूबर 2016 में गोवा आए, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ही, और सबसे पहले सितंबर 2014 में, जब दोनों नेता अपने-अपने पहले कार्यकाल में थे। यानी तीन में से दो यात्राएँ ब्रिक्स से नहीं जुड़ी थीं, और चौथी फिर उसी मेज़ पर लौट रही है।
सात साल में दोनों नेता कहाँ मिलते रहे
भारत न आने का मतलब यह नहीं कि मुलाक़ात नहीं हुई। द हिंदू के मुताबिक़ अक्टूबर 2024 में कज़ान के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के हाशिये पर दोनों की बैठक हुई और तभी से सामान्यीकरण की धीमी प्रक्रिया चली है। यहीं एक विरोधाभास दर्ज करना ज़रूरी है। द हिंदू लिखता है कि आख़िरी मुलाक़ात पिछले बरस अगस्त में चीन के तिआनजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में हुई थी, जहाँ दोनों ने दोहराया कि उनके देश "विकास साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं"। उसी दिन आईएएनएस ने लिखा कि संक्षिप्त बातचीत हाल के बिश्केक एससीओ शिखर सम्मेलन में हुई।
अप्रैल 2020 के बाद जो-जो बंद हुआ
अप्रैल 2020 में सीमा पर तनाव शुरू हुआ और जून में गलवान घाटी की झड़प हुई, जिसे द हिंदू ने बरसों में सीमा पर सबसे बुरी हिंसा कहा है और जिसके बाद रिश्ते चार साल जमे रहे; 17 अप्रैल 2020 को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने प्रेस नोट 3 जारी कर ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश को स्वचालित रास्ते से हटाकर सरकारी मंज़ूरी के रास्ते पर डाल दिया; 29 जून 2020 को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए और 2009 के ब्लॉकिंग नियमों का हवाला देकर 59 ऐप बंद किए, और उस विज्ञप्ति के परिशिष्ट में पहला नाम टिकटॉक का है; और सरकारी ख़रीद में चीनी बोलीदाताओं के लिए विदेश मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय की मंज़ूरी अनिवार्य कर दी गई।
निवेश का ताला मार्च 2026 में ढीला हुआ
छह साल बाद वही ताला ढीला हुआ। द ट्रिब्यून के मुताबिक़ 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रेस नोट 3 में संशोधन को मंज़ूरी दी। अब सीमावर्ती देशों के ऐसे निवेशक, जिनका लाभकारी स्वामित्व 10 फ़ीसदी तक हो और जिनका कंपनी पर नियंत्रण न हो, क्षेत्रवार सीमाओं और रिपोर्टिंग शर्तों के अधीन स्वचालित रास्ते से आ सकते हैं। तय क्षेत्रों में 60 दिन में फ़ैसला देने की समय-सीमा भी रखी गई। एक शर्त जस की तस रही: निवेश पाने वाली इकाई का बहुमत स्वामित्व और नियंत्रण हर समय भारतीय नागरिकों या उनके नियंत्रण वाली इकाइयों के पास रहेगा।
बिजली के ठेकों में लौटी चार चीनी कंपनियाँ
इसी साल मार्च में सरकार ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड को पाँच साल तक चीन से 21 अहम पुर्ज़े ख़रीदने की छूट दी। जून में वित्त मंत्रालय ने भारत में कारख़ाना रखने वाली चार चीनी बिजली उपकरण कंपनियों को अहम परियोजनाओं के सरकारी टेंडर में हिस्सा लेने दिया: टीबीईए एनर्जी, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया)। छूट सचिवों की समिति के विचार के बाद दी गई, जिसकी सिफ़ारिश उद्योग संवर्धन विभाग के तहत बनी पंजीकरण समिति ने की थी। यह पूरा तंत्र 2020 की झड़प के बाद ही खड़ा हुआ था।
जो अब तक नहीं बदला
जिन दस्तावेज़ों से ये ढीलें दर्ज होती हैं, उनमें से कोई भी 2020 की ऐप पाबंदी वापस लेने की बात नहीं करता। सरकारी ख़रीद में पंजीकरण की शर्त भी हटी नहीं; चार कंपनियों को उससे छूट मिली, शर्त बनी रही। उधर से भी दरवाज़ा पूरा नहीं खुला। इंडियन एक्सप्रेस को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय का चीन डेस्क चीनी सीमा शुल्क विभाग की लगाई कई तकनीकी पाबंदियों पर काम कर रहा है। रेयर अर्थ मैग्नेट की आपूर्ति में देरी से भारतीय वाहन उद्योग पहले ही रास्ते तलाश रहा है।
ब्रिक्स में अब कितने देश हैं और कब कौन जुड़ा
पत्र सूचना कार्यालय के 10 सितंबर के बैकग्राउंडर में गिनती साफ़ है: ब्रिक्स में आज 11 देश हैं। ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। सऊदी अरब की सदस्यता पर जो असमंजस रहा है, उसका जवाब इसी सूची में है। बीबीसी हिंदी ने शिखर सम्मेलन की वेबसाइट के हवाले से लिखा है कि मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जनवरी 2024 से पूर्ण सदस्य हैं और इंडोनेशिया जनवरी 2025 से। पिछले बरस रियो दी जनेरो में दस देश साझेदार बने।
एक ही पन्ने पर दक्षिण अफ़्रीका की दो तारीख़ें
उसी बैकग्राउंडर में एक गड़बड़ी है जो पढ़ने पर ही दिखती है। एक जगह लिखा है कि दक्षिण अफ़्रीका 2011 में पूर्ण सदस्य बना और उसी के साथ ब्रिक का विस्तार होकर ब्रिक्स हुआ। कुछ ही पैराग्राफ़ पहले उसी दस्तावेज़ में लिखा है कि 2010 में दक्षिण अफ़्रीका के शामिल होने से ब्रिक का विस्तार ब्रिक्स में हुआ। एक ही सरकारी पन्ने पर एक घटना की दो तारीख़ें हैं। बाक़ी क्रम मेल खाता है: नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के शोध-पत्र में गढ़ा गया, ब्रिक की स्थापना 2006 में हुई और पहला शिखर सम्मेलन 2009 में येकातेरिनबर्ग में।
भारत की चौथी अध्यक्षता, अठारहवाँ शिखर
यह अठारहवाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन है और भारत की चौथी अध्यक्षता। बीबीसी हिंदी के मुताबिक़ इससे पहले भारत ने 2012, 2016 और 2021 में अध्यक्षता की। इसी साल मई में भारत ने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक कराई थी। अध्यक्षता का मार्गदर्शक विषय पत्र सूचना कार्यालय ने इन शब्दों में दर्ज किया है: "सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण"। यही वाक्य दिल्ली पुलिस के यातायात परामर्श पर छपे लोगो के नीचे अंग्रेज़ी में दिखता है। बैकग्राउंडर के हिसाब से ये 11 देश दुनिया की 49.5 फ़ीसदी आबादी और विश्व व्यापार के 26 फ़ीसदी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
व्यापार का असल आँकड़ा: आयात, निर्यात और घाटा
वाणिज्य मंत्रालय के ट्रेडस्टैट डेटा बैंक से 10 सितंबर 2026 को निकाली गई देशवार तालिका चीन के लिए यह कहती है। 2025-26 में भारत ने चीन को 19,471.08 मिलियन डॉलर का सामान बेचा और चीन से 131,620.29 मिलियन डॉलर का ख़रीदा। कुल व्यापार 151,091.37 मिलियन डॉलर रहा और व्यापार घाटा 112,149.21 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 112.15 अरब डॉलर। निर्यात एक साल में 36.62 फ़ीसदी बढ़ा, आयात 16.02 फ़ीसदी। भारत के कुल आयात में चीन का हिस्सा 16.97 फ़ीसदी रहा, जो तालिका के पाँचों बरसों में सबसे ऊँचा है। कुल निर्यात में उसका हिस्सा 4.41 फ़ीसदी है।
घाटे का एक तिहाई हिस्सा अकेले चीन से
उसी तालिका की आख़िरी पंक्ति में भारत का कुल वस्तु व्यापार घाटा 2025-26 के लिए 334,261.03 मिलियन डॉलर दर्ज है। चीन के साथ का घाटा उसका 33.5 फ़ीसदी है। यह अनुपात अपने आप में ख़बर है, क्योंकि बातचीत के जितने दरवाज़े पिछले दो बरसों में खुले, उनमें से किसी ने इसे घटाया नहीं। 2021-22 में यह हिस्सा 38.4 फ़ीसदी था, 2022-23 में 31.4 फ़ीसदी, और तब से एक तिहाई के आसपास ठहरा हुआ है।
छह साल पहले यही आँकड़ा आधा था
शी की पिछली यात्रा जिस वित्त वर्ष में पड़ी, उसके आँकड़े इसी डेटा बैंक से निकलते हैं। 2019-20 में चीन से आयात 65,260.75 मिलियन डॉलर था और व्यापार घाटा 48,647.99 मिलियन डॉलर। छह साल में आयात दोगुना से थोड़ा ज़्यादा हो गया और घाटा 2.3 गुना। उसी अवधि में चीन को निर्यात 16,612.75 से बढ़कर 19,471.08 मिलियन डॉलर हुआ, यानी क़रीब 17 फ़ीसदी। सीमा पर झड़प, ऐप पर पाबंदी, निवेश पर मंज़ूरी की शर्त और उड़ानों का बंद रहना, इनमें से कोई भी आयात की रेखा को नीचे नहीं ला सका।
आयात की सूची में दो अध्याय सबसे भारी

एचएस अध्यायों में देखें तो तस्वीर और साफ़ होती है। अध्याय 85, यानी बिजली की मशीनें और उनके पुर्ज़े, अकेले 46,365.13 मिलियन डॉलर का है; अध्याय 84, यानी बॉयलर और यांत्रिक उपकरण, 29,446.26 मिलियन डॉलर का। दोनों मिलकर चीन से कुल आयात का 57.6 फ़ीसदी हैं। इनके बाद कार्बनिक रसायन 11,521.52, प्लास्टिक 6,711.25 और वाहन तथा पुर्ज़े 2,869.26 मिलियन डॉलर पर आते हैं। ऊपर के पाँच अध्याय कुल आयात का 73.6 फ़ीसदी बनते हैं। इसी अध्याय 85 में भारत चीन को 3,178.29 मिलियन डॉलर का माल बेचता भी है, यानी ख़रीद बिक्री से लगभग 14.6 गुना है।
उर्वरक का आयात 166 फ़ीसदी बढ़ा
एक अध्याय अनुपात में छोटा है पर रफ़्तार में सबसे तेज़। उर्वरक, यानी अध्याय 31, में चीन से आयात 2024-25 के 875.84 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 2,336.70 मिलियन डॉलर हो गया, एक बरस में 166.80 फ़ीसदी की बढ़त। काँच और काँच का सामान 38.86 फ़ीसदी बढ़ा, मानव-निर्मित तंतु 42.45 फ़ीसदी और एल्युमीनियम 29.70 फ़ीसदी। दूसरी तरफ़ लोहा और इस्पात 2,382.93 से घटकर 1,571 मिलियन डॉलर रह गया।
निर्यात 36 फ़ीसदी बढ़ा, पर किन चीज़ों से
निर्यात की बढ़त असली है और उसकी वजह गिनी जा सकती है। चीन को भारत का निर्यात 14,252.21 से बढ़कर 19,471.08 मिलियन डॉलर हुआ, यानी 5,218.87 मिलियन डॉलर की बढ़त। इसका 44.8 फ़ीसदी अकेले अध्याय 85 से आया, जो 842.62 से उछलकर 3,178.29 मिलियन डॉलर हो गया। खनिज ईंधन 1,269.24 से बढ़कर 2,462.26 मिलियन डॉलर हुए और बढ़त का 22.9 फ़ीसदी दिया। मछली और क्रस्टेशियन 1,093.82 से 1,374.97 मिलियन डॉलर पर पहुँचे, वही श्रेणी जिसने अमेरिकी शुल्क की मार झेल रहे मत्स्य निर्यात को सहारा दिया।
सीधी उड़ानें, नाथू ला और कैलास यात्रा

छोटे संकेतक बड़े आँकड़ों से पहले दिखते हैं। इंडिगो की उड़ान 6ई1703 कोलकाता से गुआंगझाओ के लिए उड़ी और 27 अक्टूबर 2025 को क़रीब 180 यात्रियों के साथ उतरी; अल जज़ीरा के मुताबिक़ यह पाँच साल में भारत और मुख्य भूमि चीन के बीच पहली सीधी उड़ान थी। उड़ानें 2020 की शुरुआत में महामारी के साथ बंद हुई थीं और सीमा पर तनाव के कारण बंद ही रहीं। नाथू ला से सीमा-व्यापार भी दोबारा शुरू हुआ। कैलास मानसरोवर यात्रा पाँच साल बाद जून 2025 में लौटी और उस बार 750 तीर्थयात्रियों को जाने दिया गया।
भारत किस चीज़ पर रोक हटवाना चाहता है
बातचीत की मेज़ पर भारत की सूची तकनीकी है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "चीन ने इनगॉट और वेफ़र तकनीक, बैटरी सेल और सेल तकनीक के निर्यात पर पाबंदियाँ लगाई हैं।" उन्होंने जोड़ा कि ट्रांसमिशन क्षेत्र में एचवीडीसी और विशेष पुर्ज़ों पर भी रोक लग रही है, और ये पाबंदियाँ ज़्यादातर पिछले 12 से 15 महीनों में आईं। स्टरलाइट इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक प्रतीक अग्रवाल ने कहा कि यह भारत के लिए इसलिए अहम है कि वह दुनिया के सबसे बड़े ट्रांसमिशन विस्तार कार्यक्रमों में से एक चला रहा है।
दो वाणिज्य मंत्री, एक मेज़
द हिंदू के मुताबिक़ शी के साथ बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ रहा है, जिसमें पोलितब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी तथा वाणिज्य मंत्री वांग वेनताओ शामिल हैं। वांग वेनताओ की बातचीत वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से होने की संभावना है। दोनों की पहली द्विपक्षीय बैठक इसी साल अप्रैल में कैमरून में विश्व व्यापार संगठन के चौदहवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के हाशिये पर हुई थी, जो 2019 में भारत के आरसेप वार्ता से हटने के बाद पहली थी। 1 सितंबर को चीन के राजदूत शू फ़ेइहोंग ने वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाक़ात की।
बांग्लादेश को न्योता नहीं: उसका मतलब
बांग्लादेश ने गुरुवार को साफ़ किया कि प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान ब्रिक्स के लिए भारत नहीं आ रहे। विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूँ कबीर ने पीटीआई से कहा कि रहमान को "ठीक तरह से आमंत्रित नहीं किया गया" था। उनके सवाल इंडियन एक्सप्रेस ने दर्ज किए हैं: "हम कैसे जाएँ? क्या बांग्लादेश सरकार से किसी को न्योता मिला है? हमारे प्रधानमंत्री को न्योता नहीं मिला।" भारत का कहना है कि रहमान को बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष के नाते आउटरीच सत्र के लिए बुलाया गया था। कबीर ने जोड़ा, "हम द्विपक्षीय यात्राओं और चर्चाओं पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं।"
फ़रवरी की चिट्ठी और दिसंबर की मियाद
तारिक़ रहमान 17 फ़रवरी 2026 को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने, 12 फ़रवरी के आम चुनाव के बाद। उसी 17 फ़रवरी को भारत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ढाका भेजा, जो प्रधानमंत्री की चिट्ठी लेकर गए थे जिसमें बधाई के साथ रहमान को पत्नी और इकलौती बेटी समेत भारत आने का न्योता था। द्विपक्षीय न्योता तब से टिका हुआ है। कबीर ने यह भी कहा कि जहाँ राष्ट्रीय हित जुड़ा हो, ढाका पूरी गंभीरता से काम करेगा; यह बात 1996 की गंगा जल बँटवारा संधि पर पूछने पर कही गई, जिसकी तीस साल की मियाद दिसंबर में ख़त्म हो रही है।
इस शिखर सम्मेलन का एजेंडा किसने तय किया
एजेंडा अध्यक्ष देश तय करता है, और इस बार अध्यक्ष भारत है। पत्र सूचना कार्यालय का बैकग्राउंडर ब्रिक्स के काम के क्षेत्रों में आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कृषि, श्रम, दूरसंचार तथा अंतरराष्ट्रीय वित्त गिनाता है। चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने 10 सितंबर को ग्लोबल टाइम्स में छपे लेख में लिखा कि इस शिखर से व्यापार और संपर्क से लेकर जलवायु कार्रवाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक सहयोग गहरा करने का मौक़ा है, और दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित में एक स्थिर तथा पूर्वानुमेय रिश्ता है।
दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक क्या रुकेगा

दिल्ली यातायात पुलिस के परामर्श पर तारीख़ें 11, 12 और 13 सितंबर हैं, दो दिन नहीं तीन, क्योंकि नेता 11 को पहुँचने लगेंगे। परामर्श में 22 डायवर्जन बिंदु और "35 से ज़्यादा" नियंत्रित सड़कें गिनाई गई हैं। जिन सड़कों से बचने को कहा गया है उनमें मथुरा रोड, जनपथ, अकबर रोड, तीन मूर्ति मार्ग, सफ़दरजंग रोड, शांति पथ, तिलक मार्ग, कर्तव्य पथ, तुग़लक़ रोड, नीला गुंबद, अफ़्रीका एवेन्यू और 'सी' हेक्सागन हैं। परामर्श यह भी कहता है कि किसी सड़क का सूची में होना यह नहीं बताता कि वह तीनों दिन लगातार बंद रहेगी।
स्टेशन और हवाई अड्डे तक कैसे पहुँचें
परामर्श में डायवर्जन एक-एक करके लिखे हैं। डॉ. दिनेश नंदिनी दालमिया चौक से मथुरा रोड और तिलक मार्ग की तरफ़ जाना मना है; विकल्प बहादुर शाह ज़फ़र मार्ग, आईपी मार्ग और सिकंदरा रोड हैं। पटेल चौक से विंडसर प्लेस और रिज़र्व बैंक की ओर रोक है; विकल्प अशोक रोड होते हुए जीपीओ और संसद मार्ग होते हुए कनॉट प्लेस हैं। तीनों रेलवे स्टेशनों के लिए तीन-तीन रास्ते दिए गए हैं। हवाई अड्डे के लिए परामर्श मेट्रो की सलाह मोटे अक्षरों में देता है, और द्वारका से टी3 के लिए यूईआर-2 की नई सुरंग सुझाता है।
जो बंद रहेगा और जो खुला
राष्ट्रपति सचिवालय की 10 सितंबर की विज्ञप्ति के मुताबिक़ राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति भवन संग्रहालय और अमृत उद्यान में 11 से 13 सितंबर तक आम लोगों का प्रवेश बंद रहेगा, और 12 सितंबर शनिवार को प्रांगण में गार्ड परिवर्तन समारोह भी नहीं होगा। यातायात परामर्श में आपात और चिकित्सा वाहनों को दिल्ली भर में चौबीसों घंटे बिना रुकावट रास्ता देने की बात है। टैक्सी और ऑटो के लिए निर्धारित जगहों के अलावा सड़क किनारे खड़े होने पर रोक है। मेट्रो सभी स्टेशनों पर बिना व्यवधान चलेगी।
13 सितंबर का मैच और उस दिन की भीड़
13 सितंबर को दिल्ली में भारत और अफ़ग़ानिस्तान का टी20 मुक़ाबला भी है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ दिल्ली यातायात पुलिस ने मैच टालने का अनुरोध किया था, पर दिल्ली और ज़िला क्रिकेट संघ ने कहा कि मैच तय कार्यक्रम पर ही होगा और यातायात पुलिस ने ज़रूरी सहयोग तथा इंतज़ाम का भरोसा दिया है। उसी अख़बार के हिसाब से मैदान में 35,000 दर्शक आने हैं, और यही शिखर सम्मेलन का दूसरा दिन है।
सुरक्षा का घेरा
तुग़लक़ रोड इलाक़े में क़रीब 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, यह जानकारी दिल्ली पुलिस के हवाले से एएनआई ने दी है। पीटीआई के मुताबिक़ राजधानी में क़रीब 15,000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियाँ तैनात रहेंगी। विशेष पुलिस आयुक्त मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा, "कई गणमान्य लोग दिल्ली आ रहे हैं। इनमें राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के प्रमुख, मंत्री, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य शामिल हैं।" इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ चीन और रूस की सुरक्षा टीमें उन होटलों में पहुँच चुकी हैं जहाँ दोनों राष्ट्रपति ठहरेंगे।
सौ से ज़्यादा ट्रेनें
रेलवे ने कहा है कि 11 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली स्टेशन पर गाड़ियों का परिचालन "ऑपरेशनल वजहों" से प्रभावित रहेगा, और अब तक सौ से ज़्यादा ट्रेनों की जानकारी दी जा चुकी है। बीबीसी हिंदी ने 11 सितंबर की जिन गाड़ियों के डायवर्जन की सूची दी है उनमें 20840 नई दिल्ली-राँची राजधानी, 12424 नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी, 12314 नई दिल्ली-सियालदह राजधानी, 12306 नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी और 12394 नई दिल्ली-राजेंद्र नगर संपूर्ण क्रांति शामिल हैं। यात्रियों से 139 पर फ़ोन करने या एनटीईएस की वेबसाइट देखने को कहा गया है।
स्रोतवाणिज्य मंत्रालय, ट्रेडस्टैट डेटा बैंक: चीन के साथ कुल व्यापार की देशवार तालिका, रिपोर्ट दिनांक 10 सितंबर 2026, वाणिज्य मंत्रालय, ट्रेडस्टैट: चीन से आयात, दो अंकों के एचएस अध्यायवार, 2024-25 और 2025-26, वाणिज्य मंत्रालय, ट्रेडस्टैट: चीन को निर्यात, दो अंकों के एचएस अध्यायवार, 2024-25 और 2025-26, पत्र सूचना कार्यालय, बैकग्राउंडर 'ब्रिक्स: प्रगति, सहयोग और भारत की नेतृत्वकारी भूमिका', 10 सितंबर 2026, राष्ट्रपति सचिवालय की विज्ञप्ति: राष्ट्रपति भवन में 11 से 13 सितंबर तक प्रवेश बंद, 10 सितंबर 2026, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय: 59 मोबाइल ऐप पर पाबंदी की विज्ञप्ति, 29 जून 2020, दिल्ली यातायात पुलिस: अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सिलसिले में यातायात परामर्श, 11 से 13 सितंबर 2026, द हिंदू: चीन ने सात साल बाद शी की भारत यात्रा की पुष्टि की, 10 सितंबर 2026, आईएएनएस, बीजिंग: चीनी विदेश मंत्रालय की घोषणा और प्रवक्ता की सुबह की ब्रीफ़िंग, 10 सितंबर 2026, द इंडियन एक्सप्रेस: शी शनिवार को पहुँचेंगे, सात साल में पहली यात्रा, 10 सितंबर 2026, द इंडियन एक्सप्रेस: बांग्लादेश ने तारिक़ रहमान की ब्रिक्स यात्रा से इनकार किया, 10 सितंबर 2026, द इंडियन एक्सप्रेस: तकनीकी आयात और निवेश पाबंदियों पर चीन से बातचीत, 8 सितंबर 2026, द इंडियन एक्सप्रेस: ब्रिक्स यातायात योजना, डायवर्जन और हवाई अड्डे का रास्ता, 10 सितंबर 2026, बीबीसी हिंदी: ब्रिक्स क्या है और इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं, 10 सितंबर 2026, बीबीसी हिंदी लाइव: नई दिल्ली स्टेशन पर ट्रेनें प्रभावित रहेंगी, 10 सितंबर 2026, अल जज़ीरा: पाँच साल बाद भारत-चीन सीधी उड़ान बहाल, 27 अक्टूबर 2025, द ट्रिब्यून: सीमा से लगे देशों से एफ़डीआई के नियमों में ढील, 11 मार्च 2026, द इंडियन एक्सप्रेस: कैलास मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन संबंध, 8 सितंबर 2026