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ग्रेटर नोएडा की बस पर आग-सुरक्षा तंत्र का नियम लागू नहीं था

बुधवार, 23 सितंबर की रात क़रीब साढ़े ग्यारह बजे यमुना एक्सप्रेसवे पर ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में राज कल्पना ट्रैवल्स की एक स्लीपर बस में आग लगी, जिसमें नौ यात्रियों की मौत हुई। बस नवंबर 2022 में बनी थी, लेकिन आग-सूचक और बुझाने के तंत्र को टाइप-3 बसों में अनिवार्य करने वाली सरकारी अधिसूचना सिर्फ़ 1 अक्तूबर 2023 के बाद बनी बसों पर लागू होती है।

गाज़ियाबाद के कौशांबी बस डिपो में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसें, दिसंबर 2021 की तस्वीर; यह हादसे वाली बस नहीं, रोज़ चलने वाला वही बेड़ा है जिस पर ये नियम लागू होते हैं
तस्वीर: Kool Nerd 123, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार, 23 सितंबर की रात क़रीब साढ़े ग्यारह बजे एक स्लीपर बस में आग लगी। जगह थी ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र, एक्सप्रेसवे के 33वें किलोमीटर के पास, दयानतपुर गाँव के नज़दीक। गौतमबुद्ध नगर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार और पुलिस के अनुसार नौ यात्रियों की मौत हुई। चार दमकल गाड़ियाँ और बचाव दल मौक़े पर पहुँचे, और बीस से पच्चीस यात्री बचा लिए गए। यह आँकड़ा सुबह से रात तक नहीं बदला।

बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही थी। अपर पुलिस आयुक्त (क़ानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र के अनुसार उसमें 35 यात्री सवार थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएमएनआरएफ़ से हर मृतक के परिजन को दो लाख रुपये और हर घायल को पचास हज़ार रुपये देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की ओर से उतनी ही रक़म अलग से जोड़ी।

यह लेख हादसे की तफ़सील नहीं है। सवाल एक है, सीधा: क़ानून एक बस से क्या माँगता है, और क्या यह बस उस पर खरी उतरती थी।

राज कल्पना ट्रैवल्स की बस: कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट, नवंबर 2022 का निर्माण

जो बस जली, वह कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट पर चलती थी, यानी बुकिंग पर चलने वाली निजी सेवा, तय किराये और तय रूट वाली स्टेज कैरिज (जैसे राज्य परिवहन निगम की बस) से अलग। यह भेद इसलिए मायने रखता है कि परमिट की श्रेणी तय करती है कि वाहन किस निरीक्षण-चक्र और किन शर्तों के तहत सड़क पर उतरता है। पंजीकरण संख्या बीआर32पीए8647 थी।

वाहन रिकॉर्ड के अनुसार यह पंजीकरण बिहार के मधुबनी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में 5 अप्रैल 2023 को हुआ। बस ख़ुद उससे पाँच महीने पुरानी थी, आइशर प्रो 6019 एस सीडब्ल्यूसी बीएस-6 मॉडल, नवंबर 2022 में बनी। प्रभात खबर ने 24 सितंबर, दोपहर 2:14 बजे प्रकाशित रिपोर्ट में लिखा कि फ़िटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान से और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र हरियाणा से जुड़ा बताया जा रहा है। अख़बार ने ख़ुद इसे पुष्टि नहीं, वाहन-रिकॉर्ड में मिला विवरण बताया, और लिखा कि जांच का असल बिंदु यह होगा कि फ़िटनेस जिस दिन जारी हुई, उस दिन बस के एसी, इंजन, वायरिंग, आग-सुरक्षा उपकरण और इमरजेंसी एग्ज़िट की हालत क्या थी।

एक बस, तीन राज्यों के काग़ज़। यह अकेला तथ्य बताता है कि वाणिज्यिक बसों का निरीक्षण-तंत्र कितना बिखरा हुआ है, पंजीकरण एक राज्य में, फ़िटनेस दूसरे में, प्रदूषण जांच तीसरे में।

नवंबर 2022 की यह निर्माण तारीख़ आगे इस लेख के मूल सवाल से सीधे जुड़ती है।

आग की वजह पर अधिकारियों का शुरुआती अनुमान

मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार ने कहा कि आग इंजन से शुरू हुई और ईंधन के चलते तेज़ हुई। ग्रेटर नोएडा की डीसीपी रवि शंकर निम ने बताया कि शुरुआती जांच वायरिंग में स्पार्क की ओर इशारा करती है, जिससे इंजन के लुब्रिकेंट तेल ने आग पकड़ ली। दोनों अधिकारियों ने इसे शुरुआती अनुमान बताया, अंतिम वजह नहीं। कोई सरकारी दस्तावेज़ अभी तक किसी एक वजह की पुष्टि नहीं करता।

जांच इंस्पेक्टर अजय कुमार सिंह के पास है।

बस में सवार सुनील कुमार की शिकायत पर जेवर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। इंडिया टीवी न्यूज़ की 24 सितंबर, सुबह 9:53 बजे प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार शिकायत में आरोप है कि चालक और परिचालक ने जलने की गंध की चेतावनी के बावजूद बस नहीं रोकी, और यात्रियों को चुप रहने को कहा। रिपब्लिक भारत की उसी दिन रात 9:34 बजे (अपडेट 9:49 बजे) की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया, दो चालक और एक परिचालक। अदालत ने तीनों को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। मामला बीएनएस यानी भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 (लापरवाही से गाड़ी चलाना), 125(बी) (जान ख़तरे में डालने वाली उपेक्षा), 105 (ग़ैर-इरादतन हत्या के बराबर अपराध, पुरानी आईपीसी धारा 304 जैसा) और 351(3) (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज है। तीनों आरोपी हैं, दोषी नहीं। किसी अदालत ने अभी अपराध पर कुछ तय नहीं किया।

एआईएस-052 के मुताबिक़ बस में इमरजेंसी दरवाज़ा अनिवार्य है

बस की बॉडी कैसे बने, यह निर्माता की मर्ज़ी का मामला नहीं। केंद्रीय मोटर यान नियम, 1989 के नियम 125ग के तहत 13 या उससे ज़्यादा यात्री क्षमता वाले हर वाहन को एक दस्तावेज़ का पालन करना पड़ता है, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड यानी एआईएस-052 (रिवीज़न-1):2008, जिसे भारतीय ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन (एआरएआई) ने सड़क परिवहन मंत्रालय की सीएमवीआर-तकनीकी स्थायी समिति के तहत तैयार किया। यह समिति बस-निर्माण मानकों पर मंत्रालय की तकनीकी विशेषज्ञ इकाई है।

यह दस्तावेज़ बसों को चार श्रेणियों में बाँटता है। टाइप-1 शहर की बसें हैं, खड़े होकर यात्रा की जगह के साथ। टाइप-2 अंतर-शहर बसें हैं। टाइप-3 लंबी दूरी की बसें हैं, सिर्फ़ बैठी सवारी के लिए। टाइप-4 ख़ास मक़सद की बसें हैं। स्कूल बस, टूरिस्ट बस और स्लीपर कोच इसी में आते हैं।

धारा 2.2.4 के मुताबिक़ मिनी और मिडी बस के अलावा हर बस में सेवा-दरवाज़े के उलटी तरफ़ कम-से-कम एक इमरजेंसी एग्ज़िट होना चाहिए। टाइप-3 बसों में, यानी एसडीएक्स, डीएलएक्स और एसीएक्स श्रेणी में, न्यूनतम दो इमरजेंसी दरवाज़े या रास्ते मूल संहिता में ही तय हैं। यह 2008 से लागू संहिता की बुनियादी शर्त है।

12 अगस्त 2014 के संशोधन संख्या 4 ने इसे और सख़्त किया। टाइप-2 और टाइप-3 (एसडीएक्स, डीएलएक्स, एसीएक्स) बसों में सेवा-दरवाज़े के उलटी तरफ़ कम-से-कम एक एग्ज़िट अब पूरा दरवाज़ा होना चाहिए, सिर्फ़ खिड़की नहीं। यह शर्त 22 जुलाई 2014 की सीएमवीआर-तकनीकी स्थायी समिति की 42वीं बैठक के फ़ैसले पर आधारित थी। यह 1 अक्तूबर 2015 से लागू हुई।

दरवाज़े का न्यूनतम आकार भी तय है: 1250 मिलीमीटर ऊँचाई, 550 मिलीमीटर चौड़ाई। दरवाज़ा बाहर की ओर खुलना चाहिए, कम-से-कम 100 डिग्री तक, और हाथ से चलने वाला हो, बिजली से चलने वाला नहीं। खिड़की को एग्ज़िट माना जाए तो उसका शीशा आसानी से टूटने वाला हो, पास में हथौड़े से तोड़ने का यंत्र लगा हो। हर एग्ज़िट पर लाल अक्षरों में हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में "इमरजेंसी एग्ज़िट" लिखा हो, साथ में चित्र। खोलने की विधि रिलीज़ तंत्र से 150 मिलीमीटर के भीतर दर्ज हो। छत में एक अतिरिक्त एस्केप हैच का विकल्प भी है, हर श्रेणी की बस के लिए, पर वह दरवाज़े का विकल्प नहीं, अतिरिक्त इंतज़ाम है। छोटे-छोटे मानक हैं, पर हर एक जान बचाने के लिए है।

एक बस की छत पर लगा इमरजेंसी एग्ज़िट हैच, पास ही निर्देश लिखे। यह भारत की तस्वीर नहीं, पर एग्ज़िट पर चेतावनी लिखने की शर्त वैसी ही है
तस्वीर: Sushiflinger, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

स्लीपर कोच के लिए अलग दस्तावेज़ है, एआईएस-119:2012. इसकी धारा 3.0 सीधे कहती है कि स्लीपर कोच टाइप-4 में आते हैं, टाइप-3 में नहीं। इन्हें ए.सी. डीलक्स या डीलक्स श्रेणी का ही होना चाहिए। लेकिन उसी दस्तावेज़ की धारा 4.0 यह भी कहती है कि स्लीपर कोच के लिए बुनियादी ज़रूरतें एआईएस-052 के उसी अध्याय-2 से ली जाएँगी, जो टाइप-3 की डीलक्स और एसी-डीलक्स बसों पर लागू होता है। नाम भले टाइप-4 हो। दरवाज़े और एग्ज़िट का बुनियादी नियम टाइप-3 वाला ही बस पर बंधता है। एआईएस-119 खिड़की, गैंगवे और हैंडरेल के लिए अलग शर्तें जोड़ता है, पर इमरजेंसी एग्ज़िट पर कोई अलग या ढीली शर्त कहीं दर्ज नहीं मिलती।

इमरजेंसी एग्ज़िट पर मीडिया का दावा, पुलिस की चुप्पी

द वीक ने 24 सितंबर, दोपहर 12:40 बजे प्रकाशित रिपोर्ट में "शुरुआती जांच" और "अधिकारियों" के हवाले से लिखा कि बस का इमरजेंसी एग्ज़िट स्लीपर बर्थ बनाए जाने से बंद हो गया था, ठीक उसके ऊपर। रिपोर्ट में किसी अधिकारी का नाम नहीं है। बिज़नेस टुडे की हिंदी वेबसाइट ने उसी दिन दोपहर 3:08 बजे लिखा कि जांच में तय सीमा से ज़्यादा लंबाई, छोटा इमरजेंसी दरवाज़ा, रास्ते में रुकावट और आग-सुरक्षा तंत्र की कमी मिली, यह भी बिना किसी नामित अधिकारी के हवाले से।

गौतमबुद्ध नगर पुलिस, अग्निशमन विभाग या परिवहन विभाग की ओर से इमरजेंसी एग्ज़िट को लेकर अब तक कोई नामित बयान नहीं आया। जो अधिकारी नाम से बोले हैं, उन्होंने आग की वजह पर बोला है, दरवाज़े पर नहीं।

अगर द वीक और बिज़नेस टुडे का दावा सच निकलता है, तो यह ठीक एआईएस-052 की धारा 2.2.4.11 का उल्लंघन होगा, जो किसी भी वेल्डेड ढाँचे या फ़्रेम से इमरजेंसी एग्ज़िट के रास्ते को रोकने पर पूरी तरह रोक लगाती है, चाहे वह अंदर से हो या बाहर से। लेकिन यह नियम की भाषा है, घटना की पुष्टि नहीं।

एक दावा है, दो अख़बारों में, बिना नाम के स्रोत से। दूसरा एक ख़ामोशी है, नाम वाले अधिकारियों की तरफ़ से। जांच पूरी होने तक दोनों को गड्डमड्ड करना ग़लत होगा।

आग-सूचक और बुझाने के तंत्र की तारीख़, जो इस बस को नियम से बाहर रखती है

दरवाज़े से अलग एक और नियम है, आग की सूचना देने और उसे बुझाने के सिस्टम का। 27 जनवरी 2022 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जीएसआर 48(अ) अधिसूचना जारी की, केंद्रीय मोटर यान (प्रथम संशोधन) नियम, 2022. इसने नियम 125ग में एक नई शर्त जोड़ी: एआईएस-052 में परिभाषित टाइप-3 बसों के अधिभोगी कक्ष, यानी जहाँ यात्री बैठते-सोते हैं, वहाँ एआईएस-135 के तहत आग-अलार्म और सुरक्षा तंत्र अनिवार्य होगा, लेकिन सिर्फ़ उन बसों में जो इस नियम के लागू होने की तारीख़ से बारह महीने बाद बनी हों, यानी 27 जनवरी 2023 से। स्कूल बसों के लिए भी वही शर्त, वही तारीख़, एआईएस-063 के हवाले से।

एक बस के इंजन-कक्ष में लगा स्वचालित आग-बुझाने का सिलिंडर, उपकरण पर लिखावट चीनी भाषा में, भारत की तस्वीर नहीं। एआईएस-135 जिस तरह के तंत्र की बात करता है, उसकी झलक इसमें मिलती है
तस्वीर: Ptrump16, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

फिर 28 अप्रैल 2023 को मंत्रालय ने जीएसआर 337(अ) से इस शर्त को बदल दिया। नई भाषा साफ़ थी: एआईएस-135 के प्रावधान टाइप-3 बसों पर तभी लागू होंगे, जिनका निर्माण 1 अक्तूबर 2023 को या उसके बाद हुआ हो। तारीख़ पीछे नहीं गई, आगे गई।

यह बस नवंबर 2022 में बनी। यानी जनवरी 2022 वाली मूल शर्त के हिसाब से भी, और अप्रैल 2023 वाली संशोधित शर्त के हिसाब से भी, यह बस उस समय-सीमा से पहले की थी जब आग-अलार्म और बुझाने का तंत्र अनिवार्य हुआ। दोनों अधिसूचनाओं का पाठ पढ़ने पर यह गणित सीधा है: नियम किसी बस की उम्र नहीं, उसके बनने की तारीख़ देखता है, और यह तारीख़ मूल शर्त से भी ग्यारह महीने पुरानी है।

एक बात और ध्यान देने की है। जो अनिवार्यता दोनों अधिसूचनाओं में दर्ज है, वह ख़ास तौर पर "अधिभोगी कक्ष" के आग-अलार्म और सुरक्षा तंत्र की है, यानी यात्री बैठने-सोने की जगह की। इस लेख को एआईएस-135 का पूरा मूल पाठ नहीं मिल सका। इंजन-कक्ष की आग बुझाने की अलग व्यवस्था पर किसी और तारीख़ से कोई अलग शर्त है या नहीं, यह लेख इस दस्तावेज़-सीमा के भीतर नहीं बता सकता। जो सत्यापित हुआ, वह सिर्फ़ यह है: अधिभोगी कक्ष वाली शर्त की तारीख़ 1 अक्तूबर 2023 है। अधिकारियों का शुरुआती अनुमान इंजन में लगी आग की ओर है, यात्री कक्ष में नहीं।

एक और परत है, तारीख़ से अलग। दोनों अधिसूचनाएँ शब्द "टाइप-3 बस" इस्तेमाल करती हैं। लेकिन एआईएस-119 की धारा 3.0 ख़ुद कहती है कि स्लीपर कोच टाइप-4 में आते हैं। दस्तावेज़ों में कहीं यह साफ़ नहीं मिलता कि जीएसआर 48(अ) और 337(अ) का "टाइप-3" शब्द टाइप-4-2 स्लीपर कोच को भी बाँधता है या नहीं, भले ही एआईएस-119 दरवाज़े-खिड़की के लिए टाइप-3 का ही नियम उधार लेता हो। मंत्रालय की किसी अलग व्याख्या, परिपत्र या स्पष्टीकरण का पता इस लेख को नहीं चला। तारीख़ का सवाल तो साफ़ है, वर्गीकरण का सवाल दस्तावेज़ों में ही खुला रह जाता है।

फिर भी एक बात पक्की है। चाहे इस बस को टाइप-3 पढ़ें या टाइप-4-2, तारीख़ का हिसाब इसे उस माँग से बाहर रखता है। आग-अलार्म या बुझाने का कोई सिस्टम न होना, अगर सच है, तो यह इस बस के लिए उस दिन तक अवैध नहीं था। यह क़ानून की ख़ाली जगह है, उल्लंघन नहीं। यह फ़र्क़ भूलना आसान है, और यही इस हादसे की सबसे ज़रूरी क़ानूनी बात है।

परमिट की शर्तें, पुराने चालान, और केरल हाईकोर्ट का एक पुराना आदेश

इस बस पर पहले से चालान दर्ज थे। के-न्यूज़ इंडिया की रिपोर्ट में बीस चालान और 1,07,632.40 रुपये लंबित जुर्माने का ज़िक्र है, जिसमें तेज़ रफ़्तार, ग़लत पार्किंग, परमिट की शर्तों का उल्लंघन और प्राथमिक-उपचार पेटी व अग्निशामक यंत्र की कमी शामिल है। ईटीवी भारत हिंदी की रिपोर्ट में यह संख्या उन्नीस चालान और क़रीब पौने दो लाख रुपये बताई गई है। दो अख़बार, दो अलग गिनती। ठीक संख्या इस लेख में तय नहीं की जा सकती। दिशा फिर भी एक है: बस पर बार-बार जुर्माना लगा, और वह सड़क पर चलती रही।

यह पहली बार नहीं है कि किसी अदालत ने कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में आग के ख़तरे पर बात की हो। 6 अक्तूबर 2022 को केरल हाईकोर्ट ने पलक्कड़ के वडक्कनचेरी में एक टूरिस्ट बस के केएसआरटीसी बस से टकराने पर स्वतः संज्ञान लिया। उस हादसे में नौ लोग मारे गए थे। जस्टिस अनिल के. नारेंद्रन और जस्टिस पी. जी. अजितकुमार की खंडपीठ ने पहला सवाल यही पूछा। बस को फ़िटनेस प्रमाणपत्र किसने दिया? अदालत ने आदेश दिया कि जिन कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में तय मानक से हटकर एलईडी-लेज़र लाइट और ऊँची आवाज़ वाले साउंड सिस्टम लगे हों, उन्हें सड़क से हटाया जाए। लाइवलॉ की उसी दिन दोपहर 12:56 बजे की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने कहा कि साउंड सिस्टम के लिए एसी और डीसी बिजली आपूर्ति को मिलाना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है, और यात्रियों के लिए आग का ख़तरा पैदा करता है।

केरल हाईकोर्ट की एर्नाकुलम स्थित इमारत, 2013 की तस्वीर। यहीं की एक खंडपीठ ने 2022 में कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में बिजली की गड़बड़ी को आग का ख़तरा बताया था
तस्वीर: Augustus Binu/ www.dreamsparrow.net/ facebook, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

यह आदेश सीधे इस हादसे से नहीं जुड़ता। यह किसी बस-अग्निकांड पर भी नहीं था, टक्कर पर था। फिर भी यह दिखाता है कि अदालतें कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में अनधिकृत बिजली के जोड़-तोड़ को आग के ख़तरे के तौर पर पहले भी दर्ज कर चुकी हैं। ऐसा कोई आदेश जो सीधे स्लीपर कोच की संरचनात्मक आग-सुरक्षा, एआईएस-052 या एआईएस-135 पर हो, ढूँढने पर इस लेख को नहीं मिला। खोज यहीं तक गई।

मुआवज़े की घोषणा हो चुकी, जांच बाक़ी है

केंद्र और राज्य, दोनों ने मुआवज़ा घोषित कर दिया है। पीएमएनआरएफ़ से दो लाख, राज्य सरकार से दो लाख, हर मृतक के परिजन को। घायलों को पचास-पचास हज़ार, दोनों तरफ़ से। दिलचस्प यह भी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की अपनी प्रेस विज्ञप्ति में मृतकों की कोई गिनती दर्ज नहीं, सिर्फ़ "प्रत्येक मृतक के परिजन" का ज़िक्र है। नौ का आँकड़ा पुलिस और अग्निशमन विभाग से आया, केंद्र सरकार के दस्तावेज़ से नहीं।

जो अभी तय नहीं हुआ, वह लंबी सूची है। आग किस वजह से लगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं। इमरजेंसी एग्ज़िट काम करता था या नहीं, इसका किसी नामित अधिकारी ने जवाब नहीं दिया। फ़िटनेस और पीयूसी प्रमाणपत्र सच में राजस्थान और हरियाणा से जारी हुए थे या नहीं, यह भी जांच का विषय है। और यह सवाल दस्तावेज़ों में ही खुला है कि आग-सूचक तंत्र की तारीख़-आधारित शर्त टाइप-4-2 स्लीपर कोच पर बंधती भी है या नहीं।

दोनों चालक और परिचालक, तीनों आरोपी हैं, चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में। दोषी कोई नहीं ठहराया गया।

इंस्पेक्टर अजय कुमार सिंह की जांच पूरी होने पर ही इनमें से ज़्यादातर सवालों के जवाब मिलेंगे। तब तक हर आँकड़ा वैसा ही रहेगा, जैसा 24 सितंबर की शाम तक था।

स्रोतपत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 24 सितंबर 2026, सुबह 11:14 बजे: ग्रेटर नोएडा बस अग्नि त्रासदी पर प्रधानमंत्री का शोक और पीएमएनआरएफ़ की घोषणा (रिलीज़ आईडी 2314292); टोल की कोई संख्या इस रिलीज़ में नहीं है, एएनआई, 24 सितंबर 2026, सुबह क़रीब 8:12 बजे: जेवर पुलिस के हवाले से नौ मौतें, कश्मीरी गेट से महोबा रूट, मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार का बयान, एएनआई, 24 सितंबर 2026, सुबह क़रीब 9:29 बजे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दो लाख और पचास हज़ार रुपये मुआवज़े का ऐलान, इंडिया टीवी न्यूज़, 24 सितंबर 2026, सुबह 9:53 बजे (अपडेट 10:23 बजे): सुनील कुमार की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी का ब्योरा, इंस्पेक्टर अजय कुमार सिंह की जांच, न्यूज़ड्रम, 24 सितंबर 2026, सुबह 9:13 बजे: मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार और डीसीपी रवि शंकर निम के बयान, बस का बीएस-6 मॉडल, द वीक, 24 सितंबर 2026, दोपहर 12:40 बजे, बाइलाइन अनुजा सुज़न वर्गीज़: इमरजेंसी एग्ज़िट बंद होने और पेंट थिनर का दावा, अनाम 'प्रारंभिक जांच' और 'अधिकारियों' के हवाले से, बिज़नेस टुडे (बाज़ार), 24 सितंबर 2026, दोपहर 3:08 बजे, बाइलाइन सोनम: एआईएस-052 और एआईएस-119 का ज़िक्र, अनाम स्रोत से लंबाई, इमरजेंसी दरवाज़े और आग-सुरक्षा तंत्र में कमी का दावा, प्रभात खबर, 24 सितंबर 2026, दोपहर 2:14 बजे (अपडेट 2:20 बजे), बाइलाइन राधेश्याम कुशवाहा: बस का पंजीकरण, निर्माण तारीख़, फ़िटनेस व पीयूसी का राज्यवार ब्योरा, के-न्यूज़ इंडिया, 24 सितंबर 2026: बस पर बीस पूर्व चालान और 1,07,632.40 रुपये लंबित जुर्माने का ब्योरा, ईटीवी भारत हिंदी, 24 सितंबर 2026: बस पर उन्नीस लंबित चालान और क़रीब पौने दो लाख रुपये जुर्माने का अलग आंकड़ा, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, जीएसआर 48(अ), 27 जनवरी 2022, भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग II खंड 3(i): केंद्रीय मोटर यान (प्रथम संशोधन) नियम, 2022, नियम 125ग में संशोधन; मूल रूप से morth.nic.in पर, अब मंत्रालय की पुनर्रचित वेबसाइट पर सीधे उपलब्ध नहीं, इंटरनेट आर्काइव की प्रति पढ़ी गई, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, जीएसआर 337(अ), 28 अप्रैल 2023, भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग II खंड 3(i): केंद्रीय मोटर यान (चौथा संशोधन) नियम, 2023, नियम 125ग की तारीख़ 1 अक्तूबर 2023 में बदली; इंटरनेट आर्काइव की प्रति पढ़ी गई, एआईएस-052 (रिवीज़न-1):2008, बस बॉडी डिज़ाइन एवं अनुमोदन संहिता, भारतीय ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन (एआरएआई), सड़क परिवहन मंत्रालय की सीएमवीआर-तकनीकी स्थायी समिति के तहत; पूरा दस्तावेज़, अध्याय 1 (परिभाषाएँ) और अध्याय 2-3 (इमरजेंसी एग्ज़िट) पढ़े गए, एआईएस-052 (रिवीज़न-1):2008 में संशोधन संख्या 4, 12 अगस्त 2014, एआरएआई: टाइप-2/3 बसों में इमरजेंसी दरवाज़े की अनिवार्यता, 1 अक्तूबर 2015 से प्रभावी, एआईएस-119:2012, स्लीपर कोच के लिए अपेक्षाएँ, एआरएआई: धारा 3.0 में स्लीपर कोच को टाइप-4 में वर्गीकृत किया गया, धारा 4.0 में टाइप-3 एसीएक्स/डीएलएक्स की सामान्य अपेक्षाएँ अपनाई गईं, लाइवलॉ, 6 अक्तूबर 2022, दोपहर 12:56 बजे: केरल हाईकोर्ट का पलक्कड़ बस हादसे पर स्वतः संज्ञान, जस्टिस अनिल के. नारेंद्रन और जस्टिस पी. जी. अजितकुमार की खंडपीठ, एसी-डीसी बिजली मिश्रण को आग का ख़तरा बताया, एससीसी ऑनलाइन ब्लॉग, 8 अक्तूबर 2022: केरल हाईकोर्ट, स्वतः संज्ञान बनाम केरल राज्य, 2022 एससीसी ऑनलाइन केर 4898, आदेश का विवरण

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।