सितंबर की शाम के लिए केरल को बिजली बेचने कोई तैयार नहीं हुआ
केरल राज्य विद्युत बोर्ड ने सितंबर की शाम के लिए 500 मेगावाट का टेंडर निकाला था और डीप पोर्टल पर एक भी बोली नहीं आई। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने आपात बैठक बुलाई, और उसी दिन नियामक आयोग ने बोर्ड का सितंबर वाला पूरा ख़रीद प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया।

केरल राज्य विद्युत बोर्ड ने सितंबर के लिए शाम साढ़े छह बजे से आधी रात तक की 500 मेगावाट बिजली का टेंडर निकाला था।
डीप पोर्टल पर एक भी कंपनी ने बोली नहीं लगाई।
यह केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग के उस आदेश में दर्ज है जो शुक्रवार, 11 सितंबर को जारी हुआ। उसी टेंडर में रात 12 से सुबह 5 बजे वाले 500 मेगावाट के लिए कुल एक बोली आई, 25 मेगावाट की, 9.95 रुपये प्रति यूनिट पर। बोर्ड की अपनी मूल्यांकन समिति ने उसे हद से ज़्यादा महँगा बताकर ठुकराने की सिफ़ारिश की। अगस्त के लिए तो किसी ने बोली लगाई ही नहीं।
उसी शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बिजली संकट पर आपात बैठक बुलाई। उसी दिन, उसी शहर में, नियामक आयोग ने बोर्ड का सितंबर वाला पूरा ख़रीद प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया।
गुरुवार, 10 सितंबर को केरल ने 9.60 करोड़ यूनिट बिजली खपाई। उसमें से 71 फ़ीसदी राज्य के बाहर से आई। राज्य के अपने ताप बिजलीघरों ने उस दिन एक यूनिट भी नहीं बनाई, और महीने के पहले दस दिनों में भी नहीं।
मुख्यमंत्री की आपात बैठक और 900 मेगावाट की अपील
बैठक में मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा और बोर्ड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एम.जी. राजामाणिक्कम मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने तुरंत उठाए जाने वाले क़दमों के निर्देश दिए। बैठक की पृष्ठभूमि में राज्य भर से आ रही वे शिकायतें थीं कि बिजली बिना बताए और बार-बार काटी जा रही है।
राजामाणिक्कम ने कहा कि बोर्ड ने आउटेज मैनेजमेंट सिस्टम चालू कर दिया है, जिससे उपभोक्ता को कटौती की पहले से सूचना मिल जाती है। यह व्यवस्था उपसंस्थानों से जानकारी जोड़कर तय करती है कि किस वितरण ट्रांसफ़ॉर्मर पर कितना भार घटाना है, फिर उससे जुड़े उपभोक्ताओं को संदेश भेजती है। बोर्ड अब एक अलग ऐप बना रहा है, ताकि जिनका मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है या परिवार के किसी और सदस्य के नाम है, वे भी उपभोक्ता नंबर डालकर अपने फ़ीडर की कटौती का समय देख सकें।
असल अपील इसके बाद आई। राजामाणिक्कम ने लोगों से कहा कि शाम सात बजे से आधी रात के बीच बिजली की खपत घटाएँ, एसी का ग़ैर-ज़रूरी इस्तेमाल टालें और बिजली की गाड़ियाँ बाद में चार्ज करें। बोर्ड को इस स्वैच्छिक बचत से चरम माँग में क़रीब 900 मेगावाट की कमी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में क़रीब 12,000 मेगावाट की किल्लत है और इसी वजह से दूसरे राज्य इस समय बिजली बेचने से इनकार कर रहे हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की आख़िरी प्रकाशित रिपोर्ट जुलाई 2026 की है, और उसमें अखिल भारतीय स्तर पर चरम माँग की कमी 119 मेगावाट दर्ज है। सितंबर का कोई प्रकाशित राष्ट्रीय आँकड़ा अभी नहीं है, इसलिए 12,000 मेगावाट वाली बात बोर्ड के अध्यक्ष के बयान के रूप में ही दर्ज है। उन्होंने तमिलनाडु और दूसरे दक्षिणी राज्यों के अपने समकक्षों से बात की, जिनमें से कई 2,000 से 3,000 मेगावाट की कमी झेल रहे हैं।
चरम माँग के तीन अलग-अलग रिकॉर्ड
राजामाणिक्कम के मुताबिक़ गुरुवार को केरल की चरम माँग रिकॉर्ड 5,400 मेगावाट पर पहुँची, जबकि बोर्ड के पास आपूर्ति के लिए क़रीब 4,200 मेगावाट ही थे। पिछले साल सितंबर में औसत माँग 4,224 मेगावाट रही थी।
उसी दिन इडुक्की से छपी द हिंदू की दूसरी रिपोर्ट में आँकड़े अलग हैं। भार प्रेषण केंद्र ने सितंबर के लिए 4,850 मेगावाट की चरम माँग आँकी थी, गर्मी उसे 5,450 मेगावाट तक ले गई, और बोर्ड भीतरी तथा बाहरी स्रोतों से 4,850 मेगावाट जुटा पाया, यानी क़रीब 600 मेगावाट की कमी कटौती से पाटी गई। एक ही अख़बार में एक ही दिन के लिए दो आपूर्ति आँकड़े हैं, 4,200 और 4,850, और कोई भी किसी दस्तावेज़ का हवाला नहीं देता।
राज्य भार प्रेषण केंद्र का अपना दैनिक लॉग तीसरी तस्वीर देता है। 10 सितंबर को शाम का सबसे ऊँचा भार 6:44 बजे आया, 5,024 मेगावाट, और उस क्षण ग्रिड की आवृत्ति 49.55 हर्ट्ज़ थी। सुबह का सबसे ऊँचा भार 4,209 मेगावाट रहा, 6:46 बजे।
उसी पन्ने पर रिकॉर्ड की तालिका भी है। सितंबर महीने का सबसे ऊँचा शाम का भार 5 तारीख़ को दर्ज हुआ, 5,045 मेगावाट। केरल का सर्वकालिक सबसे ऊँचा शाम का भार 18 अप्रैल 2026 का है, 6,033 मेगावाट। 5,400 मेगावाट सितंबर का रिकॉर्ड है, साल का नहीं।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आँकड़े इसी बात को दूसरे सिरे से कहते हैं। जुलाई 2026 में केरल की चरम माँग 5,340 मेगावाट आँकी गई और पूरी हुई 4,820 मेगावाट, यानी 520 मेगावाट या 9.7 फ़ीसदी की कमी। उस महीने पूरे देश में किसी भी राज्य की इससे बड़ी कमी दर्ज नहीं हुई। दक्षिणी क्षेत्र के बाक़ी राज्यों में तमिलनाडु 61 मेगावाट और आंध्र प्रदेश 4 मेगावाट पर थे, कर्नाटक और तेलंगाना शून्य पर। पिछले जुलाई से केरल की चरम माँग 28.9 फ़ीसदी बढ़ी।
अखिल भारतीय आँकड़ा उसी रिपोर्ट में 2,70,322 मेगावाट माँग और 2,70,203 मेगावाट पूर्ति का है, कमी 119 मेगावाट। अकेले केरल की कमी उससे चार गुना ज़्यादा है, और यह गणित की ग़लती नहीं। राज्य की कमी उस क्षण की नापी जाती है जब उस राज्य की माँग सबसे ऊँची होती है, देश की उस क्षण की जब देश की। केरल की शाम पौने सात बजे की चोटी देश की चोटी से मेल नहीं खाती, इसलिए राष्ट्रीय संख्या में वह दिखती ही नहीं। अप्रैल से जून 2026 की संशोधित तालिका में केरल की चरम माँग 6,488 मेगावाट और पूर्ति 6,178 मेगावाट दर्ज है। भार प्रेषण केंद्र का अपना सर्वकालिक आँकड़ा 6,033 मेगावाट है। एक ही चोटी के दो सरकारी रिकॉर्ड 145 मेगावाट पर अलग हैं।
केरल की बिजली कहाँ से आती है
10 सितंबर को राज्य के भीतर 2.76 करोड़ यूनिट बनी और बाहर से 6.84 करोड़ यूनिट आई। भीतरी उत्पादन का 90 फ़ीसदी पनबिजली था, 2.49 करोड़ यूनिट। ब्रह्मपुरम और कोझिकोड के डीज़ल बिजलीघर उस दिन बंद रहे, और महीने का उनका कुल उत्पादन भी शून्य दर्ज है। सबसे बड़ा योगदान इडुक्की का रहा, 91 लाख यूनिट, और उसका सबसे ऊँचा उत्पादन रात आठ बजे 640 मेगावाट पर पहुँचा।
महीने के पहले दस दिनों का अनुपात भी यही है: 93.40 करोड़ यूनिट की खपत में 66.60 करोड़ बाहर से आई।
अब स्थापित क्षमता का सवाल, जिसके दो अलग सरकारी जवाब हैं और दोनों सही हैं। सीईए की पारेषण योजना के मुताबिक़ 31 मार्च 2026 को केरल की ज़मीन पर खड़े बिजलीघरों की कुल क्षमता 3,221 मेगावाट थी, जिसमें पनबिजली 2,284 मेगावाट, ताप 537 मेगावाट और बाक़ी अक्षय स्रोत 400 मेगावाट। इसी रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि एक मेगावाट से छोटी छत वाली सौर क्षमता 1,912 मेगावाट है, जिसे स्थापित क्षमता में गिना ही नहीं जाता।
दूसरा जवाब सीईए की 31 जुलाई 2026 वाली स्थापित क्षमता तालिका में है, जो केरल के नाम 8,417 मेगावाट लिखती है। अंतर का कारण यह है कि यह तालिका दूसरे राज्यों में खड़े केंद्रीय और निजी बिजलीघरों में केरल के आवंटित हिस्से भी जोड़ती है। उसी तालिका में राज्य क्षेत्र का हिस्सा 2,385 मेगावाट है, केंद्रीय क्षेत्र का 2,581 मेगावाट और निजी क्षेत्र का 3,451 मेगावाट। केरल का अपना, राज्य सरकार के मालिकाने वाला हिस्सा कुल का 28 फ़ीसदी है, और उसका भी 2,008 मेगावाट पनबिजली है।
बाहर की बिजली नौ अंतर-राज्यीय लाइनों से आती है, सात तमिलनाडु से और दो कर्नाटक से। 10 सितंबर को सबसे ज़्यादा 1.38 करोड़ यूनिट 400 केवी कोझिकोड लाइन से आई, फिर कोच्चि और कोट्टायम से 1.16 करोड़, तिरुवनंतपुरम से 91 लाख और मडक्कथारा से 85 लाख यूनिट। 220 केवी की चार लाइनों से मिलाकर 1.18 करोड़ यूनिट आई।

इन नौ लाइनों की दर्ज क्षमताएँ जोड़ें तो 15,000 मेगावाट से ऊपर जाती हैं। सीईए की उसी रिपोर्ट में केरल तंत्र की कुल हस्तांतरण क्षमता 4,575 मेगावाट लिखी है और आयात क्षमता 4,455 मेगावाट। हस्तांतरण क्षमता तारों की क्षमता का जोड़ नहीं होती, वह उस सीमा का नाम है जिस तक पूरा तंत्र बिना अस्थिर हुए बिजली ढो सकता है। 6,033 मेगावाट की शाम में 4,455 मेगावाट की छत का मतलब साफ़ है: बाज़ार में बिजली मिल भी जाए, तो एक हद से ज़्यादा केरल उसे भीतर नहीं ला सकता।
स्वैप का हिसाब और सितंबर की वापसी
स्वैप या बैंकिंग समझौता उधार का लेन-देन है, पैसे का नहीं। जिन महीनों में एक राज्य के पास बिजली बच जाती है, वह दूसरे को दे देता है और तय महीनों में वापस ले लेता है। नियामक आयोग ने 18 अगस्त 2026 के आदेश में बोर्ड के नौ ऐसे समझौतों को उत्तर-स्वीकृति दी, जो जुलाई 2025 से मई 2026 के बीच हुए थे। वापसी 103 से 105 फ़ीसदी तक होती है, मंच को 1.5 पैसे प्रति यूनिट और उस पर 18 फ़ीसदी जीएसटी देना होता है, और लाने वाले राज्य को पारेषण शुल्क भरना पड़ता है।
पिछले साल यह सौदा केरल के हक़ में था। जुलाई और अगस्त 2025 में बोर्ड ने 36.77 करोड़ यूनिट बची हुई बिजली छत्तीसगढ़, पंजाब और एक व्यापारी के पास जमा की, और नवंबर 2025 से फ़रवरी 2026 के बीच 38.42 करोड़ यूनिट वापस ले ली।
इस साल की उलटी टाँग अब चल रही है। आदेश में दर्ज है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने दो अलग मंचों से 1 मार्च से 15 अप्रैल 2026 के बीच केरल को 14.72 करोड़ यूनिट दी, वह भी रात 12 से 3 और शाम 7 से 12 बजे के ख़ानों में, 200-200 मेगावाट। लौटानी उतनी ही है, उन्हीं घंटों में, 16 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन ने मार्च और अप्रैल में 29.28 करोड़ यूनिट चौबीसों घंटे के आधार पर दी थी, जिसकी 105 फ़ीसदी वापसी 31 अगस्त तक पूरी होनी थी और आदेश की तारीख़ तक नहीं हुई थी।
इडुक्की से छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ बोर्ड इस समय रोज़ 34 लाख यूनिट लौटा रहा है, चौबीस घंटों में बँटे पाँच अलग-अलग खंडों में, जिनमें सबसे बड़ा सोलह घंटे में 10.43 लाख यूनिट का है। भार प्रेषण केंद्र की 10 सितंबर की तालिका इसकी तस्दीक़ करती है: उस दिन स्वैप निर्यात 34.04 लाख यूनिट और स्वैप आयात 24.08 लाख यूनिट दर्ज है।
समझौते की बनावट में ही पेच है। केरल ने मार्च-अप्रैल में शाम के घंटों की बिजली उधार ली, जब उसकी अपनी गर्मी चरम पर थी, और लौटाने का समय जून से सितंबर रखा, जब सामान्य मानसून में उसके पास पनबिजली बच जाती है। मानसून कमज़ोर पड़ा तो वही शर्त उलटी पड़ गई। द हिंदू के मुताबिक़ सितंबर की वापसी आमतौर पर थोट्टियार जैसे नदी-प्रवाह वाले छोटे बिजलीघरों से निभाई जाती है, जिनके पास भंडारण नहीं होता। इस बार नदियों में पानी ही कम है।
जलाशयों में पिछले साल से 69 करोड़ यूनिट कम पानी
जलाशय का पानी कितनी बिजली बना सकता है, उसे भी यूनिट में ही नापा जाता है। 10 सितंबर को केरल के सारे जलाशयों में मिलाकर 261.01 करोड़ यूनिट का भंडारण था, जबकि पूरे भरे होने पर वह 414.03 करोड़ यूनिट होता। भराव 63 फ़ीसदी।
इडुक्की का जलस्तर 721.907 मीटर था, यानी 2,368.46 फ़ुट, और भराव 63 फ़ीसदी। द हिंदू के मुताबिक़ पिछले साल इसी तारीख़ को वह 2,382.04 फ़ुट और 76 फ़ीसदी पर था। बाक़ी जलाशयों में शोलयार 88 फ़ीसदी पर है, इडमलयार 69, कुट्टियाडी 44 और मडुपट्टी 21 फ़ीसदी पर।

पिछले साल से तुलना भार प्रेषण केंद्र अपने पन्ने पर ख़ुद छापता है। इसी तारीख़ को 2025 में भंडारण 330.36 करोड़ यूनिट था और 2024 में 293.83 करोड़। सबसे अच्छे साल 2018-19 में 349.94 करोड़ यूनिट। इस साल का आँकड़ा 261.01 करोड़ है, पिछले साल से 69.35 करोड़ यूनिट कम। सिर्फ़ 2023 और 2016-17 इससे नीचे रहे हैं।
पानी आने की रफ़्तार और डराती है। इस जल-वर्ष में अब तक जलाशयों में कुल 336.56 करोड़ यूनिट के बराबर पानी आया है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 577.91 करोड़ और 2018-19 में 890.04 करोड़ यूनिट आ चुका था। सितंबर के पहले दस दिनों में 15.89 करोड़ यूनिट का पानी आया, और बोर्ड का अपना अनुमान इसी तारीख़ तक 32.57 करोड़ यूनिट का था। आधा भी नहीं आया। 10 सितंबर को दिन भर की आवक 1.14 करोड़ यूनिट रही, पिछले साल के इसी दिन 2.36 करोड़ यूनिट के मुक़ाबले।
नियामक आयोग ने अपने आदेश में एक राहत की बात दर्ज की है। केरल के जलाशयों में आने वाले पानी का क़रीब 25 फ़ीसदी उत्तर-पूर्वी मानसून से आता है, जो अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक चलता है, और आयोग का कहना है कि अल नीनो दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमज़ोर करता है, उत्तर-पूर्वी मानसून पर उसका असर इसी तरह नहीं पड़ता।
दिन में दो हज़ार मेगावाट, शाम को पाँच हज़ार
बोर्ड ने नियामक आयोग के सामने अपना भार-उत्पादन संतुलन रखा, और उसमें केरल की असली बीमारी दर्ज है। मानसून के महीनों में, बारिश वाले दिनों को छोड़कर, शाम की चरम माँग 4,500 से 5,000 मेगावाट रहती है। रात में 4,000 से 4,200। और दिन में, सौर घंटों के दौरान, माँग गिरकर 2,000 मेगावाट तक आ जाती है।
चरम माँग दिन की माँग से 250 फ़ीसदी तक ऊपर चली जाती है। वजह वही 1,912 मेगावाट की छत वाली सौर क्षमता है, जो दोपहर में राज्य की आधी माँग निगल जाती है।
बोर्ड इसी मजबूरी में दिन के समय अपने दीर्घकालिक चौबीसों घंटे वाले अनुबंधों की बिजली छोड़ देता है, और शाम को वही बिजली बाज़ार से महँगे दाम पर ख़रीदता है। 10 सितंबर को उसने केंद्रीय हिस्से में से 17.73 लाख यूनिट सरेंडर की, और उसी दिन उसका अपना उत्पादन साढ़े दस बजे गिरकर 206 मेगावाट पर आ गया।
आयोग के आदेश में यह भी दर्ज है कि सौर घंटों के बाहर की चरम माँग पिछले साल से 10 से 15 फ़ीसदी बढ़ी है। और उन्हीं घंटों में बाज़ार से मदद नहीं मिल रही। बोर्ड ने आयोग को बताया कि 10 रुपये प्रति यूनिट की ऊपरी सीमा पर भी एक्सचेंज में बिजली उपलब्ध नहीं है।
डेटा सेंटर की माँग का आकार
उसी शुक्रवार को हैदराबाद में तेलंगाना विधानसभा के प्रश्नकाल में सिरपुर के विधायक पलवई हरीश बाबू ने प्रस्तावित डेटा सेंटरों की बिजली ज़रूरत पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि नौकरियाँ आईटी सेवाएँ देती हैं, डेटा सेंटर नहीं। आईटी और उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने जवाब में कहा कि सरकार ने तय किया है कि घरेलू खपत, खेती, उद्योग और राज्य की अपनी ज़रूरत पूरी करने के बाद ही डेटा सेंटरों की बिजली का सवाल उठाया जाएगा। उन्होंने माना कि इस क्षेत्र के साथ कुछ दिक़्क़तें जुड़ी हैं, और कहा कि एक विशेष कार्ययोजना बनाई गई है तथा वैकल्पिक इंतज़ाम किए जा रहे हैं ताकि स्थानीय आपूर्ति पर असर न पड़े।
माँग का आकार कितना है, इसके जवाब तीन अलग दर्जे के हैं और उन्हें आपस में मिलाना ग़लत होगा। सबसे ऊपर एक राज्य अधिकारी का बयान है: तेलंगाना के विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) नवीन मित्तल ने 28 मई 2026 को असोचैम के सम्मेलन में कहा कि आने वाले सालों में हैदराबाद और आसपास आठ से दस गीगावाट डेटा सेंटरों की दिलचस्पी की उम्मीद है। शब्द दिलचस्पी है, अनुबंध नहीं, और कोई समय-सीमा उन्होंने नहीं बताई। तेलंगाना में इस समय चालू डेटा सेंटर क्षमता क़रीब एक गीगावाट है।
दूसरे दर्जे पर केंद्र सरकार का अनुमान है। जुलाई 2026 के आख़िरी हफ़्ते में संसद में दिए लिखित जवाब में बिजली राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि 2031-32 तक एआई डेटा सेंटरों से 26.3 गीगावाट का अतिरिक्त भार आने का अनुमान है, जिसे ग्रिड में जोड़ा जाएगा और मुख्य रूप से अक्षय ऊर्जा से पूरा किया जाएगा। चार महीने पहले, मार्च 2026 में, इसी सरकार का अनुमान उसी 2031-32 के लिए 13.56 गीगावाट का था। अनुमान चार महीने में दोगुना हुआ, माँग नहीं।
तीसरे दर्जे पर वह है जो पारेषण योजना में कागज़ पर उतर चुका है। सीईए की तेलंगाना वाली रिपोर्ट में 2034-35 तक बनने वाले उपकेंद्रों की सूची में एक 400 केवी स्विचिंग स्टेशन सीट्रीएलएस डेटा सेंटर लिमिटेड के लिए दर्ज है, 2,000 एमवीए के संयोजित भार के वास्ते। संयोजित भार वह अधिकतम क्षमता है जिसके लिए कनेक्शन बनाया जाता है, वास्तविक खपत नहीं। उसी रिपोर्ट में तेलंगाना की पारेषण कंपनी ने सीईए को बताया है कि हैदराबाद के आसपास भारी डेटा सेंटर भार आ रहा है और पर्याप्तता अध्ययन की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए। तेलंगाना की चरम माँग 2029-30 तक 24.2 गीगावाट और 2034-35 तक 31.8 गीगावाट आँकी गई है।

केरल के लिए बनी ठीक उसी शृंखला की रिपोर्ट में 2029-30 तक चरम माँग 7,916 मेगावाट रखी गई है। उस पूरी रिपोर्ट में डेटा सेंटर शब्द एक बार भी नहीं आता।
केरल की ज़मीन पर ये केंद्र नहीं बन रहे। पर बिजली उसे उसी दक्षिणी ग्रिड और उसी बाज़ार से मिलती है जिसमें तेलंगाना की आठ से दस गीगावाट वाली उम्मीद खड़ी है, और जिसकी नौ लाइनें तमिलनाडु तथा कर्नाटक से होकर आती हैं। डेटा सेंटर का भार चौबीसों घंटे एक-सा रहता है, और यही वह आकार है जिसे लंबे अनुबंध पर बिजली बेचना विक्रेता के लिए सबसे सुविधाजनक होता है। केरल को चाहिए शाम के साढ़े पाँच घंटे की बिजली, साल में कुछ महीने। सितंबर के टेंडर में उस माँग पर कोई बोली नहीं आई।
742 करोड़ का प्रस्ताव और 348 करोड़ की मंज़ूरी
बोर्ड ने 1 सितंबर 2026 से 15 मई 2027 तक के लिए कुल 83.55 करोड़ यूनिट बिजली ख़रीदने का प्रस्ताव रखा था, औसत 8.97 रुपये प्रति यूनिट पर, कुल 742.52 करोड़ रुपये का। उसने आयोग से यह भी माँगा कि इस अतिरिक्त ख़र्च को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने की कोई व्यवस्था मंज़ूर की जाए, क्योंकि इस समय ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं। बोर्ड का आकलन है कि 15 मई 2027 तक शाम के घंटों की कमी 500 से 2,000 मेगावाट के बीच रहेगी। आयोग ने इसी आकलन पर आपत्ति की: दिन की माँग असल से ऊँची दिखाई गई है, और केंद्रीय बिजलीघरों का हिस्सा सामान्य उपलब्धता से क़रीब 150 मेगावाट कम माना गया है।
ये दरें केंद्रीय पारेषण तंत्र की सीमा पर की हैं, और आयोग ने आदेश में इनका हिसाब उपभोक्ता तक लगाकर दिखाया। तीन से साढ़े तीन फ़ीसदी की अंतर-राज्यीय हानि और क़रीब 60 पैसे प्रति यूनिट का पारेषण शुल्क जोड़ने पर केरल की सीमा पर यही बिजली 9.90 रुपये से ऊपर बैठती है, और बोर्ड के अपने नेटवर्क का ख़र्च जोड़े बिना भी उपभोक्ता तक पहुँचते-पहुँचते क़रीब 11 रुपये प्रति यूनिट। तुलना के लिए भार प्रेषण केंद्र की उसी दिन की मेरिट ऑर्डर सूची में बोर्ड के दीर्घकालिक कोयला अनुबंधों की दरें 3.47 से 4.22 रुपये प्रति यूनिट के बीच हैं।
आयोग ने प्रस्ताव का आधे से ज़्यादा हिस्सा नामंज़ूर कर दिया। सितंबर की दोनों ख़रीदें, 9.15 रुपये वाली 100 मेगावाट और 6.55 रुपये वाली 25 मेगावाट, इस तर्क पर ख़ारिज हुईं कि रात के ढीले घंटों की ख़रीद शाम की किल्लत घटाती ही नहीं और उतनी माँग पनबिजली से निकाली जा सकती है। अप्रैल और मई 2027 की रात वाली तथा चौबीसों घंटे वाली ख़रीद भी दर ऊँची होने के कारण नामंज़ूर हुई। अंत में मंज़ूरी 34.64 करोड़ यूनिट की मिली, 347.79 करोड़ रुपये में, औसत 10.04 रुपये प्रति यूनिट पर। मंज़ूर बिजली की औसत दर प्रस्तावित औसत से ऊँची है, क्योंकि आयोग ने सस्ते खंड छाँट दिए और सिर्फ़ शाम वाले महँगे खंड रहने दिए।
आयोग ने आदेश में यह भी लिख दिया कि इतनी ऊँची दर पर दी गई मंज़ूरी आगे की किसी ख़रीद के लिए मिसाल नहीं मानी जाएगी। ऑनमनोरमा की 9 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ अप्रैल से अगस्त के बीच बोर्ड 1,190 करोड़ रुपये बिजली ख़रीद पर ख़र्च कर चुका है। अगले नियंत्रण-काल की दरें जिन नियमों से तय होंगी, उनका मसौदा आयोग ने 8 सितंबर 2026 को राय के लिए जारी कर दिया है।
बैटरी, पवन और उत्तर-पूर्वी मानसून
आयोग ने आदेश में गिनाया है कि राहत कहाँ से आ सकती है। कासरगोड के मैलाट्टी में सेकी के ज़रिए 125 मेगावाट और 500 मेगावाट-घंटे की बैटरी तथा मुल्लेरिया में एनएचपीसी की 15 मेगावाट वाली इकाई अक्टूबर तक चालू होनी है। श्रीकंठपुरम की 40 मेगावाट और आरीकोड की 30 मेगावाट वाली इकाइयाँ नवंबर तक। पोतनकोड की 40 मेगावाट वाली परियोजना में देरी हो चुकी है और आयोग ने बोर्ड को दिसंबर तक उसे चालू करने का निर्देश दिया है। सेकी से अनुबंधित 500 में से 400 मेगावाट की बैटरी मार्च 2027 से शेड्यूल होने की उम्मीद है, जबकि उसके चालू होने की मूल तारीख़ 27 सितंबर 2026 थी।
ब्रह्मपुरम के बंद पड़े डीज़ल बिजलीघर के परिसर में 250 मेगावाट और 500 मेगावाट-घंटे की बैटरी के लिए आयोग ने जून 2026 में 1.81 लाख रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह की दर मंज़ूर की थी। बोर्ड ने राज्य के भीतर 300 मेगावाट पवन बिजली के लिए और शाम 6 से 12 बजे तक पाँच साल के लिए 300 मेगावाट के लिए अलग निविदाएँ निकाल रखी हैं।
एक रास्ता ऐसा भी है जिस पर कोई निवेश नहीं लगता, और आयोग ने उसी पर सबसे तीखी बात कही है। माँग प्रबंधन पर आयोग ने पहले भी निर्देश दिए थे, और इस आदेश में उसने नाराज़गी के साथ दर्ज किया कि बोर्ड इस काम को गंभीरता से नहीं ले रहा। आयोग का आकलन है कि सिर्फ़ उपभोक्ताओं के सहयोग से चरम माँग में कम से कम 300 मेगावाट की कमी लाई जा सकती है। उसने बोर्ड को आदेश दिया कि एक वरिष्ठ अधिकारी को इस काम का ज़िम्मा दिया जाए और हर हफ़्ते की प्रगति बोर्ड की वेबसाइट पर छापी जाए। बोर्ड को दिसंबर 2026 के मध्य तक संशोधित भार-उत्पादन संतुलन के साथ आयोग के सामने दोबारा आना है।
स्रोतकेरल राज्य विद्युत नियामक आयोग, आदेश OP 39/2026, 11 सितंबर 2026: 1 सितंबर 2026 से 15 मई 2027 तक डीप पोर्टल से अल्पकालिक बिजली ख़रीद की याचिका पर आदेश, केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग, आदेश OP 38/2026, 18 अगस्त 2026: एमपीपीएमसीएल, पीएसपीसीएल, यूपीपीसीएल, एपीसीपीडीसीएल, सीएसपीडीसीएल और मणिकरण पावर के साथ स्वैप समझौतों को उत्तर-स्वीकृति, केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग, आदेश OP 16/2026, 12 जून 2026: ब्रह्मपुरम में 250 मेगावाट/500 मेगावाट-घंटे की बैटरी की दर 1.81 लाख रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह, केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग, आदेश OP 32/2026, 16 जुलाई 2026: शाम 6 से 12 बजे तक पाँच साल के लिए 300 मेगावाट की बोली प्रक्रिया, केरल राज्य भार प्रेषण केंद्र (एसएलडीसी): 10 सितंबर 2026 की अधिकतम माँग, आवृत्ति और रिकॉर्ड तालिका, केरल राज्य भार प्रेषण केंद्र: 10 सितंबर 2026 का उत्पादन और आयात विवरण, बिजलीघरवार और लाइनवार, केरल राज्य भार प्रेषण केंद्र: 10 सितंबर 2026 की जलाशय भंडारण रिपोर्ट और पिछले वर्षों से तुलना, केरल राज्य भार प्रेषण केंद्र: 10 सितंबर 2026 की उपलब्धता और मेरिट ऑर्डर, दीर्घकालिक अनुबंधों की दरें, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत क्षेत्र पर कार्यकारी सारांश, जुलाई 2026: राज्यवार चरम और ऊर्जा आपूर्ति स्थिति, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण: केरल की पारेषण संसाधन पर्याप्तता योजना, 2034-35 तक, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण: तेलंगाना की पारेषण संसाधन पर्याप्तता योजना, 2034-35 तक, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण: 31 जुलाई 2026 तक स्थापित क्षमता, दक्षिणी क्षेत्र, राज्यवार आवंटित हिस्से सहित, द हिंदू, 11 सितंबर 2026: मुख्यमंत्री की आपात बैठक, एम.जी. राजामाणिक्कम के बयान, द हिंदू, इडुक्की, 11 सितंबर 2026: स्वैप के तहत रोज़ाना वापसी के स्लॉट और इडुक्की का जलस्तर, द हिंदू, हैदराबाद, 11 सितंबर 2026: तेलंगाना विधानसभा में आईटी मंत्री डी. श्रीधर बाबू का जवाब, द साउथ फ़र्स्ट, 11 सितंबर 2026: सिरपुर विधायक पलवई हरीश बाबू का सवाल और मंत्री का जवाब, द ट्रिब्यून, 28 मई 2026: तेलंगाना के विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) नवीन मित्तल का असोचैम सम्मेलन में बयान, इंक42, जुलाई 2026: बिजली राज्य मंत्री श्रीपद नाइक का संसद में लिखित जवाब, 26.3 गीगावाट का अनुमान, बिज़नेस स्टैंडर्ड, 29 जुलाई 2026: मार्च 2026 का 13.56 गीगावाट वाला पिछला अनुमान, केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग, 8 सितंबर 2026: केएसईआरसी (बहु-वर्षीय दर) विनियम, 2026 का मसौदा, परामर्श के लिए, ऑनमनोरमा, 9 सितंबर 2026: सितंबर में लोड प्रतिबंध, अप्रैल-अगस्त की बिजली ख़रीद पर ख़र्च