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प्रीमियर एनर्जीज़ ने ख़ुद को 10.6 गीगावाट क्षमता वाली देश की सबसे बड़ी सोलर सेल निर्माता बताया, सरकार की सूची में उसकी दर्ज क्षमता तेलंगाना के प्लांट पर 1,358 और 751 मेगावाट है, आंध्र प्रदेश वाला नया प्लांट सूची में है ही नहीं

सोमवार, 21 सितंबर की सुबह 8:14 बजे प्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड ने बीएसई और एनएसई को बताया कि आंध्र प्रदेश के नैडूपेटा में उसका 7 गीगावाट का नया सोलर सेल कारख़ाना चालू हो गया है और ट्रायल रन शुरू हो चुके हैं, जिससे कंपनी की कुल क्षमता 10.6 गीगावाट हो गई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिस सूची के दम पर तय होता है कि किसी कंपनी का सेल सरकारी-समर्थित सोलर परियोजना में लग सकता है या नहीं, उसमें प्रीमियर एनर्जीज़ फ़ोटोवोल्टिक प्राइवेट लिमिटेड की दर्ज क्षमता तेलंगाना के फ़ैब सिटी प्लांट में 1,358 मेगावाट टॉपकॉन और 751 मेगावाट मोनो-पर्क है, नैडूपेटा का नाम उस सूची में कहीं नहीं है।

अमेरिका के ओहायो में पेरिस्बर्ग की एक सोलर फ़ैक्ट्री में मॉड्यूल पैकिंग की लाइन, अगस्त 2017 की तस्वीर; यह प्रीमियर एनर्जीज़ का कारख़ाना नहीं है, पर सोलर विनिर्माण की असेंबली लाइन कुछ ऐसी ही दिखती है
तस्वीर: U.S. Department of Energy, विकिमीडिया कॉमन्स Public domain

सुबह 8:14 की फ़ाइलिंग, एक सूची में नदारद पता

आंध्र प्रदेश के नैडूपेटा में सोमवार सुबह जिस सोलर सेल कारख़ाने के चालू होने की ख़बर आई, उसका एक भी सेल फ़िलहाल किसी सरकारी-समर्थित सोलर परियोजना में नहीं लग सकता। वजह किसी अदालत का आदेश नहीं है। वजह एक सूची है, और उस सूची में इस कारख़ाने का पता ही दर्ज नहीं है।

प्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड (एनएसई पर PREMIERENE, बीएसई पर 544238) ने सोमवार, 21 सितंबर की सुबह 8:14 बजे बीएसई और एनएसई को रेगुलेशन 30 के तहत सूचना दी। कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफ़िसर हितेश कुमार जैन ने यह फ़ाइलिंग डिजिटल हस्ताक्षर से 8:06:56 बजे तैयार की थी, आठ मिनट बाद वह एक्सचेंज के सिस्टम में दर्ज हुई। साथ नत्थी थी हैदराबाद से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति, जिसका शीर्षक ख़ुद कंपनी के शब्दों में है, "Premier Energies Commissions India's Largest Solar Cell Facility, becomes largest Cell manufacturer with 10.6 GW capacity"।

कंपनी का दावा दो हिस्सों में है। पहला, उसने आंध्र प्रदेश के नैडूपेटा में अपना 7 गीगावाट का एन-टाइप टॉपकॉन जी12आर सोलर सेल कारख़ाना चालू कर दिया है। दूसरा, इससे कंपनी की कुल सेल क्षमता 10.6 गीगावाट हो गई है, जो उसके मुताबिक़ उसे देश की सबसे बड़ी सेल निर्माता बनाती है। दोनों दावे सही हो सकते हैं। लेकिन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की जिस सूची के आधार पर तय होता है कि किस कंपनी का कौन-सा सेल सरकारी मदद वाली सोलर परियोजना में लग सकता है, उसमें प्रीमियर एनर्जीज़ के नाम दर्ज क्षमता तेलंगाना के एक अलग प्लांट की है, आंध्र प्रदेश की नहीं। यह फ़र्क़ ही इस ख़बर की जड़ है।

यह किसी घोटाले की कहानी नहीं है। कंपनी ने जो कहा वह विज्ञप्ति में लिखा है। सरकार की सूची में जो दर्ज है वह भी सार्वजनिक दस्तावेज़ है। दोनों को साथ पढ़ने पर एक ऐसा फ़ासला दिखता है जो किसी एक बयान से समझ नहीं आता।

दस्तावेज़ के अपने शब्द, चालू और ट्रायल रन शुरू

प्रेस विज्ञप्ति के पहले पैराग्राफ़ में क्रिया पर ध्यान देना ज़रूरी है। मूल अंग्रेज़ी वाक्य है, "has commissioned its 7 GW N-type TOPCon G12R solar cell manufacturing facility at Naidupeta, Andhra Pradesh and starts trial runs, taking the company's total solar cell capacity to 10.6 GW"। यानी प्लांट चालू हुआ है, लेकिन उसके साथ ही ट्रायल रन शुरू हुए हैं, वाणिज्यिक उत्पादन नहीं। दोनों बातें एक ही वाक्य में हैं, और दोनों अलग हैं।

विज्ञप्ति के मुताबिक़ यह प्लांट 101 एकड़ में फैला है और 3,293 करोड़ रुपये की लागत से बना है। हर घंटे क़रीब 88,000 सेल बनाने के लिए इसे डिज़ाइन किया गया है। दक्षता का आँकड़ा भी शर्त के साथ है: "Following stabilisation and ramp-up, the facility is targeting average solar cell efficiency of approximately 25.8%"। यानी 25.8 फ़ीसदी दक्षता का लक्ष्य स्थिरीकरण के बाद का है, अभी का दावा नहीं।

प्रबंध निदेशक चिरंजीव सलूजा ने अपने बयान में कहा, "Commissioning India's largest solar cell manufacturing facility on time and within budget is an important execution milestone for Premier Energies." निदेशक और मुख्य रणनीति अधिकारी सुधीर रेड्डी ने जोड़ा कि नैडूपेटा प्लांट कंपनी के "integrated manufacturing roadmap" का बड़ा क़दम है। कंपनी के परिचय वाले हिस्से में एक और आँकड़ा है: अगले तीन साल में 12,500 करोड़ रुपये के पूँजीगत ख़र्च की योजना, जिसमें इनगट और वेफ़र तक पीछे जाना और इनवर्टर, ट्रांसफ़ॉर्मर व बैटरी भंडारण में उतरना शामिल है। यह कंपनी का अपना दावा है, सरकारी पुष्टि नहीं।

न्यूज़ीलैंड के माउंट कुक इलाक़े में टेकापो-ए बिजलीघर का स्विचयार्ड और पावर ट्रांसफ़ॉर्मर, जून 2024 की तस्वीर; यह प्रीमियर एनर्जीज़ की नहीं है, पर कंपनी ख़ुद ट्रांसफ़ॉर्मर बनाने में उतरने का दावा करती है
तस्वीर: David Palmer, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

फ़ाइलिंग में कहीं भी एएलएमएम शब्द नहीं है। सूची में दर्ज होने या न होने की कोई बात कंपनी की विज्ञप्ति में नहीं है। यह चुप्पी अपने आप में कोई ग़लती नहीं, नियम भी ऐसा नहीं माँगता। लेकिन जो सूची इस सेल के इस्तेमाल की सीमा तय करती है, उसे पढ़े बिना विज्ञप्ति अधूरी तस्वीर देती है।

सरकार की सूची में दर्ज तीन अलग नाम

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय हर सोलर सेल बनाने वाली फ़ैक्ट्री और मॉडल की एक सूची रखता है, जिसे एएलएमएम (Approved List of Models and Manufacturers) सूची-दो कहा जाता है। इस सूची में जो नहीं है, उसका सेल कोई भी सरकारी-समर्थित सोलर परियोजना इस्तेमाल नहीं कर सकती। सूची का नौवाँ संशोधन 21 अगस्त 2026 को जारी हुआ।

कर्नाटक के कोल्लेगल के पास माधुवनहल्ली में सोलर पैनलों की पंक्तियाँ खेतों के बीच, नवंबर 2018 की तस्वीर; यह प्रीमियर एनर्जीज़ की परियोजना नहीं है, पर ऐसी ही सरकारी-समर्थित परियोजनाओं के लिए एएलएमएम सूची में दर्ज होना ज़रूरी है
तस्वीर: Prashanthns, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

यह संशोधन दो हिस्सों में बँटा है। पहला हिस्सा पहले से दर्ज फ़ैक्ट्रियों में बदलाव का है। दूसरा हिस्सा नई फ़ैक्ट्रियाँ जोड़ने का। प्रीमियर एनर्जीज़ का नाम पहले हिस्से में है, दूसरे में नहीं। यह कोई नई एंट्री नहीं थी, एक पहले से दर्ज एंट्री का अपडेट था।

उस हिस्से की तीसरी पंक्ति में दर्ज है: एम/एस प्रीमियर एनर्जीज़ फ़ोटोवोल्टिक प्राइवेट लिमिटेड। पता है फ़ैब सिटी, रविर्याल, महेश्वरम, रंगा रेड्डी ज़िला, तेलंगाना। दर्ज क्षमता 1,358 मेगावाट सालाना। तकनीक बाइफ़ेशियल एन-टाइप टॉपकॉन सेल, मॉडल कोड G12R।

उसी पंक्ति के नीचे एक फ़ुटनोट है। यही फ़ुटनोट इस ख़बर की जड़ है: "This capacity (TOPCon) is in addition to the Mono-PERC Capacity (751) of M/s Premier Energies which was previously mentioned in ALMM List II dated 31.07.2025"। मतलब सीधा है: इसी कंपनी की, इसी तेलंगाना पते की 751 मेगावाट मोनो-पर्क क्षमता पहले से सूची में है, उस मूल सूची से जो 31 जुलाई 2025 को जारी हुई थी। दोनों जोड़ें तो प्रीमियर एनर्जीज़ फ़ोटोवोल्टिक प्राइवेट लिमिटेड के नाम तेलंगाना में कुल 2,109 मेगावाट दर्ज है।

एक तीसरा नाम भी वहीं मिलता है, उसी मूल सूची में, उसी पते पर। एम/एस प्रीमियर एनर्जीज़ फ़ोटोवोल्टिक प्राइवेट लिमिटेड की 751 मेगावाट वाली पंक्ति के ठीक नीचे एम/एस प्रीमियर एनर्जीज़ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड दर्ज है। वही प्लॉट नंबर। वही सर्वे नंबर। वही फ़ैब सिटी, रविर्याल पता। क्षमता 1,174 मेगावाट, तकनीक वही मोनो सी-सी पर्क। सूची यह नहीं बताती कि दोनों कंपनियों का आपस में क्या रिश्ता है, न ही यह कि सोमवार को फ़ाइलिंग करने वाली प्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड इनमें से किसी की सीधी मालिक है। तीनों नाम जोड़ें तो प्रीमियर एनर्जीज़ नाम वाली कंपनियों की तेलंगाना के इसी एक पते पर कुल दर्ज क्षमता 3,283 मेगावाट बैठती है।

और नैडूपेटा? आंध्र प्रदेश के इस नए प्लांट का नाम सूची के किसी भी संशोधन में नहीं है। हो भी नहीं सकता था। सोमवार की फ़ाइलिंग ख़ुद कहती है कि प्लांट अभी चालू हुआ है। सूची का नौवाँ संशोधन तो एक महीने पहले, 21 अगस्त को ही जारी हो चुका था। मंत्रालय की वेबसाइट पर सोमवार शाम तक भी दसवाँ संशोधन नहीं चढ़ा था। नैडूपेटा अब भी सूची से बाहर है।

नौवें संशोधन में एक और ब्योरा है। इसी 1,358 मेगावाट के लिए दक्षता की सीमा पहले 24 से 26 फ़ीसदी दर्ज थी। संशोधन के बाद यह 22.50 से 26 फ़ीसदी हो गई। वाट क्षमता की सीमा भी 9.18-9.95 से बदलकर 8.61-9.95 हो गई। सूची सिर्फ़ नई फ़ैक्ट्री जोड़ने का काम नहीं करती। पहले से दर्ज फ़ैक्ट्रियों के ब्योरे भी लगातार अपडेट होते रहते हैं।

नेमप्लेट क्षमता और सूची-दर्ज क्षमता का फ़र्क़

सोलर मैन्युफ़ैक्चरिंग में चार पड़ाव हैं: इनगट, वेफ़र, सेल, मॉड्यूल। रेत जैसी सिलिकॉन को पिघलाकर एक बेलननुमा इनगट बनता है। इनगट को बारीक़ काटने पर वेफ़र मिलता है, काग़ज़ जितनी पतली परत। वेफ़र पर रासायनिक प्रक्रिया से सेल बनता है, वही हिस्सा जो धूप को बिजली में बदलता है। कई सेल जोड़कर मॉड्यूल बनता है, वही पट्टी जो छत पर लगती है। भारत में ज़्यादातर सोलर मैन्युफ़ैक्चरिंग अब तक मॉड्यूल तक सीमित रही है, यानी बाहर से सेल मँगाकर जोड़ने का काम। सेल बनाना कहीं ज़्यादा मुश्किल पड़ाव है, वेफ़र और इनगट उससे भी मुश्किल।

अमेरिका के ओरेगन में सोलरवर्ल्ड की फ़ैक्ट्री में एक सिलिकॉन वेफ़र पर रौशनी डालकर जाँच, फ़रवरी 2009 की तस्वीर; यह इनगट और सेल के बीच वाली वही कड़ी दिखाती है जिसका ज़िक़्र ऊपर है
तस्वीर: Oregon Department of Transportation, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.0

यह पूरा प्रसंग उस साल में हो रहा है जब देश की सोलर बिजली क्षमता तेज़ी से बढ़ी है। अध्यक्ष के सोमवार वाले भाषण के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2026 में 44.6 गीगावाट सोलर क्षमता जुड़ी, और मार्च 2026 तक कुल स्थापित सोलर क्षमता 150.3 गीगावाट हो गई। यह बिजली बनाने की क्षमता है, सेल बनाने की नहीं। पर मांग की तस्वीर यहीं से बनती है, और उसी मांग के दम पर कंपनियाँ पीछे की तरफ़, सेल और वेफ़र की तरफ़, बढ़ने का दावा करती हैं।

नेमप्लेट क्षमता और एएलएमएम-दर्ज क्षमता, ये दो अलग नाप हैं। नेमप्लेट क्षमता वह है जो कारख़ाना डिज़ाइन के हिसाब से बना सकता है, चाहे वह अभी ट्रायल रन में ही क्यों न हो। एएलएमएम-दर्ज क्षमता वह है जिसका मंत्रालय ने निरीक्षण कर लिया है, जिस मॉडल और जिस दक्षता सीमा को मंत्रालय ने परखा और सूची में चढ़ाया है। कंपनी का 10.6 गीगावाट पहली तरह का आँकड़ा है। मंत्रालय के 1,358 और 751 मेगावाट दूसरी तरह के हैं। एक ग़लत नहीं है, न दूसरा। दोनों अलग सवालों के जवाब हैं।

फ़र्क़ कितना बड़ा है, यह देखने का एक तरीक़ा है कंपनी के अपने आँकड़ों से हिसाब लगाना। विज्ञप्ति कहती है कि 7 गीगावाट जोड़ने के बाद कुल क्षमता 10.6 गीगावाट हुई। घटाएँ तो नैडूपेटा से पहले क्षमता क़रीब 3.6 गीगावाट बैठती है। प्रीमियर एनर्जीज़ नाम से एएलएमएम में तेलंगाना में दर्ज कुल क्षमता 3,283 मेगावाट है, यानी 3.283 गीगावाट। दोनों आँकड़े पास हैं, बराबर नहीं। क़रीब 317 मेगावाट का फ़ासला बचता है। इसे किसी दस्तावेज़ ने नहीं समझाया। यह घटाव न कंपनी का दावा है, न मंत्रालय का। दोनों दस्तावेज़ों की संख्याओं से निकाला गया एक हिसाब भर है, कुछ और नहीं। अगर सिर्फ़ फ़ोटोवोल्टिक प्राइवेट लिमिटेड के नाम वाली 2,109 मेगावाट गिनें, इंटरनेशनल वाली अलग रखकर, तो फ़ासला और बड़ा हो जाता है, क़रीब 1.5 गीगावाट का।

सूची लागू होने से पहले ही छूट की कतार

एएलएमएम की शुरुआत 2 जनवरी 2019 के एक आदेश से हुई, जब मंत्रालय ने दो सूचियाँ बनाने का फ़ैसला किया: सूची-एक मॉड्यूल के लिए, सूची-दो सेल के लिए। सूची-एक पहली बार 10 मार्च 2021 को जारी हुई, यानी मॉड्यूल के लिए नियम छह साल पुराना है। सेल के लिए पहली सूची कहीं देर से आई, 31 जुलाई 2025 को, ठीक चार साल बाद।

पहली सूची जारी होने के बाद से सूची-दो नौ बार संशोधित हो चुकी है: 23 सितंबर और 24 नवंबर और 15 दिसंबर 2025, फिर 2026 में 5 फ़रवरी, 13 फ़रवरी, 13 अप्रैल, 30 अप्रैल, 22 जुलाई और 21 अगस्त। औसतन हर डेढ़ महीने में एक संशोधन। सूची-दो का पालन सरकारी-समर्थित परियोजनाओं के लिए 1 जून 2026 से ज़रूरी होना था।

मंत्रालय की अपनी वेबसाइट पर उस एक तारीख़ के इर्द-गिर्द कम-से-कम छह अलग सूचनाएँ दर्ज हैं। 25 मई 2026 का एक आदेश कहता है कि 1 जून के बाद कोई सामान्य छूट नहीं मिलेगी। उसी आदेश पर दो अलग स्पष्टीकरण चढ़े। राज्यों के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनी। समय बढ़ाने के अनुरोध लेने का एक पोर्टल-आधारित तरीक़ा जारी हुआ। सरकारी इमारतों की रूफ़टॉप परियोजनाओं के लिए एक अलग स्पष्टीकरण आया। एक नोटिस नेट-मीटरिंग और ओपन एक्सेस परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2026 तक की खिड़की भी देता है।

एक नियम जिसे लागू होने से पहले छह बार समझाना पड़े, वह सिर्फ़ काग़ज़ी सतर्कता नहीं है। वह बताता है कि जितना सेल घरेलू बाज़ार को चाहिए था, उतना बनाने वाला कोई तैयार नहीं मिला। प्रीमियर एनर्जीज़ का नैडूपेटा प्लांट ठीक इसी अंतर को भरने के दावे के साथ आया है। भले अभी सूची में दर्ज न हो।

अध्यक्ष के सोमवार वाले भाषण में यह मोहलतों वाली कड़ी अप्रत्यक्ष रूप से मौजूद है। भाषण के अपने शब्दों में, "Measures such as ALMM and domestic content requirements now emphasise deeper local value addition and use of advanced technologies." आगे जोड़ा गया, "That is precisely the vision we have spent more than three decades building Premier Energies towards." कंपनी ख़ुद एएलएमएम को अपनी रणनीति की वजह बताती है, उसी दिन जब उसका नया प्लांट उसी सूची से बाहर है।

ट्रायल रन का मतलब और अध्यक्ष के भाषण में चुप्पी

ट्रायल रन और वाणिज्यिक उत्पादन एक चीज़ नहीं हैं। ट्रायल रन में मशीनें चलाई जाती हैं, पैरामीटर मिलाए जाते हैं, ख़राबी पकड़ी जाती है। वाणिज्यिक उत्पादन तब शुरू माना जाता है जब कारख़ाना लगातार, तय गुणवत्ता के साथ, बेचने लायक़ माल बनाने लगे। विज्ञप्ति ख़ुद यह भेद बनाए रखती है: प्लांट "commissioned" है, लेकिन "starts trial runs" भी उसी वाक्य में है।

सोमवार को ही एक और मौक़ा था। कंपनी की 31वीं वार्षिक आम बैठक उसी दिन हुई, जहाँ नैडूपेटा पर कुछ और बताया जा सकता था। बैठक की कार्यवाही और अध्यक्ष का भाषण, दोनों शाम को अलग-अलग फ़ाइलिंग से एक्सचेंजों में दर्ज हुए, पहला 3:40 बजे, दूसरा 3:49 बजे। अध्यक्ष के भाषण में नैडूपेटा का ज़िक़्र है, पर सुबह वाले सेल कारख़ाने के तौर पर नहीं। भाषण में लिखा है, "At Naidupeta, we are developing 10 GW ingot and wafer capacity making us one of the largest, fully integrated solar module manufacturers in the world outside China." यह इनगट-वेफ़र की बात है, सेल की नहीं। "developing" है, "commissioned" नहीं।

यानी एक ही दिन, एक ही कंपनी के दो अलग दस्तावेज़ों में, नैडूपेटा दो अलग रूपों में दिखा। सुबह की फ़ाइलिंग में वह जगह है जहाँ 7 गीगावाट का सेल कारख़ाना चालू हो गया। शाम के भाषण में वह जगह है जहाँ 10 गीगावाट की इनगट-वेफ़र क्षमता अभी बन रही है। दोनों बातें एक-दूसरे को ग़लत नहीं ठहरातीं, अलग-अलग परियोजनाओं की हो सकती हैं। पर भाषण में सुबह के कारख़ाने का सीधा ज़िक़्र न होना दर्ज करने लायक़ है।

प्रति वाट लागत का हिसाब, और वित्त वर्ष के नतीजे

3,293 करोड़ रुपये को 7,000 मेगावाट से भाग दें तो क़रीब 47 लाख रुपये प्रति मेगावाट बैठता है, यानी लगभग 4.70 रुपये प्रति वाट। यह सिर्फ़ एक कारख़ाने की लागत है, पूरी कंपनी की नहीं। विज्ञप्ति में एक बड़ा आँकड़ा अलग से है: अगले तीन साल में 12,500 करोड़ रुपये के पूँजीगत ख़र्च की योजना, जिसमें इनगट-वेफ़र तक पीछे जाना और इनवर्टर, ट्रांसफ़ॉर्मर, बैटरी भंडारण में उतरना शामिल है। यह योजना कितने गीगावाट जोड़ेगी, विज्ञप्ति नहीं बताती।

अध्यक्ष के सोमवार शाम वाले भाषण में वित्त वर्ष 2026 के नतीजे भी हैं, जो सुबह के एलान के साथ किसी ख़बर में नहीं आए। कंपनी का परिचालन राजस्व 20.7 फ़ीसदी बढ़कर 7,824 करोड़ रुपये हुआ। परिचालन मुनाफ़ा, एबिट्डा, 35 फ़ीसदी बढ़कर 2,579 करोड़ रुपये रहा। कर के बाद मुनाफ़ा 61 फ़ीसदी बढ़कर 1,510 करोड़ रुपये हुआ। पूँजी पर प्रतिफल 33.5 फ़ीसदी दर्ज है, इक्विटी पर प्रतिफल 42 फ़ीसदी। बोर्ड ने दो किस्तों में कुल 1 रुपया प्रति शेयर लाभांश देने का एलान किया।

ये आँकड़े एएलएमएम के सवाल का जवाब नहीं देते। पर इतना दिखाते हैं कि जिस साल कंपनी ने सेल क्षमता बढ़ाई, उसी साल मुनाफ़ा भी बढ़ा। भाषण के अपने शब्दों में, "Growing cell and module capacities converted into direct financial outcomes." यह कंपनी का दावा है, स्वतंत्र पुष्टि नहीं। सुबह का दावा और शाम के ये नतीजे एक ही कंपनी की, एक ही सोमवार की फ़ाइलिंग हैं, बस अलग-अलग घंटों में दर्ज।

आगे वेफ़र की बारी, अनुत्तरित सवाल बाक़ी

कंपनी अगर वेफ़र और इनगट तक पीछे जाना चाहती है, तो उसकी वजह भी दस्तावेज़ों में है। मंत्रालय ने वेफ़र के लिए भी एएलएमएम जैसी शर्त पर मसौदा मंगाया था, 12 सितंबर 2025 को, और 17 मार्च 2026 को उसमें संशोधन का नोटिस चढ़ाया। यानी जिस पायदान पर कंपनी ख़ुद बढ़ना चाहती है, मंत्रालय उसी पायदान पर अगली शर्त बाँधने की तैयारी में है। दोनों की दिशा एक है, समय अलग-अलग है।

कुछ सवाल इस दस्तावेज़ी पड़ताल से हल नहीं हुए। देश की कुल सेल-विनिर्माण क्षमता कितनी है, यह एएलएमएम की संशोधन-दर-संशोधन सूची से जोड़ना इस दायरे में मुमकिन नहीं था, ग़लत जोड़ का ख़तरा असली था। किसी पीआईबी या मंत्रालय की विज्ञप्ति में सितंबर 2026 का ऐसा कोई राष्ट्रीय आँकड़ा नहीं मिला। प्रीमियर एनर्जीज़ का ऑर्डर बुक, उसका आयात-प्रतिस्थापन में हिस्सा, या "भारत की सबसे बड़ी" वाले दावे की स्वतंत्र पुष्टि, इनमें से कुछ भी किसी सरकारी दस्तावेज़ में नहीं मिला।

जो नहीं मिला, वह इस ख़बर में नहीं है।

स्रोतप्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड, रेफ़. PEL 55/2026-27, एनएसई और बीएसई को रेगुलेशन 30 सूचना, 21 सितंबर 2026, सुबह 8:14 बजे दर्ज, कंपनी सेक्रेटरी हितेश कुमार जैन के डिजिटल हस्ताक्षर से 8:06:56 बजे, नत्थी प्रेस विज्ञप्ति सहित, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, एएलएमएम सूची-दो (सोलर पीवी सेल) का नौवाँ संशोधन, 21 अगस्त 2026, अनुबंध-1: संशोधन की तालिका और मूल सूची की तालिकाएँ दोनों, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, एएलएमएम सूची-एक और सूची-दो का आधिकारिक पन्ना, सभी संशोधनों, आदेशों और स्पष्टीकरणों की सूची सहित, 21 सितंबर 2026 की शाम पढ़ा गया, प्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड, 31वीं वार्षिक आम बैठक की कार्यवाही की सूचना, एनएसई में 21 सितंबर 2026, शाम 3:40 बजे दर्ज, प्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड, 31वीं वार्षिक आम बैठक में अध्यक्ष का भाषण, एनएसई में 21 सितंबर 2026, शाम 3:49 बजे दर्ज, वित्त वर्ष 2026 के नतीजे और नैडूपेटा की इनगट-वेफ़र योजना सहित

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