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आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल की नवजात यूनिट में लगी आग से दो नवजातों की मौत हुई या तीन की, मंगलवार दिन भर दोनों आंकड़े साथ-साथ छपे

सोमवार रात क़रीब 11:50 बजे आदिलाबाद के सरकारी अस्पताल रिम्स की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में एयर कंडीशनर से आग लगी। मंगलवार दोपहर 12:16 बजे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अपने बयान में तादाद दो थी; ठीक 18 मिनट बाद तेलंगाना टुडे ने निज़ामाबाद में तीसरी मौत की ख़बर छापी। शाम तक किसी सरकारी बयान ने तीन की पुष्टि नहीं की, और दोनों आंकड़े साथ-साथ छपते रहे।

तेलंगाना के खम्मम ज़िले के एक सरकारी अस्पताल की बाहरी इमारत, 2017 की तस्वीर; यह आदिलाबाद के रिम्स की नहीं, एक और तेलंगाना सरकारी अस्पताल की तस्वीर है, संदर्भ के लिए
तस्वीर: KISHORE JEPHTHAH, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

आदिलाबाद के सरकारी अस्पताल रिम्स की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में सोमवार, 21 सितंबर की रात क़रीब 11:50 बजे आग लगी। मंगलवार, 22 सितंबर को सुबह से शाम तक अलग-अलग वक़्त पर छपी रिपोर्टों में मरने वाले नवजातों की तादाद दो भी बताई गई और तीन भी। आंकड़ा टिका नहीं। दोनों संख्याएँ दिन भर साथ-साथ छपती रहीं, और शाम तक किसी एक सरकारी बयान ने दूसरे को ग़लत नहीं ठहराया।

रिम्स, यानी राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, आदिलाबाद, 2008 में स्थापित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल है और कालोजी नारायण राव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध है। इसके निदेशक डॉ. आर. जयसिंह हैं।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के अपने बयान में, तेलंगाना टुडे के अनुसार मंगलवार दोपहर 12:16 बजे तक भी तादाद दो ही थी। ठीक 18 मिनट बाद, दोपहर 12:34 बजे, उसी अख़बार ने तीसरी मौत की ख़बर छापी, निज़ामाबाद के एक अस्पताल से। कोई सरकारी बयान तीन तक नहीं पहुँचा।

यह भूल किसी एक रिपोर्टर की नहीं।

सुबह के पहले घंटों में तादाद दो थी, छह अलग स्रोतों में

रिम्स आदिलाबाद की आग की पहली रिपोर्टें मंगलवार सुबह सवा नौ बजे के आसपास आनी शुरू हुईं। न्यूज़मीटर ने सुबह 9:09 बजे लिखा कि दो नवजातों की मौत हुई है; उस वक़्त वॉर्ड में 24 बच्चे थे, जिनमें से 22 की हालत स्थिर बताई गई। यूएनआई इंडिया ने भी क़रीब उसी समय दो मौतें दर्ज कीं। गिनती में कोई फ़र्क़ नहीं था। सुबह 9:18 बजे आई एएनआई की रिपोर्ट में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और बीआरएस नेता के.टी. रामाराव, दोनों के दो नवजातों की मौत पर शोक जताने का ज़िक्र था; उस सुबह दोनों राजनीतिक पक्ष एक ही आंकड़े पर थे। वनइंडिया ने सुबह 9:27 बजे दो मौतों और वॉर्ड से 28 बच्चों के निकाले जाने की ख़बर छापी।

सवा दस बजे के आसपास द साउथ फ़र्स्ट और सियासत ने भी अलग-अलग रिपोर्टों में तादाद दो ही रखी; सियासत के अनुसार 20 से ज़्यादा बच्चे निकाले गए थे। दोपहर 12:20 बजे मेडिकल डायलॉग्स ने भी वही आंकड़ा दोहराया। यानी आग की ख़बर आने के साढ़े बारह घंटे बाद तक हर रिपोर्ट दो मौतों पर टिकी रही।

मुख्यमंत्री का बयान भी इसी तादाद पर था। तेलंगाना टुडे ने दोपहर 12:16 बजे छापा कि रेवंत रेड्डी ने दो नवजातों की मौत पर दुख जताया, अधिकारियों को घटना की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा, बचे हुए बच्चों के इलाज पर लगातार नज़र रखने का निर्देश दिया, और राज्य के सभी अस्पतालों में सुरक्षा कड़ी करने को कहा।

यह तादाद छह अलग-अलग स्रोतों में दर्ज है।

दोपहर बाद तीसरी मौत की ख़बर छपी, तादाद बढ़कर तीन हुई

दोपहर 12:34 बजे तेलंगाना टुडे ने अपनी ही सुबह की रिपोर्ट को अपडेट करते हुए लिखा कि तादाद बढ़कर तीन हो गई है। अख़बार के मुताबिक़ तीसरा नवजात, उम्र 20 दिन, मंगलवार सुबह निज़ामाबाद के सरकारी सामान्य अस्पताल में इलाज के दौरान चल बसा। एक घंटे बाद, दोपहर 1 बजे, डैजीवर्ल्ड ने भी तीन मौतें दर्ज कीं और लिखा कि वॉर्ड में 27 बच्चे इलाज में थे, जिन्हें निजी अस्पतालों में शिफ़्ट किया गया। इनमें से 20 मंगलवार शाम तक भर्ती रहे, चार को हालत स्थिर होने पर घर भेज दिया गया। दोपहर क़रीब पौने दो बजे आर्यन एज ने भी तीन मौतों की ख़बर छापी और एसी में ख़राबी को वजह बताया।

तीन का आंकड़ा किसी मंत्री ने नहीं दिया।

वह ख़बर पत्रकारिता से आई। तेलंगाना टुडे की दोपहर 12:16 बजे वाली रिपोर्ट और उसकी अपनी 12:34 बजे वाली अगली रिपोर्ट के बीच सिर्फ़ 18 मिनट का फ़ासला है, और इस बीच किसी मंत्री या मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपना आंकड़ा नहीं बदला। शाम 6:56 बजे तक, जब विपक्षी बीआरएस अपनी मांग रख रही थी, वह भी तीन नवजातों की मौत की ही बात कर रही थी। यह आंकड़ा अख़बारों की अपनी रिपोर्टिंग से आया। किसी मंत्री या मुख्यमंत्री कार्यालय ने ख़ुद यह तादाद इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक नहीं बताई।

वॉर्ड में उस रात 24 से 30 बच्चे थे, गिनती हर रिपोर्ट में अलग

दो और तीन मौतों के अलावा एक दूसरा हिसाब भी नहीं मिलता, वह है वॉर्ड में उस रात कुल कितने बच्चे थे। न्यूज़मीटर के मुताबिक़ तादाद 24 थी। डैजीवर्ल्ड और पीटीआई, दोनों ने 27 बच्चों के इलाज में होने की बात लिखी। तेलंगाना टुडे की दोपहर वाली रिपोर्ट में यह आंकड़ा क़रीब 30 इन्क्यूबेटरों तक पहुँच गया।

निकाले गए बच्चों की गिनती भी नहीं मिलती। सियासत के अनुसार 20 से ज़्यादा बच्चे निकाले गए, न्यूज़मीटर के अनुसार 22 बच्चों की हालत स्थिर थी, वनइंडिया के अनुसार 28 बच्चे बाहर निकाले गए। एक ही रात के एक ही वॉर्ड के लिए 24 से 30 के बीच चार अलग तादाद छपी हैं, और कोई एक दस्तावेज़ इनमें से किसी को आख़िरी नहीं बताता।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दिशा-निर्देश के मुताबिक़ एक स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट की बुनियादी क्षमता 12 बिस्तर होती है, और जिस अस्पताल में सालाना 3,000 से ज़्यादा प्रसव हों, वहाँ हर 1,000 अतिरिक्त प्रसव पर चार बिस्तर और जोड़े जाते हैं। रिम्स आदिलाबाद के इस वॉर्ड को कितने बिस्तरों की सरकारी मंज़ूरी थी, यह किसी रिपोर्ट में नहीं मिलता। क्षमता का यह सवाल खुला है। इसलिए 24 से 30 के बीच की तादाद वॉर्ड की मंज़ूर क्षमता से ज़्यादा थी या उसी के भीतर, इसका जवाब किसी दस्तावेज़ में नहीं है।

स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट: इन्क्यूबेटर, वॉर्मर और चौबीसों घंटे बिजली पर टिका वॉर्ड

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम की वेबसाइट पर इस यूनिट की परिभाषा दर्ज है: यह ज़िला या मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में प्रसव कक्ष के पास बना वॉर्ड है, जो बीमार नवजातों और 1,800 ग्राम से कम वज़न वाले शिशुओं की चौबीसों घंटे देखभाल करता है। परिभाषा में एक शर्त साफ़ है: यह उन्हीं नवजातों के लिए है जिन्हें कृत्रिम श्वसन यानी मैकेनिकल वेंटिलेशन या बड़ी सर्जरी की ज़रूरत नहीं; ऐसे मामले बड़े अस्पताल के एनआईसीयू या आईसीयू भेजे जाते हैं। यानी जिस वॉर्ड में आग लगी, वहाँ के नवजात वेंटिलेटर पर निर्भर नहीं थे, जैसा शुरुआती ख़बरों में कहीं-कहीं मान लिया गया।

एक अस्पताल में ख़ाली इन्फ़ैंट इनक्यूबेटर; जगह दर्ज नहीं है, यह तस्वीर सांकेतिक है और आदिलाबाद की नहीं
तस्वीर: Ajia4ty, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

निर्भरता दूसरी चीज़ों पर थी, कम गंभीर नहीं। कम वज़न के नवजात इन्क्यूबेटर या रेडिएंट वॉर्मर में तापमान बनाए रखते हैं, कइयों को लगातार ऑक्सीजन और नस में दवा चल रही होती है। नवजात ख़ुद चलकर बाहर नहीं आ सकता। हर बच्चे को उठाकर, उसकी नली और तार सम्भालते हुए निकालना पड़ता है, और यही काम आग लगने के बाद सबसे मुश्किल होता है। तेलंगाना गवर्नमेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपने बयान में इसी जोखिम की तरफ़ इशारा किया कि ऐसे वॉर्डों में बिजली के सिस्टम चौबीसों घंटे चालू रहते हैं, यानी ख़राबी का जोखिम भी चौबीसों घंटे बना रहता है।

धुआँ इसमें अलग से जानलेवा है।

एक छोटे, बंद, वातानुकूलित कमरे में बिजली के जलते पुर्ज़ों से उठने वाला धुआँ ज़हरीली गैसें छोड़ता है, और नवजात के फेफड़े इन्हें झेलने लायक़ नहीं होते। न्यूज़मीटर की रिपोर्ट के अनुसार पाँच बच्चे धुआँ अंदर जाने से गंभीर हालत में पहुँच गए, तीन मंगलवार तक गंभीर बने रहे। एनएचएम की गाइडलाइन हर यूनिट में चार प्रशिक्षित डॉक्टर और 10 से 12 नर्स चौबीसों घंटे रखने की शर्त रखती है, ताकि एक शिफ़्ट में इतने बच्चों को संभालने लायक़ हाथ मौजूद रहें। यह शर्त काग़ज़ पर है। रात क़रीब 11:50 बजे, जब आग लगी, उस शिफ़्ट में कितने डॉक्टर और नर्स ड्यूटी पर थे, यह किसी रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।

यह ढांचा सिर्फ़ कमरे भर का नहीं, तीन हिस्सों का है। एनएचएम के दिशा-निर्देश के अनुसार यूनिट के भीतर मरीज़-देखभाल क्षेत्र के अलावा एक सहायक क्षेत्र और एक स्टेप-डाउन क्षेत्र होने की भी शर्त है, ताकि हालत सुधरने पर बच्चे को तुरंत बगल के कम-निगरानी वाले हिस्से में शिफ़्ट किया जा सके। एनएचएम ने हर राज्य से हर ज़िले में कम-से-कम एक ऐसी यूनिट बनाने को कहा है, और छुट्टी के बाद के फ़ॉलो-अप व टीकाकरण को भी इसी यूनिट के दायरे में रखा गया है। यह गाइडलाइन पुरानी नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसका संशोधित संस्करण, चौदह साल बाद, 14 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय नवजात सप्ताह और सांस अभियान 2025-26 के उद्घाटन के मौक़े पर जारी किया था, यानी आदिलाबाद की आग से क़रीब दस महीने पहले।

आग की वजह बताई तो गई, पुष्टि किसी दस्तावेज़ ने नहीं की

हर रिपोर्ट में आग की वजह एक जैसी बताई गई है: वातानुकूलन यंत्र में शॉर्ट सर्किट, जिसके बाद आग और घना धुआँ वॉर्ड में फैल गया। यह वजह हर जगह शुरुआती जानकारी या संदिग्ध कारण के तौर पर दर्ज है, अंतिम तौर पर नहीं। आदिलाबाद के ज़िलाधिकारी राजर्षि शाह ने बचाव कार्य का जायज़ा लेने के बाद डैजीवर्ल्ड को बताया कि आग की असल वजह विस्तृत जांच के बाद ही तय होगी। मंत्री ने भी वही कहा, अपने शब्दों में। स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने पीटीआई से कहा, "आग की असल वजह और सुरक्षा मानकों में हुई किसी भी चूक का पता पूरी जांच के बाद ही चलेगा।" दोनों बयान एक ही बात कहते हैं: जो वजह हर हेडलाइन में छपी, उसकी अब तक किसी सरकारी दस्तावेज़ ने पुष्टि नहीं की।

आग लगते ही बिजली एहतियातन काट दी गई। अस्पताल के स्टाफ़ और बच्चों के परिजनों ने मिलकर नवजातों को बाहर निकालना शुरू किया; डैजीवर्ल्ड और न्यूज़मीटर, दोनों की रिपोर्टों के अनुसार धुएँ से भरे वॉर्ड तक पहुँचने के लिए काँच के पैनल तोड़े गए। रिम्स के निदेशक डॉ. जयसिंह ने ख़ुद निकासी की निगरानी की। दमकल ने आग पर काबू पाया, और गंभीर हालत वाले बच्चों को निजी अस्पतालों में भेजा गया।

मुंबई फ़ायर ब्रिगेड का डादर फ़ायर स्टेशन, जनवरी 2020 की तस्वीर; यह आदिलाबाद की नहीं, रोज़मर्रा के इस्तेमाल में एक भारतीय फ़ायर स्टेशन की तस्वीर है
तस्वीर: AvaneeshKulkarni04, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

ज़िलाधिकारी राजर्षि शाह और पुलिस रात में ही अस्पताल पहुँच गए थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी अलग जांच शुरू की। स्वास्थ्य मंत्री ने रात में ही वरिष्ठ अधिकारियों से बात की, और मंगलवार को आदिलाबाद के विधायक पायल शंकर के साथ अस्पताल पहुँचकर बचे बच्चों की हालत के बारे में डॉक्टरों से जानकारी ली।

फ़ायर एनओसी किसका काम है, और डॉक्टरों ने इसे आरोग्यश्री के बक़ाए से क्यों जोड़ा

अस्पताल जैसी इमारत के लिए फ़ायर एनओसी अनिवार्य है, और तेलंगाना में यह ज़िम्मेदारी राज्य के अग्निशमन विभाग की है। तेलंगाना फ़ायर सर्विस एक्ट, 1999 के तहत मुख्य अग्निशमन अधिकारी इमारत का निरीक्षण कर एनओसी जारी करते हैं, और यह जांच नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के भाग-4 के मानकों पर होती है: धुआँ और आग पकड़ने वाले संसूचक, स्प्रिंकलर, अलार्म, रोशनी वाले निकास संकेत और आपातकालीन बिजली व्यवस्था।

एक इमारत में लगा फ़ायर अलार्म कंट्रोल पैनल, सैन फ़्रांसिस्को, 2008 की तस्वीर; यह उसी तरह के उपकरण को दिखाती है जिसकी जांच फ़ायर एनओसी में होती है, आदिलाबाद की नहीं
तस्वीर: BrokenSphere, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

इसके अलावा एक दूसरी, स्वैच्छिक परत भी है। नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फ़ॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स यानी एनएबीएच की अपनी सलाह में 24 घंटे स्टाफ़ वाली जगह पर केंद्रीय फ़ायर अलार्म, नियमित जाँचे गए संसूचक, हर मंज़िल के लिए साफ़ निकासी योजना और आपदा की सूरत में जमा होने की तय जगह की शर्तें हैं।

रिम्स आदिलाबाद के पास हादसे के वक़्त वैध फ़ायर एनओसी था या नहीं, यह किसी रिपोर्ट, बयान या दस्तावेज़ में दर्ज नहीं मिला।

तेलंगाना गवर्नमेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इसी सवाल को पैसे से जोड़ा। एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष डॉ. बी. नरहरि, महासचिव डॉ. आर. लालू प्रसाद राठोड और कोषाध्यक्ष डॉ. ए. लक्ष्मी नारायण ने साझा बयान दिया। पैसा वहीं अटका मिला। उनके मुताबिक़ सरकारी अस्पतालों का आरोग्यश्री योजना का 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा बक़ाया पिछले ढाई साल से जारी नहीं हुआ है, और इसी नक़दी संकट ने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव, बायोमेडिकल सर्विसिंग, बिजली व्यवस्था और आग-सुरक्षा अनुपालन को प्रभावित किया। एसोसिएशन ने स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट, एनआईसीयू, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसे वॉर्डों के लिए ढांचागत रखरखाव का पैसा तुरंत जारी करने की मांग रखी, और साथ ही "बिजली और आग-सुरक्षा उपकरणों का ऑडिट" कराने की भी। यह मांग समिति की रिपोर्ट से पहले आई।

तीन जांचें अलग-अलग दिशा में शुरू हुईं, कोई नतीजा अभी नहीं

रिम्स आदिलाबाद की आग को लेकर तीन अलग जांचें एलान हुई हैं, और तीनों अलग-अलग हाथों में हैं। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को घटना की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है; रिपोर्ट किस विभाग को कब तक देनी है, यह किसी रिपोर्ट में दर्ज नहीं मिला। स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने अलग से एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की बात कही, जो आग की वजह, सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर हुई किसी भी चूक, और आगे के लिए ज़रूरी क़दमों की पूरी पड़ताल करेगी। सदस्यों के नाम अब तक नहीं आए। कमेटी कब रिपोर्ट देगी, यह तय नहीं। पुलिस ने अपनी तरफ़ से मामला दर्ज कर अलग जांच शुरू कर दी, जो प्रशासनिक जांचों से अलग, आपराधिक जवाबदेही का रास्ता है। मुख्यमंत्री ने इसके अलावा राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में फ़ायर सेफ़्टी ऑडिट का आदेश भी दिया, जो सिर्फ़ इस एक आग तक सीमित नहीं है।

बीआरएस इन तीन जांचों से संतुष्ट नहीं थी। पार्टी के महासचिव आर.एस. प्रवीण कुमार के हवाले से तेलंगाना टुडे ने शाम 6:56 बजे लिखा कि बीआरएस ने किसी सिटिंग जज से न्यायिक जांच की मांग की और मौतों को "राज्य द्वारा हत्या" बताया। यह पार्टी का आरोप है, किसी अदालत या जांच का निष्कर्ष नहीं। बीआरएस नेता के.टी. रामाराव ने अलग से हर मृत बच्चे के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवज़े की मांग रखी। सरकार की तरफ़ से किसी तयशुदा मुआवज़े का एलान इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक नहीं मिला।

जो अब तक साफ़ नहीं हुआ

तीन में से दो नवजातों की उम्र किसी रिपोर्ट में नहीं है, सिर्फ़ निज़ामाबाद में मरने वाले बच्चे की उम्र 20 दिन दर्ज है। किस बच्चे की मौत कब और कहाँ हुई, इस क्रम पर भी अलग-अलग रिपोर्टें आपस में नहीं मिलतीं, इसलिए वह क्रम यहाँ नहीं दोहराया गया। पुलिस की धाराएँ किसी रिपोर्ट में नहीं हैं। आग लगने और दमकल के पहुँचने के बीच कितना वक़्त लगा, यह भी दर्ज नहीं। दमकल विभाग की वह जांच रिपोर्ट, जो आग की तकनीकी वजह तय करेगी, अब तक सार्वजनिक नहीं हुई। स्वास्थ्य मंत्री की एक्सपर्ट कमेटी और मुख्यमंत्री की मंगाई रिपोर्ट, दोनों की कोई समयसीमा किसी बयान में दर्ज नहीं है। एनएबीएच से जुड़ी मान्यता रिम्स को मिली थी या नहीं, यह भी किसी दस्तावेज़ में नहीं है। मंगलवार शाम के बाद भर्ती बच्चों की हालत पर कोई नई जानकारी नहीं मिली।

इसलिए यह रिपोर्ट मरने वाले नवजातों की तादाद दो और तीन, दोनों दर्ज करती है। कोई एक संख्या आख़िरी नहीं मानी गई है।

स्रोतन्यूज़मीटर, 22 सितंबर 2026, सुबह 9:09 बजे: दो नवजातों की मौत, वॉर्ड में 24 बच्चे, 22 की हालत स्थिर, यूएनआई इंडिया, 22 सितंबर 2026, सुबह क़रीब 9:14 बजे (03:43:52 यूटीसी): दो नवजातों की मौत, एएनआई, 22 सितंबर 2026, सुबह क़रीब 9:18 बजे: मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और बीआरएस नेता के.टी. रामाराव का दो नवजातों की मौत पर शोक, वनइंडिया, 22 सितंबर 2026, सुबह 9:27 बजे: दो नवजातों की मौत, 28 बच्चे निकाले गए, द साउथ फ़र्स्ट, 22 सितंबर 2026, सुबह 10:22 बजे: दो नवजातों की मौत, सियासत, 22 सितंबर 2026, सुबह 10:22 बजे: दो नवजातों की मौत, 20 से ज़्यादा बच्चे निकाले गए, मेडिकल डायलॉग्स, 22 सितंबर 2026, दोपहर 12:20 बजे: दो नवजातों की मौत, तेलंगाना टुडे, 22 सितंबर 2026, दोपहर 12:16 बजे: मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का बयान, दो नवजातों की मौत पर दुख और जांच का आदेश, तेलंगाना टुडे, 22 सितंबर 2026, दोपहर 12:34 बजे: तादाद बढ़कर तीन, तीसरे नवजात की मौत निज़ामाबाद के सरकारी सामान्य अस्पताल में, डैजीवर्ल्ड, 22 सितंबर 2026, दोपहर 1:00 बजे: तीन नवजातों की मौत, वॉर्ड में 27 बच्चे इलाज में, ज़िलाधिकारी और रिम्स निदेशक का ब्योरा, आर्यन एज, 22 सितंबर 2026, दोपहर 1:58 बजे: तीन नवजातों की मौत, एसी में ख़राबी बताई वजह, द प्रिंट (पीटीआई की कॉपी), 22 सितंबर 2026: तीन नवजातों की मौत, स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा का जांच वाला बयान और एक्सपर्ट कमेटी की घोषणा, न्यूज़मीटर, 22 सितंबर 2026: तेलंगाना गवर्नमेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का बयान, आरोग्यश्री बक़ाया और फ़ायर सेफ़्टी ऑडिट की मांग, तेलंगाना टुडे, 22 सितंबर 2026, शाम 6:56 बजे: बीआरएस की न्यायिक जांच की मांग, मौतों को राज्य द्वारा हत्या बताया, तेलंगाना टुडे: बीआरएस नेता के.टी. रामाराव की 25 लाख रुपये मुआवज़े की मांग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट की सरकारी परिभाषा, बिस्तर-मानक और स्टाफ़िंग नियम, तेलंगाना राज्य आपदा प्रतिक्रिया एवं अग्निशमन सेवा विभाग: फ़ायर एनओसी की प्रक्रिया, तेलंगाना फ़ायर सर्विस एक्ट, 1999 (अधिनियम संख्या 15/1999), इंडिया कोड, नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फ़ॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स: न्यूनतम फ़ायर सेफ़्टी उपायों की सलाह, 20 सितंबर 2022, विकिपीडिया: रिम्स आदिलाबाद की स्थापना (2008) और प्रशासनिक ब्योरा, संदर्भ के लिए

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।