भारत पन्ना
देश

नागालैंड में ज़हरीली शराब से उन्नीस मौतें, शराबबंदी पर दो साल की बहस बेनतीजा

शनिवार, 26 सितंबर की दोपहर तक नागालैंड पुलिस के हवाले से मोकोकचुंग ज़िले में आठ और तुएनसांग ज़िले में ग्यारह मौतों की पुष्टि थी। राज्य में शराब रखना, बेचना, पीना और बनाना, 1989 के नागालैंड लिकर टोटल प्रोहिबिशन एक्ट के तहत चारों क़ानूनन अपराध हैं; इसे ढीला करने पर सरकार ख़ुद अगस्त 2024 से बहस में है, पर क़ानून का मूल पाठ आज भी वही है।

मोकोकचुंग शहर, नागालैंड, मई 2019 में ली गई तस्वीर; शनिवार, 26 सितंबर को इसी ज़िले में आठ मौतों की पुष्टि हुई थी
तस्वीर: Rocktim2019, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

नागालैंड में शराब पीना, बेचना, बनाना और रखना, चारों क़ानूनन जुर्म हैं। राज्य 1990 से पूरी तरह "सूखा" है। फिर वहाँ शराब से मौतें क्यों होती हैं?

शनिवार, 26 सितंबर की दोपहर तक का जवाब यही था: मोकोकचुंग ज़िले में आठ मौतें, तुएनसांग ज़िले में ग्यारह। कुल उन्नीस। दोनों जगह शक मिलावटी शराब पर था। समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) ने यह आंकड़ा दोपहर एक बजकर तिरपन मिनट पर जारी किया। द शिलॉन्ग टाइम्स ने उसी दिन दो बजकर अठारह मिनट पर अपनी वेबसाइट पर छापा। दोनों रिपोर्टों में गिनती एक जैसी थी।

पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बुंगलांग चांग की अगुवाई में एक विशेष जांच दल, यानी एसआईटी (SIT), बनाया है। यह दल शराब की सप्लाई चेन का सिरा ढूँढेगा। दोनों ज़िलों में मिलाकर उन्नीस लोग गिरफ़्तार हुए हैं, और क़रीब 3,000 बोतलें ज़ब्त हुई हैं। मृतकों के विसरा और ज़ब्त शराब के नमूने गुवाहाटी की केंद्रीय फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए हैं।

नतीजा शनिवार शाम तक नहीं आया था।

यह इस महीने की दूसरी ऐसी घटना है। ठीक दो हफ़्ते पहले तुएनसांग में नौ मौतों के बाद पुलिस महानिदेशक रूपिन शर्मा ने सात ज़िलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। दोनों घटनाओं की तारीख़ अलग है। गिनती भी अलग है। पुलिस ने दोनों को अलग-अलग दर्ज किया है। जड़ एक ही है: एक क़ानून, जो साढ़े तीन दशक से नागालैंड को शराबबंदी वाला राज्य बनाए हुए है। इसे ढीला करने पर ख़ुद राज्य सरकार दो साल से बहस कर रही है। बहस अब तक बेनतीजा है।

मोकोकचुंग और तुएनसांग: उन्नीस मौतों का पुलिस आंकड़ा

मोकोकचुंग ज़िले की तस्वीर सबसे साफ़ है। वहाँ ज़िला प्रशासन ने शनिवार को ख़ुद मीडिया से बात की। ज़िलाधिकारी अजीत कुमार वर्मा और पुलिस अधीक्षक वेसुप्रा केज़ो ने डीसी के सम्मेलन कक्ष में पत्रकारों को बताया कि मोकोकचुंग में मरने वालों की पुष्टि आठ है। इनमें छह मांगकोलेंबा उपमंडल से हैं, जिनमें दो पुलिसकर्मी शामिल हैं। बाक़ी दो ओंगपांगकोंग उपमंडल के अलीबा गाँव से हैं, जहाँ एक आदिवासी दंपती खेतों में मज़दूरी करता था। पुलिस ने मांगकोलेंबा थाने में मामला दर्ज किया है।

वर्मा ने कहा, "ज़िले में जितना भी स्टॉक उपलब्ध है, या जो लोग प्रतिबंधित शराब बेचने के लिए रखे हुए हैं, उसे क़ानून के प्रावधानों के तहत ज़ब्त और नष्ट करना होगा।" प्रशासन को मौतों की पहली सूचना मांगकोलेंबा से मिली थी। इसके बाद पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर मोकोकचुंग शहर, मांगकोलेंबा, तुली और चांगटोंग्या में छापे मारे। केज़ो ने कहा, "जान जाने की वजह से हमने मामले को बहुत गंभीरता से लिया है।"

ज़ब्त शराब में ज़्यादातर मैकडॉवेल रम की बोतलें थीं। यह आईएमएफ़एल यानी भारत में बनी विदेशी शराब का एक जाना-पहचाना ब्रांड है। केज़ो के मुताबिक़, पुलिस को अब तक ऐसा कोई सुराग़ नहीं मिला जिससे लगे कि मिलावट नागालैंड के भीतर हुई। शुरुआती जांच पड़ोसी राज्य से लाए जाने की तरफ़ इशारा करती है। अलीबा के दंपती ने शराब एक ख़ास विक्रेता से ख़रीदी थी, जो फ़िलहाल फ़रार है। उसके घर से खाली बोतलें बरामद हुई हैं। चार शवों का पोस्टमार्टम हुआ है। मांगकोलेंबा मामले में छह लोग गिरफ़्तार हुए। अलग से, पूरे ज़िले के छापों में उन्नीस और गिरफ़्तार होकर न्यायिक हिरासत में गए, मॉरुंग एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़। यह संख्या राज्यव्यापी आंकड़े में बताई गई कुल उन्नीस गिरफ़्तारियों से मेल नहीं खाती। मोकोकचुंग अकेले उतने या उससे ज़्यादा लोग गिरफ़्तार बता रहा है जितने पूरे राज्य के लिए दर्ज हैं। यह फ़र्क़ किसी बयान में सुलझाया नहीं गया है। इसलिए यहाँ दोनों आंकड़े दर्ज हैं, कोई एक चुनकर नहीं।

शनिवार को ही मोकोकचुंग में एक ज़िला-स्तरीय समन्वय बैठक हुई। इसमें आओ सेंडेन, वात्सू मुंगदांग, आओ कक्षेतशिर मुंगदांग, आबकारी विभाग, पुलिस, ज़िला प्रशासन और ग्राम परिषदों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक ने शराब की बिक्री और उपलब्धता पर "ज़ीरो टॉलरेंस", यानी कोई रियायत नहीं, का प्रस्ताव पारित किया। मांगकोलेंबा इलाक़े से मिली एक अलग जानकारी के मुताबिक़, आधिकारिक आंकड़ा इससे ज़्यादा हो सकता है: लोंगनाक इलाक़े में मिलते-जुलते लक्षणों से 24 और 25 सितंबर को दो ग़ैर-नागा मज़दूरों की मौत की बात कही गई है। यह सरकारी गिनती में शामिल नहीं है। इस लेख में आठ का आंकड़ा ही दर्ज है, क्योंकि वही अधिकारियों की तरफ़ से पुष्टि किया गया आंकड़ा है।

तुएनसांग की तस्वीर उतनी साफ़ नहीं है। वहाँ की ग्यारह मौतों का स्रोत सिर्फ़ राज्यव्यापी पुलिस बयान है, जो कई अख़बारों में लगभग एक जैसे शब्दों में छपा। मोकोकचुंग जैसी कोई अलग, नामी अधिकारी की ब्रीफ़िंग तुएनसांग से शनिवार शाम तक सार्वजनिक रिपोर्टों में नहीं मिली। कितने उपमंडल, कौन-सा गाँव, किस उम्र के लोग: इनमें से कुछ भी दर्ज नहीं है।

1989 का क़ानून: शराब रखना, बेचना, पीना और बनाना, चारों मना है

नागालैंड लिकर टोटल प्रोहिबिशन एक्ट को राज्यपाल की मंज़ूरी 13 अप्रैल 1990 को मिली। यह 24 अप्रैल 1990 के नागालैंड गज़ट में छपा। क़ानून का अपना नाम फिर भी "1989 का एक्ट" है। काग़ज़ों में यह "नागालैंड एक्ट संख्या 4, 1990" कहलाता है। धारा 3 इसकी बुनियाद है: कोई भी व्यक्ति शराब का परिवहन, आयात या क़ब्ज़ा नहीं करेगा; बेचेगा या ख़रीदेगा नहीं; सेवन नहीं करेगा; निर्माण नहीं करेगा; और शराब बनाने के लिए कोई सामग्री, बर्तन या उपकरण नहीं रखेगा। वही धारा नागालैंड को "सूखा राज्य" घोषित करती है।

छूट भी हैं। पर उतनी बड़ी नहीं जितनी रोक। धारा 4 के तहत टॉयलेट, दवा, एंटीसेप्टिक और फ़्लेवरिंग तैयारियाँ छूट में हैं, बशर्ते वे "शराब के काम की न हों" और धारा 33 की सीमा में रहें। धारा 33 किण्वन यानी फर्मेंटेशन से बनी शराब की मात्रा 12 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं होने देती। धारा 8 सिर्फ़ रजिस्टर्ड डॉक्टरों को शराब का पर्चा लिखने देती है। हर पर्चे की एक प्रति एक साल तक सुरक्षित रखनी होती है। धारा 14, 15 और 20 सेहत, दवा-निर्माण, विज्ञान और उद्योग के नाम पर परमिट का रास्ता खोलती हैं, पर हर परमिट राज्य सरकार या उसके अधिकृत अफ़सर की मंज़ूरी से ही मिलता है। धारा 17 सेना और अर्धसैनिक बलों की मेस और कैंटीन में शराब की इजाज़त देती है। धारा 16 विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और उन पर निर्भर परिजनों को विशेष परमिट का प्रावधान करती है।

एक तीसरी छूट कम जानी-मानी है। धारा 84 के तहत सरकार के अपने क़ब्ज़े वाली शराब पर क़ानून लागू नहीं होता। "ज़ू" तथा "रोही" नाम की पारंपरिक चावल की बीयर पर भी नहीं, बशर्ते इनका इस्तेमाल घर के भीतर हो। ज़ू और रोही नागा समुदायों की पुरानी शराबें हैं। क़ानून उन्हें तभी बख़्शता है जब वे बाज़ार में न बिकें और घर की चौखट न लांघें।

लिखित छूट से बड़ी छूट व्यवहार में मिलती है। हर दिसंबर, हॉर्नबिल महोत्सव के दौरान, राज्य सरकार दस दिन के लिए कीसामा हेरिटेज विलेज परिसर में शराब बिक्री की इजाज़त देती है। पर्यटन मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने नवंबर 2024 में यह साफ़ किया कि परमिट सिर्फ़ कीसामा परिसर के भीतर मान्य है। यह इंतज़ाम पिछले साल जैसा ही है, यानी हर साल दोहराया जाता है। यह छूट क़ानून के मूल पाठ में कहीं नहीं लिखी। यह प्रशासनिक परमिट से चलती है। डूसीसीएफ़ नाम के संगठन ने बाद में इसी रियायत की तरफ़ इशारा करते हुए सवाल उठाया कि जब उत्सव में छूट मिल सकती है, तो बाक़ी साल क्यों नहीं।

कीसामा हेरिटेज विलेज का प्रवेश द्वार, दिसंबर 2024 की तस्वीर; हर साल यहीं दस दिन के लिए शराब बिक्री की सरकारी इजाज़त मिलती है
तस्वीर: JyotiPN, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

धारा 44: उल्लंघन पर तीन साल तक की क़ैद

एक्ट की धारा 44 वह प्रावधान है जिसके तहत शराब का आयात, निर्माण, बिक्री, ख़रीद या रखना, सब पर सज़ा तय होती है। अधिकतम सज़ा तीन साल क़ैद और जुर्माना है। अदालत चाहे तो इससे कम नहीं दे सकती, सिवाय ख़ास वजह लिखने के। पहली बार पकड़े जाने पर कम-से-कम छह महीने की क़ैद और 500 रुपये जुर्माना तय है। दूसरी बार नौ महीने और 1,000 रुपये। तीसरी या उसके बाद हर बार कम-से-कम एक साल और 2,000 रुपये। यह न्यूनतम सज़ा है, अधिकतम नहीं।

धारा 43 एक और शर्त जोड़ती है। इस एक्ट के तहत कोई मामला अदालत तभी सुनेगी जब शिकायत ख़ुद प्रोहिबिशन डायरेक्टर या उसके अधिकृत अफ़सर की तरफ़ से आए। कोई आम नागरिक सीधे शिकायत दर्ज नहीं करा सकता। जांच की पूरी रफ़्तार पुलिस और आबकारी विभाग के हाथ में रहती है।

सज़ा की यह सीढ़ी 1990 से नहीं बदली। मोकोकचुंग और तुएनसांग में गिरफ़्तार लोगों पर यही धाराएँ लगेंगी, जब तक जांच किसी और अपराध की तरफ़ न मुड़े। अब तक किसी को मौत का सीधा ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

शराबबंदी ढीली करने पर सरकार ख़ुद अगस्त 2024 से बहस में है

क़ानून बदलने की माँग नई नहीं है। 25 फ़रवरी 2022 को एक सलाहकार बैठक में आबकारी सलाहकार ज़ालेओ रियो ने चर्च संगठनों, नागा होहो और छात्र संगठनों की राय सुनी थी। तब भी दो ही सुर थे: या तो क़ानून को सख़्ती से लागू करो, या पूरी तरह हटा दो। सरकार ने एक समिति बनाकर सुझावों पर विचार करने का भरोसा दिया था।

बात असल में आगे बढ़ी अगस्त 2024 में। 22 अगस्त को कोहिमा में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने क़ानून पर दोबारा विचार करने का फ़ैसला किया। सरकारी प्रवक्ता के.जी. केन्ये ने कहा कि कुछ इलाक़ों में आंशिक छूट की कोशिश होगी। विभाग इसे लागू करने का तरीक़ा तय करेगा। ठीक पाँच दिन बाद, 27 अगस्त को, चौदहवीं नागालैंड विधानसभा के पाँचवें सत्र के पहले दिन, नियम 50-ए के तहत "मिलावटी शराब से सेहत को ख़तरा" विषय पर खुली चर्चा हुई।

कोहिमा में नागालैंड विधानसभा भवन, मई 2023 की तस्वीर; यहीं 27 अगस्त 2024 को शराबबंदी क़ानून पर खुली चर्चा हुई थी
तस्वीर: GeoEvan (www.polgeonow.com), विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 4.0

आबकारी सलाहकार मोआतोशी लोंगकुमेर ने सदन को बताया कि नागालैंड की असम से लगती सरहद 512.10 किलोमीटर लंबी है। पूरे राज्य में तस्करी रोकने के लिए आबकारी विभाग के पास सिर्फ़ 336 कर्मचारी हैं। उन्होंने साप्ताहिक ड्राई-डे, दुकानों के तय घंटे और शराब पीने की क़ानूनी उम्र 21 साल तय करने का सुझाव रखा। उन्होंने भूमिगत शराब कारोबार को राज्य में एचआईवी-एड्स के मामलों से भी जोड़ा। यह उनका अपना आकलन है, किसी अध्ययन का हवाला नहीं। मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने ख़ुद सदन को बताया कि तीन दशक से लागू यह क़ानून कामयाब नहीं रहा है। इसने तस्करों तथा मुनाफ़ाख़ोर सप्लायरों को फ़ायदा पहुँचाया, जबकि आम लोग मिलावटी शराब पीकर बीमार पड़ते और मरते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शराब की बिक्री को रोक-टोक सकती है, पर किसी को पीने से पूरी तरह रोकना उसके बस की बात नहीं।

सदन बँटा रहा। सलाहकार कुडेचो खामो ने कहा कि यह क़ानून नागालैंड की ईसाई पहचान झलकाता है, इसे कमज़ोर नहीं करना चाहिए। सलाहकार डॉ. केखरीलहौली यहोमे ने कहा कि शराब को शैतान बताना नई पीढ़ी के लिए ठीक नहीं। पीना-न-पीना निजी आज़ादी का मामला है, उन्होंने कहा। विधायक पी. लोंगोन ने क़ानून हटाने का विरोध किया। उन्होंने विभाग में और कर्मचारी रखने की माँग की। कुछ विधायकों, जैसे अचुम्बेमो किकोन, ने कहा कि दुनिया में कहीं भी शराबबंदी कामयाब नहीं रही। उनकी माँग थी कि क़ानून की समीक्षा या पूरी वापसी के लिए एक समिति बने।

बहस का कोई क़ानूनी नतीजा अब तक नहीं निकला। मुख्य सचिव की अगुवाई वाली एक सरकारी समिति अब भी अलग-अलग पक्षों से राय ले रही है। दिसंबर 2025 में डिमापुर अर्बन कौंसिल चेयरमैन फ़ेडरेशन, यानी डूसीसीएफ़ (DUCCF), के एक पैनल ने सिर्फ़ डिमापुर ज़िले के लिए क़ानून हटाने की माँग दोहराई। पैनल के संयोजक ज़ासिविखो ज़ाकिएसातो ने दावा किया कि डिमापुर में 2,700 से ज़्यादा तस्कर सक्रिय हैं। क़बायली होहो व स्थानीय पक्षों से 90 फ़ीसदी सलाह-मशविरा पूरा हो चुका है। आख़िरी दौर जनवरी 2026 में होना तय हुआ। उन्होंने हॉर्नबिल महोत्सव की छूट का हवाला देकर चर्चों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया: उत्सव के वक़्त की रियायत पर चर्च कभी नहीं बोलते, उनका कहना था। यह सिलसिला सितंबर 2026 तक किसी विधेयक या संशोधन में नहीं बदला। क़ानून का मूल पाठ आज भी वही है जो 1990 में लागू हुआ, सिवाय एक तकनीकी संशोधन के। 1994 में सिर्फ़ अर्धसैनिक बलों की परिभाषा बदली गई थी, प्रोहिबिशन के किसी हिस्से में नहीं।

मेथेनॉल पुराने मामले में मिला, नए मामले की जांच अधूरी

मेथेनॉल एक ज़हरीली क़िस्म की शराब है। यह सस्ती और ग़ैर-क़ानूनी शराब में मिलावट के लिए अक्सर इस्तेमाल होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़, मेथेनॉल ख़ुद उतनी ज़हरीली नहीं है। शरीर इसे तोड़कर पहले फ़ॉर्मेल्डिहाइड, फिर फ़ॉर्मिक एसिड में बदलता है, और इंसानी शरीर फ़ॉर्मिक एसिड को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता। यही एसिड जमा होकर ख़ून को अम्लीय बना देता है। यह आँखों की नस को नुक़सान पहुँचाकर अंधापन ला सकता है। बड़ी मात्रा में यह साँस रुकने से मौत की वजह बनता है। असर तुरंत नहीं दिखता। लक्षण आने में घंटों लग सकते हैं, और यही देरी मरीज़ को अस्पताल पहुँचने में देर करा देती है। इलाज में शरीर के भीतर मेथेनॉल के टूटने की प्रक्रिया रोकनी होती है, जिसके लिए एथेनॉल या फ़ोमेपिज़ोल नाम की दवा दी जाती है। ख़ून का एसिड बेअसर करने को सोडियम बाइकार्बोनेट दिया जाता है, और गंभीर मामलों में डायलिसिस। फ़ोमेपिज़ोल को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2013 में अपनी ज़रूरी दवाओं की सूची में शामिल किया था।

प्रयोगशाला के काँच के उपकरण, प्रतीकात्मक तस्वीर; यह डिमापुर या गुवाहाटी की फ़ॉरेंसिक लैब की नहीं है, ज़ब्त शराब के नमूनों की जांच ऐसी ही प्रयोगशालाओं में होती है
तस्वीर: Tweenk, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 3.0

दो हफ़्ते पहले की तुएनसांग घटना में डीजीपी रूपिन शर्मा की शुरुआती जांच में जो लक्षण दर्ज हुए थे, वे इसी असर से मेल खाते हैं: धुंधला दिखना, तेज़ सिरदर्द, चक्कर, जी मिचलाना और उल्टी। ज़्यादातर मरीज़ों ने शराब पीने के कुछ समय बाद ही ये लक्षण महसूस किए थे।

यहाँ एक बारीक़ फ़र्क़ है, जो ज़्यादातर रिपोर्टों में गड्डमड्ड हो गया। डिमापुर की फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की 24 सितंबर की रिपोर्ट ने मेथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि की। पर यह रिपोर्ट तुएनसांग की पुरानी, 10-12 सितंबर वाली नौ मौतों के नमूनों की थी, ताज़ा उन्नीस मौतों वाले मामले की नहीं। द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक़, डिमापुर लैब यह भी नहीं बता सकी कि मेथेनॉल कितनी मात्रा में था, क्योंकि मात्रा नापने के उपकरण वहाँ नहीं हैं। सिर्फ़ इतना पता चला कि वह मौजूद है। थोड़ी मात्रा में मेथेनॉल सामान्य शराब में भी क़ानूनन जायज़ मानी जाती है। सिर्फ़ मौजूदगी से मौत की वजह साबित नहीं होती। मात्रा नापने का काम गुवाहाटी की केंद्रीय फ़ॉरेंसिक लैब को करना है, और वह नतीजा अब तक नहीं आया।

मोकोकचुंग और तुएनसांग की ताज़ा उन्नीस मौतों के नमूने भी उसी गुवाहाटी लैब भेजे गए हैं। पर उन पर अलग से कोई मेथेनॉल रिपोर्ट शनिवार शाम तक सामने नहीं आई। जिस मामले पर यह लेख केंद्रित है, उसमें मौत की रासायनिक वजह अब भी पुष्टि की राह देख रही है।

दो हफ़्ते पहले तुएनसांग में नौ मौतें हुई थीं

12 सितंबर को तुएनसांग शहर और चेंडांग सैडल इलाक़े से नौ मौतों की ख़बर आई थी। ज़्यादातर मरीज़ तुएनसांग के ज़िला अस्पताल लाए गए थे। तब शराब का ब्रांड "एमसी रम" बताया गया था। उसी दिन डीजीपी रूपिन शर्मा ने मोन, मोकोकचुंग, तुएनसांग, लोंगलेंग, किफ़िरे, शमटोर और नोकलाक, यानी सात ज़िलों के लोगों से बिना लेबल या पहचान वाली शराब न पीने की अपील करते हुए रेड अलर्ट जारी किया था। मॉरुंग एक्सप्रेस की 15 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़, तब तक स्थानीय स्तर पर सुना गया आंकड़ा नौ से ज़्यादा, ग्यारह तक था। सरकारी गिनती नौ पर ही टिकी रही। उसी रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि पाँच दिन बाद तक भी ज़ब्त शराब के नमूने जांच के लिए भेजे नहीं गए थे।

दोनों घटनाओं को जोड़ें तो सितंबर 2026 में अब तक सरकारी आंकड़ों के हिसाब से कम-से-कम अट्ठाईस मौतें दर्ज हुई हैं। इसके उलट, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ताज़ा रिपोर्ट, "एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2023", नागालैंड के लिए मिलावटी शराब से एक भी मौत या मामला दर्ज नहीं करती। उस साल पूरे देश में ऐसी 456 घटनाओं में 522 मौतें दर्ज हुई थीं, जिनमें झारखंड 194 मौतों के साथ सबसे आगे था, फिर कर्नाटक 79 और बिहार 57 के साथ। नागालैंड की अपनी हालिया सरकारी गिनती में यह आंकड़ा हमेशा शून्य रहा है।

जांच अब भी जारी है। सप्लाई चेन का सिरा अब तक बेनाम है।

स्रोतआईएएनएस, 26 सितंबर 2026, दोपहर 1:53 बजे: मोकोकचुंग में आठ और तुएनसांग में ग्यारह मौतें, एसआईटी गठित, उन्नीस गिरफ़्तार, क़रीब 3,000 बोतलें ज़ब्त, द शिलॉन्ग टाइम्स, 26 सितंबर 2026, दोपहर 2:18 बजे: उन्नीस मौतों की पुष्टि, आईएएनएस कॉपी, नॉर्थईस्ट लाइव टीवी, 26 सितंबर 2026, शाम 5:43 बजे: उन्नीस मौतों को एक अलग, ताज़ा घटना के तौर पर दर्ज करती रिपोर्ट, पुरानी घटना से अलग, द मॉरुंग एक्सप्रेस, 26 सितंबर 2026: मोकोकचुंग की आठ मौतों पर ज़िलाधिकारी अजीत कुमार वर्मा और पुलिस अधीक्षक वेसुप्रा केज़ो की मीडिया ब्रीफ़िंग, ज़ीरो टॉलरेंस प्रस्ताव, द मॉरुंग एक्सप्रेस, 15 सितंबर 2026: तुएनसांग की पुरानी घटना में पाँच दिन बाद तक नमूने जांच के लिए नहीं भेजे गए थे, पीजीयूरस, 26 सितंबर 2026: दो अलग घटनाओं का ब्योरा, अतिरिक्त उपायुक्त मोआकुमज़ुक त्ज़ुदिर का बयान, चेंडांग सैडल का ज़िक्र, द वीक, 26 सितंबर 2026: डिमापुर फ़ॉरेंसिक लैब की मेथेनॉल पुष्टि सिर्फ़ गुणात्मक थी, मात्रा नापने के उपकरण न होने की बात, हबनेटवर्क, 12 सितंबर 2026: पुलिस महानिदेशक रूपिन शर्मा का रेड अलर्ट, सात ज़िलों के नाम, नौ मौतों का शुरुआती आंकड़ा, ब्रांड 'एमसी रम', नागालैंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट: नागालैंड लिकर टोटल प्रोहिबिशन एक्ट, 1989 का पूरा पाठ, संशोधन सहित, नागालैंड सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर), 27 अगस्त 2024: मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के एनएलटीपी एक्ट पर बयान, नागालैंड सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर), 27 अगस्त 2024: विधानसभा में नियम 50-ए के तहत हुई चर्चा का पूरा रिकॉर्ड, नागालैंड ट्रिब्यून, 22 अगस्त 2024: कैबिनेट के फ़ैसले पर प्रवक्ता के.जी. केन्ये का बयान, ईस्टर्न मिरर नागालैंड, 28 अगस्त 2024, सुबह 5:14 बजे: 14वीं विधानसभा के पाँचवें सत्र की चर्चा, आबकारी सलाहकार मोआतोशी लोंगकुमेर के आँकड़े, नागालैंड पोस्ट, 25 फ़रवरी 2022: सलाहकार बैठक में चर्च और नागा होहो के सुझाव, आबकारी सलाहकार ज़ालेओ रियो का बयान, ईस्टर्न मिरर नागालैंड, 3 दिसंबर 2025, शाम 5:58 बजे: डूसीसीएफ़ पैनल की डिमापुर के लिए माँग, संयोजक ज़ासिविखो ज़ाकिएसातो का बयान, ईस्टमोजो, 29 नवंबर 2024: हॉर्नबिल महोत्सव में कीसामा हेरिटेज विलेज तक सीमित शराब बिक्री की इजाज़त, पर्यटन मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग का बयान, विश्व स्वास्थ्य संगठन, जुलाई 2014: 'मेथेनॉल पॉइज़निंग आउटब्रेक्स' सूचना नोट, तंत्र, लक्षण और इलाज, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, गृह मंत्रालय: 'एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2023', तालिका 1.10

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।