विषय
स्वास्थ्य
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देश
नागालैंड में ज़हरीली शराब से उन्नीस मौतें, शराबबंदी पर दो साल की बहस बेनतीजा
शनिवार, 26 सितंबर की दोपहर तक नागालैंड पुलिस के हवाले से मोकोकचुंग ज़िले में आठ और तुएनसांग ज़िले में ग्यारह मौतों की पुष्टि थी। राज्य में शराब रखना, बेचना, पीना और बनाना, 1989 के नागालैंड लिकर टोटल प्रोहिबिशन एक्ट के तहत चारों क़ानूनन अपराध हैं; इसे ढीला करने पर सरकार ख़ुद अगस्त 2024 से बहस में है, पर क़ानून का मूल पाठ आज भी वही है।
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रातभर की हर सौ यात्राओं में अड़तालीस अब तीर्थ और धार्मिक मक़सद से हैं, ग्यारह साल पहले यही मक़सद तीस दिन की खिड़की में गिना जाता था
बुधवार, 23 सितंबर की शाम 4 बजे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण, जुलाई 2025 से जून 2026, का प्रेस नोट जारी किया। रातभर बाहर रहकर लौटने वाली हर सौ यात्राओं में अड़तालीस अब तीर्थ और धार्मिक मक़सद से हैं, हर मापे गए मक़सद में सबसे ज़्यादा। मगर 2014-15 के पिछले सर्वेक्षण में यही मक़सद व्यापार और सामाजिक यात्राओं के साथ तीस दिन की खिड़की में गिना गया था, छुट्टी और स्वास्थ्य वाले साल-भर के समूह में नहीं, इसलिए अड़तालीस फ़ीसदी की तुलना सीधे पुराने आँकड़े से नहीं हो सकती।
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काम की बात
किर्गिज़स्तान के तेरह मेडिकल कॉलेजों का लाइसेंस गया, फ़ैसला वहाँ की सरकार का है, भारत का नहीं: वहाँ पढ़ रहे छात्र अभी क्या करें
किर्गिज़स्तान में तेरह निजी मेडिकल यूनिवर्सिटियों का लाइसेंस सितंबर 2026 से निलंबित है, मगर यह राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की कोई सूची-कार्रवाई नहीं, राष्ट्रपति सद्यर जापारोव के अगस्त 2025 के फ़रमान पर किर्गिज़ स्वास्थ्य मंत्रालय की अपनी राष्ट्रीय मान्यता-जाँच का नतीजा है। भारतीय दूतावास, बिश्केक के दस्तावेज़ों, एनएमसी के अपने नियमों और संसद में सरकार के जवाब से यह लेख वह फ़र्क़ बताता है जिस पर तय होता है कि परिवार को अभी किससे बात करनी है।
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राष्ट्रीय वयोश्री योजना के नौ वित्त-वर्षों में साढ़े आठ लाख बुज़ुर्गों को उपकरण मिले, आबादी के हिसाब से यह आधे फ़ीसदी से भी कम बैठता है
सामाजिक न्याय मंत्रालय की सोमवार, 21 सितंबर की विज्ञप्ति एक साथ तीन योजनाओं के आंकड़े देती है, पर तीनों की अवधि अलग-अलग है: वयोश्री के नौ वित्त-वर्ष, एल्डरलाइन के पांच और देखभालकर्ता प्रशिक्षण के तीन। जनसंख्या अनुमान से जोड़कर देखने पर 8,53,728 का आंकड़ा 2026 की अनुमानित 17.32 करोड़ बुज़ुर्ग आबादी के आधे फ़ीसदी से भी कम बैठता है, जबकि 2011 की जनगणना में दर्ज दिव्यांग बुज़ुर्गों की 53.76 लाख की संख्या के मुक़ाबले यह लगभग सोलह फ़ीसदी है।
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देश
आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल की नवजात यूनिट में लगी आग से दो नवजातों की मौत हुई या तीन की, मंगलवार दिन भर दोनों आंकड़े साथ-साथ छपे
सोमवार रात क़रीब 11:50 बजे आदिलाबाद के सरकारी अस्पताल रिम्स की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में एयर कंडीशनर से आग लगी। मंगलवार दोपहर 12:16 बजे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अपने बयान में तादाद दो थी; ठीक 18 मिनट बाद तेलंगाना टुडे ने निज़ामाबाद में तीसरी मौत की ख़बर छापी। शाम तक किसी सरकारी बयान ने तीन की पुष्टि नहीं की, और दोनों आंकड़े साथ-साथ छपते रहे।
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बायोकॉन के पेब्रिल्ज़ो को सीएचएमपी की सिफ़ारिश 17 सितंबर को मिली, भारतीय एक्सचेंजों को बताया 21 को, यूरोपीय आयोग की मंज़ूरी अभी बाक़ी है
सोमवार सुबह 8 बजकर 25 मिनट 40 सेकंड पर बायोकॉन के कंपनी सचिव ने बीएसई और एनएसई को भेजी चिट्ठी पर दस्तख़त किए: कंपनी का पर्टुज़ुमैब बायोसिमिलर पेब्रिल्ज़ो, बिना तुलनात्मक परीक्षण वाले यूरोप के एक नए रास्ते से सिफ़ारिश पाने वाली दुनिया की पहली दवा बन गया है। रिलीज़ की अपनी आख़िरी पंक्तियाँ कहती हैं कि जब तक यूरोपीय आयोग मंज़ूरी नहीं देता, दवा यूरोपीय संघ में बिकने के लिए अधिकृत नहीं है।
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सीडीएससीओ ने डेंगू टीके को 4 से 60 बरस के लिए मंज़ूरी दी, डब्ल्यूएचओ की सिफ़ारिश 6 से 16 बरस तक सीमित है
भारत के दवा नियामक की विषय विशेषज्ञ समिति ने 19 मार्च 2026 को टाकेडा के डेंगू टेट्रावैलेंट टीके के आयात की संस्तुति 4 से 60 बरस की उम्र के लिए की। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 3 मई 2024 के अपने पोज़ीशन पेपर में इसी टीके की सिफ़ारिश 6 से 16 बरस के बच्चों के लिए की है, और सिर्फ़ तेज़ संक्रमण वाले इलाक़ों में। ये एक ही फ़ैसले के दो रूप नहीं, दो अलग संस्थाओं के दो अलग फ़ैसले हैं।
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नेस्ले के तीन शिशु उत्पादों पर एफ़एसएसएआई के तीन न्यायनिर्णयन मामले, आदेश अभी सार्वजनिक नहीं
शुक्रवार, 18 सितंबर को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने नेस्ले इंडिया के तीन शिशु उत्पादों पर कार्रवाई की जानकारी अपने सोशल मीडिया खातों पर दी। नेस्ले इंडिया ने उसी शाम बीएसई और एनएसई को चिट्ठी भेजकर ख़बर को 'factually incorrect' बताया। दोनों के बीच जो प्रक्रिया है, उसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम का दसवाँ अध्याय न्यायनिर्णयन कहता है, और उसका एक भी काग़ज़ अभी सामने नहीं है।
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पैसा
सिरिंज पर 516 फ़ीसदी का औसत व्यापार मार्जिन एनपीपीए ने 2018 में ख़ुद नापा था, आदेश आठ साल में नहीं आया
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषध प्रशासन ने केंद्र को लिखा है कि 11.05 रुपये में अस्पताल तक पहुँचे एक ड्रिप सेट पर 325 रुपये की एमआरपी छपी है। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने ठीक यही हिसाब सिरिंज और सुइयों पर 1 मार्च 2018 के अपने दफ़्तरी ज्ञापन में छापा था, हितधारकों से राय माँगी थी, और उसके बाद इन तीनों में से किसी पर कोई मूल्य आदेश जारी नहीं किया।
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एनएफ़एचएस-6 ने हीमोग्लोबिन नापा ही नहीं: 131 सूचकांक घटकर 101 रह गए
29 मई 2026 को जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के छठे दौर की 182 पन्नों की फ़ैक्ट शीट में एनीमिया और हीमोग्लोबिन, दोनों शब्द एक बार भी नहीं आते। बायोमार्कर शेड्यूल में ऊँचाई, वज़न, रक्तचाप, रैंडम ब्लड शुगर और उँगली से लिए ख़ून की एचआईवी तथा हेपेटाइटिस जाँच है। ख़ून की कमी उसमें नहीं है। उसी सर्वेक्षण से शिशु मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और पाँच साल से कम उम्र की मृत्यु दर भी ग़ायब हैं।
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देश
नक़ली दवा के आरोप में बेंगलुरु की कृपा हेल्थकेयर पर छापा, मालिक गिरफ़्तार
शनिवार, 12 सितंबर को बेंगलुरु पुलिस की विशेष जाँच टीम और कर्नाटक के औषधि नियंत्रण विभाग ने मिनर्वा सर्कल के पास एक थोक दवा कारोबार के दफ़्तर और गोदाम की तलाशी ली और मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ़्तार किया। जाँच अधिकारियों का कहना है कि कैंसर की दवाएँ, जीवन रक्षक दवाएँ और आईसीयू के इंजेक्शन एमआरपी से क़रीब आधे दाम पर 90 से ज़्यादा अस्पतालों, क्लीनिकों और दवा दुकानों तक पहुँचे। यह संख्या जाँच एजेंसी का आकलन है और नमूने अभी प्रयोगशालाओं में हैं।
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काम की बात
रात दस बजे के बाद शोर की शिकायत में डेसिबल नापने की ज़रूरत नहीं
ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 में चार क्षेत्र हैं और हर क्षेत्र की दिन-रात की अलग सीमा। रात दस से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर पर सीधी रोक है, और साल में पंद्रह रातों की जो छूट राज्य सरकार दे सकती है, उसकी तारीख़ें उसे पहले से घोषित करनी होती हैं। शिकायत किसके पास जाती है, उसमें क्या लिखा होना चाहिए, नाप कौन करता है, और लिखित आदेश आने के बाद पुलिस का अधिकार कैसे बदल जाता है, नीचे उसी क्रम में है।
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देश
एचपीवी टीके की 80 लाख ख़ुराकें लगीं, और एक ख़ुराक वाले कार्यक्रम में यह 80 लाख लड़कियाँ भी हैं
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 सितंबर को राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का आँकड़ा ख़ुराकों में दिया। कार्यक्रम एक ख़ुराक का है और पहले टीका लगवा चुकी लड़कियाँ इससे बाहर हैं, इसलिए ख़ुराक और लड़की एक ही संख्या हैं। साल भर का लक्ष्य 1.15 करोड़ का है।
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सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी लेबल की समयसीमा माँगी, एफ़एसएसएआई के प्रस्ताव पर तेरह सवाल
3 अगस्त को खाद्य नियामक ने अदालत से कहा था कि पैकेट के सामने एक तालिका छाप दी जाएगी। अदालत ने वह प्रस्ताव लौटा दिया। 28 अगस्त को लाल षट्कोण का प्रस्ताव आया, और 10 सितंबर के आदेश में उस पर तेरह सवाल दर्ज हैं।
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देश
हर पायलट की एक बार नशे की जाँच जुलाई 2027 तक होगी, पर जिस नियम से यह होती है उसमें उड़ान से पहले की जाँच अब भी लागू नहीं
फुकेट से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के ए320 के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम चार सेकंड के भीतर बैठ गए और विमान अपनी तय ऊँचाई से 372 फ़ीट ऊपर उठकर 292 फ़ीट नीचे गिरा। एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट कहती है कि कमांडर का नमूना साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए नॉन-नेगेटिव निकला। इसके बाद डीजीसीए ने सभी एयरलाइनों से कहा है कि हर पायलट की एक बार जाँच जुलाई 2027 तक पूरी हो।
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देश
बालाघाट में बच्चों की मौतों के बाद जिस टीकाकरण आँकड़े का हवाला दिया गया, वह 55 बच्चों के नमूने पर टिका है
मध्य प्रदेश के बिरसा विकासखंड में मई से बैगा और गोंड समुदाय के कम से कम 25 बच्चों की मौत दर्ज है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की मध्य प्रदेश रिपोर्ट में बालाघाट की पूरी पंक्ति कोष्ठक में छपी है, यानी वह 25 से 49 अभारित मामलों पर आधारित है। जिस ब्लॉक में मौतें हुईं, उसका अलग आँकड़ा उस सर्वेक्षण में है ही नहीं।
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44.4 करोड़ भारतीय दूसरों के धुएँ में साँस लेते हैं, और जिस जगह यह धुआँ सबसे ज़्यादा है वह क़ानून की परिभाषा से बाहर है
लैंसेट पब्लिक हेल्थ में छपे नए वैश्विक अध्ययन ने 2023 के लिए भारत का आँकड़ा 44.4 करोड़ रखा है। सरकार का अपना सर्वेक्षण कहता है कि सबसे ज़्यादा धुआँ घर के भीतर मिलता है। कोटपा की धारा 3 में 'सार्वजनिक स्थान' की जो सूची है, उसमें घर नहीं आता।
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पैसा
बीमा की नई बिक्री अगस्त में एक-तिहाई बढ़ी, उसी हफ़्ते नियामक ने 2019 की एक जाँच पर एक करोड़ का जुर्माना तय किया
इरडा ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। आदेश सितंबर 2019 की एक जाँच से निकला है और उसके केंद्र में 709.57 करोड़ रुपये का एक ख़र्च मद है। उसी हफ़्ते जीवन बीमा परिषद के आँकड़े आए, जिनमें अगस्त का नया कारोबार प्रीमियम 33.07 फ़ीसदी बढ़ा दिखा। बढ़त जिस महीने पर से नापी गई है, वह महीना ख़ुद 5.2 फ़ीसदी गिरा था।
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पैसा
उपकर के 9,222 करोड़ रुपये तय कोषों में नहीं गए, और तेल उपकर के 2,94,150 करोड़ रुपये संचित निधि में पड़े हैं
कैग की रिपोर्ट संख्या 6 (2026) के पैरा 3.3.1 में चार आरक्षित कोषों का हिसाब है: वित्त वर्ष 2024-25 में उनके नाम पर 82,321 करोड़ रुपये वसूले गए और 73,099 करोड़ रुपये ही उन तक पहुँचे। लोक लेखा समिति ने 8 सितंबर को इसी पैरा पर वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सुना। उसी रिपोर्ट के दूसरे हिस्सों में इसी वित्त वर्ष के कुछ और आँकड़े हैं, जिन्हें पैरा 3.3.1 अपने साथ नहीं जोड़ता।
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सत्य निकेतन में एम्बुलेंस किराने के ऐप से आई, और देश का सरकारी बेड़ा उसी साल 28,830 से घटकर 28,321 रह गया
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जून 2025 तक 28,321 एम्बुलेंस चल रही थीं। इनमें उन्नत जीवन-रक्षक सुविधा वाली सिर्फ़ 3,129 हैं। 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन की रिपोर्ट पुराने वाहन, प्रशिक्षित तकनीशियनों की कमी और असंगत जीपीएस दर्ज करती है। दिल्ली में सरकारी नंबर 102 है, और उस दोपहर सबसे पहले पहुँची गाड़ी उस नंबर की नहीं थी।
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काम की बात
भारत से एमबीबीएस करने वाला सीधे काम शुरू करता है, विदेश से करने वाले को एक और परीक्षा देनी पड़ती है
उस परीक्षा में तीन सौ में से डेढ़ सौ अंक चाहिए। पास होने वालों का अनुपात हर सत्र में आधे से नीचे रहा है और कई सत्रों में उससे भी बहुत नीचे।
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देश
जिस रसायन ने सागर में बारह लोगों को मारा, वह ज़हर अधिनियम की सूची में दर्ज नहीं है
मध्य प्रदेश के बांदा में मरे लोगों के शरीर में मेथनॉल मिला। शराब उत्तर प्रदेश के ललितपुर में बनी थी। बीस लोग नामज़द हुए, दस हिरासत में हैं, और सब स्थानीय हैं।
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लखनऊ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पहले नंबर पर आया, और उसकी हवा राष्ट्रीय मानक से तीन गुना गंदी है
पंद्रहवें स्थान से पहले स्थान पर, और डेढ़ करोड़ का इनाम। सर्वेक्षण के आठ में से ज़्यादातर मानक यह नापते हैं कि शहर ने क्या किया, यह नहीं कि हवा में क्या है।
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एम्स के बोर्ड पर आबादी हर सेकंड बदलती है, और भारत की आख़िरी गिनती 2011 में हुई थी
दिल्ली के एम्स में लगा डिजिटल बोर्ड 4 सितंबर को 1,47,92,39,016 दिखा रहा था। यह संख्या किसी बच्चे के जन्म से नहीं बदलती। यह एक सूत्र से बदलती है, जो पंद्रह साल पुरानी गिनती पर टिका है।
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काम की बात
नशे की लत है और पुलिस का डर भी: क़ानून में एक धारा है जो इलाज कराने पर मुक़दमे से बचाती है
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए कहती है कि जो व्यक्ति ख़ुद इलाज के लिए आगे आता है, उस पर कम मात्रा वाले मामले में मुक़दमा नहीं चलेगा। शर्त एक है, और उसे न जानने पर यह छूट वापस ली जा सकती है।
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गिद्ध लौट रहे हैं, पर सरकारी विज्ञप्ति उस दवा का नाम एक बार भी नहीं लेती
पंचकूला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस मना। पिंजौर के केंद्र ने 2025-26 में 356 गिद्ध रखे और 35 चूज़े पैदा किए। जिस दवा ने भारत के गिद्ध ख़त्म किए, उसका नाम डाइक्लोफ़ेनाक है।
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देश
गृह मंत्री ने जब्ती के आँकड़े गिनाए, पर वज़न अकेले यह नहीं बताता कि नशा घटा या बढ़ा
पणजी में अमित शाह ने कहा कि 2004-14 में 26 लाख किलो नशीला माल जब्त हुआ था और 2014-26 में 1.19 करोड़ किलो। दोनों अवधियाँ बराबर नहीं हैं, और किलो की गिनती अपने आप में एक तरफ़ झुकी होती है।
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दिल्ली की हवा में सबसे बड़ा हिस्सा सड़क की धूल का है, और यही वह वाक्य है जिसका सबसे ज़्यादा दुरुपयोग होता है
सत्रह शहरों के अध्ययनों में सड़क की धूल पीएम10 का 20 से 52 फ़ीसदी है। पर पीएम2.5 में वह 8 से 25 फ़ीसदी ही है, और फेफड़ों में गहरे तक वही जाता है। सीएसआईआर-सीआरआरआई ने शुक्रवार को दिल्ली पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को इसी ढाँचे पर प्रशिक्षण दिया।
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भारत में दिल के वाल्व का मरीज़ पश्चिम के मरीज़ से औसतन तीस साल छोटा होता है, और इलाज की किताब वहीं की है
चेन्नई में शुक्रवार को इंडिया वाल्व रजिस्ट्री शुरू हुई। इसकी ज़रूरत इसलिए है कि जो उपकरण दुनिया में वाल्व का इलाज बदल चुका है, वह कैल्शियम पर टिकता है, और भारत के ज़्यादातर ख़राब वाल्व में कैल्शियम कम और रेशा ज़्यादा होता है।
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देश जिस विज्ञप्ति में परीक्षा 'सफलतापूर्वक संपन्न' लिखा है, उसी में 2,445 की परीक्षा अधूरी रहने की बात है नीट-पीजी 2026 पर जारी सरकारी विज्ञप्ति का शीर्षक सफलता का है। आठ पैराग्राफ़ नीचे लिखा है कि जयपुर के दो केंद्रों पर परीक्षा पूरी नहीं हो सकी, और उसकी वजह परीक्षा कराने वाली एजेंसी बताई गई है।
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देश मलेरिया 80 फ़ीसदी घटा, पर भारत यह लड़ाई 1961 में भी जीत चुका था उस साल देश में सिर्फ़ 49,151 मामले बचे थे। पंद्रह साल बाद आँकड़ा 64 लाख पर था। जो वजहें तब थीं, मंत्रालय की ताज़ा समीक्षा उन्हीं की चेतावनी दे रही है।