सरकार ने 2,306 पेंशन मामले निपटाए, और जो दस मामले उसने ख़ुद गिनाए वे सब फ़ौज के हैं
दो परिवारों को जो रक़म मिली, वह 1 जनवरी 1996 से बकाया थी। एक जवान की माँ को ब्याज सहित 18.57 लाख रुपये और अनुग्रह राशि के 12.60 लाख रुपये अलग से मिले।
श्रीमती अंगूरी देवी एक रक्षा पेंशनभोगी की पत्नी हैं।
उन्हें साधारण पारिवारिक पेंशन मिल रही थी, जबकि मिलनी विशेष पारिवारिक पेंशन थी। दोनों के बीच का अंतर हर महीने जुड़ता रहा।
पिछले महीने उन्हें उस अंतर के 37.40 लाख रुपये मिले।
वह रक़म 1 जनवरी 1996 से बकाया थी।
अभियान क्या था
पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने 7 जुलाई को 'विशेष अभियान 3' शुरू किया था और वह 31 अगस्त को ख़त्म हुआ।
पहले चरण में मंत्रालयों और विभागों ने लंबे समय से अटके 1,062 मामले छाँटे। सीपीईएनजीआरएएमएस पोर्टल पर एक महीने से ज़्यादा से लटकी 2,131 शिकायतें भी इसी में जोड़ ली गईं।
कुल 3,193 मामले हाथ में लिए गए। 40 मंत्रालयों और विभागों ने काम किया।
इनमें से 2,306 निपटे। यानी 72 फ़ीसदी।
विभाग का कहना है कि निपटे मामलों में ज़्यादातर ग्रामीण इलाक़ों के पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी हैं।
पर असली बात सूची में है
विज्ञप्ति के आख़िर में दस मामलों का ब्योरा नाम, तारीख़ और रक़म के साथ दिया गया है।
उन दस को एक साथ पढ़िए।
| किसे मिला | कब से बकाया | रक़म |
|---|---|---|
| जयलक्ष्मी कर्णन, रक्षा पेंशनभोगी की दिव्यांग बेटी | जून 2013 | 16.70 लाख |
| इदान सिंह, रक्षा पेंशनभोगी, विकलांगता पेंशन | 16.09.2016 | 30 लाख |
| कपूर सिंह, रक्षा पेंशनभोगी, युद्ध में लगी चोट का हिस्सा | 01.01.2006 | 26.12 लाख |
| रुक्मणी नायर, रक्षा पेंशनभोगी की पत्नी, दोहरी पारिवारिक पेंशन | 24.09.2012 | 19 लाख |
| सरनजीत कौर, एक जवान की माँ | 28.07.2008 | 18.57 लाख और अनुग्रह राशि 12.60 लाख |
| सुनैना कुमारी, रक्षा पेंशनभोगी की विधवा बेटी | 18.03.2022 | 6.27 लाख |
| सिमरतो, रक्षा पेंशनभोगी की पत्नी, उदार पारिवारिक पेंशन | 01.01.1996 | 10.66 लाख |
| अंगूरी देवी, रक्षा पेंशनभोगी की पत्नी | 01.01.1996 | 37.40 लाख |
| रंजीत सिंह, रक्षा पेंशनभोगी, सेवा पेंशन | अक्टूबर 2004 से दिसंबर 2023 | 25.99 लाख |
| कोरांगा लक्ष्मी, रक्षा पेंशनभोगी की पत्नी | जून 2011 से फ़रवरी 2026 | 30.15 लाख |
दस के दस रक्षा पेंशन से जुड़े हैं।
सात में पाने वाली औरतें हैं। पत्नियाँ, एक माँ, एक विधवा बेटी, एक दिव्यांग बेटी।
हमारी अपनी गणना में इन दस को मिली कुल रक़म क़रीब 2.33 करोड़ रुपये बनती है।

तारीख़ें
1 जनवरी 1996 दो बार आती है।
विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि वही तारीख़ दो बार क्यों है। पर पेंशन के हिसाब में वह तारीख़ जानी-पहचानी है, क्योंकि पाँचवें वेतन आयोग की सिफ़ारिशें उसी दिन से लागू हुई थीं और पेंशन की दरें वहीं से बदली थीं। जिन परिवारों की पेंशन उस बदलाव के बाद दुरुस्त नहीं हुई, उनका बकाया उसी दिन से चलता है। यह हमारा पढ़ना है, विभाग का कहा हुआ नहीं।
उस दिन से इस अभियान तक तीस साल बीते हैं।
एक और मामला अलग तरह का है। रंजीत सिंह की सेवा पेंशन का बकाया अक्टूबर 2004 से दिसंबर 2023 तक का था, और विज्ञप्ति साफ़ लिखती है कि वह बकाया समय-सीमा से बाहर हो चुका था।
यानी नियम कहते थे कि अब यह पैसा नहीं दिया जा सकता। फिर भी दिया गया।
जो विज्ञप्ति नहीं बताती
बाक़ी 887 मामलों का क्या हुआ, यह नहीं लिखा है। विभाग कहता है कि उन पर कार्रवाई चल रही है।
यह भी नहीं बताया गया कि 3,193 में कितने रक्षा पेंशन के थे। जो दस नाम दिए गए वे उदाहरण हैं, कुल आँकड़ा नहीं।
और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन फ़ाइलों को निकालने के लिए दो महीने का विशेष अभियान चलाना पड़ा, वे तीस साल तक पड़ी क्यों रहीं। इसका जवाब किसी दस्तावेज़ में नहीं है।
पेंशनभोगी अपनी शिकायत सीपीईएनजीआरएएमएस पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं। यह कैसे किया जाता है, उसका पूरा तरीक़ा हमने अलग से लिखा है।
स्रोतपेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग, विज्ञप्ति, सीपीईएनजीआरएएमएस, केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण प्रणाली