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हर पायलट की एक बार नशे की जाँच जुलाई 2027 तक होगी, पर जिस नियम से यह होती है उसमें उड़ान से पहले की जाँच अब भी लागू नहीं

फुकेट से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के ए320 के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम चार सेकंड के भीतर बैठ गए और विमान अपनी तय ऊँचाई से 372 फ़ीट ऊपर उठकर 292 फ़ीट नीचे गिरा। एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट कहती है कि कमांडर का नमूना साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए नॉन-नेगेटिव निकला। इसके बाद डीजीसीए ने सभी एयरलाइनों से कहा है कि हर पायलट की एक बार जाँच जुलाई 2027 तक पूरी हो।

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर खड़ा एयर इंडिया का एयरबस ए320; यह तस्वीर मार्च 2011 की है, उस विमान की नहीं जिसकी बात यहाँ है
तस्वीर: Ramesh NG, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 2.0

शौचालय का कमोड अपनी जगह से उखड़ चुका था।

एयरबस ए320 के केबिन में और भी बहुत कुछ टूटा मिला। छत के पैनल पाँचवीं से उन्तीसवीं पंक्ति तक जगह-जगह चटके हुए, बीसवीं पंक्ति में सामान रखने वाले खाने का दरवाज़ा कब्ज़े से उतरा हुआ, आगे के दाहिने आपात दरवाज़े का हैंडल टूटा हुआ। यह 4 अगस्त 2026 का हाल है, फुकेट से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान वीटी-ईएक्सओ का।

विमान सुरक्षित उतरा। दिल्ली में 24 लोगों को चिकित्सा सहायता दी गई, 20 यात्री और चार केबिन क्रू; इनमें चार को गंभीर चोटें आईं।

उतरने के बाद दोनों पायलटों के नमूने लिए गए। विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट, जिसकी फ़ाइल 3 सितंबर को बनी, कहती है कि कमांडर का नमूना साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए "नॉन-नेगेटिव" निकला और पुष्टिकरण जाँच में भी वही नतीजा आया। सह-पायलट के दोनों नमूने नेगेटिव रहे।

इसके पीछे-पीछे नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी भारतीय एयरलाइनों से कहा है कि उनके हर पायलट की नशीले पदार्थों की एक बार जाँच जुलाई 2027 तक पूरी कर ली जाए।

चार सेकंड में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम, और 664 फ़ीट का झटका

एयरबस ए320 के कॉकपिट का ऊपरी पैनल, उड़ान के दौरान ली गई तस्वीर; ग्रीन, ब्लू और येलो, तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम के स्विच इसी पैनल पर होते हैं
तस्वीर: Olivier Cleynen, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

रिपोर्ट में समय सेकंड तक दर्ज है। 04:02:43 यूटीसी पर, एफ़एल 360 पर उड़ते हुए, विमान की उड़ान नियंत्रण प्रणाली ने ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम का दबाव जाता हुआ पकड़ा। 04:02:47 पर ब्लू और येलो भी बैठ गए। अगले सेकंड ऑटोपायलट अपने आप कट गया और लगातार बजने वाली चेतावनी घंटी शुरू हो गई। 04:02:51 पर दो सेकंड के लिए स्टॉल वॉर्निंग बजी। उस वक़्त विमान सह-पायलट उड़ा रहे थे; कमांडर निगरानी पर थे और उन्होंने नियंत्रण अपने हाथ में लिया। विमान पहले तय ऊँचाई से 372 फ़ीट ऊपर उठा, फिर 292 फ़ीट नीचे गिरा। 04:02:52 पर ब्लू वापस आ गया, कुछ सेकंड बाद येलो और ग्रीन भी। सीट बेल्ट का संकेत उस समय बंद था।

जिस पुर्ज़े को सात दिन पहले ख़राब मानकर विमान उड़ाया गया

फुकेट से चलने से पहले रखरखाव कर्मियों की जाँच में एक ही बात दर्ज हुई: विमान 28 जुलाई 2026 को लगाए गए एमईएल आइटम 29-23-01ए के तहत उड़ाया जा रहा था, यानी पावर ट्रांसफ़र यूनिट (पीटीयू) ख़राब मानकर छूट ली गई थी। ए320 के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम, ग्रीन, ब्लू और येलो, मिलकर 3000 पीएसआई पर दबाव देते हैं, हर एक का अपना अलग तेल-भंडार होता है, और एक से दूसरे में तरल नहीं भेजा जा सकता। पीटीयू ग्रीन का भी सहायक स्रोत है और येलो का भी, और वह तब अपने आप चलता है जब दोनों में 500 पीएसआई का फ़र्क़ आ जाए। सात दिन से वह सहायक जोड़ मौजूद नहीं था। हाइड्रोलिक पुर्ज़े विमान से निकालकर जाँच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट कारण नहीं बताती; वह प्रारंभिक है।

दिल्ली में उतरने के बाद क्या-क्या जाँचा गया

विमान 05:30 यूटीसी पर दिल्ली के रनवे 11एल पर उतरा और 05:37 पर अपनी ताक़त से पार्किंग बे तक पहुँचा। एएआईबी की रिपोर्ट के शब्दों में, चूँकि उड़ान भारत के बाहर से आ रही थी, इसलिए डीजीसीए के सीएआर सेक्शन 5, सीरीज़ एफ़, पार्ट III के पैरा 4.2.3 के अनुसार दोनों पायलटों की उड़ान-बाद की ब्रेथ एनालाइज़र जाँच हुई। दोनों की शराब जाँच रिपोर्ट संतोषजनक रही। इसके साथ दोनों की साइकोएक्टिव पदार्थ पहचान किट से जाँच भी की गई। कमांडर का नमूना नॉन-नेगेटिव निकला। फिर दोनों के ख़ून के नमूने पुष्टिकरण जाँच के लिए पैथोलॉजी प्रयोगशाला भेजे गए।

रिपोर्ट जिस नियम का नंबर देती है, और जिसका नहीं

रिपोर्ट ब्रेथ एनालाइज़र जाँच के लिए तो नियम का पैरा नंबर देती है, नशीले पदार्थ वाली जाँच के लिए कोई पैरा नहीं देती। शराब और नशीले पदार्थ भारत में अलग-अलग दस्तावेज़ों से चलते हैं। पार्ट III चालक दल की शराब जाँच का नियम है, जिसका ताज़ा संशोधन 9 फ़रवरी 2026 को आया। नशीले पदार्थों वाला नियम सीएआर सेक्शन 5, सीरीज़ एफ़, पार्ट V है। वह 27 सितंबर 2021 को जारी हुआ, 31 जनवरी 2022 से लागू हुआ, उसकी फ़ाइल संख्या डीजीसीए.15032(02)/2/2020-डीएएस है, और उस पर तत्कालीन महानिदेशक अरुण कुमार के दस्तख़त हैं।

नमूना मूत्र का, पुष्टि ख़ून से

पार्ट V का पैरा 6.1 कहता है कि जाँच मूत्र के नमूनों पर होगी। पैरा 6.6 के मुताबिक़ कम से कम 45 मिलीलीटर मूत्र लिया जाएगा और कर्मचारी के सामने ही दो शीशियों, ए और बी, में बाँटा जाएगा। पैरा 6.9 कहता है कि अगर नमूना ए नॉन-नेगेटिव निकले तो नमूना बी पुष्टिकरण जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। पूरे दस्तावेज़ में "मूत्र" छह बार आता है और "ख़ून" एक बार भी नहीं। एएआईबी की रिपोर्ट कहती है कि इस मामले में पुष्टिकरण के लिए ख़ून के नमूने भेजे गए। इस फ़र्क़ पर डीजीसीए की कोई सार्वजनिक व्याख्या सामने नहीं आई है।

अब तक का नियम: हर साल दस फ़ीसदी की बेतरतीब जाँच

पार्ट V का पैरा 3 बताता है कि नियम किन पर लागू है: व्यावसायिक उड़ान चलाने वाली एयरलाइनें, रखरखाव और मरम्मत संगठन, उड़ान प्रशिक्षण संस्थान, और हवाई नौवहन सेवा प्रदाता। पैरा 4.1 में असली बात है। अनुसूचित एयरलाइनें और हवाई नौवहन सेवा प्रदाता अपने फ़्लाइट क्रू सदस्यों तथा एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलरों की बेतरतीब जाँच अपनी बनाई सुविधाओं में, किसी उपयुक्त प्रयोगशाला की मदद से कराएँगे। शर्त यह है कि साल भर में कम से कम दस फ़ीसदी कर्मचारी इसमें आ जाएँ। यही वह दस फ़ीसदी है जिसका ज़िक्र इन दिनों हर ख़बर में है।

चुनाव कैसे होता है, और किसे निशाना नहीं बनाया जा सकता

नाम कैसे चुने जाएँ, यह भी लिखा है। संगठन को वैज्ञानिक रूप से मान्य तरीक़ा इस्तेमाल करना होगा, जैसे रैंडम नंबर टेबल या कंप्यूटर से बनी बेतरतीब संख्या, और चुनाव पहचान संख्या के आधार पर होगा। हर बार हर कर्मचारी के चुने जाने की संभावना बराबर होनी चाहिए, और किसी ख़ास व्यक्ति या जगह को निशाना नहीं बनाया जा सकता। पैरा 4.3 उन मौक़ों की सूची देता है जब जाँच बेतरतीब नहीं होती: नौकरी पर रखने से पहले, किसी प्रशिक्षु पायलट को उड़ान संस्थान में भर्ती करने से पहले, पुष्ट मामलों की अनुवर्ती जाँच में, और तब जब किसी कर्मचारी ने विदेश में वहाँ के नियामक की जाँच से इनकार किया हो।

जाँच होती कैसे है और क्या-क्या देखा जाता है

बेतरतीब मूत्र जाँच के एक आयोजन में नमूने के डिब्बे बाँटे जा रहे हैं, यह तस्वीर जुलाई 2024 की जर्मनी के स्पांगडालेम स्थित अमेरिकी वायुसेना अड्डे की है; नमूना कर्मचारी के सामने ही लिया और बाँटा जाता है
तस्वीर: U.S. Air Force photo by Airman 1st Class Demi M. Ebert, विकिमीडिया कॉमन्स सार्वजनिक डोमेन

नमूना लेने की जगह के लिए भी शर्तें हैं: अच्छी रोशनी, सफ़ाई, और ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ मिलावट की चीज़ छिपाई जा सके; पानी और साबुन के स्रोत हटाने या बंद करने होंगे। शीशियों के लेबल पर कर्मचारी और नमूना लेने वाले के दस्तख़त नमूना लेने से पहले होते हैं, संगठन के चिकित्सा कर्मचारी के भी। स्क्रीनिंग जाँच नमूना लेने के तुरंत बाद उसी सुविधा में होगी; नमूना बाँटने समेत पूरी स्क्रीनिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य है और रीडिंग कर्मचारी के सामने नोट की जाती है। पुष्टिकरण जाँच के लिए दस्तावेज़ गैस क्रोमैटोग्राफ़ी मास स्पेक्ट्रोमेट्री या लिक्विड क्रोमैटोग्राफ़ी मास स्पेक्ट्रोमेट्री को सर्वोत्तम तरीक़ा बताता है।

छह पदार्थ, जबकि मसौदे में तेरह थे

अंतिम नियम के पैरा 5 में छह चीज़ें हैं: एम्फ़ेटामाइन और एम्फ़ेटामाइन जैसे उत्तेजक, ओपिएट तथा उनके अवशेष, कैनबिस यानी टीएचसी, कोकेन, बार्बिचुरेट्स, और बेंज़ोडायज़ेपीन। फ़रवरी 2020 के मसौदे में तेरह नाम थे। जो नाम अंतिम सूची में अलग से नहीं बचे उनमें मेथाडोन, ऑक्सीकोडोन, फ़ेनसाइक्लिडीन, प्रोपॉक्सीफ़ीन, ब्यूप्रेनोर्फ़ीन और एमडीएमए हैं। मेथाम्फ़ेटामाइन और एमडीएमए एम्फ़ेटामाइन जैसे उत्तेजकों में गिने जाते हैं, पर मेथाडोन तथा ऑक्सीकोडोन जैसे दवा-आधारित ओपिऑइड के लिए सूची अब "ओपिएट तथा उनके अवशेष" पर टिकी है। दिसंबर 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इन्हीं छह पदार्थों की जाँच को चुनौती दिए जाने पर उसे बरक़रार रखा था।

जाँच किस वक़्त हो सकती है, और किस वक़्त नहीं

पैरा 6.3 एक और सीमा खींचता है। जाँच उड़ान के बाद, शिफ़्ट के बाद, या ड्यूटी अवधि के दौरान कभी भी की जा सकती है। और साफ़ शब्दों में: कर्मचारी के छुट्टी पर होने या विश्राम अवधि में होने पर जाँच नहीं की जाएगी। जाँच ड्यूटी से बँधी है, व्यक्ति से नहीं। साल में दस फ़ीसदी की शर्त और ड्यूटी की इस खिड़की को साथ रखिए तो एक पायलट के जीवन में जाँच से टकराने के मौक़े गिनती के बचते हैं।

उड़ान से पहले की जाँच, जो 2021 से यथासमय है

इसके ठीक बाद वाला पैरा 6.4 पूरा इतना ही है: उड़ान से पहले जाँच की शर्त यथासमय लाई जाएगी, और सभी संबंधित संगठनों को उसके लिए क्षमता तथा ढाँचा तैयार करना होगा। दस्तावेज़ 31 जनवरी 2022 से लागू है। साढ़े चार साल बाद भी उड़ान से पहले नशीले पदार्थों की जाँच अधिसूचित नहीं हुई है। शराब के मामले में उलटा है, जहाँ हर उड़ान से पहले चालक दल की ब्रेथ एनालाइज़र जाँच होती है। एक ही कॉकपिट में बैठने से पहले शराब रोज़ नापी जाती है और नशीले पदार्थ का सवाल उड़ान के बाद उठता है, वह भी तब जब नाम बेतरतीब सूची में आ जाए।

पॉज़िटिव आने पर लाइसेंस का क्या होता है

पैरा 8.1 के मुताबिक़ स्क्रीनिंग जाँच नॉन-नेगेटिव आते ही कर्मचारी को सुरक्षा-संवेदनशील ड्यूटी से तुरंत हटा दिया जाता है, पुष्टिकरण रिपोर्ट आने तक। पैरा 8.2 कहता है कि पहली बार पुष्टिकरण जाँच पॉज़िटिव आने पर संगठन उसे नशामुक्ति केंद्र या विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भेजेगा; वह ड्यूटी पर तभी लौटेगा जब दोबारा जाँच में नेगेटिव रिपोर्ट आए और संगठन का मुख्य चिकित्सा अधिकारी फ़िटनेस प्रमाणपत्र दे। कितने दिन के लिए हटाया जाएगा, यह संख्या दस्तावेज़ में कहीं नहीं है। पैरा 8.3 के अनुसार दूसरी बार पॉज़िटिव आने पर लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित होता है और तीसरी बार पर रद्द।

जाँच से इनकार पर 48 घंटे की मोहलत

इनकार का अपना ख़ाना है। पैरा 8.4 कहता है कि जाँच से इनकार करने वाले को सुरक्षा-संवेदनशील ड्यूटी से हटा दिया जाएगा और उसे 48 घंटे के भीतर संगठन की सुविधा में पूरी सूची की जाँच पास करनी होगी। ऐसा न करने पर लाइसेंस एक साल के लिए निलंबित होगा और लौटने से पहले पुनर्वास से गुज़रना होगा। पैरा 8.5 इसे आगे बढ़ाता है: दूसरी बार इनकार, या पहली बार इनकार के बाद जाँच में पॉज़िटिव आना, तीन साल का निलंबन है। हर पॉज़िटिव मामला 24 घंटे के भीतर डीजीसीए मुख्यालय के वायु सुरक्षा निदेशक को बताना अनिवार्य है।

मसौदे की सज़ा और अंतिम नियम की सज़ा

2020 के मसौदे और 2021 के अंतिम नियम को साथ रखने पर सज़ा का ढाँचा बदला हुआ दिखता है। मसौदे के पैरा 7.4 में दूसरी बार पॉज़िटिव आने पर लाइसेंस रद्द होना था। अंतिम नियम में दूसरी बार पर तीन साल का निलंबन है, रद्दीकरण तीसरी बार पर टल गया। इनकार के मामले में मसौदा एक हफ़्ते की मोहलत देता था और उसके बाद तीन साल का निलंबन; अंतिम नियम मोहलत घटाकर 48 घंटे करता है और निलंबन घटाकर एक साल। मसौदे में यह वाक्य भी था कि नमूने केवल जाँच कराने वाले की सहमति से लिए जाएँगे; अंतिम पाठ में वह वाक्य नहीं है।

दुर्घटना के बाद की जाँच, जो अंतिम नियम में नहीं है

मसौदे के पैरा 4.2 में उन मौक़ों की सूची थी जब संगठन को जाँच करानी ही है, और उसका दूसरा बिंदु था: दुर्घटना के बाद। अंतिम नियम के पैरा 4.3 में यह बिंदु नहीं है। उसकी जगह प्रशिक्षु पायलट की भर्ती और विदेशी नियामक की जाँच से इनकार वाले दो नए बिंदु आए। पूरे अंतिम दस्तावेज़ में "पोस्ट-एक्सीडेंट" शब्द एक बार भी नहीं आता। इस मामले में चालक दल की जाँच उतरने पर हुई, पर एएआईबी की रिपोर्ट उसके लिए किसी सीएआर पैरा का हवाला नहीं देती, जबकि शराब जाँच के लिए वह पैरा 4.2.3 का हवाला देती है।

जाँच डीजीसीए के हाथ से निकलकर कंपनियों के पास कैसे गई

सबसे बड़ा बदलाव पैरा 4.1 में है। मसौदे में लिखा था कि डीजीसीए ख़ुद बेतरतीब जाँच कराएगा, अपनी अधिकृत प्रयोगशाला से, पहले चरण में छह हवाई अड्डों पर, यानी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद, और यह जाँच सहायक निदेशक या उससे ऊपर के डीजीसीए अधिकारी की मौजूदगी में होगी; संगठन का चिकित्सा कर्मचारी साथ रह "सकता" है। अंतिम नियम में डीजीसीए अधिकारी का ज़िक्र ग़ायब है। जाँच अब एयरलाइन और हवाई नौवहन सेवा प्रदाता अपनी सुविधाओं में कराते हैं। नियामक की निगरानी में होने वाली जाँच नियोक्ता की अपनी जाँच बन गई।

एक बार की जाँच, जुलाई 2027 तक: यह किस-किस पर लागू है

इंडियन एक्सप्रेस के सुकल्प शर्मा की 10 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ डीजीसीए ने सभी भारतीय एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि हर पायलट की एक बार साइकोएक्टिव पदार्थ जाँच अगले जुलाई तक हो जाए; सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि यह निर्देश अगस्त में ही जारी हो गया था और जाँच शुरू भी हो चुकी है। लेटेस्टली के अनुसार मौजूदा चक्र 31 जुलाई तक चलेगा। पायलटों की कुल संख्या पर आँकड़े अलग-अलग हैं: द फ़ेडरल 12,000 से ज़्यादा बताता है, इंडियन एक्सप्रेस लगभग 14,000। निर्देश पायलटों तक सीमित है; एटीसी अधिकारी, विमान रखरखाव इंजीनियर और केबिन क्रू इसमें नहीं हैं।

एयर इंडिया ने अपने स्तर पर क्या किया

डीजीसीए के निर्देश से पहले एयर इंडिया समूह ने अपने और एयर इंडिया एक्सप्रेस के अनुमानित 5,000 पायलटों की एक बार जाँच ख़ुद शुरू कर दी थी; लेटेस्टली के मुताबिक़ यह 13 अगस्त से चल रही है। 4 सितंबर को कंपनी ने कहा कि सुरक्षा, फ़िटनेस या नियामकीय शर्तों के उल्लंघन पर उसकी शून्य-सहिष्णुता की नीति के अनुरूप संबंधित पायलट की नौकरी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। कंपनी ने यह भी कहा कि सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिज़नेस टुडे ने 25 अगस्त को लिखा था कि इस अभियान में कुछ और पायलटों की प्रारंभिक जाँच नॉन-नेगेटिव आई; डीजीसीए ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

शराब की जाँच का नियम इससे अलग क्यों है

हाथ में पकड़ा जाने वाला एक ब्रेथ एनालाइज़र यंत्र, यह तस्वीर 2012 की जर्मनी की है; ज़मीनी और एटीसी कर्मचारियों की रोज़ की जाँच इसी तरह के यंत्र से होती है
तस्वीर: Fabian Börner, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

शराब दो अलग सीएआर से चलती है। चालक दल के लिए पार्ट III है, जिसका पाँचवाँ संशोधन 9 फ़रवरी 2026 को आया; टीमलीज़ रेगटेक के सारांश के अनुसार वह उड़ान ड्यूटी अवधि के पहले प्रस्थान हवाई अड्डे पर उड़ान से पहले की जाँच, विदेश से आने वाली उड़ानों के लिए भारत में पहले उतरने पर चॉक्स-ऑन के दो घंटे के भीतर जाँच, और हर पॉज़िटिव तथा छूटे मामले की सूचना ईजीसीए पोर्टल पर 24 घंटे में देने की शर्तें रखता है। ज़मीनी और एटीसी कर्मचारियों के लिए पार्ट IV है, 16 सितंबर 2019 का, जिसमें दस फ़ीसदी कर्मचारियों की जाँच रोज़, ड्यूटी पर रिपोर्ट करते समय होनी है; 0.000 से ऊपर कोई भी रीडिंग पॉज़िटिव मानी जाती है और सज़ा की सीढ़ी तीन महीने, एक साल, तीन साल और फिर रद्दीकरण है।

एटीसी और केबिन क्रू इसमें कहाँ हैं

पार्ट V की दस फ़ीसदी वाली बेतरतीब जाँच में फ़्लाइट क्रू सदस्य और एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलर, दोनों हैं। पैरा 4.3 के मौक़ा-आधारित मामलों में विमान रखरखाव इंजीनियर तथा प्रमाणन कर्मचारी, प्रशिक्षु पायलट और प्रशिक्षक जुड़ जाते हैं। पूरे दस्तावेज़ में "केबिन क्रू" शब्द एक बार भी नहीं आता। केबिन क्रू की शराब जाँच होती है, नशीले पदार्थों की जाँच का कोई प्रावधान उन पर लागू नहीं है। पार्ट IV में "सुरक्षा-संवेदनशील कर्मचारी" की परिभाषा में केबिन क्रू का नाम है, पर उसी दस्तावेज़ का लागू-होने वाला पैरा एटीसी, फ़्लाइट डिस्पैचर, रखरखाव, हवाई अड्डा संचालन, अग्निशमन, वाहन चालक और ग्राउंड हैंडलिंग तक सीमित है।

पायलटों की अपनी माँग: 25 फ़ीसदी और लार की जाँच

फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन पायलट्स ने 17 अगस्त को डीजीसीए को दिए प्रतिवेदन में कहा कि सालाना न्यूनतम दायरा दस फ़ीसदी से बढ़ाकर 20 से 25 फ़ीसदी किया जाए, एक ही पायलट का नाम एक से ज़्यादा बार आ सके, और जाँच साल भर अप्रत्याशित ढंग से फैलाई जाए। संगठन ने मूत्र के साथ लार की मान्य जाँच जोड़ने का सुझाव दिया, यह तर्क देते हुए कि मूत्र के नमूने में लगभग 45 मिनट लगते हैं और लार में लगभग 15। देशव्यापी लागू करने से पहले 12 महीने का नियंत्रित परीक्षण चलाने की माँग भी उसने रखी।

एमआरओ की भूमिका, और कोडीन वाली दवा

पैरा 7 में एक सावधानी है जिसकी चर्चा कम होती है। पुष्टिकरण जाँच पॉज़िटिव आने पर संगठन का मुख्य चिकित्सा अधिकारी मेडिकल रिव्यू ऑफ़िसर से सलाह लेगा ताकि तय हो सके कि नतीजा किसी वैध इलाज या किसी और निर्दोष स्रोत से तो नहीं आया। दस्तावेज़ अपना उदाहरण ख़ुद देता है: कोडीन वाली दर्द निवारक दवा से ओपिएट की जाँच पॉज़िटिव आ सकती है। एमआरओ वह डॉक्टर है जो भारत की किसी मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत हो और जिसने मान्यता प्राप्त एमआरओ प्रमाणन पाठ्यक्रम किया हो।

रिकॉर्ड सिर्फ़ एक साल के लिए

पैरा 9 पूरा एक वाक्य है: संगठन साइकोएक्टिव पदार्थ जाँच के रिकॉर्ड एक साल तक सुरक्षित रखेगा। 2020 के मसौदे में इससे आगे की शर्त थी, कि पुष्टिकरण जाँच पॉज़िटिव आने पर नमूना बी का एक हिस्सा अधिकृत प्रयोगशाला में बारह महीने तक रखा जाए; अंतिम नियम में नमूना सुरक्षित रखने की कोई शर्त नहीं है। पैरा 4.5 में स्व-घोषणा को बढ़ावा देने की बात है, ऐसे कर्मचारी पुनर्वास से गुज़रकर ड्यूटी पर लौटेंगे, और डीजीसीए को छह महीने में एक बार ऐसे मामलों की संख्या भेजी जाएगी। दस्तावेज़ संख्या माँगता है, नाम नहीं।

सीएआर का मसौदा इस महीने के आख़िर तक

नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने 10 सितंबर को कहा कि डीजीसीए अभी हितधारकों से बातचीत कर रहा है, "पर उम्मीद है कि इस महीने के ख़त्म होने से पहले हम तय कर पाएँगे कि पायलट जाँच पर नया दिशानिर्देश क्या होगा।" इससे पहले उन्होंने कहा था कि "इस डोप टेस्ट को करने के कई तरीक़े हैं", और मंत्रालय देख रहा है कि क्या सभी व्यावसायिक पायलटों को साल भर फैली बेतरतीब जाँच के दायरे में लाया जाए। उधर एएआईबी की जाँच चल रही है। फ़्रांस के बीईए ने अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया, एयरबस के विशेषज्ञ 13 से 15 अगस्त तक दिल्ली में विमान की जाँच कर गए, और दोनों उड़ान रिकॉर्डरों का डेटा निकल चुका है। रिपोर्ट की अंतरिम सुरक्षा सिफ़ारिश एक वाक्य की है, कि डीजीसीए साइकोएक्टिव पदार्थ के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करे। रिपोर्ट में यह कहीं नहीं लिखा कि कौन सा पदार्थ मिला।

स्रोतविमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी), वीटी-ईएक्सओ पर प्रारंभिक रिपोर्ट, फ़ाइल 3 सितंबर 2026 को बनी, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का निविदा दस्तावेज़, जिसमें डीजीसीए के सीएआर सेक्शन 5, सीरीज़ एफ़, पार्ट IV (16 सितंबर 2019) और पार्ट V (27 सितंबर 2021) का पूरा पाठ संलग्न है, डीजीसीए का मसौदा सीएआर सेक्शन 5, सीरीज़ एफ़, पार्ट V, फ़रवरी 2020, इंडियन एक्सप्रेस, सुकल्प शर्मा की रिपोर्ट, 10 सितंबर 2026, द फ़ेडरल, डीजीसीए के निर्देश पर रिपोर्ट, 10 सितंबर 2026, द पायनियर, नागर विमानन मंत्री का बयान और पायलट संगठन की माँग, लेटेस्टली, मंत्री के 10 सितंबर के बयान सहित, द ट्रिब्यून, फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन पायलट्स के प्रस्ताव पर, द वीक, 4 सितंबर 2026, एयर इंडिया का बयान, बिज़नेस टुडे, 25 अगस्त 2026, टीमलीज़ रेगटेक, सीएआर सेक्शन 5 सीरीज़ एफ़ पार्ट III के रिवीज़न 5 (9 फ़रवरी 2026) का सारांश

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