विषय
मेक इन इंडिया
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पैसा
यूबीफ्लाई को 285 करोड़, बोर्ड के रिकॉर्ड में अब तक की सबसे बड़ी मंज़ूरी
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बुधवार को चेन्नई की यूबीफ्लाई टेक्नोलॉजीज़ को उसकी ई-प्लेन परियोजना के लिए 285 करोड़ रुपये मंज़ूर किए, एक लाख करोड़ रुपये के आरडीआई कोष से। बोर्ड के अपने 2014-15 से दर्ज रिकॉर्ड में किसी एक कंपनी को दी गई यह अब तक की सबसे बड़ी रक़म है, और यही आंकड़ा जुलाई में एक अख़बार की रिपोर्ट में पहले भी सामने आ चुका था।
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देश
रक्षा मंत्रालय ने बीडीएल के साथ 160 सैट-साव के लिए 810.79 करोड़ रुपये का अनुबंध किया, स्वदेशी सामग्री 60 फ़ीसदी रखी गई जो इस श्रेणी की न्यूनतम शर्त से दस अंक ज़्यादा है
बुधवार, 23 सितंबर को हुए इस अनुबंध की पुष्टि भारत डायनेमिक्स ने ख़ुद शेयर बाज़ार को दी सूचना में 86 मिनट बाद की, लगभग उन्हीं शब्दों में जो पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति में थे। असली सवाल रक़म का नहीं निकला, 60 फ़ीसदी स्वदेशी सामग्री के आँकड़े का निकला: डिफ़ेंस एक्विज़िशन प्रोसीजर 2020 में 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' श्रेणी की शर्त सिर्फ़ 50 फ़ीसदी है, और 60 फ़ीसदी उस मसौदे का आँकड़ा है जो अभी नियम नहीं बना है।
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पैसा
प्रीमियर एनर्जीज़ ने ख़ुद को 10.6 गीगावाट क्षमता वाली देश की सबसे बड़ी सोलर सेल निर्माता बताया, सरकार की सूची में उसकी दर्ज क्षमता तेलंगाना के प्लांट पर 1,358 और 751 मेगावाट है, आंध्र प्रदेश वाला नया प्लांट सूची में है ही नहीं
सोमवार, 21 सितंबर की सुबह 8:14 बजे प्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड ने बीएसई और एनएसई को बताया कि आंध्र प्रदेश के नैडूपेटा में उसका 7 गीगावाट का नया सोलर सेल कारख़ाना चालू हो गया है और ट्रायल रन शुरू हो चुके हैं, जिससे कंपनी की कुल क्षमता 10.6 गीगावाट हो गई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिस सूची के दम पर तय होता है कि किसी कंपनी का सेल सरकारी-समर्थित सोलर परियोजना में लग सकता है या नहीं, उसमें प्रीमियर एनर्जीज़ फ़ोटोवोल्टिक प्राइवेट लिमिटेड की दर्ज क्षमता तेलंगाना के फ़ैब सिटी प्लांट में 1,358 मेगावाट टॉपकॉन और 751 मेगावाट मोनो-पर्क है, नैडूपेटा का नाम उस सूची में कहीं नहीं है।
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पैसा
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अंतिम तथ्य-पत्र में भारत के लिए तीन आँकड़े हैं: 123.04, 107.17 और 126.09
शुक्रवार, 11 सितंबर को अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले क्रिस्टलीय सिलिकॉन सौर सेल और मॉड्यूल पर डंपिंग-रोधी और प्रतिकारी शुल्क की जाँच का अंतिम फ़ैसला सुनाया। भारत के लिए डंपिंग मार्जिन 123.04 फ़ीसदी और सब्सिडी की दर 126.09 फ़ीसदी दर्ज है। दोनों जोड़ने पर 249.13 बनता है, पर अमेरिकी सीमा पर हर खेप से जो नक़द जमा माँगा जाएगा वह 233.26 फ़ीसदी है, क्योंकि विभाग डंपिंग मार्जिन में से निर्यात-सब्सिडी वाला हिस्सा घटा देता है।
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समझिए
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात की 71 लाइनों पर चीन का हिस्सा 80 फ़ीसदी से ऊपर पहुँच चुका है, ज़्यादातर मोटर, तार और स्विच जैसे बुनियादी पुर्ज़ों में
कोआन एडवाइज़री ग्रुप और चीन अध्ययन संस्थान की नई रिपोर्ट ने वाणिज्य मंत्रालय के आँकड़ों को आठ अंकों वाली टैरिफ़ लाइन तक खोलकर गिना है। 2018-19 में ऐसी 44 लाइनें थीं, 2025-26 में 71 हैं। इनमें से 46 पर निर्भरता इन्हीं सात सालों में बनी, यानी ठीक उस दौर में जब भारत मोबाइल बनाने में दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुँचा।
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समझिए
कोयला गैसीकरण योजना को पहले दौर में सात आवेदन मिले, तीन एक ही समूह के; सरकार के अपने दस्तावेज़ 25 परियोजनाएँ गिनते हैं
कोयला मंत्रालय ने 37,500 करोड़ रुपये की योजना के पहले दौर को 'जबरदस्त प्रतिक्रिया' कहा है। सात आवेदनों में तीन अदानी एंटरप्राइजेज के हैं और दो सरकारी कंपनियों के। कैबिनेट की विज्ञप्ति 25 परियोजनाओं का अनुमान देती है, और तीन दिन पहले मंत्रालय उन ख़बरों का खंडन कर रहा था कि किसी ने आवेदन ही नहीं किया।
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पैसा
नोटबुक पर जीएसटी शून्य हुआ, आयात शुल्क पहले से शून्य था, और कॉपी बनाने वाले बीच में आ गए
अखिल भारतीय नोटबुक निर्माता संघ ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखा है कि 1,500 इकाइयाँ और 1.25 लाख रोज़गार ख़तरे में हैं। संघ की चार माँगें हैं: आयात पर न्यूनतम मूल्य, इंडोनेशिया से आने वाली कॉपियों पर डंपिंग-रोधी जाँच, निर्यात रिफ़ंड की आसान प्रक्रिया, और काग़ज़ मिलों की क़ीमतों की जाँच। संघ का एक बड़ा दावा अधिसूचना के पाठ से पूरी तरह नहीं मिलता।
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देश
रक्षा परिषद ने इस साल जितनी ख़रीद मंज़ूर की, उतना पैसा पूरे साल के बजट में है ही नहीं
सोमवार को 1.10 लाख करोड़ की मंज़ूरी मिली, मार्च में 2.38 लाख करोड़ की। इस साल पूँजीगत अधिग्रहण का पूरा बजट 1.85 लाख करोड़ का है। विरोधाभास नहीं है, क्योंकि यह मंज़ूरी ख़रीद नहीं है।
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देश
37,500 करोड़ की योजना पर कोयला मंत्रालय ने खंडन जारी किया, और सबूत में जो दो नाम गिनाए वे दोनों सरकारी हैं
ख़बरें छपी थीं कि सतही कोयला गैसीकरण की योजना में एक भी आवेदन नहीं आया। मंत्रालय ने कहा कि यह जल्दबाज़ी है, आवेदन आए हैं, और गिनाए तालचर फ़र्टिलाइज़र्स और एनटीपीसी। पहली खिड़की 7 सितंबर को बंद हो रही है।