मौदा का 413.37 करोड़ का ठेका किसने रद्द किया: एक्सचेंज में सिर्फ़ जीआर इंफ़्रा की नोटिस दर्ज है, एनटीपीसी का उलटा दावा तीन दिन बाद अख़बारों में आया
महाराष्ट्र के मौदा बिजलीघर पर बैटरी लगाने का ठेका 15 सितंबर 2026 को ख़त्म हुआ। ठेका ख़त्म करने की नोटिस ठेकेदार कंपनी जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स ने दी, और वजह में अपनी फ़ाइलिंग में फ़ोर्स मैज्योर तथा वॉर रिस्क की परिस्थितियाँ बताईं। 19 सितंबर को एनटीपीसी ने समाचार एजेंसी को बताया कि ठेका उसने रद्द किया, क्योंकि काम पिछड़ गया था। पहली बात बीएसई और एनएसई के रिकॉर्ड में है। दूसरी किसी फ़ाइलिंग में नहीं है।

बीएसई की वेबसाइट पर 16 सितंबर 2026 की शाम सात बजकर पंद्रह मिनट पर एक चिट्ठी चढ़ी। भेजने वाली कंपनी जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड। दस्तख़त कंपनी सचिव सुधीर मूथा के, और डिजिटल स्टैंप पर समय 19:06:39 दर्ज है। चिट्ठी में लिखा था कि कंपनी ने एनटीपीसी लिमिटेड को ठेका ख़त्म करने की नोटिस दे दी है, तत्काल प्रभाव से। ठेका महाराष्ट्र के नागपुर ज़िले में एनटीपीसी के मौदा बिजलीघर के अहाते में बैटरी लगाने का था, 413.37 करोड़ रुपये का।
तीन दिन बाद, 19 सितंबर को, ख़बर उलटी छपी। एनटीपीसी ने पत्रकारों से कहा कि ठेका उसने रद्द किया है, क्योंकि ठेकेदार का काम पिछड़ गया था और चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरा। बिज़नेस स्टैंडर्ड की उस दिन की हेडलाइन थी, "NTPC terminates 400 MWh BESS contract awarded to G R Infraprojects"।
दोनों बातें एक ही ठेके के बारे में हैं। एक बात शेयर बाज़ार के नियामकीय रिकॉर्ड में दर्ज है। दूसरी वहाँ कहीं नहीं है।
टर्मिनेशन नोटिस 15 सितंबर की है, और वजह में फ़ोर्स मैज्योर लिखा है
16 सितंबर की फ़ाइलिंग सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस नियमों के रेगुलेशन 30 के तहत दी गई है। यह वह प्रावधान है जो किसी सूचीबद्ध कंपनी को हर ऐसी घटना की जानकारी एक्सचेंज को देने के लिए बाध्य करता है जो निवेशक के लिए मायने रखती हो। चिट्ठी के साथ एक अनुलग्नक है, जिसमें सेबी के 30 जनवरी 2026 के मास्टर परिपत्र के मुताबिक़ ख़ानेवार ब्योरा भरा गया है।
उस ख़ाने में ठेके के तीन नंबर लिखे हैं: CS-9575-171A-9-FC-COA-7978, CS-9575-171A-9-SC-COA-7979 और CS-9575-171A-9-TC-COA-7980। तीनों करार 23 अप्रैल 2026 को हुए थे। काम का नाम फ़ाइलिंग के अपने शब्दों में है, "EPC Package for BESS Implementation at NTPC Thermal Power Stations (Lot-1); Mouda Super Thermal Power Station (Mouda)"।
वजह वाले ख़ाने में कंपनी ने यह लिखा है: "The Company, in view of the continuing Force Majeure and War Risk circumstances and the contractual issues arising from the contractual provisions, has issued a notice of termination to NTPC Limited, with immediate effect."
यानी कंपनी के अपने कथन में तीन आधार हैं। चलती हुई फ़ोर्स मैज्योर परिस्थितियाँ, यानी ऐसी घटनाएँ जिन पर किसी पक्ष का ज़ोर नहीं चलता। युद्ध से जुड़ा जोखिम। और ठेके की शर्तों से ही पैदा हुए विवाद।
अगली पंक्ति में कंपनी कहती है कि उसने ठेके का विवाद-निपटारा तंत्र शुरू कर दिया है और अपने अधिकार सुरक्षित रखे हैं। आख़िरी पंक्ति छोटी है: "The financial impact of the termination is presently being assessed."
नोटिस की तारीख़ इस चिट्ठी में नहीं है। वह अगले दिन की फ़ाइलिंग में मिलती है, जहाँ कंपनी लिखती है कि इन्हीं तीन ठेकों पर उसने 15 सितंबर 2026 को टर्मिनेशन नोटिस जारी की थी। तो क्रम यह बनता है। नोटिस 15 सितंबर को गई। एक्सचेंज को 16 सितंबर की शाम बताया गया। एनएसई पर वही सूचना 19:16 बजे दर्ज हुई।
फ़ाइलिंग यह नहीं बताती कि फ़ोर्स मैज्योर किस घटना से बनी। कोई तारीख़ नहीं, कोई जगह नहीं, कोई आपूर्तिकर्ता नहीं। ठेके की फ़ोर्स मैज्योर धारा भी सार्वजनिक नहीं है, क्योंकि करार का मूल पाठ कहीं दाख़िल नहीं किया गया। जो पढ़ा जा सकता है वह इतना ही है।
अगले दिन 90.86 करोड़ की गारंटियाँ भुना ली गईं
17 सितंबर की रात 8 बजकर 49 मिनट पर जीआर इंफ़्रा की दूसरी फ़ाइलिंग आई। उसमें कंपनी बताती है कि उसे उसी दिन सूचनाएँ मिलीं कि एनटीपीसी ने दो तरह की सुरक्षा राशियाँ भुना ली हैं।
पहली, एचडीएफ़सी बैंक की जारी की हुई मोबिलाइज़ेशन एडवांस बैंक गारंटी, 49,52,59,040 रुपये की। यह वह गारंटी होती है जो ठेकेदार काम शुरू करने के लिए मिले अग्रिम के बदले देता है। दूसरी, बजाज जनरल इंश्योरेंस के तीन इंश्योरेंस परफ़ॉर्मेंस श्योरिटी बॉन्ड, जिनकी रक़में फ़ाइलिंग में अलग-अलग दर्ज हैं: 34,51,72,694 रुपये, 4,08,91,016 रुपये और 2,73,07,288 रुपये। तीनों का जोड़ कंपनी ने ख़ुद लिखा है, 41,33,70,998 रुपये।
दोनों मदों को जोड़ने पर 90,86,30,038 रुपये बनते हैं। यह जोड़ किसी फ़ाइलिंग में नहीं लिखा। वह दोनों आँकड़ों को मिलाने से निकलता है।
यहाँ एक चीज़ और निकलती है। तीनों श्योरिटी बॉन्ड का जोड़, 41,33,70,998 रुपये, ठेके की जीएसटी-रहित क़ीमत का ठीक दसवाँ हिस्सा है। दस से गुणा कीजिए तो 4,13,37,09,980 रुपये आते हैं, और नोटिफ़िकेशन ऑफ़ अवॉर्ड में यही रक़म 413.37 करोड़ रुपये लिखी गई है। ईपीसी ठेकों में प्रदर्शन गारंटी का दस फ़ीसदी होना आम बात है, और यहाँ अंक रुपये तक मिलते हैं।
16 जनवरी 2026 की फ़ाइलिंग इसी हिसाब को दूसरी तरफ़ से पक्का करती है। उस दिन वित्तीय बोली खुली थी और जीआर इंफ़्रा एल-1 रही। बोली की क़ीमत वहाँ 4,87,77,77,777 रुपये दर्ज है। इसमें 18 फ़ीसदी जीएसटी घटाइए तो 4,13,37,09,980 रुपये बचते हैं, रुपये के अंतर के साथ। सीएनबीसी टीवी18 ने 16 जनवरी को इसे 488 करोड़ का प्रोजेक्ट लिखा था और 29 मार्च को 413 करोड़ का। दोनों एक ही रक़म हैं। बीच का फ़र्क़ टैक्स है, छूट नहीं।
कंपनी के लिए यह रक़म कितनी बड़ी है, इसका पैमाना उसकी अपनी प्रस्तुति में है। 30 जून 2026 तक जीआर इंफ़्रा की ऑर्डर बुक 2,53,192 मिलियन रुपये, यानी क़रीब 25,319 करोड़ रुपये थी। भुनाई गई 90.86 करोड़ की रक़म उसका 0.36 फ़ीसदी है। जून तिमाही में कंपनी की परिचालन आय 2,423 करोड़ रुपये रही थी। कंपनी ने अपनी फ़ाइलिंग में लिखा है, "There is presently no material impact on the business operations or other activities of the Company arising from the aforesaid invocation." आँकड़े उस वाक्य को काटते नहीं।
एनटीपीसी का बयान अख़बारों में है, एक्सचेंज के रिकॉर्ड में नहीं
एनटीपीसी ने 8 सितंबर से इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक, यानी 19 सितंबर की शाम तक, बीएसई पर पाँच सूचनाएँ दाख़िल की हैं। एनएसई पर 10 सितंबर से अब तक चार। उनमें से एक भी मौदा, बैटरी या जीआर इंफ़्रा के बारे में नहीं है। यह ख़ामोशी आज तक की है। कल यह बदल सकती है।
8 सितंबर की सूचना लेखा परीक्षकों की है। कैग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पाँच चार्टर्ड अकाउंटेंट फ़र्मों के नाम भेजे थे। 12 और 19 सितंबर की सूचनाएँ एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की सौर और पवन इकाइयों के वाणिज्यिक संचालन की हैं। 18 सितंबर को दो चिट्ठियाँ गईं: एक ईएसजी रेटिंग की, जिसमें कंपनी को 61 अंक और "Performer" श्रेणी मिली, और दूसरी उन्हीं लेखा परीक्षकों का ब्योरा। मौदा का ज़िक्र कहीं नहीं है।

एनटीपीसी का पक्ष 19 सितंबर को समाचार एजेंसी एएनआई की कॉपी से बाहर आया, जिसे द ट्रिब्यून ने उसी दिन शाम 4:47 बजे छापा। उसमें एनटीपीसी का कहना है कि परियोजना की अहम गतिविधियों में ख़ासी देरी हुई, कंपनी को ठेके के तहत नोटिस देकर तुरंत सुधार करने को कहा गया, और जीआर इंफ़्रा ने ज़रूरी उपाय नहीं किए। एनटीपीसी ने यह भी कहा कि उसने ठेके की शर्तों के मुताबिक़ क़रीब 91 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशियाँ भुनाई हैं, और परियोजना की दोबारा निविदा जीआर इंफ़्रा के जोखिम और ख़र्च पर शुरू कर दी है।
इन शब्दों को पढ़ते हुए एक फ़र्क़ याद रखना ज़रूरी है। जीआर इंफ़्रा का कथन एक नियामकीय दस्तावेज़ है, जिस पर कंपनी सचिव के दस्तख़त हैं और जिसे ग़लत भरने पर सेबी के नियम लागू होते हैं। एनटीपीसी का कथन पत्रकारों को दिया गया बयान है। दोनों सार्वजनिक हैं। दोनों की जवाबदेही एक जैसी नहीं है।
अख़बारों का रिकॉर्ड इस पलटाव को साफ़ दिखाता है। सीएनबीसी टीवी18 ने 16 सितंबर की रात लिखा कि जीआर इंफ़्रा ने ठेका ख़त्म किया। सौर एनर्जी ने 17 सितंबर की दोपहर वही लिखा। एनर्जेटिका इंडिया ने 17 सितंबर को शीर्षक दिया कि जीआर इंफ़्रा ने ठेके ख़त्म किए, और 19 सितंबर को उसी वेबसाइट पर शीर्षक बना कि एनटीपीसी ने जीआर इंफ़्रा का 413 करोड़ का ठेका ख़त्म किया। तीन दिन में दिशा उलट गई। बीच में मौदा पर कोई नई फ़ाइलिंग नहीं आई थी।
एनटीपीसी ने अपनी ओर से कोई टर्मिनेशन नोटिस जारी की या नहीं, इसका जवाब किसी काग़ज़ में दर्ज नहीं है। 17 सितंबर की फ़ाइलिंग में जीआर इंफ़्रा सिर्फ़ इतना लिखती है कि एनटीपीसी ने गारंटियाँ भुनाने के लिए कहा है।
किसी फ़ाइलिंग में न मेगावाट है, न मेगावाट-घंटा
मेगावाट और मेगावाट-घंटा एक चीज़ नहीं हैं। यह फ़र्क़ इस ख़बर की जड़ में है। मेगावाट क्षमता नापता है, यानी किसी पल में कितनी बिजली निकल सकती है। मेगावाट-घंटा ऊर्जा नापता है, यानी कुल कितनी बिजली भरी या दी जा सकती है। एक नल की मोटाई और एक टंकी का आयतन, दोनों अलग चीज़ें हैं। बैटरी का ठेका जब मेगावाट-घंटा में लिखा जाता है तो वह भंडारण ख़रीदता है, और जब मेगावाट में लिखा जाता है तो निकासी की रफ़्तार।

मौदा के मामले में दोनों में से कुछ भी दर्ज नहीं है। 16 जनवरी की एल-1 सूचना में सिर्फ़ रुपये हैं। 29 मार्च की नोटिफ़िकेशन ऑफ़ अवॉर्ड वाली सूचना में काम का ब्योरा है, अवधि नियत तिथि से 15 महीने लिखी है, और क़ीमत 413.37 करोड़ रुपये। न मेगावाट। न मेगावाट-घंटा। 23 अप्रैल की करार वाली सूचना में भी यही हाल है, और सितंबर की दोनों फ़ाइलिंगों में भी।
काम के ब्योरे में एक बात और है, जिसे क़ीमत की कोई भी तुलना करते वक़्त याद रखना पड़ता है। सूचना के अपने शब्द हैं, "including services, Ex-Works (India) Supply and Comprehensive Annual Maintenance for entire design life of BESS system"। यानी 413.37 करोड़ में सिर्फ़ बैटरी और उसका ढाँचा नहीं है। उसमें आपूर्ति, सेवाएँ और पूरे डिज़ाइन जीवन का रख-रखाव भी शामिल है। प्रति मेगावाट-घंटा का कोई भी हिसाब इसीलिए मोटा ही रहेगा।
400 मेगावाट-घंटा का आँकड़ा दस्तावेज़ों से नहीं आया। वह 19 सितंबर की ख़बरों से आया है, जिनमें बिज़नेस स्टैंडर्ड की हेडलाइन और एएनआई की कॉपी शामिल हैं।
उसी कार्यक्रम के भाई-पैकेज बताते हैं कि यह ब्योरा लिखा जा सकता था। सोलरवर्ल्ड एनर्जी सॉल्यूशंस ने 29 मार्च को एनएसई को बताया कि उसे सोलापुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन के लॉट-1 का लेटर ऑफ़ अवॉर्ड मिला है, और उसकी सूचना में दो इकाइयाँ साथ लिखी हैं: 132 मेगावाट/264 मेगावाट-घंटा, क़ीमत क़रीब 314.26 करोड़ रुपये, अवधि 15 महीने, बिड दस्तावेज़ CS-0011-171A-9। 30 मार्च की दो और सूचनाओं में सोलापुर का लॉट-2 75 मेगावाट/150 मेगावाट-घंटा का है और फ़िरोज़ गांधी ऊँचाहार का 50 मेगावाट/100 मेगावाट-घंटा का।
तीनों में अनुपात एक ही है। एक मेगावाट पर दो मेगावाट-घंटा, यानी दो घंटे का भंडारण। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने फ़रवरी 2025 में जो सलाह जारी की थी, उसमें सौर परियोजना के साथ लगने वाले भंडारण के लिए कम से कम दो घंटे की अवधि सुझाई गई है, और सौर क्षमता का कम से कम दस फ़ीसदी। यह ब्योरा बिजली मंत्रालय की 30 मार्च 2026 की विज्ञप्ति में सिफ़ारिश के तौर पर दर्ज है। सीईए की मूल सलाह का पूरा पाठ अलग से नहीं पढ़ा जा सका।
इससे मौदा की बैटरी का मेगावाट निकाल लेना आसान लगता है। वह निकाला नहीं जा सकता। किसी दस्तावेज़ ने यह नहीं कहा कि मौदा का पैकेज भी दो घंटे का है, और उसे चार घंटे की बैटरी कहना तो और भी बेबुनियाद है।
इकाइयों की यह फिसलन सरकारी काग़ज़ों में भी है। राष्ट्रीय विद्युत योजना 2023 के हवाले से बिजली मंत्रालय कहता है कि 2030 तक 208 गीगावाट-घंटा बैटरी भंडारण चाहिए। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की 3 फ़रवरी 2026 की विज्ञप्ति सीईए की ऑप्टिमल जनरेशन मिक्स 2030 रिपोर्ट के हवाले से कहती है कि 2029-30 तक 60.63 गीगावाट भंडारण चाहिए, जिसमें 41.65 गीगावाट बैटरी से। एक आँकड़ा ऊर्जा का है, दूसरा क्षमता का। ये दो अलग राशियाँ हैं, टकराव नहीं।
7 अगस्त की कमाई कॉल: बैटरियाँ तब तक ऑर्डर नहीं हुई थीं
टर्मिनेशन से छह हफ़्ते पहले जीआर इंफ़्रा ने जून तिमाही के नतीजों पर विश्लेषकों से बात की थी। कॉल 7 अगस्त 2026 को हुई और उसका पूरा प्रतिलेख कंपनी ने 10 अगस्त को बीएसई में दाख़िल किया। उसमें एक सवाल सीधे इसी परियोजना पर है।
वैभव शाह नाम के विश्लेषक पूछते हैं कि बीईएसएस परियोजना पर काम कब शुरू होगा। जवाब समूह मुख्य वित्त अधिकारी आनंद राठी देते हैं: "BESS, the work has already started. Only thing is because of that geopolitical issues, right, the battery prices and that dollar price -- dollar rupee movement. So we are just waiting for the time to where all those external factors comes to, I would say, which -- I mean it comes to in favor maybe next 3 months time, we will be ordering batteries and all that probably, so that is on track."
आगे वे जोड़ते हैं कि सिविल यानी निर्माण का काम और बाक़ी सामान या तो ऑर्डर हो चुका है या चल रहा है।
इस एक जवाब में दोनों पक्षों की कहानी दिखती है। कंपनी ख़ुद कह रही है कि अगस्त की शुरुआत तक बैटरियाँ मँगाई नहीं गई थीं, और उनके लिए तीन महीने और इंतज़ार की बात हो रही है। ठेके की अवधि नियत तिथि से 15 महीने थी। बैटरी ही उस ठेके का सबसे लंबा और सबसे महँगा हिस्सा है। भूराजनीति, बैटरी के दाम और डॉलर-रुपया, तीनों वही चीज़ें हैं जिन्हें एक तरफ़ फ़ोर्स मैज्योर कहा जाएगा और दूसरी तरफ़ अहम गतिविधियों में देरी।
यह भी ध्यान देने लायक़ है कि मौदा जीआर इंफ़्रा का पहला बैटरी प्रोजेक्ट था। कंपनी की अपनी निवेशक प्रस्तुति में 2026 के ख़ाने में मील का पत्थर लिखा है, "Emerged as L-1 Bidder for first BESS Project"। उसी प्रस्तुति में बीईएसएस को एक कारोबारी वर्टिकल के रूप में गिनाया गया है, इन शब्दों के साथ, "With in-house expertise, we deliver intelligent, efficient, & bankable Solar and battery energy storage solutions"। कंपनी की बुनियादी पहचान सड़क बनाने की है। 18 सितंबर को, यानी टर्मिनेशन के तीन दिन बाद, उसने एनएचएआई की आगरा-ग्वालियर परियोजना की नियत तिथि की सूचना दाख़िल की, जिसकी अनुमानित लागत 4,262.78 करोड़ रुपये है। मौदा का ठेका उसका दसवाँ हिस्सा भी नहीं था।
देश ने अब तक 798 मेगावाट-घंटा बनाया है, मौदा अकेले 400 का था
अब पैमाना बदलिए। बिजली मंत्रालय ने 30 मार्च 2026 को राज्यसभा में विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक के लिखित उत्तर के ज़रिए बताया कि देश में एक मेगावाट-घंटा से बड़ी जितनी बैटरी भंडारण क्षमता चालू है, वह कुल 798 मेगावाट-घंटा है।
अनुलग्नक में राज्यवार ब्योरा है। बिहार 282, कर्नाटक 150, छत्तीसगढ़ 120, राजस्थान 100, गुजरात 77, दिल्ली 50, अंडमान-निकोबार 8, पश्चिम बंगाल 6, उत्तर प्रदेश 3 और लक्षद्वीप 1। इन दस अंकों को जोड़िए तो 797 आते हैं। अनुलग्नक की अपनी आख़िरी पंक्ति में कुल 798 छपा है। एक मेगावाट-घंटा का यह अंतर विज्ञप्ति में समझाया नहीं गया।
मौदा का पैकेज, अगर वह वाक़ई 400 मेगावाट-घंटा का था, तो अकेले इस पूरे जोड़ का आधा है। उसी उत्तर में यह भी दर्ज है कि 35.8 गीगावाट-घंटा निर्माणाधीन है, और राष्ट्रीय विद्युत योजना 2023 के मुताबिक़ 2030 तक 208 गीगावाट-घंटा चाहिए। जो बन चुका है वह उस ज़रूरत का 0.38 फ़ीसदी है। जो बन रहा है वह 17 फ़ीसदी है।
इस पैमाने पर एक ठेके का रद्द होना छोटी घटना नहीं रह जाता।
सब्सिडी की तस्वीर अलग है, और उसे मिलाना नहीं चाहिए। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की 3 फ़रवरी 2026 की विज्ञप्ति के मुताबिक़ मार्च 2024 में 13,220 मेगावाट-घंटा के लिए 3,760 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फ़ंडिंग मंज़ूर हुई थी, दर 27 लाख रुपये प्रति मेगावाट-घंटा। जून 2025 में 30 गीगावाट-घंटा के लिए बिजली प्रणाली विकास कोष से 5,400 करोड़ रुपये, दर 18 लाख प्रति मेगावाट-घंटा। दूसरी योजना का गुणा ठीक बैठता है। पहली का नहीं: 13,220 को 27 लाख से गुणा करने पर 3,569 करोड़ आते हैं, 3,760 नहीं। दोनों योजनाओं के मंत्रालयी आदेश नहीं मिल सके, क्योंकि powermin.gov.in पर दस्तावेज़ खुलते ही नहीं।
और मौदा वीजीएफ़ का प्रोजेक्ट था ही नहीं। एनटीपीसी के अपने प्रतिलेख के मुताबिक़ बिजलीघरों के अहाते में लगने वाली बैटरियाँ नियत प्रतिफल के ढाँचे में आती हैं, जिसमें लागत टैरिफ़ से वसूल होती है। 413.37 करोड़ को 400 से भाग दीजिए तो क़रीब 1.03 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट-घंटा बैठता है। सोलापुर के लॉट-1 में यह क़रीब 1.19 करोड़ है। सब्सिडी की 18 लाख वाली दर से इनकी तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि वह अनुदान है और ये ठेके की क़ीमत।
कोयले के बिजलीघर पर बैटरी क्यों लगती है
एनटीपीसी की 22वीं वार्षिक विश्लेषक बैठक 27 जुलाई 2026 को हुई और उसका प्रतिलेख 2 अगस्त को दाख़िल हुआ। उसमें एक विश्लेषक ने ठीक यही सवाल पूछा कि दोपहर में सौर बिजली की भरमार होने पर कोयले की इकाइयाँ तकनीकी न्यूनतम से नीचे चली जाती हैं, तो कंपनी क्या करेगी।
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक का जवाब सीधा है। कोयले के संयंत्र तकनीकी न्यूनतम तक आ सकते हैं, जो 55 फ़ीसदी है। उससे नीचे जाने पर अब नियामक की सहमति से इकाई बंद की जा सकती है और क़रीब एक दिन बाद ही चालू हो पाती है। तीसरा रास्ता बैटरी है। दिन में जो बिजली खप नहीं रही, उसे भरकर शाम को ग्रिड में डाल दिया जाए। प्रतिलेख में वे यह भी कहते हैं कि एनटीपीसी ने नियामक और मंत्रालय के साथ मिलकर यह नीति बनवाई कि बैटरी को संयंत्र का ही हिस्सा माना जाए, जिससे उस पर नियत टैरिफ़ लागू हो।

इसी बैठक में कंपनी ने अपना भंडारण पोर्टफ़ोलियो 38.9 गीगावाट-घंटा बताया, जिसमें 6.62 गीगावाट-घंटा निर्माणाधीन है और उसके भीतर 5 गीगावाट-घंटा बिजलीघरों के अहाते में, नियत प्रतिफल वाले ढाँचे में। उसी सवाल-जवाब में सवाल पूछने वाले विश्लेषक ने "5 gigawatt hour" कहा। जवाब में "5 gigawatt is going to be very helpful" कहा गया। इकाई कमरे के भीतर भी फिसलती है।
कंपनी के अपने आकार में भी दो पैमाने चलते हैं। 27 जुलाई के प्रतिलेख में एनटीपीसी समूह की वाणिज्यिक क्षमता 90 गीगावाट से ऊपर बताई गई है। 19 सितंबर की फ़ाइलिंग में वही समूह 91,164 मेगावाट स्थापित क्षमता और 90,084 मेगावाट वाणिज्यिक क्षमता दर्ज कराता है। पहला आँकड़ा लगी हुई क्षमता का है। दूसरा उस हिस्से का जो व्यावसायिक रूप से चालू घोषित हो चुका है। जहाँ 90 और 91 का फ़र्क़ छपता है, वहाँ अक्सर यही दो पैमाने होते हैं।
मौदा का पैमाना एनटीपीसी की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मिलता है। 2025-26 की एकीकृत वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक़ मौदा कोयले का 2,320 मेगावाट का बिजलीघर है और वित्त वर्ष 2026 में उसने 14,465 मिलियन यूनिट बिजली बनाई। यानी औसतन क़रीब 39,600 मेगावाट-घंटा रोज़। 400 मेगावाट-घंटा की बैटरी उस रोज़ाना उत्पादन का लगभग एक फ़ीसदी भर रखती। वह बिजली बनाती नहीं। उसका काम दिन की बची हुई बिजली शाम तक पहुँचाना है।
दस्तावेज़ों में जो नहीं मिला
फ़ोर्स मैज्योर किस घटना की है, यह किसी काग़ज़ में नहीं है। ठेके की वह धारा भी सार्वजनिक नहीं है जिसके तहत नोटिस दी गई, क्योंकि करार का मूल पाठ कभी दाख़िल ही नहीं हुआ।
एक तारीख़ की ग़ैरमौजूदगी सबसे ज़्यादा खटकती है। अवधि नियत तिथि से 15 महीने थी, और मौदा की नियत तिथि किसी सार्वजनिक दस्तावेज़ में दर्ज नहीं है। ऐसी तारीख़ें कंपनी नियम से बताती रही है। 15 जून 2026 को उसने पश्चिम मध्य रेलवे की सीधी-सिंगरौली रेल लाइन की नियत तिथि बताई, और 18 सितंबर को आगरा-ग्वालियर की। मौदा के लिए ऐसी कोई सूचना कभी नहीं आई। इसलिए यह तक तय नहीं किया जा सकता कि 15 महीने की घड़ी कब चली थी।
दोबारा निविदा सचमुच जारी हुई या नहीं, इसका कोई दस्तावेज़ नहीं मिला। वह बात 19 सितंबर के एजेंसी बयान तक सीमित है। जीआर इंफ़्रा ने विवाद-निपटारा तंत्र शुरू करने की बात कही है, पर मंच, मध्यस्थता की शर्तें और दावे की रक़म कहीं दर्ज नहीं हैं।
एनटीपीसी के इसी कार्यक्रम में कोई दूसरा ठेका रद्द हुआ या पिछड़ा, यह खोज में सामने नहीं आया। इसका मतलब सिर्फ़ इतना है कि ऐसा कुछ मिला नहीं। यह नहीं कि ऐसा कुछ है ही नहीं।
स्रोतजीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, बीएसई और एनएसई को रेगुलेशन 30 के तहत सूचना, 16 सितंबर 2026, शाम 7:15 बजे दर्ज: टर्मिनेशन नोटिस जारी करने की जानकारी और अनुलग्नक-ए, जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, रेगुलेशन 30 के तहत सूचना, 17 सितंबर 2026, रात 8:49 बजे दर्ज: मोबिलाइज़ेशन एडवांस बैंक गारंटी और तीन इंश्योरेंस परफ़ॉर्मेंस श्योरिटी बॉन्ड भुनाए जाने की जानकारी, जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, 16 जनवरी 2026: मौदा बीईएसएस पैकेज में एल-1 बोलीदाता बनने की सूचना, बोली मूल्य 4,87,77,77,777 रुपये, जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, 29 मार्च 2026: 28 मार्च की नोटिफ़िकेशन ऑफ़ अवॉर्ड की सूचना, 413.37 करोड़ रुपये जीएसटी छोड़कर, अवधि नियत तिथि से 15 महीने, जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, 23 अप्रैल 2026: एनटीपीसी के साथ ईपीसी करार पर हस्ताक्षर की सूचना, जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, 7 अगस्त 2026 की तिमाही कमाई कॉल का पूरा प्रतिलेख, बीएसई में 10 अगस्त 2026 को दाख़िल, जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, निवेशक प्रस्तुति, जून 2026 तिमाही, 6 अगस्त 2026: ऑर्डर बुक 2,53,192 मिलियन रुपये और बीईएसएस वर्टिकल, जीआर इंफ़्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, 18 सितंबर 2026: एनएचएआई की आगरा-ग्वालियर परियोजना की नियत तिथि की सूचना, लागत 4,262.78 करोड़ रुपये, सोलरवर्ल्ड एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड, 29 मार्च 2026: सोलापुर (लॉट-1) का लेटर ऑफ़ अवॉर्ड, 132 मेगावाट/264 मेगावाट-घंटा, 314.26 करोड़ रुपये, बिड दस्तावेज़ CS-0011-171A-9, सोलरवर्ल्ड एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड, 30 मार्च 2026: सोलापुर (लॉट-2), 75 मेगावाट/150 मेगावाट-घंटा, सोलरवर्ल्ड एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड, 30 मार्च 2026: फ़िरोज़ गांधी ऊँचाहार (लॉट-2), 50 मेगावाट/100 मेगावाट-घंटा, पत्र सूचना कार्यालय, विद्युत मंत्रालय, 30 मार्च 2026, शाम 4:16: राज्यसभा में विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक का लिखित उत्तर, अनुलग्नक-2 में राज्यवार बीईएसएस क्षमता, पत्र सूचना कार्यालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, 3 फ़रवरी 2026, दोपहर 1:31: दोनों वीजीएफ़ योजनाओं के आँकड़े और सीईए का ऑप्टिमल जनरेशन मिक्स 2030, एनटीपीसी लिमिटेड, 27 जुलाई 2026 को हुई 22वीं वार्षिक विश्लेषक एवं संस्थागत निवेशक बैठक का प्रतिलेख, बीएसई में 2 अगस्त 2026 को दाख़िल, एनटीपीसी लिमिटेड, एकीकृत वार्षिक रिपोर्ट 2025-26, 4 अगस्त 2026 को दाख़िल: समूह के बिजलीघरों की स्थापित क्षमता और वित्त वर्ष 2026 का उत्पादन, एनटीपीसी लिमिटेड, 19 सितंबर 2026: एनजीईएल की परियोजनाओं के वाणिज्यिक संचालन की सूचना, समूह की स्थापित क्षमता 91,164 मेगावाट और वाणिज्यिक क्षमता 90,084 मेगावाट, बिज़नेस स्टैंडर्ड, 19 सितंबर 2026: 400 मेगावाट-घंटा का आँकड़ा और एनटीपीसी की ओर से रद्दीकरण की ख़बर, द ट्रिब्यून, 19 सितंबर 2026, शाम 4:47 बजे, समाचार एजेंसी एएनआई की कॉपी: एनटीपीसी का पक्ष, दोबारा निविदा और 91 करोड़ रुपये भुनाए जाने की बात, सौर एनर्जी, 17 सितंबर 2026, दोपहर 12:18: जीआर इंफ़्रा की ओर से ठेका ख़त्म किए जाने की ख़बर और लॉट-1 के दूसरे ठेकेदार