भारत पन्ना
पैसा

प्याज़ और सीएनजी दोनों चढ़े, पर घर के बजट में फ़र्क़ 124 रुपये का है

दिल्ली में सीएनजी 29 अगस्त की सुबह ₹3.89 महँगी हुई। प्याज़ साल भर में 70 फ़ीसदी ऊपर है। एक परिवार पर असल बोझ कितना बैठता है, यह सरकार के अपने सर्वे से निकाला जा सकता है।

प्याज़ और सीएनजी दोनों चढ़े, पर घर के बजट में फ़र्क़ 124 रुपये का है

आज सुबह छह बजे से दिल्ली में सीएनजी ₹83.09 से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गई। बढ़त ₹3.89 की है।

इंडियन ऑयल और गेल की साझा कंपनी आईजीएल ने वजह बताई है कि हॉर्मुज़ में आवाजाही बाधित होने के बाद हाज़िर बाज़ार में गैस के दाम दोगुने हो गए। यूरोप के टीटीएफ़ सूचकांक में 105 फ़ीसदी और एशिया के जेकेएम में 113 फ़ीसदी की उछाल आई है।

इस साल जनवरी से अब तक दिल्ली में सीएनजी ₹77.09 से ₹86.98 हुई है। कुल बढ़त 12.8 फ़ीसदी।

यह पूरा बोझ ड्राइवर पर बैठता है

दिल्ली में ऑटो का किराया जनवरी 2023 से नहीं बदला है। डेढ़ किलोमीटर तक ₹30, उसके बाद ₹11 प्रति किलोमीटर।

तीन साल सात महीने।

इस बीच सीएनजी जितनी बार महँगी हुई, हर बार वह अंतर ड्राइवर की जेब से गया, सवारी की जेब से नहीं। यूनियनें अब ₹50 और ₹15 प्रति किलोमीटर की माँग कर रही हैं।

सीएनजी इस साल पाँच रुपये महँगी हो चुकी है। हम दिल्ली सरकार से कहेंगे कि किराया बढ़ाने पर मजबूर करने के बजाय यह बढ़ोतरी वापस ले।

राजेंद्र सोनी, दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ

प्याज़ में कमी नहीं है, फिर भी दाम 70 फ़ीसदी ऊपर हैं

उपभोक्ता मामले विभाग की रोज़ की श्रृंखला में 28 अगस्त को प्याज़ का अखिल भारतीय खुदरा औसत ₹48.50 प्रति किलो दर्ज है। एक साल पहले यही ₹28.56 था।

लासलगाँव मंडी में 27 अगस्त को भारित औसत ₹3,800 प्रति क्विंटल रहा, जो एक महीने में 81 फ़ीसदी ऊपर है।

अब वह आँकड़ा जो इस कहानी को पलट देता है। इस साल प्याज़ का उत्पादन 307.37 लाख टन है। पिछले साल 307.67 लाख टन था।

यानी पैदावार वहीं है। यह कमी की कहानी नहीं है।

453 टन, दो करोड़ लोगों के शहर के लिए

28 अगस्त की सुबह नासिक से एक विशेष रेलगाड़ी दिल्ली के आदर्श नगर पहुँची। 21 डिब्बे, 453.65 टन प्याज़। इसे ₹35 प्रति किलो पर बेचा जा रहा है, एनसीसीएफ़ के 9 केंद्रों और 40 वैनों से, नैफ़ेड के 13 केंद्रों और 50 वैनों से, और केंद्रीय भंडार की लगभग 100 दुकानों से।

अब हिसाब।

राष्ट्रीय उपभोग सर्वे 2023-24 के मुताबिक़ दिल्ली का एक शहरी व्यक्ति महीने में 1.044 किलो प्याज़ खाता है। औसत परिवार 4.09 लोगों का है, यानी महीने का 4.27 किलो।

भाव ₹33 से ₹62 प्रति किलो होने पर उस परिवार का महीना ₹124 महँगा हुआ।

₹35 वाली वैन तक पहुँच जाने पर वही थैला ₹265 के बजाय ₹149 का पड़ता है। बचत लगभग ₹116 महीने की।

₹116सरकारी वैन तक पहुँच पाने वाले एक परिवार को महीने में इतनी बचत होती है

453 टन दो करोड़ की आबादी वाले शहर के लिए एक संकेत है, समाधान नहीं। जिस मोहल्ले में वैन नहीं पहुँचती, वहाँ भाव मंडी वाला ही है।

जो नहीं बदला, वह भी ख़बर है

घरेलू रसोई गैस का सिलेंडर दिल्ली में 7 जून से ₹942 पर टिका है। और 19 किलो वाला व्यावसायिक सिलेंडर 1 अगस्त को ₹192 सस्ता हुआ था।

जुलाई की महँगाई दर 4.45 फ़ीसदी रही, खाने-पीने की चीज़ों की 5.52 फ़ीसदी। रिज़र्व बैंक ने 5 अगस्त को रेपो दर 5.25 फ़ीसदी पर सर्वसम्मति से बरक़रार रखी।

उसी जुलाई की सूची में सबसे तेज़ चढ़ने वाली चीज़ प्याज़ थी, 22.54 फ़ीसदी सालाना।

एक आख़िरी बात, जो इन सब आँकड़ों को अलग-अलग परिवारों पर अलग-अलग बना देती है। शहरी परिवार अपना 39.68 फ़ीसदी ख़र्च खाने पर करता है। ग्रामीण परिवार 47.04 फ़ीसदी।

वही महँगाई गाँव के घर पर एक-पाँचवाँ ज़्यादा भारी पड़ती है।

स्रोतउपभोक्ता मामले विभाग, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।