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कच्चा तेल सौ डॉलर के पार गया, पर पंप का दाम 107 दिन से नहीं हिला और घाटा तेल कंपनियों की किताब में दर्ज हो रहा है

दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये 12 पैसे और डीज़ल 95 रुपये 20 पैसे पर 25 मई से टिका है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के हिसाब से सितंबर के औसत दाम पर पेट्रोल की बिक्री पर 5 रुपये और डीज़ल पर 23 रुपये प्रति लीटर का ऋणात्मक विपणन मार्जिन बैठ रहा है। पिछले सत्रह महीनों में केंद्र ने उत्पाद शुल्क एक बार बढ़ाया, एक बार घटाया, और दोनों बार पंप का बोर्ड नहीं बदला।

महाराष्ट्र में नागपुर के पास एक भारत पेट्रोलियम पंप पर कर्मचारी मोटरसाइकिल में पेट्रोल भरता हुआ, यह तस्वीर जून 2021 की है। दिल्ली के पंप का बोर्ड 25 मई 2026 से नहीं बदला
तस्वीर: Ganesh Dhamodkar, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

एक लीटर पेट्रोल दिल्ली में 102 रुपये 12 पैसे का है। यह अंक 25 मई 2026 की सुबह तय हुआ था और तब से नहीं बदला।

बीच के 107 दिनों में जिस कच्चे तेल से वह पेट्रोल बनता है, वह ऊपर गया, नीचे आया, और 9 सितंबर को पश्चिम एशिया की नई भिड़ंत के साथ फिर सौ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया। पंप पर लगा बोर्ड जस का तस रहा।

रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के हवाले से पीटीआई ने उसी दिन लिखा कि सितंबर के अब तक के औसत दाम पर पेट्रोल का विपणन मार्जिन ऋणात्मक 5 रुपये प्रति लीटर बैठता है, डीज़ल का ऋणात्मक 23 रुपये प्रति लीटर, और घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी 200 रुपये प्रति सिलेंडर।

यह फ़र्क़ किसी न किसी के खाते में जाता है। किसके, इसका जवाब पिछले सत्रह महीनों की दो अधिसूचनाओं, एक संसदीय उत्तर और तीन कंपनियों के जून तिमाही के नतीजों में लिखा हुआ है।

ब्रेंट का आँकड़ा दो रिपोर्टों में अलग है

पीटीआई की ख़बर कहती है कि ब्रेंट 2.5 फ़ीसदी चढ़कर सौ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँचा और अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट लगभग 2 फ़ीसदी चढ़कर क़रीब 95 डॉलर पर आया। द हिंदू की उसी दिन की रिपोर्ट में आँकड़ा अलग है: ब्रेंट 2.15 डॉलर या 2.2 फ़ीसदी चढ़कर 100.07 डॉलर, और डब्ल्यूटीआई 1.70 डॉलर या 1.83 फ़ीसदी चढ़कर 94.73 डॉलर, समय 0721 जीएमटी। दोनों आँकड़े एक ही कारोबारी दिन के हैं, पर घड़ी अलग है। किस स्तर पर दिन बंद हुआ, यह दोनों में से कोई नहीं बताता।

पीपीएसी की बास्केट ब्रेंट से नौ डॉलर ऊपर बैठी है

भारत जिस मिश्रण को ख़रीदता है, उसका नाम भारतीय बास्केट है और उसका हिसाब पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ रखता है। द ट्रिब्यून ने पीपीएसी के हवाले से लिखा कि 8 सितंबर को यह बास्केट 108.91 डॉलर प्रति बैरल थी। सितंबर का अब तक का औसत 102.11 डॉलर है, अगस्त का 90.19 डॉलर और जुलाई का 82.04 डॉलर। यानी जिस दिन ब्रेंट सौ डॉलर छूकर सुर्ख़ी बना, उससे एक दिन पहले भारत की अपनी बास्केट उससे नौ डॉलर ऊपर थी। दो महीनों में यह औसत 82 से 102 डॉलर पर पहुँचा है।

दाम कच्चे तेल से नहीं, तैयार ईंधन से जुड़ा है

12 दिसंबर 2018 को राज्यसभा में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के लिखित उत्तर में एक वाक्य है जिसे दैनिक ख़बरों में कम दोहराया जाता है: देश में पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा बिक्री क़ीमत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की क़ीमत से नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीज़ल की अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों से जुड़ी है। उसी उत्तर में खुदरा दाम के बाक़ी हिस्से गिनाए गए हैं: उत्पाद शुल्क, वैट, बीएस-4 प्रीमियम, विपणन लागत और मार्जिन, डीलर कमीशन। ब्रेंट का आँकड़ा इसलिए संकेत है, हिसाब नहीं।

मई की चार बढ़ोतरियाँ, दस दिन में

रिपब्लिक वर्ल्ड के ब्योरे के मुताबिक़ 15 मई को पेट्रोल और डीज़ल दोनों 3 रुपये प्रति लीटर महँगे हुए, 19 मई को 90 पैसे, 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीज़ल 91 पैसे, और 25 मई को पेट्रोल 2 रुपये 61 पैसे तथा डीज़ल 2 रुपये 71 पैसे। पीटीआई के मुताबिक़ चार किस्तों में पेट्रोल कुल 7 रुपये 35 पैसे और डीज़ल 7 रुपये 53 पैसे चढ़ा। बिज़नेस टुडे ने 26 मई को दिल्ली में पेट्रोल 102.12 और डीज़ल 95.20 रुपये दर्ज किया। इसके बाद बोर्ड रुक गया।

पाँच पैसे जो जोड़ में नहीं मिलते

रिपब्लिक वर्ल्ड की चारों रक़में जोड़ें तो पेट्रोल पर 7 रुपये 38 पैसे बनते हैं, डीज़ल पर 7 रुपये 52 पैसे। पीटीआई का कुल जोड़ 7 रुपये 35 पैसे और 7 रुपये 53 पैसे है। दूसरा अंतर बड़ा है। 15 मार्च 2024 को दिल्ली में पेट्रोल 94 रुपये 72 पैसे और डीज़ल 87 रुपये 62 पैसे हुआ था। उस पर पीटीआई का जोड़ लगाएँ तो 102.07 और 95.15 आना चाहिए, जबकि पंप पर 102.12 और 95.20 लिखा है। दोनों ईंधनों पर ठीक पाँच पैसे का फ़र्क़ है, और किसी रिपोर्ट में इसका ज़िक्र नहीं मिला।

मार्च 2024 का वह वाक्य, जो इस बार नहीं दोहराया गया

14 मार्च 2024 को तेल कंपनियों ने दाम 2 रुपये प्रति लीटर घटाए थे, जो अगली सुबह छह बजे से लागू हुए। बिज़नेस टुडे के मुताबिक़ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तब कहा था कि दाम घटने से उपभोक्ता ख़र्च बढ़ेगा और डीज़ल पर चलने वाले 58 लाख से ज़्यादा भारी माल वाहनों, 6 करोड़ कारों तथा 27 करोड़ दोपहिया वाहनों की परिचालन लागत घटेगी। मंत्रालय ने उसी गिनती को उलटी दिशा में, यानी मई 2026 की बढ़ोतरी के समय, दोहराया हो, ऐसा कोई बयान नहीं मिला।

अप्रैल 2025: शुल्क बढ़ा, बोर्ड नहीं बदला

7 अप्रैल 2025 को केंद्र ने पेट्रोल और डीज़ल पर उत्पाद शुल्क 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया, जो 8 अप्रैल से लागू हुआ। द ट्रिब्यून के मुताबिक़ पेट्रोल पर यह दर 13 रुपये और डीज़ल पर 10 रुपये प्रति लीटर हो गई। उसी दिन तेल मंत्रालय ने लिखा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने सूचित किया है कि आज की उत्पाद शुल्क दर बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीज़ल के खुदरा दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। तर्क यह था कि अंतरराष्ट्रीय दाम गिरने से जो कटौती बनती थी, वह इस बढ़ोतरी से समायोजित हो जाएगी।

मार्च 2026: शुल्क घटा, बोर्ड फिर नहीं बदला

ग्यारह महीने बाद पहिया उलटा घूमा। कार्स24 के ब्योरे के अनुसार वित्त मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 11/2026-केंद्रीय उत्पाद शुल्क, दिनांक 26 मार्च 2026, ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये किया और डीज़ल पर 10 रुपये से शून्य। कुल उत्पाद शुल्क पेट्रोल पर 21 रुपये 90 पैसे से 11 रुपये 90 पैसे और डीज़ल पर 17 रुपये 80 पैसे से 7 रुपये 80 पैसे रह गया। इंडमनी की रिपोर्ट भी यही दरें देती है। आउटलुक इंडिया की रिपोर्ट में पेट्रोल पर यह विशेष शुल्क शून्य बताया गया है, जो बाक़ी विवरणों से मेल नहीं खाता।

विज्ञप्ति में सरकार ने ख़ुद हिसाब दिया

27 मार्च 2026 की पीआईबी विज्ञप्ति संख्या 2245970 का उपशीर्षक ही बताता है कि यह कटौती किसके लिए थी: खुदरा दाम स्थिर रहेंगे, तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी आंशिक रूप से भरपाई होगी। विज्ञप्ति में लिखा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दामों पर अंडर-रिकवरी पेट्रोल पर लगभग 26 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 81 रुपये 90 पैसे प्रति लीटर है, और तीनों कंपनियाँ मिलकर रोज़ाना लगभग 2,400 करोड़ रुपये का बोझ उठा रही हैं। 10 रुपये की कटौती उसी में से 10 रुपये हटाती है।

जो रास्ता चुना गया, विज्ञप्ति के शब्दों में

उसी विज्ञप्ति में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हवाले से कहा गया कि सरकार के पास दो ही रास्ते थे: या तो बाक़ी देशों की तरह नागरिकों के लिए दाम तेज़ी से बढ़ा दिए जाते, या सरकार अपने वित्त पर मार झेलती ताकि नागरिक अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से बचा रहे, और प्रधानमंत्री ने दूसरा रास्ता चुना; विज्ञप्ति में आगे लिखा है कि सरकार ने तेल विपणन कंपनियों के भारी घाटे को घटाने के लिए अपने कर राजस्व पर बड़ी चोट ली है। विज्ञप्ति यह भी दर्ज करती है कि संकट शुरू होने के बाद दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में ईंधन के दाम 30 से 50 फ़ीसदी, उत्तरी अमेरिका में 30 फ़ीसदी और यूरोप में 20 फ़ीसदी बढ़े, जबकि भारत ने लकीर बनाए रखी, और उस स्थिरता की राजकोषीय क़ीमत सरकार ने उठाने का फ़ैसला किया। कच्चा तेल एक महीने में लगभग 70 डॉलर से 122 डॉलर पर पहुँचा था, यानी चार हफ़्तों से कम में क़रीब 75 फ़ीसदी की उछाल, और विज्ञप्ति इसे 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के समय अपनाए गए उसी तरीक़े का विस्तार बताती है, जब कंपनियों ने लगातार घाटा उठाया और केंद्र ने कर घटाए थे।

वह शब्द जो 2014 में विदा हुआ था

अंडर-रिकवरी का मतलब बिक्री दाम और उस काल्पनिक आयात-समता दाम का अंतर है जो वह उत्पाद बाहर से मँगाने पर पड़ता। 18 अक्तूबर 2014 की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की विज्ञप्ति में यही शब्द आख़िरी बार अपने पुराने अर्थ में इस्तेमाल हुआ: समिति ने डीज़ल की बिक्री पर अंडर-रिकवरी के मुद्दे पर विचार कर उसी रात से दाम बाज़ार-निर्धारित कर दिए। पेट्रोल के लिए यह 26 जून 2010 को हो चुका था। 2026 की विज्ञप्ति उसी शब्द को वापस लाती है, इस बार सरकार के अपने खाते में।

जिस लेवी की दर विज्ञप्ति में नहीं है

मार्च 2026 की विज्ञप्ति में एक वाक्य है कि शुल्क कटौती के साथ-साथ सरकार ने डीज़ल के निर्यात पर लेवी लगाई है, ताकि रिफ़ाइनरी का उत्पादन पहले घरेलू माँग की ओर जाए। दर नहीं दी गई। इंडमनी की रिपोर्ट इस लेवी को डीज़ल पर 21 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर और विमान ईंधन पर 29 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर बताती है। आउटलुक इंडिया की रिपोर्ट में डीज़ल के लिए 18 रुपये 50 पैसे मिलते हैं। सरकारी विज्ञप्ति में इनमें से कोई अंक नहीं है।

संसद में सरकार ने बढ़ोतरी को 'मामूली' कहा

4 अगस्त 2026 को राज्यसभा के अतारांकित प्रश्न 1846 के लिखित उत्तर में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार ने मार्च 2026 में केंद्रीय उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया, ब्रेंट अप्रैल 2026 में 138.2 डॉलर प्रति बैरल के शिखर पर पहुँचा था, और अप्रैल-जून में औसत खुदरा महँगाई 3.9 फ़ीसदी रही। उसी उत्तर में लिखा है कि तेल विपणन कंपनियों ने खुदरा दाम मामूली रूप से बढ़ाए हैं। जिन बढ़ोतरियों को यह शब्द दिया गया, वे चार साल की सबसे तेज़ बढ़ोतरियाँ थीं।

जून तिमाही: 18,149 करोड़ रुपये का साझा घाटा

केरल में कोच्चि स्थित भारत पेट्रोलियम की रिफ़ाइनरी, जहाँ आसवन स्तंभ और गोल भंडारण टंकियाँ दिखती हैं, 4 सितंबर 2026 की तस्वीर। जून तिमाही में बीपीसीएल का सकल रिफ़ाइनिंग मार्जिन 41.4 डॉलर प्रति बैरल था, फिर भी कंपनी को शुद्ध घाटा हुआ
तस्वीर: Rehman Abubakr, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

आउटलुक बिज़नेस के विश्लेषण के अनुसार अप्रैल-जून 2026 तिमाही में इंडियन ऑयल को 2,661 करोड़ रुपये, बीपीसीएल को 3,962 करोड़ रुपये और एचपीसीएल को 11,526 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। तीनों जोड़ने पर 18,149 करोड़ रुपये बैठते हैं, और रिटेलइंटेल ने फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के आधार पर यही साझा आँकड़ा दिया है। इसी तिमाही में रिफ़ाइनिंग का काम मुनाफ़े में था: बीपीसीएल का सकल रिफ़ाइनिंग मार्जिन 41.4 डॉलर प्रति बैरल, इंडियन ऑयल का 36 डॉलर। तिमाही में ब्रेंट 125 डॉलर तक गया था।

एचपीसीएल का घाटा दो जगह दो अलग अंकों में

एचपीसीएल के नतीजों पर दो अलग अंक चल रहे हैं। कोटक नियो के ब्योरे में स्टैंडअलोन शुद्ध घाटा 11,526.41 करोड़ रुपये है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में 4,370.87 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा था; कुल आय 1,46,407.30 करोड़ रुपये रही। इक्विटीबुल्स की सुर्ख़ी में घाटा 12,265 करोड़ रुपये और आमदनी 21 फ़ीसदी बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। रिफ़ाइनिंग मार्जिन भी दो जगह दो हैं: आउटलुक बिज़नेस में 23.4 डॉलर, कोटक नियो में 23.80 डॉलर प्रति बैरल।

एलपीजी की वह रक़म जो अभी किताब में नहीं आई

एचपीसीएल ने अप्रैल-जून तिमाही में एलपीजी अंडर-रिकवरी की भरपाई के तौर पर 1,980 करोड़ रुपये दर्ज किए, जो पेट्रोलियम मंत्रालय की मंज़ूर की गई क्षतिपूर्ति की तीन मासिक किस्तें थीं। इसके बावजूद 30 जून 2026 तक कंपनी के खाते में एलपीजी बफ़र का 16,405.92 करोड़ रुपये का घाटा ऐसा पड़ा है जिसे अभी किताब में नहीं लिया गया। घरेलू सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी मार्च तिमाही के 80 रुपये से बढ़कर जून तिमाही में 510 रुपये प्रति सिलेंडर हुई और जुलाई में क़रीब 490 रुपये रही।

30,000 करोड़ रुपये, बारह किस्तों में

8 अगस्त 2025 को मंत्रिमंडल ने तीनों सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी की बिक्री पर हुई अंडर-रिकवरी के लिए 30,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति मंज़ूर की थी, जो बारह किस्तों में दी जानी है। विज्ञप्ति में कारण यह दर्ज है कि 2024-25 में अंतरराष्ट्रीय एलपीजी दाम ऊँचे बने रहे और वह बढ़ोतरी घरेलू उपभोक्ता तक नहीं पहुँचाई गई। इससे पहले 12 अक्तूबर 2022 को 22,000 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान दिया गया था, जो जून 2020 से जून 2022 तक के घाटे के लिए था और जिसकी घोषणा तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने की थी।

सिलेंडर का दाम जून से टिका है

घरेलू रसोई गैस का लाल सिलेंडर, जिस पर 14.2 किलो का शुद्ध वज़न छपा है। दिल्ली में इसका दाम 9 सितंबर 2026 को 942 रुपये था और जून 2026 के बाद नहीं बदला
तस्वीर: தகவலுழவன், विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

रसोई गैस का बोर्ड भी रुका हुआ है। गुडरिटर्न्स के अनुसार 9 सितंबर 2026 को 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर का दाम दिल्ली में 942 रुपये, मुंबई में 941 रुपये 50 पैसे, कोलकाता में 968 रुपये और चेन्नई में 957 रुपये 50 पैसे था, और जून 2026 के बाद इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ। पेट्रोल और डीज़ल के उलट रसोई गैस पर सरकार आज भी दाम तय करती है: 29 नवंबर 2021 के राज्यसभा उत्तर में साफ़ लिखा है कि सब्सिडी वाली घरेलू एलपीजी और पीडीएस मिट्टी के तेल का उपभोक्ता दाम सरकार नियंत्रित करती रहती है।

चार सितंबर और नौ सितंबर के बीच

पाँच दिन में आँकड़े हिले हैं। फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस की 7 सितंबर की रिपोर्ट के आधार पर रिटेलइंटेल ने 4 सितंबर की स्थिति दर्ज की: पेट्रोल पर विपणन मार्जिन ऋणात्मक 4 रुपये 20 पैसे और डीज़ल पर ऋणात्मक 24 रुपये 90 पैसे प्रति लीटर, और भारतीय बास्केट 101.07 डॉलर प्रति बैरल। पाँच दिन बाद आईसीआरए का आकलन पेट्रोल पर ऋणात्मक 5 रुपये और डीज़ल पर ऋणात्मक 23 रुपये है। डीज़ल का घाटा घटा हुआ दिखता है जबकि बास्केट 101 से 108.91 डॉलर पर चढ़ी। दोनों रिपोर्टें इस उलटी दिशा की व्याख्या नहीं करतीं।

रोज़ दाम बदलने की व्यवस्था, जिसका फ़ॉर्मूला छपा नहीं है

जून 2017 से देश भर के पंपों पर दाम रोज़ सुबह छह बजे बदलते हैं। इससे पहले पखवाड़े में एक बार बदलते थे। 29 नवंबर 2021 के राज्यसभा उत्तर में सरकार ने इतना ही बताया कि तेल विपणन कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय उत्पाद क़ीमतों, विनिमय दर, कर ढाँचे, अंतर्देशीय भाड़े और अन्य लागत तत्वों को देखते हुए उचित निर्णय लेती हैं। कितने दिन का औसत लिया जाता है, किस अनुपात में लागत आगे बढ़ाई जाती है, यह किसी सरकारी दस्तावेज़ में दर्ज नहीं मिला।

जो कैलकुलेटर अब भी पुराना शुल्क दिखाते हैं

उपभोक्ताओं को दाम का ब्योरा दिखाने वाली वेबसाइटें मार्च 2026 की कटौती के बाद भी पुरानी दरों पर अटकी हैं। बैंकबाज़ार के दिल्ली पेट्रोल पन्ने पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क 27 रुपये 90 पैसे प्रति लीटर लिखा है, कवरफ़ॉक्स के पन्ने पर 21 रुपये 90 पैसे, जबकि अधिसूचना के बाद यह 11 रुपये 90 पैसे है। दोनों पन्ने 9 सितंबर 2026 का दाम 102.12 रुपये सही दिखाते हैं। पंप का अंक अपडेट होता रहा, उसके नीचे का ब्योरा नहीं।

रुपया, आयात बिल और उस दिन का बाज़ार

मुंबई में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत, जिसकी दीवार पर लगा डिजिटल पट्ट सूचकांक के अंक दिखाता है। 9 सितंबर को सेंसेक्स 813 अंक नीचे गया और रुपया 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ
तस्वीर: नियंत शेखर, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.0

9 सितंबर को रुपया 34 पैसे गिरकर 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ और सेंसेक्स 813 अंक नीचे गया। तेल डॉलर में महँगा हुआ और डॉलर रुपये में महँगा हुआ, दोनों एक साथ। पीपीएसी के आँकड़े के अनुसार अप्रैल से जुलाई तक भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 56 फ़ीसदी से ज़्यादा बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 40.5 अरब डॉलर था। मात्रा लगभग उतनी ही रही: पिछले साल के 8 करोड़ 15 लाख टन के मुक़ाबले 8 करोड़ 19 लाख टन। भारत अपनी ज़रूरत का 88 फ़ीसदी से ज़्यादा कच्चा तेल बाहर से मँगाता है।

ब्याज दर पर अगली तारीख़

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के शोध प्रमुख राजीव शरण के आकलन के अनुसार ओपेक प्लस के उत्पादन स्थिर रखने और भू-राजनीतिक जोखिम बने रहने से दाम आने वाले महीने में मज़बूत और उतार-चढ़ाव भरे रहेंगे, और नरमी तभी आएगी जब तनाव घटे। उन्होंने 7 अक्तूबर की समीक्षा में रिज़र्व बैंक से रेपो दर 5.25 फ़ीसदी पर बनाए रखने की उम्मीद जताई, इस शर्त के साथ कि ब्रेंट सौ डॉलर के ऊपर टिका रहा तो रुख़ सख़्ती की ओर मुड़ सकता है। उन्होंने विमानन, पेंट, टायर, रसायन और लॉजिस्टिक्स के मार्जिन पर दबाव भी गिनाया।

चेन्नई और कोलकाता के अंक चुपचाप खिसके हैं

26 मई 2026 को बिज़नेस टुडे ने चेन्नई में पेट्रोल 107 रुपये 87 पैसे और कोलकाता में 113 रुपये 47 पैसे दर्ज किया था। 9 सितंबर को कारदेखो के पन्ने पर चेन्नई 107 रुपये 74 पैसे और कोलकाता 113 रुपये 50 पैसे दिखता है, जबकि दिल्ली और मुंबई के अंक ज्यों के त्यों हैं। जिस अवधि को हर रिपोर्ट फ़्रीज़ कह रही है, उसमें दो महानगरों के अंक कुछ पैसे खिसके हैं। दिल्ली का बोर्ड 25 मई से 102 रुपये 12 पैसे और 95 रुपये 20 पैसे पर खड़ा है।

स्रोतकश्मीर ऑब्ज़र्वर, पीटीआई की ख़बर का पूरा पाठ, 9 सितंबर 2026, द ट्रिब्यून, उसी पीटीआई ख़बर का संस्करण जिसमें पीपीएसी की बास्केट का आँकड़ा है, 9 सितंबर 2026, पीआईबी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की विज्ञप्ति संख्या 2245970, 27 मार्च 2026, पीआईबी, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की विज्ञप्ति 'डीरेगुलेशन ऑफ़ डीज़ल प्राइसेज़', 18 अक्तूबर 2014, पीआईबी, राज्यसभा में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का लिखित उत्तर, 12 दिसंबर 2018, पीआईबी, राज्यसभा में पेट्रोलियम राज्यमंत्री रामेश्वर तेली का लिखित उत्तर, 29 नवंबर 2021, पीआईबी, मंत्रिमंडल की विज्ञप्ति, एलपीजी अंडर-रिकवरी पर 30,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति, 8 अगस्त 2025, टैक्सगुरु, राज्यसभा अतारांकित प्रश्न 1846 के लिखित उत्तर पर रिपोर्ट, 4 अगस्त 2026, कार्स24, मार्च 2026 की उत्पाद शुल्क कटौती का दर-वार ब्योरा, इंडमनी, उसी कटौती और निर्यात लेवी पर रिपोर्ट, द ट्रिब्यून, अप्रैल 2025 की 2 रुपये की शुल्क बढ़ोतरी और तेल मंत्रालय की पोस्ट, आउटलुक बिज़नेस, तीनों तेल कंपनियों के जून तिमाही नतीजों का तुलनात्मक विश्लेषण, कोटक नियो, एचपीसीएल के जून 2026 तिमाही नतीजों का ब्योरा, रिटेलइंटेल, फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर आधारित सारांश, 7 सितंबर 2026, बिज़नेस टुडे, मार्च 2024 की 2 रुपये की कटौती और तेल मंत्रालय का बयान, रिपब्लिक वर्ल्ड, मई 2026 की चार बढ़ोतरियों की तारीख़ें और रक़में, बिज़नेस टुडे, 26 मई 2026 को महानगरों के दाम, गुडरिटर्न्स, 9 सितंबर 2026 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम, अर्बनएकर्स, ब्रिकवर्क रेटिंग्स के राजीव शरण के आकलन सहित रिपोर्ट, सितंबर 2026, द ट्रिब्यून, 2022 में एलपीजी घाटे के लिए 22,000 करोड़ के एकमुश्त अनुदान की ख़बर, कारदेखो, 9 सितंबर 2026 को महानगरों में पेट्रोल-डीज़ल के दाम, बैंकबाज़ार, दिल्ली पेट्रोल दाम और उसका पुराना शुल्क-ब्योरा, कवरफ़ॉक्स, पेट्रोल दाम के घटकों की सूची और पुरानी शुल्क दर, इक्विटीबुल्स, एचपीसीएल की जून तिमाही के घाटे का दूसरा आँकड़ा, आउटलुक इंडिया, मार्च 2026 की अधिसूचना पर रिपोर्ट जिसकी दरें दूसरों से मेल नहीं खातीं

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।