विषय
रुपया
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पैसा
कच्चे तेल की क़ीमत 117 डॉलर पार, आयात बिल में रुपये का हिस्सा नाममात्र
गुरुवार को सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ और अंतर-बैंक बाज़ार में रुपया 23 पैसे टूटकर 95.96 पर आया, पर रिज़र्व बैंक की अपनी संदर्भ दर के हिसाब से हफ़्ते भर में रुपया सिर्फ़ 2 पैसे गिरा है। पीपीएसी के मुताबिक़ भारत जो कच्चा तेल ख़रीदता है उसकी क़ीमत 117.65 डॉलर प्रति बैरल पहुँच गई है, ब्रेंट से ऊपर। दिल्ली में पेट्रोल-डीज़ल का दाम 25 मई से नहीं बदला।
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इत्मीनान
रुपया एक झटके में 4.7619 से 7.50 प्रति डॉलर हुआ, 6 जून 1966 को, और एक अमेरिकी दस्तावेज़ ख़ुद अपनी दी हुई तारीख़ पर बँटा हुआ है
अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व बोर्ड की अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट, 27 जुलाई 1966 की, इसी घटना की तारीख़ एक जगह 5 जून लिखती है और दो जगह 6 जून, एक ही दस्तावेज़ में। भारतीय रिज़र्व बैंक की अपनी आधिकारिक इतिहास-पुस्तक और उस हफ़्ते की लोकसभा-राज्यसभा बहस का पूरा पाठ यह लेख खोल नहीं सका; जो खुला और जो नहीं खुला, दोनों दर्ज हैं।
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समझिए
बजट के हर सौ रुपये में ब्याज का हिस्सा बीस है या छब्बीस, दोनों आंकड़े एक ही दस्तावेज़ में छपे हैं
बजट के सार 2026-2027 के पहले पन्ने की तालिका से ब्याज भुगतान 2026-27 के बजट अनुमान में कुल ख़र्च का 26.3 फ़ीसदी बैठता है। उसी दस्तावेज़ के तीसरे पन्ने के चार्ट में यही रक़म 20 लिखी है। फ़र्क़ राज्यों का हिस्सा जोड़ने-घटाने का है, और दस्तावेज़ ख़ुद यह अपनी टिप्पणी में बताता है।
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पैसा
रिज़र्व बैंक एक लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचकर बैंकों से नक़दी वापस खींच रहा है
11 सितंबर की शाम तीन नीलामियों का ऐलान हुआ: 17 सितंबर को 50 हज़ार करोड़, फिर 21 और 28 सितंबर को 25-25 हज़ार करोड़। उसी सुबह 26 दिन की नीलामी में रिज़र्व बैंक ने पाँच लाख करोड़ माँगे थे और बैंकों ने 60,449 करोड़ दिए। रिवर्स रेपो का पैसा कुछ दिन बाद लौट आता है; बॉन्ड बेचकर निकाली गई रक़म 2029 से पहले नहीं लौटेगी।
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पैसा
भारत ने अप्रैल से जुलाई में उतना ही तेल ख़रीदा जितना पिछले साल, और 22.9 अरब डॉलर ज़्यादा चुकाए
शुक्रवार को हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदेब के बीच बसे पेरिम द्वीप पर क़ब्ज़ा कर लिया। यही वह रास्ता है जिससे रूस का तेल भारत आता है, और फ़रवरी के बाद से सऊदी अरब का भी। ब्रेंट उसी दिन 104 डॉलर के आसपास बंद हुआ, रुपया 95.57 पर।
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पैसा
कच्चा तेल सौ डॉलर के पार गया, पर पंप का दाम 107 दिन से नहीं हिला और घाटा तेल कंपनियों की किताब में दर्ज हो रहा है
दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये 12 पैसे और डीज़ल 95 रुपये 20 पैसे पर 25 मई से टिका है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के हिसाब से सितंबर के औसत दाम पर पेट्रोल की बिक्री पर 5 रुपये और डीज़ल पर 23 रुपये प्रति लीटर का ऋणात्मक विपणन मार्जिन बैठ रहा है। पिछले सत्रह महीनों में केंद्र ने उत्पाद शुल्क एक बार बढ़ाया, एक बार घटाया, और दोनों बार पंप का बोर्ड नहीं बदला।
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पैसा
रिज़र्व बैंक ने सात लाख करोड़ माँगे, बैंकों ने ढाई लाख दिए; बैंकों के पास इतना पैसा इसलिए है कि प्रवासी भारतीयों ने तीन महीने में 127 अरब डॉलर जमा किए
बैंकिंग व्यवस्था में 11 लाख करोड़ रुपये फ़ालतू पड़े हैं। यह पैसा रुपये को बचाने की उस योजना से आया जो 8 जून को शुरू हुई और 31 अगस्त को समय से पहले बंद करनी पड़ी, क्योंकि जितना माँगा था उससे कहीं ज़्यादा आ गया। अब रिज़र्व बैंक उसी पैसे को वापस खींच रहा है, और बैंक तीस दिन के लिए देने को तैयार नहीं।