विषय
आंध्र प्रदेश
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समझिए
बंगाल की खाड़ी का अवदाब शाम साढ़े पांच बजे पुरी से 310 किलोमीटर दूर दर्ज था, दोपहर की विज्ञप्ति में वह अवदाब था ही नहीं
सोमवार, 21 सितंबर की दोपहर 2 बजे और 2:05 बजे मौसम विभाग की अंग्रेज़ी और हिंदी विज्ञप्तियों में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम को 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया' लिखा गया, यह नाम ख़ुद चक्रवात चेतावनी प्रभाग की अपनी शब्दावली पुस्तिका में कहीं दर्ज नहीं है। उसी रात साढ़े नौ बजे जारी राष्ट्रीय बुलेटिन नंबर 1 में लिखा मिला कि शाम साढ़े पांच बजे तक यह सिस्टम पुरी से 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व अवदाब बन चुका था। उसी दोपहर की विज्ञप्ति में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ और हिस्सों से लौट जाने की घोषणा भी है, दो दिन की ख़ामोशी के बाद।
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पैसा
प्रीमियर एनर्जीज़ ने ख़ुद को 10.6 गीगावाट क्षमता वाली देश की सबसे बड़ी सोलर सेल निर्माता बताया, सरकार की सूची में उसकी दर्ज क्षमता तेलंगाना के प्लांट पर 1,358 और 751 मेगावाट है, आंध्र प्रदेश वाला नया प्लांट सूची में है ही नहीं
सोमवार, 21 सितंबर की सुबह 8:14 बजे प्रीमियर एनर्जीज़ लिमिटेड ने बीएसई और एनएसई को बताया कि आंध्र प्रदेश के नैडूपेटा में उसका 7 गीगावाट का नया सोलर सेल कारख़ाना चालू हो गया है और ट्रायल रन शुरू हो चुके हैं, जिससे कंपनी की कुल क्षमता 10.6 गीगावाट हो गई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिस सूची के दम पर तय होता है कि किसी कंपनी का सेल सरकारी-समर्थित सोलर परियोजना में लग सकता है या नहीं, उसमें प्रीमियर एनर्जीज़ फ़ोटोवोल्टिक प्राइवेट लिमिटेड की दर्ज क्षमता तेलंगाना के फ़ैब सिटी प्लांट में 1,358 मेगावाट टॉपकॉन और 751 मेगावाट मोनो-पर्क है, नैडूपेटा का नाम उस सूची में कहीं नहीं है।
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देश
मौसम विभाग की दोपहर 1:40 बजे की विज्ञप्ति में मछुआरों के लिए उसी शाम की समय-सीमा है
रविवार, 20 सितंबर की इस विज्ञप्ति में मछुआरों के लिए चार पंक्तियां हैं। तीन बताती हैं कि समुद्र के किन हिस्सों में किन तारीख़ों तक नहीं जाना। चौथी कहती है कि जो समुद्र में हैं, वे उसी शाम तक तट पर लौट आएं। उसी दस्तावेज़ में दर्ज है कि बंगाल की खाड़ी का निम्न दाब क्षेत्र 23 सितंबर की सुबह के आसपास उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों के पास पहुंच सकता है।
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समझिए
कवच का एक किलोमीटर लखनऊ मंडल में 41.47 लाख का, मुरादाबाद में 23.88 लाख का, और दोनों विज्ञप्तियाँ वजह नहीं बतातीं
शनिवार, 19 सितंबर की दोपहर रेल मंत्रालय ने 53 मिनट में चार काम मंज़ूर किए, कुल 736.23 करोड़ रुपये। सबसे बड़ी रक़म उत्तर-पूर्व रेलवे के लखनऊ मंडल में कवच 4.0 की है: 607.7 रूट किलोमीटर पर 252 करोड़। अठारह दिन पहले उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद मंडल में वही संस्करण 712 रूट किलोमीटर पर 170 करोड़ में मंज़ूर हुआ था।
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देश
मॉनसून 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौटा, और उस दिन के 695.6 मिलीमीटर मौसम विभाग की किसी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं हैं
शनिवार, 19 सितंबर 2026 को भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दोपहर 2:20 बजे अंग्रेज़ी में और 2:25 बजे हिंदी में जो विज्ञप्ति जारी की, उसमें लिखा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौट गया है, जबकि उसकी सामान्य वापसी की तारीख़ 17 सितंबर थी। उसी दस्तावेज़ में अगला सिस्टम भी दर्ज है — उसी शाम उत्तरी अंडमान सागर पर बनने वाला निम्न दाब क्षेत्र। और उस दिन हर जगह छपा मौसम का हिसाब, 695.6 मिलीमीटर, उन सत्ताईस पन्नों में कहीं नहीं है।
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देश
मंत्रिमंडल ने 20,804 करोड़ की आठ रेल परियोजनाएँ मंज़ूर कीं, पर मंज़ूर 35,966 किलोमीटर में से 12,769 ही चालू हुए हैं
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 9 सितंबर को आठ मिनट के अंतर पर दो विज्ञप्तियाँ जारी कीं: नौ राज्यों की आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ, 1,196 किलोमीटर, 2029-30 की समयसीमा। रेल मंत्रालय के अपने संसदीय जवाबों में मंज़ूरी और चालू होने के बीच का फ़ासला दर्ज है। दक्षिण वाली विज्ञप्ति हर परियोजना की लंबाई छापती है, पूरब वाली एक भी नहीं। और कार्बन बचत को पेड़ों में बदलने का गुणा दोनों में एक जैसा नहीं है।
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पैसा
आंध्र के झींगा किसान तीस सितंबर की मियाद दे रहे हैं, और उनका बाज़ार अमेरिका में शुल्क के नीचे दबा है
फ़ीड एक सौ नौ रुपये किलो है और उसमें और बढ़ोतरी की तैयारी है। किसानों की माँग है कि उसे बीस हज़ार रुपये प्रति टन सस्ता कराया जाए, वरना वे तालाब ख़ाली छोड़ देंगे।