मॉनसून 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौटा, और उस दिन के 695.6 मिलीमीटर मौसम विभाग की किसी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं हैं
शनिवार, 19 सितंबर 2026 को भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दोपहर 2:20 बजे अंग्रेज़ी में और 2:25 बजे हिंदी में जो विज्ञप्ति जारी की, उसमें लिखा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौट गया है, जबकि उसकी सामान्य वापसी की तारीख़ 17 सितंबर थी। उसी दस्तावेज़ में अगला सिस्टम भी दर्ज है — उसी शाम उत्तरी अंडमान सागर पर बनने वाला निम्न दाब क्षेत्र। और उस दिन हर जगह छपा मौसम का हिसाब, 695.6 मिलीमीटर, उन सत्ताईस पन्नों में कहीं नहीं है।

इस मॉनसून में देश पर अब तक 695.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, और यह सामान्य से 15 फ़ीसदी कम है। यह वाक्य इंडियन एक्सप्रेस का है। तारीख़ 19 सितंबर 2026।
उसी शनिवार भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दो प्रेस विज्ञप्तियाँ जारी कीं। पहली अंग्रेज़ी में, दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर, तेरह पन्नों की। दूसरी विभाग के अपने हिंदी अनुवाद में, 2 बजकर 25 मिनट पर, चौदह पन्नों की। सूची में वे 5326 और 5327 नंबर पर दर्ज हैं।
इन सत्ताईस पन्नों में 695.6 कहीं नहीं है। मौसम का कोई कुल जोड़ नहीं है। किसी राज्य की कमी का कोई आँकड़ा नहीं है।
जो है, वह पहले पन्ने पर है। अंग्रेज़ी विज्ञप्ति में: "The Southwest monsoon has withdrawn from some parts of West Rajasthan today, the 19th September, 2026 against the normal date of 17th September." विभाग के अपने हिंदी पाठ में वही वाक्य इस तरह है: "दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आज, 19 सितंबर 2026 को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस लौट गया है, जबकि इसकी सामान्य वापसी की तारीख 17 सितंबर थी।"
चार महीने की एक यात्रा उसी दिन उलटी दिशा में मुड़ी। और उसी दस्तावेज़ में, वापसी की घोषणा से कुछ ही पंक्तियाँ नीचे, अगली बारिश का पूर्वानुमान दर्ज है।
वापसी की तीन शर्तें, और 19 सितंबर की विज्ञप्ति में उनका ज़िक्र
मॉनसून का लौटना कोई दृश्य नहीं है। इसे विभाग घोषित करता है, कसौटी पर परखकर। कसौटी विभाग की अपनी वेबसाइट पर लिखी है, 'Withdrawal of SW Monsoon' शीर्षक वाले पन्ने पर, और वह कुछ ही वाक्यों की है।
पहली शर्त तारीख़ की है: "Withdrawal from extreme north-western parts of the country is not attempted before 1st September." यानी 1 सितंबर से पहले वापसी घोषित करने की कोशिश ही नहीं की जाती। इसके बाद तीन मौसमी लक्षण देखे जाते हैं। पन्ने पर वे इस तरह लिखे हैं: "Cessation of rainfall activity over the area for continuous 5 days"; "Establishment of anticyclone in the lower troposphere (850 hPa and below)"; और "Considerable reduction in moisture content as inferred from satellite water vapour imageries and tephigrams."
तीन चीज़ें — इलाक़े में लगातार पाँच दिन बारिश का बंद रहना, नीचे के वायुमंडल में प्रतिचक्रवात का जम जाना, और नमी का साफ़ घट जाना। तीनों में से कोई भी 19 सितंबर की विज्ञप्ति में नाम लेकर दर्ज नहीं है। कौन-सी शर्त कब पूरी हुई, विज्ञप्ति नहीं बताती। 'anticyclone' शब्द एक बार भी नहीं आता। न 19 सितंबर की विज्ञप्ति में, न 18 सितंबर की में, न 17 सितंबर के दो-हफ़्ते वाले पूर्वानुमान में, जो उन तीनों में सबसे लंबा दस्तावेज़ है।
घोषणा जिस इकाई पर लागू है, वह भी ध्यान से पढ़ने लायक़ है। विज्ञप्ति पूरे पश्चिमी राजस्थान की बात नहीं करती। वह कहती है, "some parts of West Rajasthan", यानी कुछ हिस्से। किन हिस्सों से, यह अगली पंक्ति में रेखा के रूप में है: "The line of withdrawal of southwest monsoon passes through 27.0°N/68.0°E, Ramgarh, Mohangarh, Phalodi, Khajuwala and 29.5°N/71.5°E on 19th September." दो अक्षांश-देशांतर और बीच में चार क़स्बों के नाम। रेखा के उस तरफ़ मॉनसून नहीं रहा; इस तरफ़ अब भी है।

उसी विज्ञप्ति के पूर्वानुमान वाले हिस्से में लिखा है कि 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान में कहीं-कहीं या छिटपुट बारिश हो सकती है। यह कोई विरोधाभास नहीं है। बारिश रेखा के पूरब वाले हिस्से में हो सकती है, और उपखंड पूरा का पूरा वापसी में नहीं गया। लेकिन यह बताता है कि वापसी होना और बारिश बंद होना एक बात नहीं हैं।
आगे की वापसी के लिए कसौटी थोड़ी अलग है। वेबसाइट का पन्ना कहता है कि देश के बाक़ी हिस्सों से वापसी "keeping the spatial continuity" घोषित की जाती है, नमी के घटने और पाँच दिन के सूखे मौसम के साथ। यानी रेखा को लगातार बढ़ना होता है, टुकड़ों में नहीं। 19 सितंबर की विज्ञप्ति अगले तीन-चार दिनों में राजस्थान के और हिस्सों, पंजाब के कुछ हिस्सों तथा सौराष्ट्र व कच्छ से वापसी की परिस्थितियाँ अनुकूल बताती है।
पूरे देश से वापसी कब मानी जाएगी, इस पर विभाग के दो दस्तावेज़ दो बातें कहते हैं। वेबसाइट का कसौटी वाला पन्ना कहता है, "only after 1st October"। विभाग की मॉनसून प्रश्नोत्तर पुस्तिका के प्रश्न 35 में यही बात "around 15th October" लिखी है। पुस्तिका पुरानी है। उसमें देश की मौसमी वर्षा का दीर्घावधि औसत अब भी 1961-2010 के आधार पर 880.6 मिलीमीटर दर्ज है, जो विभाग की अपनी ताज़ा विज्ञप्तियों में बदल चुका है। दोनों वाक्य विभाग के अपने हैं। हम यहाँ दोनों दर्ज कर रहे हैं और किसी एक को नहीं चुन रहे।
18 तारीख़ की विज्ञप्ति में "becoming favourable", 19 की में "has withdrawn"
18 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर जारी विज्ञप्ति का विषय इन शब्दों में है: "Conditions are becoming favourable for withdrawal of Southwest Monsoon from some parts of West Rajasthan around 19th September, 2026."
अगले दिन 2 बजकर 20 मिनट पर विषय बदल गया: "The Southwest monsoon has withdrawn from some parts of West Rajasthan today, the 19th September, 2026."
चौबीस घंटे का फ़ासला, और एक क्रिया का फ़र्क़। 18 तारीख़ का दस्तावेज़ संभावना है, 19 का घोषणा।
एक और बात जो इन दोनों को साथ पढ़ने से ही दिखती है। 18 सितंबर की विज्ञप्ति में पिछले चौबीस घंटे का दर्ज मौसम बताता है कि पूर्वी राजस्थान, सौराष्ट्र, गुजरात, बिहार और सिक्किम में कहीं-कहीं 12 से 20 सेंटीमीटर बारिश हुई थी। जिस दिन वापसी की बात पक रही थी, उसी दिन राजस्थान के दूसरे हिस्से में बहुत भारी बारिश दर्ज हो रही थी।
18 तारीख़ की उसी विज्ञप्ति का दूसरा विषय अंडमान सागर पर 19 सितंबर के आसपास निम्न दाब क्षेत्र बनने की संभावना था। वह वाक्य अगले दिन घोषणा में नहीं बदला। उसकी बारी बाद में आनी थी।
दो दिन देर, या चार दिन
विभाग का वाक्य 19 सितंबर की वापसी को 17 सितंबर की सामान्य तारीख़ के मुक़ाबले रखता है। दोनों तारीख़ों के बीच दो दिन हैं। मेट्रो वार्ता और हेराल्ड गोवा में 19 सितंबर को छपी एक ही कॉपी यही लिखती है, दो दिन की देरी।
उसी दिन इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ और लिखा। उसके शब्दों में वापसी "is close to the climatological normal (September 17), with a deviation of four days"। सामान्य तारीख़ दोनों जगह 17 सितंबर है। देरी एक जगह दो दिन, दूसरी जगह चार। यह अंतर हम दर्ज कर रहे हैं और सुलझा नहीं रहे।
असली सवाल इससे नीचे का है: 17 सितंबर आया कहाँ से? यह तारीख़ विभाग के एक शोध दस्तावेज़ से आती है। जलवायु अनुसंधान एवं सेवा प्रभाग, पुणे की शोध रिपोर्ट CRS RR 003/2020, जारी तारीख़ 15 मई 2020, शीर्षक "New Normal Dates of Onset/Progress and Withdrawal of Southwest Monsoon over India"। लेखकों में डी. एस. पई, सुनीता देवी, सुलोचना गाडगिल, एम. महापात्र और एम. राजीवन शामिल हैं। रिपोर्ट के निष्कर्षों में सातवाँ बिंदु यह है: "As per the new normal, monsoon start its withdrawal from northwest India around 17th September, which is a delay of more than 2 weeks compared to the existing normal date (i.e. 1st September)."
इससे पहले सामान्य तारीख़ 1 सितंबर थी। और वह तारीख़ 1901 से 1940 के आँकड़ों से बनी थी।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि नई तारीख़ें किस अवधि से निकाली गईं। आगमन और प्रगति के सामान्य 1961-2019 के आँकड़ों से, और वापसी के सामान्य 1971-2019 की उन तारीख़ों से जो विभाग ने हर साल परिचालन स्तर पर घोषित की थीं। पूरे देश को ढकने की तारीख़ भी इसी में बदली, 15 जुलाई से घटकर 8 जुलाई। इस साल 9 जुलाई की विज्ञप्ति में विभाग ने लिखा कि मॉनसून ने पूरे देश को 9 जुलाई को ढका, "against the normal date of 08th July"। यानी कुछ तारीख़ें आगे खिसकीं और कुछ पीछे।
अब उसी रिपोर्ट का एक आँकड़ा, जो दो दिन और चार दिन वाली बहस को उसके अनुपात में रख देता है। वापसी की तारीख़ों का मानक विचलन रिपोर्ट देश के ज़्यादातर हिस्सों के लिए 7 से 9 दिन बताती है; गुजरात के कुछ हिस्सों में 10 दिन और पूर्वोत्तर भारत में 6। मानक विचलन का मतलब है कि साल-दर-साल तारीख़ इतनी इधर-उधर होती ही रहती है। दो दिन उस बिखराव के भीतर हैं। चार दिन भी।
695.6 मिलीमीटर किस इलाक़े का, किस अवधि का और किस औसत के मुक़ाबले
इंडियन एक्सप्रेस का वाक्य पूरा इस तरह है: "In this season (till September 19), the country-wide rainfall was 15 per cent below normal at 695.6mm." यह आँकड़ा अख़बार का है, जो उसे विभाग का बताता है। 19 सितंबर की विज्ञप्तियों में यह नहीं है, इसलिए इसे हर बार अख़बार और तारीख़ के नाम के साथ ही पढ़ा जाना चाहिए।
अब इसे रखना किसके मुक़ाबले है, यह तय करना ज़रूरी है, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा गड़बड़ होती है। मौसमी दीर्घावधि औसत एक चीज़ है और सामान्य से विचलन दूसरी। विभाग की 29 मई 2026 की दीर्घावधि पूर्वानुमान विज्ञप्ति में लिखा है: "The LPA of the seasonal rainfall over the country as a whole based on data of 1971-2020 is 87 cm." यानी जून से सितंबर तक के पूरे चार महीनों का औसत 870 मिलीमीटर है।
695.6 मिलीमीटर उस 870 का लगभग 80 फ़ीसदी बनता है। लेकिन 15 फ़ीसदी की कमी का मतलब यह नहीं है। मौसम अभी ख़त्म नहीं हुआ था। 19 सितंबर तक की कमी उस तारीख़ तक के सामान्य के मुक़ाबले नापी जाती है, पूरे मौसम के औसत के मुक़ाबले नहीं।
वह बीच वाला सामान्य विभाग के एक दूसरे दस्तावेज़ में मिल जाता है। 17 सितंबर 2026 की विस्तारित पूर्वानुमान विज्ञप्ति की तालिका 1 में, "01.06.2026 TO 16.09.2026" शीर्षक वाले ख़ानों में, पूरे देश की तीन संख्याएँ दर्ज हैं: वास्तविक 682.0 मिलीमीटर, सामान्य 801.5 मिलीमीटर, विचलन 15 फ़ीसदी कम। यह विभाग का अपना आँकड़ा है, विभाग के अपने काग़ज़ पर, तारीख़ के साथ।
दोनों को मिलाकर देखिए। 16 सितंबर तक 682.0 और 19 सितंबर तक 695.6 के बीच तीन दिन में 13.6 मिलीमीटर का फ़र्क़ है। 15 फ़ीसदी की कमी बनाए रखने के लिए 19 सितंबर तक का सामान्य क़रीब 818 मिलीमीटर होना चाहिए, यानी 801.5 से लगभग 17 मिलीमीटर ऊपर। सितंबर के मध्य में तीन दिन का सामान्य इतना ही बैठता है। दोनों आँकड़े आपस में टकराते नहीं।
यहाँ तीन अलग-अलग संदर्भ-अवधियाँ एक साथ चल रही हैं, और ख़बरों में तीनों एक जैसी दिखती हैं। वापसी की सामान्य तारीख़ 1971-2019 की परिचालन तारीख़ों से बनी है। आगमन की सामान्य तारीख़ें 1961-2019 से। और वर्षा का दीर्घावधि औसत 1971-2020 से। यह विभाग की 31 अगस्त 2026 की विज्ञप्ति में भी दोहराया गया है, जहाँ सितंबर महीने का औसत "based on data from 1971-2020, is about 167.9 mm" लिखा है। तीन संख्याएँ, तीन अलग आधार।
एक और फ़र्क़, जो छोटा दिखता है और नहीं है। मौसम कब से गिना जा रहा है? इंडियन एक्सप्रेस लिखता है "this season (till September 19)"। मेट्रो वार्ता और हेराल्ड गोवा वाली कॉपी लिखती है "between June 4 and September 19", यानी केरल में मॉनसून के आने के दिन से। विभाग की अपनी तालिका का ख़ाना 1 जून से शुरू होता है। तीनों जगह कमी 15 फ़ीसदी ही छपी है। तीनों वाक्य यहाँ जैसे हैं वैसे दर्ज हैं।
इस मौसम का अपना पूर्वानुमान भी इसी हिसाब का हिस्सा है। 29 मई को विभाग ने कहा था कि जून-सितंबर की वर्षा दीर्घावधि औसत की 90 फ़ीसदी रहने की सबसे ज़्यादा संभावना है, मॉडल त्रुटि ±4 फ़ीसदी के साथ, और देश के लिए यह "below normal" श्रेणी है। 19 सितंबर तक का आँकड़ा सामान्य का 85 फ़ीसदी है। दोनों संख्याएँ एक ही अवधि की नहीं हैं। एक पूरे मौसम की है, दूसरी उन्नीस सितंबर तक की। मौसम का आख़िरी आँकड़ा अभी तय नहीं हुआ था। फिर भी 85, 86 से 94 के दायरे के नीचे है।
विभाग की अपनी 19 सितंबर वाली संचयी तालिका हम पढ़ नहीं सके। mausam.imd.gov.in उन आँकड़ों को तस्वीर की शक्ल में छापता है, और 5326 में मौसम भर की वर्षा की कोई तालिका नहीं है। कितने उपखंड कम वर्षा या बहुत कम वर्षा वाली श्रेणी में हैं, यह हमारे पास किसी दस्तावेज़ से नहीं है।
घाटा वहाँ नहीं है जहाँ से मॉनसून लौटा है
17 सितंबर की उसी तालिका में देश चार हिस्सों में बँटा है, और चारों की तस्वीर एक जैसी नहीं है।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत: वास्तविक 923.8 मिलीमीटर, सामान्य 1243.7, कमी 26 फ़ीसदी। दक्षिण प्रायद्वीप: वास्तविक 459.7, सामान्य 637.0, कमी 28 फ़ीसदी। मध्य भारत: 865.2 के मुक़ाबले 912.3, कमी 5 फ़ीसदी। और उत्तर-पश्चिम भारत: 498.1 के मुक़ाबले 555.9, कमी 10 फ़ीसदी।
मॉनसून की वापसी उत्तर-पश्चिम से शुरू होती है। चारों में दूसरी सबसे कम कमी इसी हिस्से की है। जहाँ से मॉनसून लौट रहा है, वहाँ इस मौसम की सबसे बड़ी कमी नहीं है।
राज्यों की सूची अख़बार में है। विज्ञप्ति में नहीं। इंडियन एक्सप्रेस 19 सितंबर को जो सूची छापता है, उसमें सबसे ऊपर मेघालय है, 59 फ़ीसदी कम। उसके बाद आंध्र प्रदेश 43, अरुणाचल प्रदेश 41, बिहार 36, गोवा 35, कर्नाटक 31, केरल 28, असम 26, तमिलनाडु और हरियाणा 22-22, तेलंगाना 21। अख़बार यह भी लिखता है कि राजस्थान और पंजाब का मौसम 21 से 40 फ़ीसदी की कमी पर ख़त्म होने की सबसे ज़्यादा संभावना है।

इन आँकड़ों को विभाग की तालिका पर सीधे नहीं रखा जा सकता, और इसकी वजह उसी 19 सितंबर की विज्ञप्ति के आख़िरी पन्ने पर लिखी है। वहाँ विभाग अपने मौसम उपखंडों की सूची देता है, और पूर्वोत्तर भारत में उपखंड ये हैं: "Arunachal Pradesh, Assam & Meghalaya and Nagaland, Manipur, Mizoram & Tripura." असम और मेघालय विभाग के लिए एक ही उपखंड हैं। अख़बार उन्हें अलग-अलग गिनता है, 26 और 59 पर। दोनों सूचियाँ एक ही देश पर पड़ी दो अलग जालियाँ हैं, और किसी एक को दूसरी में डालकर जोड़ नहीं सकते।
महीने-दर-महीने का हिसाब उसी 19 सितंबर वाली कॉपी में है, जो उसे विभाग का बताती है। जून में देश पर 106.8 मिलीमीटर बारिश हुई, सामान्य 165 के मुक़ाबले, यानी 35 फ़ीसदी कम। जुलाई अकेला महीना था जो सामान्य से ऊपर गया: 280.5 के मुक़ाबले 283.3 मिलीमीटर। अगस्त पर कॉपी कहती है कि विभाग ने 31 अगस्त के अपने मासिक पूर्वानुमान में महीने की बारिश 213.3 मिलीमीटर बताई थी, जो 2001 के बाद अगस्त का सातवाँ सबसे कम आँकड़ा है। हमने 31 अगस्त की अंग्रेज़ी विज्ञप्ति पढ़ी। उसमें 213.3 नहीं है। हो सकता है वह उसी शाम 5 बजे हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा गया हो; हमारे पास उसका पाठ नहीं है।
एक आख़िरी संख्या, जिसे बहुत जल्दी बदल दिया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि देश के लगभग 43 फ़ीसदी "geographical area" में अब भी बारिश की कमी है। भौगोलिक क्षेत्र। न ज़िलों का 43 फ़ीसदी, न उपखंडों का, न आबादी का।
उसी विज्ञप्ति में बंगाल की खाड़ी का अगला सिस्टम और खड़ी फ़सल
19 सितंबर की विज्ञप्ति में वापसी की घोषणा के ठीक बाद दूसरा विषय शुरू होता है, और वह बारिश के आने का है।
विज्ञप्ति के मुताबिक़ उत्तरी अंडमान सागर पर उसी शाम एक निम्न दाब क्षेत्र बनने की बहुत संभावना थी। आगे का रास्ता तारीख़ों के साथ लिखा है: "intensify gradually into a depression over eastcentral Bay of Bengal on 21st and into a deep depression over westcentral Bay of Bengal on 22nd September"। और फिर: "it is very likely to reach westcentral and adjoining northwest Bay of Bengal near south Odisha-north Andhra Pradesh coasts around morning of 23rd September."
इस वाक्य को ध्यान से पढ़िए। विभाग कहता है कि सिस्टम 23 सितंबर की सुबह के आसपास समुद्र के उस हिस्से तक पहुँच सकता है जो दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास है। तट पार करने की बात इसमें नहीं है।
इंडियन एक्सप्रेस ने उसी दिन विभाग के हवाले से उद्धरण चिह्नों के भीतर यह छापा: "It will continue to move towards and cross south Odisha-north Andhra Pradesh coasts around September 23." 'cross' शब्द विभाग की 19 सितंबर की विज्ञप्ति में नहीं है। उद्धरण चिह्नों के भीतर वह शब्द अख़बार का है। विभाग का नहीं।
विज्ञप्ति के आख़िरी पन्नों पर कृषि मौसम परामर्श हैं, राज्यवार, और वे बताते हैं कि यह बारिश किन फ़सलों पर गिरनी है। ओडिशा के लिए परामर्श में धान, मक्का, मोटे अनाज, अदरक, हल्दी, सब्ज़ियाँ, दालें और बाग़ हैं। आंध्र प्रदेश के लिए पका मक्का, धान, रागी, मूँगफली, अरहर, गन्ना और केले के फलदार पौधे। तेलंगाना के लिए धान, कपास, मूँग, उड़द और अरहर। तमिलनाडु के लिए कटा हुआ धान, ज्वार, मक्का और उड़द। कर्नाटक के लिए मूँग, उड़द और सोयाबीन। पूर्वी राजस्थान के लिए खड़ी फ़सल के खेत, केला, पपीता और गन्ना।
यह सितंबर के तीसरे हफ़्ते की सूची है। यानी वह फ़सल जो या तो खेत में खड़ी है या अभी-अभी कटकर खलिहान में है।

23 और 24 सितंबर के लिए विज्ञप्ति ओडिशा में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश की बात करती है। 23 सितंबर को दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों पर और उनके आसपास 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार हवा की संभावना दर्ज है, जो 24 की शाम तक बनी रह सकती है। चेतावनियों के रंग विज्ञप्ति के अनुलग्नक में हैं, और उसके नीचे एक पंक्ति है: "Action may be taken based on ORANGE AND RED COLOUR warnings." विभाग के हिंदी पाठ में यही पंक्ति इस तरह है: "नारंगी और लाल रंग की चेतावनियों के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।"
19 सितंबर की शाम तक यह सब पूर्वानुमान था। निम्न दाब क्षेत्र बना नहीं था; विज्ञप्ति उसके बनने की संभावना बता रही थी।
अल नीन्यो: विभाग ने 31 अगस्त को "strong" लिखा, 17 सितंबर को "moderate"
इस मौसम की कमी की वजह के तौर पर हर कॉपी में एक ही नाम है। विभाग के अपने दस्तावेज़ों में वह नाम है, पर एक जैसा नहीं है।
31 अगस्त 2026 की मासिक आउटलुक विज्ञप्ति में लिखा है: "Currently, strong El Niño conditions are prevailing over the equatorial Pacific Ocean, with sea surface temperature (SST) remaining above normal across the central and eastern equatorial Pacific." सत्रह दिन बाद, 17 सितंबर की विस्तारित पूर्वानुमान विज्ञप्ति में वही वाक्य इस तरह शुरू होता है: "Moderate El Niño conditions currently prevail over the equatorial Pacific Ocean…" पहले में strong, दूसरे में moderate। दोनों वाक्यों में आगे यही लिखा है कि स्थितियाँ और मज़बूत होने की उम्मीद है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने इसी बीच अपना आकलन छापा। जिनीवा से जारी उसकी प्रेस विज्ञप्ति पर छपी तारीख़ 3 सितंबर 2026 है, और उसी दिन उसका El Niño/La Niña Update (August 2026) भी प्रकाशित हुआ। संगठन का वाक्य है कि उसके ग्लोबल प्रोड्यूसिंग सेंटरों के पूर्वानुमान "exceptionally high likelihood of nearly 100%" बताते हैं कि अल नीन्यो फ़रवरी 2027 तक बना रहेगा, और यह घटना साल के आख़िर तक अपने चरम पर पहुँचने से पहले "very strong intensity" तक मज़बूत होगी। संगठन यह भी लिखता है कि उसके किसी अल नीन्यो/ला नीन्या अपडेट में पहली बार इतनी दो-टूक बात कही गई है।
संख्याएँ भी उसी विज्ञप्ति में हैं। नीन्यो 3.4 सूचकांक मई-जुलाई 2026 में औसतन सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर था, जुलाई में 2.0 डिग्री, और जुलाई के आख़िर से अगस्त के मध्य तक साप्ताहिक मान लगभग 2.2 से 2.6 डिग्री तक गए। समुद्र की सतह के नीचे कुछ जगहों पर जुलाई और अगस्त की शुरुआत में तापमान सामान्य से 8 डिग्री से भी ज़्यादा था।
और उसी दस्तावेज़ में एक वाक्य ऐसा है जिसे कोई नहीं उठाता: "However, the strength of an El Niño event does not translate directly into the magnitude of impacts in any region." घटना का कितना बड़ा होना और किसी एक इलाक़े पर उसका कितना असर पड़ना, संगठन के अपने शब्दों में, सीधे एक-दूसरे में नहीं बदलते।
19 सितंबर की ख़बरों में एक और बात है, जिस पर हम रुक रहे हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की उस दिन की रिपोर्ट के मुताबिक़ एक सौ अस्सी से ज़्यादा वैज्ञानिकों और पारिस्थितिकीविदों ने असाधारण रूप से मज़बूत अल नीन्यो की तैयारी के लिए एक अपील जारी की है। यह अपील किसने छापी और कब छापी, यह डेस्क तय नहीं कर सकी। इसलिए हम न उसका प्रकाशक लिख रहे हैं, न तारीख़।
विभाग के अपने पूर्वानुमान ने मई में ही इस मौसम को सामान्य से कम बताया था: दीर्घावधि औसत की 90 फ़ीसदी, ±4 फ़ीसदी की मॉडल त्रुटि के साथ। 19 सितंबर तक का आँकड़ा उससे भी नीचे है। मॉनसून लौटना शुरू हो चुका है और मौसम के ग्यारह दिन बचे हैं।
स्रोतभारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय: प्रेस विज्ञप्ति, तारीख़ 19 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1420 बजे IST (अंग्रेज़ी), 13 पन्ने — वापसी की घोषणा, वापसी की रेखा, पिछले 24 घंटे का दर्ज मौसम, चेतावनियाँ और कृषि मौसम परामर्श, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, तारीख़ 19 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1425 बजे (हिंदी), 14 पन्ने — उसी विज्ञप्ति का विभाग का अपना हिंदी पाठ, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, तारीख़ 18 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1310 बजे IST: 19 सितंबर के आसपास वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल होने की बात, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 17 सितंबर 2026, दो हफ़्तों (17 से 30 सितंबर 2026) का विस्तारित पूर्वानुमान — तालिका 1 में 1 जून से 16 सितंबर तक की वास्तविक, सामान्य और विचलन वाली वर्षा, और अल नीन्यो व आईओडी पर विभाग का आकलन, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026: सितंबर 2026 के लिए वर्षा और तापमान का मासिक आउटलुक, सितंबर का दीर्घावधि औसत 167.9 मिलीमीटर (1971-2020), और अल नीन्यो की स्थिति, भारत मौसम विज्ञान विभाग: दीर्घावधि पूर्वानुमान, 29 मई 2026: जून-सितंबर 2026 की मौसमी वर्षा दीर्घावधि औसत की 90 फ़ीसदी (मॉडल त्रुटि ±4 फ़ीसदी), और 1971-2020 के आँकड़ों पर दीर्घावधि औसत 87 सेंटीमीटर, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 9 जुलाई 2026: मॉनसून के पूरे देश को ढकने की घोषणा, सामान्य तारीख़ 8 जुलाई के मुक़ाबले एक दिन बाद, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 4 जून 2026: केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत, भारत मौसम विज्ञान विभाग, 'Withdrawal of SW Monsoon' — वापसी घोषित करने की विभाग की अपनी कसौटी वाला पन्ना, 21 सितंबर 2026 को पढ़ा गया, भारत मौसम विज्ञान विभाग, जलवायु अनुसंधान एवं सेवा प्रभाग, पुणे: शोध रिपोर्ट CRS RR संख्या 003/2020, 'New Normal Dates of Onset/Progress and Withdrawal of Southwest Monsoon over India', जारी तारीख़ 15 मई 2020, लेखक डी. एस. पई और अन्य, भारत मौसम विज्ञान विभाग: मॉनसून पर अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की पुस्तिका (तारीख़ अंकित नहीं; इसमें दीर्घावधि औसत 1961-2010 के आधार पर 880.6 मिलीमीटर लिखा है), प्रश्न 2, 3 और 35, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्तियों की क्रमानुसार सूची, 21 सितंबर 2026 को पढ़ी गई — 19 सितंबर के लिए प्रविष्टि 5326 और 5327, 18 सितंबर के लिए 5324, द इंडियन एक्सप्रेस, 19 सितंबर 2026 (20 सितंबर सुबह 6:11 बजे अद्यतन), एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस, बेंगलुरु: 695.6 मिलीमीटर, 15 फ़ीसदी, 43 फ़ीसदी भौगोलिक क्षेत्र, राज्यवार कमी और चार दिन की देरी, मेट्रो वार्ता, 19 सितंबर 2026, 11:30 UTC (शाम 5 बजे IST), बाइलाइन 'MV Desk'; यही कॉपी हेराल्ड गोवा में भी छपी, कोई एजेंसी-क्रेडिट किसी पन्ने पर नहीं: 4 जून से 19 सितंबर की अवधि, दक्षिण प्रायद्वीप की 29 फ़ीसदी कमी, और जून, जुलाई व अगस्त के मासिक आँकड़े, हेराल्ड गोवा, 19 सितंबर 2026, बाइलाइन 'Team Herald': वही कॉपी, जिसमें दो दिन की देरी लिखी है, विश्व मौसम विज्ञान संगठन, जिनीवा: प्रेस विज्ञप्ति, पन्ने पर छपी तारीख़ 3 सितंबर 2026, विश्व मौसम विज्ञान संगठन: 'El Niño/La Niña Update (August 2026)', पन्ने पर छपी प्रकाशन तारीख़ 3 सितंबर 2026