बंगाल की खाड़ी का अवदाब शाम साढ़े पांच बजे पुरी से 310 किलोमीटर दूर दर्ज था, दोपहर की विज्ञप्ति में वह अवदाब था ही नहीं
सोमवार, 21 सितंबर की दोपहर 2 बजे और 2:05 बजे मौसम विभाग की अंग्रेज़ी और हिंदी विज्ञप्तियों में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम को 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया' लिखा गया, यह नाम ख़ुद चक्रवात चेतावनी प्रभाग की अपनी शब्दावली पुस्तिका में कहीं दर्ज नहीं है। उसी रात साढ़े नौ बजे जारी राष्ट्रीय बुलेटिन नंबर 1 में लिखा मिला कि शाम साढ़े पांच बजे तक यह सिस्टम पुरी से 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व अवदाब बन चुका था। उसी दोपहर की विज्ञप्ति में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ और हिस्सों से लौट जाने की घोषणा भी है, दो दिन की ख़ामोशी के बाद।

उन्नीस और बीस सितंबर की विज्ञप्तियों में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने लिखा था कि बंगाल की खाड़ी का निम्न दाब क्षेत्र 21 सितंबर को अवदाब बनेगा। दोनों दिन यह सिर्फ़ "निम्न दाब क्षेत्र" था। सोमवार, 21 सितंबर की दोपहर 2 बजे जो विज्ञप्ति आई, उसमें यह सिस्टम एक पायदान ऊपर तो चढ़ चुका था, पर अवदाब अब भी नहीं बना था। तो क्या पूर्वानुमान ग़लत निकला?
जवाब उसी 21 सितंबर के काग़ज़ों में है, बस दोपहर की विज्ञप्ति में नहीं। उसी रात विभाग के क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र ने दो और दस्तावेज़ जारी किए। दोनों में यह सिस्टम अवदाब बन चुका था।
दोपहर 2 बजे 'वेल-मार्क्ड', रात साढ़े नौ बजे अवदाब
21 सितंबर की अंग्रेज़ी विज्ञप्ति दोपहर 2 बजे जारी हुई, हिंदी विज्ञप्ति पांच मिनट बाद, 2:05 बजे। दोनों का विषय-वाक्य कहता है कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना "वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया" अगले 48 घंटों में अवदाब और गहन अवदाब में बदल सकता है। हिंदी पाठ में यह नाम दोनों भाषाओं में एक साथ है: "'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया' (स्पष्ट रूप से चिह्नित कम दबाव का क्षेत्र)"। उन्नीस और बीस सितंबर को यही सिस्टम बिना किसी विशेषण के केवल "निम्न दाब क्षेत्र" था। सुबह तक यह एक पायदान ऊपर था।
विज्ञप्ति के मुताबिक़ यह सिस्टम सुबह साढ़े आठ बजे तक पश्चिमी-मध्य और उससे सटे पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर था। आगे यह अगले 24 घंटों में अवदाब बनेगा, उसके अगले 24 घंटों में गहन अवदाब, और 23 सितंबर की सुबह के आसपास उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तटों के पास पहुंचेगा। इसका अनुमानित केंद्रीय दबाव 1000 हेक्टोपास्कल है। अधिकतम हवा 20 नॉट, झोंके 30 नॉट तक।
यह एक दिन की देरी जैसा लगता है। उन्नीस और बीस, दोनों दिन विभाग ने कहा था कि सिस्टम 21 को अवदाब बनेगा। 21 की दोपहर की विज्ञप्ति सुबह साढ़े आठ बजे के अवलोकन पर बनी थी। उस पल तक सिस्टम अवदाब नहीं बना था।
शाम साढ़े पांच बजे का हिसाब अलग निकला। रात 9 बजे क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली ने एक विशेष उष्णकटिबंधीय मौसम रूपरेखा जारी की। यह नियमित तीन बजे यूटीसी के बजाय दोपहर 12 बजे यूटीसी, यानी शाम साढ़े पांच बजे भारतीय समय के आंकड़ों पर बनी थी। उसमें लिखा है: "The well marked low pressure area over Westcentral and adjoining Eastcentral Bay of Bengal, moved west-northwestwards, intensified into a Depression and lay centred at 1200 UTC of today, the 21st September, 2026, over Westcentral & adjoining Northwest Bay of Bengal near latitude 17.7°N and longitude 87.8°E, about 310 km southeast of Puri." हस्ताक्षर डॉ आनंद कुमार दास के हैं।
आधे घंटे बाद, रात साढ़े नौ बजे, विभाग ने अपना पहला नंबर वाला राष्ट्रीय बुलेटिन जारी किया: "National Bulletin NO. 1 (BOB/06/2026)"। यह गृह मंत्रालय के नियंत्रण कक्ष, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मंत्रिमंडल सचिवालय को भेजा गया। दूरदर्शन और आकाशवाणी के महानिदेशकों को भी। साथ ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पुदुचेरी के मुख्य सचिवों को। इसमें भी वही स्थिति दर्ज है, बस भारतीय मानक समय में: सिस्टम शाम साढ़े पांच बजे अवदाब बना, पुरी से 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, गोपालपुर से 310 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, कलिंगपट्नम से 390 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और विशाखापट्नम से 470 किलोमीटर पूर्व। दोनों दस्तावेज़ों के आंकड़े यहां मिलते हैं। दस्तख़त इस बार एक और नाम के हैं: Umasankar Das, आईएमडी नई दिल्ली।
तो अवदाब 21 सितंबर को ही बना। यह वैसा ही निकला जैसा उन्नीस और बीस की विज्ञप्तियों ने कहा था। बदलाव सुबह साढ़े आठ बजे और शाम साढ़े पांच बजे के बीच कहीं हुआ। विज्ञप्ति उस पल से पहले की तस्वीर थी।
'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया': जो नाम शब्दावली की किताब में नहीं है
चक्रवात चेतावनी प्रभाग की अपनी शब्दावली पुस्तिका निम्न दाब क्षेत्र को परिभाषित करती है: बंद समदाब रेखा से घिरा इलाक़ा, जहां हवा 17 नॉट से कम हो। इसके ठीक बाद पुस्तिका अवदाब पर जाती है, 17 से 33 नॉट। बीच में कुछ नहीं है। इसी पुस्तिका के हवाले से इस हफ़्ते इस सिस्टम की पूरी सीढ़ी बताई जा चुकी है। "वेल-मार्क्ड" या "well marked" शब्द उसमें एक बार भी नहीं आता।
फिर भी यही नाम 21 सितंबर की दोपहर की दोनों विज्ञप्तियों के विषय-वाक्य में है, अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में। यह श्रेणी विभाग के परिचालन बुलेटिनों में है, अपनी परिभाषा वाली किताब में नहीं। दोनों दस्तावेज़ एक ही विभाग के हैं। दोनों एक ही हफ़्ते में पढ़े गए। पाठक के लिए यह फ़र्क़ मामूली लग सकता है, पर 21 सितंबर के दिन के लिए यही फ़र्क़ केंद्र में है। पूरा दिन यह सिस्टम इसी अघोषित पायदान पर दर्ज रहा, जब तक रात के दस्तावेज़ों ने अगली पायदान की पुष्टि नहीं की।
मॉनसून हरियाणा और पंजाब तक पहुंचा, दो दिन की ख़ामोशी के बाद
पहला ऐलान उन्नीस सितंबर को हुआ था: पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मॉनसून लौटा। बीस सितंबर की विज्ञप्ति में रेखा वहीं की वहीं रही, सिर्फ़ इतना बदला कि आगे की वापसी की मोहलत तीन-चार दिन से घटकर दो-तीन दिन रह गई। दो दिन तक रेखा ने कोई नई ज़मीन नहीं छुई।
21 सितंबर को यह बदला। विज्ञप्ति में लिखा है: "The Southwest monsoon has further withdrawn from some more parts of Rajasthan, some parts of Haryana and Punjab today, the 21st September, 2026." हिंदी पाठ में यही बात इस तरह है: "आज, 21 सितंबर 2026 को, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ और हिस्सों से वापस लौट गया है।" पहली बार हरियाणा और पंजाब की ज़मीन भी रेखा के पीछे आई। पहले सिर्फ़ राजस्थान था।
आगे की सूची भी लंबी हुई। अगले दो-तीन दिनों में जिन इलाक़ों से वापसी अनुकूल बताई गई है, वे हैं "remaining parts of Punjab, Haryana-Chandigarh-Delhi, some more parts of Rajasthan and some parts of Saurashtra & Kutch, Jammu & Kashmir, Himachal Pradesh, Uttarakhand and West Uttar Pradesh"। उन्नीस और बीस को यह सूची पंजाब, सौराष्ट्र और कच्छ तक सीमित थी। अब इसमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी जुड़ गए। "हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली" यहां तीन अलग जगहें नहीं हैं। विज्ञप्ति के अपने वर्गीकरण में ये तीनों मिलकर एक ही मौसम उपखंड बनाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे असम और मेघालय पूर्वोत्तर भारत में एक उपखंड हैं।

रेखा ख़ुद कहां से गुज़रती है, यह हम नहीं बता सकते। उन्नीस सितंबर की विज्ञप्ति में यह दो अक्षांश-देशांतर बिंदुओं और चार क़स्बों के नाम से दर्ज थी। 21 सितंबर की नई रेखा का यह ब्यौरा शब्दों में नहीं, अनुबंध एक के नक़्शे में है। वह नक़्शा एक तस्वीर है, पाठ नहीं। नई रेखा किन गांवों से गुज़रती है, यह हमारे पास दर्ज नहीं है।
हवा की कतरन और तीन भंवर
रात 9 बजे की विशेष रूपरेखा में सिर्फ़ स्थिति और पूर्वानुमान नहीं है। सिस्टम के धीमे बढ़ने की तकनीकी वजह भी उसमें दर्ज है। दस्तावेज़ लिखता है कि मैडेन-जूलियन दोलन सूचकांक फ़िलहाल चरण एक में है, आयाम एक से ज़्यादा, और अगले सात दिन उसी चरण में लूप जैसी गति करेगा, जिससे उत्तरी हिंद महासागर पर संवहन गतिविधि बढ़ेगी। एनसीआईसीएस मॉडल के हिसाब से दक्षिणी और सटे मध्य बंगाल की खाड़ी पर 7 से 9 मीटर प्रति सेकंड की तेज़ पछुआ हवा की विसंगति चलेगी, साथ में एक भूमध्यरेखीय रॉस्बी तरंग, 30 सितंबर तक। उत्तरी खाड़ी पर 25 सितंबर तक पुरवा हवा की विसंगति रहेगी। दस्तावेज़ का अपना वाक्य है कि ये स्थितियां अगले चार-पांच दिन मध्य खाड़ी पर अवदाब को बनाए रखने में मददगार होंगी।
हवा की कतरन का भी हिसाब है। पूरब-पश्चिम दिशा में कम से मध्यम कतरन का एक गलियारा है। उत्तर और दक्षिण, दोनों तरफ़ ज़्यादा कतरन के इलाक़े हैं। सिस्टम इसी वजह से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की उसी संकरी, कम-कतरन वाली पट्टी में बढ़ रहा है। भंवर की नाप भी दर्ज है: सिस्टम के केंद्र के पास 700 हेक्टोपास्कल तक निचले स्तर का भंवर लगभग 60 से 70 गुणा दस की घात माइनस छह प्रति सेकंड है, और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा दक्षिणी अंडमान सागर पर दो और भंवर केंद्र दर्ज हैं। दस्तावेज़ की अपनी पंक्ति है: "multiple vorticity maxima likely to slightly inhibit the intensification of the system."
सिस्टम अकेला नहीं बढ़ रहा। उसके इर्दगिर्द हवा के कम से कम तीन घूमते केंद्र हैं। विभाग का अपना आकलन है कि यही भीड़ उसे तेज़ी से मज़बूत होने से रोक रही है। दस्तावेज़ यह भी कहता है कि मौजूदा स्थिति और आगे की चाल का अनुमान "High" भरोसे का है, तीव्रता का अनुमान भी "High" भरोसे का।
रात या सुबह: तट पार करने के समय पर एक फ़र्क़
उन्नीस, बीस और 21 सितंबर, तीनों दिन की दोपहर वाली विज्ञप्तियों में एक ही वाक्य दोहराया गया है: सिस्टम "morning of 23rd September" के आसपास उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तटों के पास पहुंचेगा।
रात साढ़े नौ बजे के राष्ट्रीय बुलेटिन नंबर 1 में यह वाक्य नहीं है। सुबह की जगह अब रात है। उसकी जगह एक ज़्यादा सटीक वाक्य है: सिस्टम "very likely to cross north Andhra Pradesh - South Odisha coasts between Visakhapatnam & Gopalpur as a Deep Depression during night of 23rd to early hours of 24th September 2026." तारीख़ भी एक बढ़ गई है, 23 से 23-24 की दरमियानी रात तक। दिन की विज्ञप्ति और रात के बुलेटिन का यह फ़र्क़ हम दर्ज कर रहे हैं, सुलझा नहीं रहे। दोनों उसी विभाग के, उसी 21 सितंबर के दस्तावेज़ हैं।
तट का हिस्सा अब पहले से ज़्यादा नपा हुआ है। पहले यह सिर्फ़ "उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट" था। रात के बुलेटिन में यह विशाखापट्नम और गोपालपुर के बीच का हिस्सा है, दो नामी शहरों के बीच बंधा हुआ।

राज्यवार बारिश का ब्यौरा भी रात के बुलेटिन में दोपहर की विज्ञप्ति से बारीक है। ओडिशा के लिए: 21 और 22 को कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश, 23 और 24 को दक्षिणी ओडिशा में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी, फिर 25 को बहुत भारी और 26 को भारी। हर तारीख़ की अपनी श्रेणी है। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के लिए 22 को भारी से बहुत भारी, 23 और 24 को उत्तरी आंध्र प्रदेश और यनम में अत्यधिक भारी, 25 को भारी। छत्तीसगढ़ के लिए 21 और 22 को भारी, 23 को भारी से बहुत भारी, 24 को कहीं-कहीं अत्यधिक भारी भी, 25 और 26 को फिर भारी से बहुत भारी। बाक़ी राज्यों की सूची छोटी है। तेलंगाना, झारखंड, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के लिए अलग-अलग तारीख़ों पर हल्की से भारी बारिश दर्ज है।
बुलेटिन में सुझाई गई कार्रवाई की एक पंक्ति ध्यान खींचती है। सिस्टम की मौजूदा और पूर्वानुमानित श्रेणी से यह आगे जाती है: "Fishing operation may be suspended till 24th September." पूर्वानुमान तालिका के मुताबिक़ यह सिस्टम अवदाब और गहन अवदाब के बीच ही रहेगा। यह चक्रवाती तूफ़ान की श्रेणी तक कभी नहीं पहुंचता।
बुलेटिन पर दस्तख़त भी हैं, जो दिन की विज्ञप्ति में कहीं नहीं थे। मॉनसून की वापसी वाली दोपहर की विज्ञप्ति, हिंदी हो या अंग्रेज़ी, किसी अफ़सर का नाम नहीं लेती। वह विभाग की ओर से आती है। अवदाब की पुष्टि के बाद के दोनों दस्तावेज़ों पर एक-एक नाम है, दो अलग-अलग नाम।
खेत जो कट चुके, खेत जो अभी भर रहे हैं
21 सितंबर की दोपहर वाली विज्ञप्ति के आख़िर में भारी बारिश के असर पर कृषि मौसम परामर्श हैं, राज्यवार। यह सूची सिर्फ़ उन राज्यों के लिए है जहां बारिश का ख़तरा है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब या दिल्ली के लिए, जहां से मॉनसून उसी दिन और पीछे हटा, इस सूची में कोई पंक्ति नहीं है।
जहां पंक्तियां हैं, वहां सलाह एक जैसी नहीं है। अंडमान-निकोबार के लिए केले और पपीते के पौधों को यांत्रिक सहारा देने और खेतों में निकासी बनाए रखने को कहा गया है। असम और मेघालय के लिए मक्का, उड़द, मूंग और तिल के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने, धान में पानी का सही स्तर बनाए रखने, और कद्दू व लौकी को बारिश से पहले जहां मुमकिन हो तोड़ लेने की सलाह है। हर राज्य की सूची अलग है। झारखंड के लिए खड़ी फ़सल की सिंचाई टालने और खाद-कीटनाशक तभी छिड़कने को कहा गया है जब आसमान साफ़ हो। गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल के लिए अतिरिक्त पानी निकालने, केले-पपीते को सहारा देने और गन्ने में मिट्टी चढ़ाने की सलाह है।
ओडिशा की सूची सबसे लंबी है। धान, मक्का, बाजरा-ज्वार, अदरक, हल्दी, सब्ज़ियों, दालों और बाग़ों से पानी निकालने, सब्ज़ियों की नर्सरी बचाने और नए लगे केले के पौधों की जड़ों पर मिट्टी चढ़ाने की सलाह है, साथ में यह भी कि बारिश थमने और मिट्टी ठीक होने तक खेत का कोई भी काम टाल दिया जाए। कोंकण और गोवा के लिए धान के खेतों में बाली निकलने या फूल आने की अवस्था में पानी 5 से 10 सेंटीमीटर पर बनाए रखने की सटीक सलाह है।
कर्नाटक की सलाह अलग ढंग की है: "Protect harvested produce by keeping it in safe, covered storage, and secure farm structures and equipment." यहां फ़सल खेत में खड़ी नहीं, कट चुकी और भंडार में है।

तमिलनाडु के लिए सलाह उसी दिन के दर्ज मौसम से जुड़ी है। वहां बीते चौबीस घंटों में कहीं-कहीं 20 सेंटीमीटर से ज़्यादा बारिश दर्ज हुई थी। सलाह है कि खड़ी फ़सल से पानी निकाला जाए, और जहां 20 सितंबर को भारी बारिश हुई वहां खाद-कीटनाशक का छिड़काव बारिश के दौरान न किया जाए।
एक ही विज्ञप्ति में इसलिए खेतों की तीन अलग तस्वीरें हैं। कहीं फ़सल कट चुकी है और भंडार में सुरक्षित रखी जा रही है। यह एक तस्वीर है। कहीं फ़सल अभी खेत में है और पानी निकालने की दौड़ चल रही है। यह दूसरी है। मॉनसून लौट जाने वाले राज्यों के लिए कोई सलाह दर्ज नहीं है, क्योंकि यह पूरी सूची बारिश के ख़तरे पर बनी है।
एक ही दिन के काग़ज़ों पर दो अलग मौसम
21 सितंबर की सुबह साढ़े आठ बजे तक के चौबीस घंटों का हिसाब उसी विज्ञप्ति में है जिसमें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से मॉनसून की आगे की वापसी दर्ज है। उसी हिसाब में तमिलनाडु में कहीं-कहीं 20 सेंटीमीटर से ज़्यादा बारिश दर्ज है, और केरल में 12 से 20 सेंटीमीटर। कोयंबटूर में 21 सेंटीमीटर बारिश नापी गई, केरल के उडुम्बनूर में 13, सौराष्ट्र के महुवा में 11, रायलसीमा के अमरापुरम में 11। आंकड़े दोनों तरफ़ के हैं। एक ही पन्ने पर वापसी की घोषणा है, और बहुत भारी बारिश का रिकॉर्ड भी।
मॉनसून राजस्थान से इसलिए लौटता है क्योंकि वहां का हवा का तंत्र बदल चुका है। बंगाल की खाड़ी अलग है। उसी दोपहर वहां, हज़ारों किलोमीटर दूर, एक बिलकुल अलग तंत्र मज़बूत हो रहा था। दोनों एक ही दस्तावेज़ में दर्ज हैं क्योंकि दोनों एक ही विभाग की ज़िम्मेदारी हैं, एक ही मौसम की नहीं।
राष्ट्रीय बुलेटिन नंबर 1 की आख़िरी पंक्ति एक समय है, कोई नतीजा नहीं: "Next bulletin will be issued at 0230 hours IST of tomorrow, the 22nd September, 2026." जिस दिन के लिए यह रिपोर्ट लिखी गई, उसका आख़िरी दस्तावेज़ भी अगले दस्तावेज़ की घड़ी बताकर ख़त्म होता है।
स्रोतभारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय: प्रेस विज्ञप्ति, 21 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1400 बजे IST (अंग्रेज़ी), फ़ाइल 20260921_pr_5330.pdf, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 21 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1405 बजे (हिंदी), फ़ाइल 20260921_pr_5331.pdf, क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (आरएसएमसी), उष्णकटिबंधीय चक्रवात, नई दिल्ली: विशेष उष्णकटिबंधीय मौसम रूपरेखा, 1200 यूटीसी (शाम साढ़े पांच बजे भारतीय समय) 21.09.2026 के आंकड़ों पर, जारी करने का समय 1530 यूटीसी यानी रात 9 बजे, हस्ताक्षर डॉ आनंद कुमार दास, भारत मौसम विज्ञान विभाग: राष्ट्रीय बुलेटिन संख्या 1, BOB/06/2026, 21 सितंबर 2026, जारी करने का समय रात 9:30 बजे IST, हस्ताक्षर Umasankar Das, गृह मंत्रालय नियंत्रण कक्ष, एनडीएमए, मंत्रिमंडल सचिवालय और आठ राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजा गया, चक्रवात चेतावनी प्रभाग, भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली: Terminology on Cyclonic disturbances over the North Indian Ocean, 21 सितंबर 2026 को दोबारा पढ़ी गई; 'well marked' या 'वेल-मार्क्ड' शब्द इसमें कहीं नहीं मिला, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्तियों की क्रमानुसार सूची, 21 सितंबर 2026 को पढ़ी गई, प्रविष्टियां 5330 और 5331, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 20 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1340 बजे IST: 21 को अवदाब और 22 को गहन अवदाब बनने का पूर्वानुमान, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 19 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1420 बजे IST: निम्न दाब क्षेत्र और उसके 21 को अवदाब बनने का शुरुआती पूर्वानुमान