मौसम विभाग की दोपहर 1:40 बजे की विज्ञप्ति में मछुआरों के लिए उसी शाम की समय-सीमा है
रविवार, 20 सितंबर की इस विज्ञप्ति में मछुआरों के लिए चार पंक्तियां हैं। तीन बताती हैं कि समुद्र के किन हिस्सों में किन तारीख़ों तक नहीं जाना। चौथी कहती है कि जो समुद्र में हैं, वे उसी शाम तक तट पर लौट आएं। उसी दस्तावेज़ में दर्ज है कि बंगाल की खाड़ी का निम्न दाब क्षेत्र 23 सितंबर की सुबह के आसपास उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों के पास पहुंच सकता है।

शनिवार, 19 सितंबर की शाम 5:30 बजे उत्तरी अंडमान सागर और उसके आसपास निम्न दाब क्षेत्र बना। ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण पहले से वहीं मौजूद था। रविवार सुबह 8:30 बजे यह निम्न दाब क्षेत्र पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी अंडमान सागर पर था। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उसी रविवार, 20 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की, उसमें इस सिस्टम का आगे का रास्ता तारीख़ों के साथ लिखा है: 21 सितंबर को अवदाब, 22 को गहन अवदाब, और 23 सितंबर की सुबह के आसपास उत्तरी आंध्र प्रदेश तथा दक्षिणी ओडिशा के तटों के पास।
उसी विज्ञप्ति के आख़िरी पन्नों पर मछुआरों के लिए चार पंक्तियां हैं। तीन पंक्तियां समुद्र के तीन हिस्सों के नाम गिनाती हैं और बताती हैं कि किन तारीख़ों तक वहां नहीं जाना। चौथी पंक्ति सबसे छोटी है। वह कहती है कि मछुआरे 20 तारीख़ की शाम तक तट पर लौट आएं। अंग्रेज़ी पाठ में यह निर्देश इन शब्दों में है: "The fishermen are advised to return to coasts by 20th evening."
यानी उसी दिन।
चार चेतावनियां, और एक ही शाम की मोहलत
मछुआरों के लिए विज्ञप्ति में जो हिस्सा है, वह तीन इलाक़ों को तीन अलग-अलग तारीख़ों तक बंद करता है। अंडमान सागर में 20 सितंबर से 21 सितंबर तक न जाएं। पूर्वी-मध्य और उससे सटे उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में 20 से 22 सितंबर तक न जाएं। पश्चिमी-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में, तथा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के आसपास, 22 से 24 सितंबर तक न जाएं। तीनों तारीख़ें सिस्टम की चाल के पीछे-पीछे चलती हैं। पाबंदी का इलाक़ा पूरब से पश्चिम की ओर बढ़ता है।
चौथी पंक्ति इन तीनों से अलग है। बाक़ी तीन आने वाले दिनों के बारे में हैं। यह उसी दिन के बारे में है।
मौसम विभाग के अपने शब्दकोश में शाम की परिभाषा छपी हुई है। चक्रवात चेतावनी प्रभाग की शब्दावली पुस्तिका के मुताबिक़ Evening का मतलब 1600 से 2000 बजे तक है, यानी शाम चार से रात आठ। उसी पुस्तिका में दोपहर 1200 से 1600 तक है और सुबह 0400 से 0800 तक। इस हिसाब से निर्देश जारी होने और समय-सीमा शुरू होने के बीच सवा दो घंटे थे। ख़त्म होने तक सवा छह घंटे। दिन रविवार था।
हिंदी विज्ञप्ति इसी निर्देश को दोहराती है और वह 1405 बजे जारी हुई, अंग्रेज़ी के 25 मिनट बाद। दोनों की सलाह एक ही है। अंग्रेज़ी पाठ में तीनों समुद्री इलाक़ों वाली सूची का शीर्षक "Fishermen are advised not to venture into" है, और चौथी पंक्ति उसी सूची के नीचे अलग से खड़ी है। दस्तावेज़ में उसके आगे कोई समझाइश नहीं है। न यह कि कितनी दूर गई नावों के लिए यह मुमकिन है, न यह कि जो शाम तक नहीं लौट पातीं वे क्या करें।
निम्न दाब, अवदाब, गहन अवदाब: विभाग की अपनी नाप
अख़बार जिन शब्दों को आगे-पीछे इस्तेमाल कर लेते हैं, मौसम विभाग के यहां वे नापी हुई श्रेणियां हैं। चक्रवात चेतावनी प्रभाग की शब्दावली पुस्तिका हर श्रेणी के लिए हवा की रफ़्तार तय करती है। नाप की इकाई नॉट है, यानी समुद्री मील प्रति घंटा, जो 1.852 किलोमीटर प्रति घंटा होता है।

सबसे नीचे निम्न दाब क्षेत्र है। पुस्तिका इसे ऐसे इलाक़े के तौर पर परिभाषित करती है जो बंद समदाब रेखा से घिरा हो, जिसके भीतर दबाव सबसे कम हो, और जहां सतह पर औसत हवा 17 नॉट यानी 31 किलोमीटर प्रति घंटा से कम हो। उससे ऊपर अवदाब है। इसमें सतह पर लगातार बनी रहने वाली अधिकतम हवा 17 से 33 नॉट, यानी 31 से 61 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। उसी दायरे के ऊपरी सिरे को अलग नाम मिलता है। जब यह रफ़्तार 28 से 33 नॉट यानी 50 से 61 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच हो, तो पुस्तिका उसे गहन अवदाब कहती है।
अगली सीढ़ी पर नाम बदल जाता है। चक्रवाती तूफ़ान की श्रेणी 34 से 47 नॉट यानी 62 से 88 किलोमीटर प्रति घंटा है। उसी 34 नॉट पर सिस्टम को पहचान-नाम भी मिलता है। पुस्तिका कहती है कि यह सीमा छूते ही आरएसएमसी नई दिल्ली तय सूची में से कोई नाम दे देता है। ऊपर की सीढ़ियां गंभीर चक्रवाती तूफ़ान 48 से 63 नॉट, अति गंभीर 64 से 89, अत्यधिक गंभीर 90 से 119 और सुपर चक्रवाती तूफ़ान 120 नॉट या उससे ऊपर हैं। सीढ़ी यहीं ख़त्म होती है।
20 सितंबर की विज्ञप्ति इस सीढ़ी पर तीन पायदान चढ़ती है और वहीं रुक जाती है। आगे का पूर्वानुमान 21 को अवदाब और 22 को गहन अवदाब तक जाता है। उससे ऊपर कुछ नहीं। इस सिस्टम के लिए विज्ञप्ति में चक्रवात शब्द नहीं आता, कोई नाम नहीं आता, और तट से टकराने की कोई जगह नहीं बताई गई। दिशा दो बार दर्ज है और दोनों बार एक ही है: पश्चिम-उत्तर-पश्चिम।
यह चूक नहीं है। प्रणाली का अपना क्रम यही है। विभाग की चार चरणों वाली चक्रवात चेतावनी का पहला चरण प्री-साइक्लोन वॉच है, जो चक्रवाती तूफ़ान बनने की आशंका पर 72 घंटे पहले जारी होता है और महानिदेशक ख़ुद कैबिनेट सचिव तथा तटीय राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजते हैं। दूसरा चरण साइक्लोन अलर्ट है, 48 घंटे पहले, रंग पीला। तीसरा साइक्लोन वॉर्निंग है, कम से कम 24 घंटे पहले, रंग नारंगी, और विभाग के अपने विवरण के मुताबिक़ तट से टकराने की जगह इसी चरण में बताई जाती है। चौथा पोस्ट लैंडफ़ॉल आउटलुक है, 12 घंटे पहले, रंग लाल। ये रंग-कोड 2006 के मानसून-बाद के मौसम से चल रहे हैं। जिस आशंका पर पहला चरण शुरू होता है, वह 20 सितंबर की विज्ञप्ति में दर्ज नहीं है।
विज्ञप्ति में यह सिस्टम अकेला भी नहीं है। मौसम प्रणालियों की सूची में सात नाम हैं और निम्न दाब क्षेत्र उनमें पहला है। बाक़ी छह ऊपरी हवा में हैं। उसी से जुड़े चक्रवाती परिसंचरण से बांग्लादेश तक निचले स्तर पर उत्तर-दक्षिण दिशा की एक ट्रफ है, और उसी से दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक तक मध्य स्तर पर पूर्व-पश्चिम दिशा की दूसरी, जो ऊंचाई के साथ दक्षिण की ओर झुकती जाती है। बाक़ी में तीन ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण हैं: दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश पर, दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश पर, और अरब सागर के पूर्वी-मध्य तथा उससे सटे उत्तर-पूर्वी हिस्से पर। सातवीं प्रणाली दक्षिणी हिमाचल प्रदेश से अरब सागर तक जाती हुई ट्रफ है। विज्ञप्ति कहती है कि आगे का मौसम इन्हीं सब प्रणालियों के असर से बनेगा।
19 सितंबर की विज्ञप्ति में 23 तारीख़ की सुबह वाली पंक्ति पहले से मौजूद थी, बस राज्यों का क्रम उलटा था। उस दिन निम्न दाब क्षेत्र बना नहीं था, बनने वाला था। 20 सितंबर को वह बन चुका था और उसके साथ राज्यवार, तारीख़वार चेतावनियां जुड़ गईं। विज्ञप्ति के अनुलग्नक पर विभाग की अपनी चेतावनी भी छपी है कि जैसे-जैसे पूर्वानुमान की अवधि बढ़ती है, उसकी सटीकता घटती जाती है।
पांच उपखंड, और उनके लिए तय तारीख़ें
विज्ञप्ति का विषय-वाक्य ही चेतावनी है, और वह पांच मौसम उपखंडों के नाम तारीख़ों के साथ गिनाता है। उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश में 22 से 24 सितंबर। दक्षिणी ओडिशा में 22 से 25। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में 23 से 25। विदर्भ में 24 और 25 सितंबर। इन सबके लिए श्रेणी एक ही है: कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश।
इसके ऊपर की श्रेणी तीन जगहों के लिए है, पांच के लिए नहीं। 23 और 24 सितंबर को दक्षिणी ओडिशा तथा उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश में, और 24 सितंबर को दक्षिणी छत्तीसगढ़ में, कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। तेलंगाना और विदर्भ इस ऊपरी श्रेणी में नहीं हैं।
| उपखंड | भारी से बहुत भारी बारिश | अत्यधिक भारी बारिश |
|---|---|---|
| उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश | 22 से 24 सितंबर | 23 और 24 सितंबर |
| दक्षिणी ओडिशा | 22 से 25 सितंबर | 23 और 24 सितंबर |
| छत्तीसगढ़ | 23 से 25 सितंबर | दक्षिणी छत्तीसगढ़ में 24 सितंबर |
| तेलंगाना | 23 से 25 सितंबर | इस श्रेणी में नहीं |
| विदर्भ | 24 और 25 सितंबर | इस श्रेणी में नहीं |
कहीं-कहीं शब्द को हल्के में पढ़ लिया जाता है। विभाग के यहां वह भी नापा हुआ है। शब्दावली पुस्तिका के मुताबिक़ isolated का मतलब है कि उपखंड के 25 फ़ीसदी से कम इलाक़े में बारिश होगी। 26 से 50 फ़ीसदी के लिए scattered है और 51 से 75 फ़ीसदी के लिए fairly widespread। यानी दक्षिणी ओडिशा के लिए जो चेतावनी है, वह पूरे दक्षिणी ओडिशा के लिए नहीं है, बल्कि उसके एक चौथाई से कम हिस्से के लिए है। कौन-सा चौथाई, यह विज्ञप्ति नहीं बताती। ज़िलेवार रंग देखने के लिए वह अपने ही दूसरे पन्ने का पता देती है।
बारिश के अलावा भी चेतावनियां हैं। 23 और 24 सितंबर को ओडिशा में और 23 से 25 सितंबर तक तेलंगाना में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से आंधी की संभावना है, जिसके झोंके 70 तक जा सकते हैं। झारखंड में 21 और 22 सितंबर को और गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 22 से 25 सितंबर तक मध्यम से तेज़ बिजली गिरने की चेतावनी है। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 20 से 24 सितंबर तक, रायलसीमा में 20 से 23 तक और तेलंगाना में 23 से 25 तक ज़मीन के पास तेज़ हवाओं की बात है। विज्ञप्ति में यह भी छपा है कि कार्रवाई नारंगी और लाल रंग की चेतावनियों के आधार पर की जा सकती है।
अत्यधिक भारी बारिश यानी 204.4 मिलीमीटर से ऊपर
विज्ञप्ति के आख़िर में संकेतों की सूची है और वहां तीनों श्रेणियां मिलीमीटर में लिखी हैं। भारी बारिश 64.5 से 115.5 मिलीमीटर। बहुत भारी बारिश 115.6 से 204.4 मिलीमीटर। अत्यधिक भारी बारिश 204.4 मिलीमीटर से ऊपर। शब्दावली पुस्तिका जोड़ती है कि यह नाप किसी एक केंद्र पर 24 घंटे में जमा हुए पानी की है, और वह 24 घंटे सुबह 8:30 बजे ख़त्म होते हैं।

इसीलिए बुलेटिन में दो तरह के आंकड़े साथ-साथ चलते हैं। चेतावनी वाले हिस्से में श्रेणी का नाम होता है और बीते मौसम वाले हिस्से में सेंटीमीटर की पट्टियां: 7 से 11, 12 से 20, और 20 से ऊपर। दोनों एक ही चीज़ हैं। 64.5 मिलीमीटर को सेंटीमीटर में गोल करें तो 7 बनता है और 204.4 को 20।
हिंदी विज्ञप्ति में इसी ऊपरी श्रेणी के दो नाम चलते हैं। विषय-वाक्य में और दक्षिणी ओडिशा वाली पंक्ति में उसे बहुत ज़्यादा भारी बारिश कहा गया है। उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी छत्तीसगढ़ वाली पंक्तियों में, तथा आख़िर की संकेत-सूची में, उसी श्रेणी को अत्यधिक भारी बारिश कहा गया है। अंग्रेज़ी पाठ में दोनों जगह extremely heavy है। एक ही दस्तावेज़, एक ही श्रेणी, दो नाम।
बीते 24 घंटों का हिसाब भी उसी विज्ञप्ति में है। 20 सितंबर की सुबह 8:30 बजे तक तेलंगाना, रायलसीमा और तमिलनाडु में बहुत भारी बारिश दर्ज हुई, और ओडिशा, मध्य प्रदेश, अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, असम, नागालैंड तथा दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश। केंद्रवार सूची में सबसे ऊपर दो नाम बराबरी पर हैं। कृष्णागिरि ज़िले का बेट्टमकोल्लम और नागरकुरनूल का कोल्लापुर, दोनों 15 सेंटीमीटर। इसके बाद कमलापुरम 12, नरसिंहपुर 10, अशोकनगर का चंदेरी 10, बेंगलुरु का हवाई अड्डा वेधशाला 9, कोरापुट 8, गोलाघाट 8, सुकमा 7, हट बे 7 और मोकोकचुंग 7। इस सूची में कोरापुट और सुकमा उन्हीं इलाक़ों में हैं जिनके लिए 23 और 24 की चेतावनी जारी हुई है। दोनों जगह बीते 24 घंटों में भी पानी गिरा है।
चेतावनी मछुआरे तक पहुंचती कैसे है
दस्तावेज़ में छपा निर्देश अपने आप किसी नाव तक नहीं पहुंचता। उसके लिए अलग ढांचा है, और वह भी विभाग के अपने काग़ज़ों में लिखा हुआ है। दिसंबर 2024 की चक्रवात चेतावनी एसओपी का अध्याय 6.4.6 मछुआरों की चेतावनी के मानक तय करता है।
चेतावनी तब जारी होती है जब इनमें से कोई एक बात हो: हवा की रफ़्तार 45 किलोमीटर प्रति घंटा से ऊपर जाने की आशंका हो और समुद्र बहुत ख़राब या उससे बदतर रहने वाला हो; समुद्र की हालत बहुत ख़राब या उससे बदतर होने वाली हो; लहरों के उभार की आशंका हो; या आंधी जैसा मौसम हो, जिसका मतलब एसओपी में 51 फ़ीसदी से ज़्यादा इलाक़े में बारिश और 20 नॉट या उससे तेज़ हवा है। 20 सितंबर की विज्ञप्ति में इनमें से तीन शर्तों के आंकड़े मौजूद हैं। लहरों के उभार का ज़िक्र उसमें कहीं नहीं है।
आगे का रास्ता भी लिखा है। ये चेतावनियां ईमेल, टेलीफ़ैक्स और टेलीफ़ोन से तटीय राज्यों के लगभग तीस आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों तक भेजी जाती हैं। आकाशवाणी उन्हें रोज़ चार बार प्रसारित करती है, स्थानीय भाषा में, सुबह-दोपहर-शाम-रात। चक्रवाती तूफ़ान के दौरान यह हर घंटे या हर तीन घंटे का हो जाता है। रास्ता एक नहीं है। मत्स्य विभागों के अधिकारियों और पंजीकृत मछुआरों को एसएमएस, व्हाट्सऐप और मोबाइल ऐप से भी संदेश जाता है। गहरे समुद्र में गई नावों के लिए इसरो की नाविक प्रणाली के ज़रिए इंकॉइस और मौसम विभाग का साझा संदेश भेजा जाता है। अप्रैल 2018 से मछुआरों की चेतावनी नक़्शे की शक्ल में भी निकलती है।

एसओपी की तालिका 1.3 बताती है कि किस श्रेणी पर क्या सलाह बनती है। सीमा साफ़ खिंची है। अवदाब और गहन अवदाब, दोनों पर सलाह यही है कि मछुआरे खुले समुद्र में न जाएं। मछली पकड़ने का काम पूरी तरह रोकने की सलाह चक्रवाती तूफ़ान की श्रेणी से शुरू होती है। रविवार की विज्ञप्ति पहली वाली सलाह देती है। उसी तालिका में गहन अवदाब के सामने लहरों की ऊंचाई 4 से 6 मीटर दर्ज है।
इस सलाह की चपेट में कितने लोग हैं, इसका अंदाज़ा उसी दिन के दूसरे सरकारी काग़ज़ से मिलता है। मत्स्य पालन विभाग की 20 सितंबर की विज्ञप्ति के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल में 2025-26 में 25.43 लाख टन मछली का उत्पादन हुआ, 617 करोड़ रुपये के निवेश से, और इससे 30 लाख से ज़्यादा मछुआरों को आजीविका के मौक़े मिले। पश्चिम बंगाल का तट भी 22 से 24 सितंबर वाली चेतावनी के भीतर है। दोनों काग़ज़ एक ही दिन के हैं। एसओपी में तूफ़ान के बाद की समीक्षा के लिए जो सवाल तय हैं, उनमें एक यह है कि समुद्र में न जाने की सलाह पर्याप्त रूप से पहले पहुंचाई गई या नहीं।
मानसून राजस्थान से लौट रहा है, खाड़ी में सिस्टम बन रहा है
इसी विज्ञप्ति में मानसून की वापसी वाला हिस्सा भी है, और रविवार को अख़बारों ने वही उठाया। उसमें लिखा है कि 19 सितंबर को वापसी की रेखा 27.0°N/68.0°E, रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला और 29.5°N/71.5°E से होकर गुज़रती है। 19 सितंबर की विज्ञप्ति में इसके साथ तुलना भी थी। उस दिन पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून लौटा, जबकि सामान्य तारीख़ 17 सितंबर है।
20 सितंबर की विज्ञप्ति में वही रेखा दोहराई गई है। उस दिन की नई वापसी उसमें दर्ज नहीं है, सिर्फ़ यह कि आगे की वापसी के लिए हालात अनुकूल हैं। 19 सितंबर को यह मोहलत अगले तीन से चार दिन की थी। 20 को अगले दो से तीन दिन की।
वापसी का मतलब सूखा पड़ जाना भी नहीं है। 19 सितंबर की विज्ञप्ति में दर्ज है कि उससे पिछले 24 घंटों में पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं 20 सेंटीमीटर से ज़्यादा बारिश हुई, यानी अत्यधिक भारी वाली सबसे ऊपरी श्रेणी। उसी राज्य के पश्चिमी हिस्से से उसी दिन मानसून की विदाई शुरू हुई।
दो बातें एक ही काग़ज़ पर हैं और एक-दूसरे को काटती नहीं। मानसून उत्तर-पश्चिम से लौटना शुरू करता है, और खाड़ी उसके बाद भी सक्रिय रहती है। विभाग की अपनी शब्दावली पुस्तिका में तूफ़ानी मौसम की परिभाषा तक दर्ज है: अप्रैल-मई और अक्टूबर-दिसंबर, वे महीने जिनमें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ज़्यादातर चक्रवाती तूफ़ान बनते हैं। सितंबर उस सूची में नहीं है।
विभाग ने अपनी विज्ञप्तियों की सूची में दोनों दिनों को जिस तरह शीर्षक दिया, वह भी फ़र्क़ बताता है। 19 सितंबर वाली प्रविष्टि की शुरुआत राजस्थान से मानसून की वापसी से होती है। 20 सितंबर वाली प्रविष्टि की शुरुआत दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश में 23 और 24 को अत्यधिक भारी बारिश से होती है। इस रिपोर्ट के लिए विभाग के आंकड़ों वाले पन्ने से इस मौसम की कुल बारिश का सामान्य से फ़र्क़ नहीं निकाला जा सका, क्योंकि उपखंड और ज़िलेवार तालिकाएं स्क्रिप्ट से खुलती हैं। इसलिए वह आंकड़ा यहां नहीं है।
हवा और समुद्र, तारीख़ दर तारीख़
हवा की चेतावनी तारीख़ों के साथ बढ़ती जाती है। 20 सितंबर को पूर्वी-मध्य और उससे सटे अंडमान सागर पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा, झोंके 60 तक। 21 को 45 से 55, झोंके 65 तक। 22 को मध्य बंगाल की खाड़ी पर 50 से 60, झोंके 70 तक। 23 सितंबर को पश्चिमी-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी खाड़ी पर 55 से 65, झोंके 75 तक, और यह हालत 24 की शाम तक बनी रह सकती है। उसी 23 को दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के साथ-साथ 55 से 65 की रफ़्तार का अनुमान है। ये आंकड़े समुद्र के इलाक़ों के लिए हैं। सिस्टम के केंद्र की नाप ये नहीं हैं।
समुद्र की हालत भी वैसे ही बढ़ती है। 20 को अंडमान सागर में ख़राब। 21 को पूर्वी-मध्य और उससे सटे उत्तर-पूर्वी खाड़ी में ख़राब से बहुत ख़राब, 22 को मध्य खाड़ी में, और 24 सितंबर तक पश्चिमी-मध्य तथा उत्तर-पश्चिमी खाड़ी और उत्तरी आंध्र प्रदेश, ओडिशा व पश्चिम बंगाल के तटों के पास। शब्दावली पुस्तिका में ख़राब समुद्र का मतलब 2.5 से 4 मीटर ऊंची लहरें हैं और बहुत ख़राब का मतलब 4 से 6 मीटर। आंधी जैसी हवा की परिभाषा भी वहीं है। झोंके कम से कम 22 नॉट यानी 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचें और कम से कम एक मिनट बने रहें।
सलाह की सूची: खेत, तालाब और हेलिकॉप्टर
विज्ञप्ति के आख़िरी अनुलग्नक में असर और सुझाई गई कार्रवाई की सूची है। उसमें टहनियां टूटने, केला-पपीता-सहजन जैसे छोटे पेड़ उखड़ने, कच्चे घरों और दीवारों को नुक़सान, ढीली चीज़ों के उड़ने, छोटे जहाज़ों, ट्रॉलरों और नावों के प्रभावित होने, सड़क और रेल यातायात में बाधा, और निचले इलाक़ों में जलभराव तथा बाढ़ की बात है। हेलिकॉप्टर सेवाओं का ज़िक्र दो बार आता है। एक बार असर में, एक बार सुझाव में।
सुझाई गई कार्रवाई में पेड़ के नीचे शरण न लेने, बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल देने और पानी से बाहर आ जाने की बात है। दो पंक्तियां कमाई से जुड़ी हैं। पर्यटन और मनोरंजन की गतिविधियां नियंत्रित की जाएं, और तट पर तथा समुद्र में होने वाले काम सोच-समझकर नियंत्रित किए जाएं।
खेती की सलाह राज्यवार है। ओडिशा के लिए धान, मक्का, बाजरा-ज्वार, अदरक, हल्दी, सब्ज़ियों, दालों और बाग़ों में लगातार निकासी बनाए रखने को कहा गया है। तटीय आंध्र प्रदेश के लिए नालियां साफ़ करने, और फल दे रहे केले के पौधों को बांस का सहारा देने तथा गन्ने को टेक लगाने की सलाह है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के लिए भी निकासी की सूची है। मछली पालने वालों के लिए अलग पंक्ति है। तालाब के चारों ओर जाली लगा निकास बनाएं, ताकि पानी भरकर बहे तो मछलियां न निकल जाएं।
स्रोतभारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय: प्रेस विज्ञप्ति, 20 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1340 बजे IST (अंग्रेज़ी), फ़ाइल 20260920_pr_5328.pdf, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 20 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1405 बजे (हिंदी), फ़ाइल 20260920_pr_5329.pdf, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्ति, 19 सितंबर 2026, जारी करने का समय 1420 बजे IST: पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी और निम्न दाब क्षेत्र बनने का पूर्वानुमान, भारत मौसम विज्ञान विभाग: प्रेस विज्ञप्तियों की क्रमानुसार सूची, 21 सितंबर 2026 को पढ़ी गई (19 सितंबर के लिए 5326 और 5327, 20 सितंबर के लिए 5328 और 5329), चक्रवात चेतावनी प्रभाग, भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली: Terminology on Cyclonic disturbances over the North Indian Ocean (निम्न दाब, अवदाब, गहन अवदाब और तूफ़ान की श्रेणियां, बारिश की श्रेणियां, समुद्र की हालत, दिन के हिस्सों की परिभाषा), भारत मौसम विज्ञान विभाग: Cyclone Warning in India: Standard Operation Procedure, दिसंबर 2024 (तालिका 1.3 समुद्री असर, अध्याय 6.4.6 मछुआरों की चेतावनी के मानक और प्रसार के रास्ते), आरएसएमसी नई दिल्ली, भारत मौसम विज्ञान विभाग: चार चरणों की चक्रवात चेतावनी प्रणाली और उसके रंग-कोड, पत्र सूचना कार्यालय, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, 20 सितंबर 2026: पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन की समीक्षा बैठक और राज्य के मत्स्य क्षेत्र के आंकड़े