विषय
पानी
-
समझिए
भारत मंडपम में मंगलवार को नौवां अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह शुरू हुआ, और केंद्रीय जल आयोग के अपने आंकड़े में देश 2021 से जल-तनाव की सीमा से नीचे है
मंगलवार, 22 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में जल शक्ति मंत्रालय का नौवां भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह शुरू हुआ, जिसका विषय जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन है। सम्मेलन की तैयारी-रिपोर्टों में कहीं नहीं छपा वह आंकड़ा जो केंद्रीय जल आयोग की जून 2019 की अपनी रिपोर्ट में दर्ज है: 2021 में देश की प्रति-व्यक्ति जल उपलब्धता 1,486 घन मीटर सालाना आंकी गई, और यह 1,700 घन मीटर की उस सीमा से नीचे है जिसे फ़ॉकेनमार्क सूचक जल-तनाव की शुरुआत मानता है।
-
समझिए
पंजाब की भूजल दर 152.22 फ़ीसदी पर आई, और पानी पिछली बार से ज़्यादा निकला
सोमवार, 31 अगस्त को चंडीगढ़ के पंजाब भवन में जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि दशकों में पहली बार राज्य के भूजल की हालत सुधरी है: खिंचाई की दर 164 से घटकर 152.22 फ़ीसदी, अति-दोहित ब्लॉक 117 से 110, सुरक्षित ब्लॉक 17 से 20। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के अपने 2025 के आकलन में पंजाब से निकाला गया पानी 26.27 अरब घनमीटर था। 2026 के आकलन में वह 26.32 है।
-
देश
अरावली की पहाड़ी किसे कहें, यह तय करने में दो फ़ैसले, एक रोक और एक समिति लग चुकी है; अदालत ने अब 30 नवंबर की तारीख़ दी है
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ही समिति को छह महीने और देने से मना कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समिति ने साफ़ तौर पर उनकी सेवानिवृत्ति के बाद की तारीख़ माँगी है। सवाल वही पुराना है: 100 मीटर से नीची पहाड़ी अरावली है या नहीं।
-
देश हिमनद झीलों पर बैठक पाँच राज्यों के साथ हुई, और सबसे ज़्यादा झीलें जहाँ हैं वह लद्दाख बुलाया ही नहीं गया गृह सचिव ने उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल और जम्मू-कश्मीर के साथ तैयारी की समीक्षा की। विज्ञप्ति में झीलों की गिनती नहीं है, पैसा नहीं है, और कोई समयसीमा नहीं है।
-
देश सोन नदी का बँटवारा हो गया, और गृह मंत्रालय की विज्ञप्ति में एक भी संख्या नहीं है बिहार और झारखंड के बीच समझौता हुआ। सरकार के अपने दस्तावेज़ में यह नहीं लिखा कि किसे कितना पानी मिला। जो आँकड़े चल रहे हैं वे समारोह में कही गई बातों से आए हैं।
-
देश गंडक में जितना पानी आया, बैराज उससे छह गुना झेलने के लिए बना है 27 अगस्त की रात वाल्मीकि नगर पर बहाव 1,50,200 क्यूसेक था। डिज़ाइन क्षमता 8,50,000 है। 2008 में कुसहा का तटबंध इससे भी कम पानी पर टूटा था।
-
दुनिया जिस झील ने 550 लोगों को बहाया, वह उससे पिछली शाम तक थी ही नहीं रसुवा की बाढ़ हिमनद झील के फटने से नहीं आई। पहाड़ का एक हिस्सा नदी में गिरा, नदी रुकी, और वह अस्थायी बाँध टूट गया। दुनिया की किसी ख़तरा-सूची में यह झील दर्ज नहीं थी।