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औद्योगिक उत्पादन 6.7 फ़ीसदी बढ़ा, पर यह आँकड़ा अभी बदलेगा

सुर्ख़ियों में इसे सुस्ती कहा जा रहा है। तुलना जिस जून के आँकड़े से हो रही है, वह ख़ुद 7.3 से बदलकर 8.8 फ़ीसदी हो चुका है।

औद्योगिक उत्पादन 6.7 फ़ीसदी बढ़ा, पर यह आँकड़ा अभी बदलेगा

जुलाई में देश का औद्योगिक उत्पादन पिछले साल जुलाई से 6.7 फ़ीसदी ऊपर रहा।

सुर्ख़ियों में इसे सुस्ती बताया गया, क्योंकि जून का आँकड़ा 7.3 फ़ीसदी था। पर वह तुलना उतनी मज़बूत नहीं जितनी दिखती है।

सांख्यिकी मंत्रालय जो आँकड़ा हर महीने की 28 तारीख़ को जारी करता है, वह त्वरित अनुमान होता है। बाद के प्रकाशनों में उसे संशोधित किया जाता है। जून का जो आँकड़ा त्वरित अनुमान में 7.3 फ़ीसदी था, संशोधन के बाद कुछ अख़बारों में 8.8 फ़ीसदी छपा है। यानी जुलाई के कच्चे आँकड़े की तुलना जून के पके आँकड़े से हो रही है।

अगले महीने जुलाई का यह 6.7 भी बदलेगा। ऊपर या नीचे।

जो बढ़ा, वह क्या बताता है

संशोधन की बात एक तरफ़ रखें, तो महीने के भीतर की तस्वीर ज़्यादा भरोसेमंद है।

विनिर्माण 7.3 फ़ीसदी बढ़ा। बिजली और गैस आपूर्ति 8.7 फ़ीसदी। पानी और सीवरेज 7.4 फ़ीसदी। खनन अकेला पीछे रहा, 0.9 फ़ीसदी की गिरावट के साथ।

विनिर्माण के 23 उद्योग समूहों में से 19 ऊपर रहे। सबसे आगे तीन: मोटर वाहन और ट्रेलर 22.2 फ़ीसदी, बिजली के उपकरण 28.3 फ़ीसदी, और मशीनरी 12.1 फ़ीसदी।

इन तीनों में एक बात साझा है।

मोटर वाहन समूह को ऊपर खींचने वाली मदें रहीं कमर्शियल व्हीकल और ऑटो पुर्ज़े। बिजली उपकरण समूह में स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, यूपीएस और ऑप्टिकल फ़ाइबर के कनेक्टर। मशीनरी समूह में बुलडोज़र, रोड रोलर, हर तरह के पंप और टरबाइन।

ट्रक, स्विचगियर, बुलडोज़र, पंप। यह किसी दुकान का सामान नहीं है। यह वह सामान है जो तब ख़रीदा जाता है जब कहीं सड़क बन रही हो, लाइन बिछ रही हो, या कारख़ाना खड़ा हो रहा हो।

खनन पर नज़र

गिरावट अकेले खनन में रही, और वही आगे की लागत तय करता है। कोयला, लौह अयस्क और दूसरे खनिज बिजली और इस्पात की क़ीमत में सबसे नीचे बैठे होते हैं। एक महीने की गिरावट रुझान नहीं बनाती, पर लगातार दो-तीन महीने बनाती है।

पैमाने के लिए: जुलाई 2025 में सूचकांक 117.0 था, जुलाई 2026 में 124.8। यह श्रृंखला 2022-23 को आधार वर्ष मानकर बनी है, जो पिछली श्रृंखला से अलग है।

यह सूचकांक बना किस चीज़ से है

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक एक टोकरी है, और उस टोकरी में क्या-क्या रखा है, यह जाने बिना उसका बढ़ना या घटना पढ़ा नहीं जा सकता।

इसमें तीन क्षेत्र हैं: खनन, विनिर्माण और बिजली। पुरानी शृंखला में इनका वज़न क्रमशः 14.37, 77.63 और 7.99 फ़ीसदी था।

तीन-चौथाई से ज़्यादा वज़न विनिर्माण का है। इसका मतलब यह है कि यह सूचकांक जब हिलता है, तो लगभग हमेशा कारख़ानों की वजह से हिलता है। खनन और बिजली के बड़े उतार-चढ़ाव भी कुल आँकड़े में दबे रह जाते हैं।

और यह शृंखला ख़ुद तीन महीने पुरानी है

अब वह बात जो इस पूरे आँकड़े को और अस्थिर बनाती है।

सांख्यिकी मंत्रालय ने इस सूचकांक का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है, और यह 1 जून 2026 से लागू है। नई शृंखला के तहत पहला आँकड़ा अप्रैल 2026 का जारी हुआ था।

बदलाव सिर्फ़ आधार वर्ष का नहीं है। नई शृंखला में 463 वस्तु समूहों के 1,042 उत्पाद हैं, जबकि पुरानी में 407 समूहों की 839 वस्तुएँ थीं।

कुछ चीज़ें पहली बार इसमें आई हैं: गैस आपूर्ति, जल आपूर्ति, मलजल निपटान और कचरा प्रबंधन। खनिजों में छोटे खनिज और दुर्लभ मृदा खनिज भी जुड़े हैं।

यानी जुलाई का जो 6.7 फ़ीसदी छपा है, वह एक ऐसी शृंखला से आया है जो ख़ुद तीन महीने पुरानी है, और जिसकी टोकरी में कुछ चीज़ें पिछले साल थीं ही नहीं।

इसीलिए मंत्रालय का आँकड़ा हर महीने की 28 तारीख़ के आसपास आता है, क्योंकि उसमें संदर्भ महीने से 28 दिन का अंतराल रखा जाता है। जो आँकड़ा 28 दिन में बनता है, वह पूरा नहीं होता। वह पहला अनुमान होता है, और अनुमान बदलते हैं।

स्रोतसांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, सांख्यिकी मंत्रालय, नई आईआईपी शृंखला (आधार वर्ष 2022-23) पर सामान्य प्रश्न, भारतीय आर्थिक सेवा, आईआईपी की 2011-12 शृंखला की संरचना

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