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यह डेस्क कैसे काम करता है
यह डेस्क मानकर नहीं चलता कि पाठक को पहले से पता है। जिस चीज़ पर बात हो रही है, पहले वह क्या है यह बताया जाता है। काम की बात के लेखों की हर छह महीने में दोबारा जाँच होती है, क्योंकि नियम बदलते रहते हैं।
इस डेस्क के अपने नियम
- हर सरकारी प्रक्रिया का लिंक दिया जाता है, ताकि पाठक ख़ुद जाँच सके
- कोई इलाज, दवा या ख़ुराक की सलाह नहीं। सिर्फ़ यह कि सरकारी दिशानिर्देश क्या कहता है
- जिस लेख में तारीख़ मायने रखती है, उस पर जाँच की तारीख़ लिखी रहती है
ये नियम पूरी साइट पर लागू संपादकीय नीति के ऊपर हैं, उसकी जगह नहीं।
यह डेस्क कहाँ से पढ़ता है
- योजनाओं और नियमों के आधिकारिक पन्ने
- क़ानून का मूल पाठ और राजपत्र अधिसूचनाएँ
- सरकारी समितियों और आयोगों की रिपोर्टें
- अदालती फ़ैसलों का मूल आदेश
इस डेस्क से हाल के लेख
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समझिए
ट्रांसजेंडर पहचान का क़ानून बदला, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पुराने अधिकार सुरक्षित रहेंगे
3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की तीन-जजों की बेंच ने मौखिक तौर पर कहा कि ट्रांसजेंडर पहचान क़ानून में हुआ बदलाव पहले दिए गए अधिकार नहीं छीन सकता, पर कोई लिखित आदेश नहीं दिया। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई में आई जो मार्च 2026 के संशोधन को चुनौती देती है, जिसने स्वयं-अनुभूत लैंगिक पहचान का अधिकार क़ानून से हटाकर उसकी जगह मेडिकल बोर्ड की सिफ़ारिश ज़रूरी कर दी है।
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काम की बात
सुमित्रा को नौकरी नहीं मिली थी, सुप्रीम कोर्ट ने 38 साल बाद वजह बताई
करनाल ज़िले के गुढ़ा गांव में इंडियन ऑयल के एलपीजी प्लांट ने 1988 में सिफ़ारिश किए गए 49 में से 43 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भेजे, सुमित्रा को नहीं भेजा। निगम के अपने गवाह ने अदालत में माना कि वह सिर्फ़ इसलिए छूटीं क्योंकि वह औरत थीं, जबकि भर्ती अधिसूचना में औरतें पात्र मानी गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को कहा कि उन्हें रोकने वाला कोई क़ानून रिकॉर्ड में कभी नहीं आया, और अनुच्छेद 142 के तहत बारह लाख रुपये मुआवज़ा तय किया। यह लेख उस साल के क़ानून, आज के क़ानून और आज किसी और के साथ ऐसा होने पर जाने के रास्ते बताता है।
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समझिए
ओडिशा की किताबों में 1,741 ग़लतियां मिलीं, सरकार ने तीन महीने पहले इनकार किया था
स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने शुक्रवार, 25 सितंबर को विधानसभा में बताया कि कक्षा एक से आठ की नई किताबों में 1,741 ग़लतियां और सुझाव मिले हैं, जिनकी छपाई-प्रकाशन पर क़रीब 175 करोड़ रुपये ख़र्च हुए। ठीक तीन महीने पहले विभाग ने लगभग वैसी ही 1,678 की गिनती को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया दावा बताकर ख़ारिज कर दिया था।
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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का रास्ता जज वाला, बाक़ी आयुक्तों का बिल्कुल अलग
6 अप्रैल 2026 को लोकसभा और राज्यसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के दो नोटिस बिना कोई वजह बताए ठुकरा दिए थे, आज़ाद भारत में किसी बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ यह पहला औपचारिक प्रयास था। पाँच महीने बाद कांग्रेस और वाम दल एक नई कोशिश की तैयारी में हैं। संविधान का अनुच्छेद 324(5) मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी सुरक्षा देता है, पर उसी अनुच्छेद का अगला हिस्सा बाक़ी निर्वाचन आयुक्तों को महज़ मुख्य आयुक्त की सिफ़ारिश पर हटाने लायक़ बना देता है। यह लेख उसी प्रक्रिया, उसकी शर्तों और अब तक के इतिहास को खोलता है।
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काम की बात
सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क शून्य हुआ, सोयाबीन-पाम पर पांच फ़ीसदी
24 सितंबर से कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क शून्य और सोयाबीन-पाम पर पांच फ़ीसदी है, पर पीआईबी की घोषणा और सीबीआईसी की असली अधिसूचना एक चीज़ नहीं। कृषि उपकर और सामाजिक कल्याण अधिभार जोड़ने पर कुल शुल्क साढ़े सोलह फ़ीसदी से घटकर साढ़े पांच या ग्यारह फ़ीसदी बैठता है, और एक लीटर पर इसका मतलब है आयातक के लिए साढ़े छह से साढ़े तेरह रुपये तक की गिरावट। पर गोदाम में पड़ा तेल पुराने शुल्क पर ही आयात हुआ है, और यह छूट टिन तक कब पहुंचेगी, इसकी कोई तारीख़ किसी ने नहीं बताई।
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रातभर की हर सौ यात्राओं में अड़तालीस अब तीर्थ और धार्मिक मक़सद से हैं, ग्यारह साल पहले यही मक़सद तीस दिन की खिड़की में गिना जाता था
बुधवार, 23 सितंबर की शाम 4 बजे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण, जुलाई 2025 से जून 2026, का प्रेस नोट जारी किया। रातभर बाहर रहकर लौटने वाली हर सौ यात्राओं में अड़तालीस अब तीर्थ और धार्मिक मक़सद से हैं, हर मापे गए मक़सद में सबसे ज़्यादा। मगर 2014-15 के पिछले सर्वेक्षण में यही मक़सद व्यापार और सामाजिक यात्राओं के साथ तीस दिन की खिड़की में गिना गया था, छुट्टी और स्वास्थ्य वाले साल-भर के समूह में नहीं, इसलिए अड़तालीस फ़ीसदी की तुलना सीधे पुराने आँकड़े से नहीं हो सकती।
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काम की बात
किर्गिज़स्तान के तेरह मेडिकल कॉलेजों का लाइसेंस गया, फ़ैसला वहाँ की सरकार का है, भारत का नहीं: वहाँ पढ़ रहे छात्र अभी क्या करें
किर्गिज़स्तान में तेरह निजी मेडिकल यूनिवर्सिटियों का लाइसेंस सितंबर 2026 से निलंबित है, मगर यह राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की कोई सूची-कार्रवाई नहीं, राष्ट्रपति सद्यर जापारोव के अगस्त 2025 के फ़रमान पर किर्गिज़ स्वास्थ्य मंत्रालय की अपनी राष्ट्रीय मान्यता-जाँच का नतीजा है। भारतीय दूतावास, बिश्केक के दस्तावेज़ों, एनएमसी के अपने नियमों और संसद में सरकार के जवाब से यह लेख वह फ़र्क़ बताता है जिस पर तय होता है कि परिवार को अभी किससे बात करनी है।
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राष्ट्रीय वयोश्री योजना के नौ वित्त-वर्षों में साढ़े आठ लाख बुज़ुर्गों को उपकरण मिले, आबादी के हिसाब से यह आधे फ़ीसदी से भी कम बैठता है
सामाजिक न्याय मंत्रालय की सोमवार, 21 सितंबर की विज्ञप्ति एक साथ तीन योजनाओं के आंकड़े देती है, पर तीनों की अवधि अलग-अलग है: वयोश्री के नौ वित्त-वर्ष, एल्डरलाइन के पांच और देखभालकर्ता प्रशिक्षण के तीन। जनसंख्या अनुमान से जोड़कर देखने पर 8,53,728 का आंकड़ा 2026 की अनुमानित 17.32 करोड़ बुज़ुर्ग आबादी के आधे फ़ीसदी से भी कम बैठता है, जबकि 2011 की जनगणना में दर्ज दिव्यांग बुज़ुर्गों की 53.76 लाख की संख्या के मुक़ाबले यह लगभग सोलह फ़ीसदी है।
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काम की बात
बुज़ुर्ग रिश्तेदार के लिए मुफ़्त वॉकर, व्हीलचेयर या सुनने की मशीन चाहिए, तो राष्ट्रीय वयोश्री योजना में आवेदन का पूरा तरीक़ा यह है
राष्ट्रीय वयोश्री योजना बीपीएल या कम आय वाले बुज़ुर्गों को छड़ी से लेकर व्हीलचेयर तक आठ उपकरण मुफ़्त देती है, पर आवेदन की मशीनरी किसी एक जगह लिखी नहीं मिलती। सामाजिक न्याय मंत्रालय और एएलआईएमको के अपने दस्तावेज़ों से यह लेख वह मशीनरी जोड़ता है, और जहां दस्तावेज़ चुप हैं वहां चुप्पी को दर्ज करता है।
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भारत मंडपम में मंगलवार को नौवां अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह शुरू हुआ, और केंद्रीय जल आयोग के अपने आंकड़े में देश 2021 से जल-तनाव की सीमा से नीचे है
मंगलवार, 22 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में जल शक्ति मंत्रालय का नौवां भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह शुरू हुआ, जिसका विषय जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन है। सम्मेलन की तैयारी-रिपोर्टों में कहीं नहीं छपा वह आंकड़ा जो केंद्रीय जल आयोग की जून 2019 की अपनी रिपोर्ट में दर्ज है: 2021 में देश की प्रति-व्यक्ति जल उपलब्धता 1,486 घन मीटर सालाना आंकी गई, और यह 1,700 घन मीटर की उस सीमा से नीचे है जिसे फ़ॉकेनमार्क सूचक जल-तनाव की शुरुआत मानता है।
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बजट के हर सौ रुपये में ब्याज का हिस्सा बीस है या छब्बीस, दोनों आंकड़े एक ही दस्तावेज़ में छपे हैं
बजट के सार 2026-2027 के पहले पन्ने की तालिका से ब्याज भुगतान 2026-27 के बजट अनुमान में कुल ख़र्च का 26.3 फ़ीसदी बैठता है। उसी दस्तावेज़ के तीसरे पन्ने के चार्ट में यही रक़म 20 लिखी है। फ़र्क़ राज्यों का हिस्सा जोड़ने-घटाने का है, और दस्तावेज़ ख़ुद यह अपनी टिप्पणी में बताता है।
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बंगाल की खाड़ी का अवदाब शाम साढ़े पांच बजे पुरी से 310 किलोमीटर दूर दर्ज था, दोपहर की विज्ञप्ति में वह अवदाब था ही नहीं
सोमवार, 21 सितंबर की दोपहर 2 बजे और 2:05 बजे मौसम विभाग की अंग्रेज़ी और हिंदी विज्ञप्तियों में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम को 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया' लिखा गया, यह नाम ख़ुद चक्रवात चेतावनी प्रभाग की अपनी शब्दावली पुस्तिका में कहीं दर्ज नहीं है। उसी रात साढ़े नौ बजे जारी राष्ट्रीय बुलेटिन नंबर 1 में लिखा मिला कि शाम साढ़े पांच बजे तक यह सिस्टम पुरी से 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व अवदाब बन चुका था। उसी दोपहर की विज्ञप्ति में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ और हिस्सों से लौट जाने की घोषणा भी है, दो दिन की ख़ामोशी के बाद।