विषय
डिजिटल इंडिया
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पैसा
दो अक्तूबर को 'नो यूपीआई डे' बुलाने वाले छह संगठनों में कैट नहीं है
बुधवार शाम मुंबई में महाराष्ट्र चैंबर ऑफ़ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर और पाँच अन्य व्यापारी संगठनों ने गांधी जयंती पर देशव्यापी 'नो यूपीआई डे' का एलान किया, दो हज़ार रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर लगने वाले शुल्क के ख़िलाफ़। देश का सबसे बड़ा व्यापारी संगठन कैट इस सूची में नहीं है; उसका राष्ट्रीय नेतृत्व 0.4 फ़ीसदी दर को वाजिब बता चुका है, जबकि उसकी मध्य प्रदेश और ओडिशा इकाइयाँ अलग से मैदान में उतर चुकी हैं। यह शुल्क अभी किसी से नहीं लिया जा रहा; इसकी शुरुआत 15 अक्तूबर से तय है।
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पैसा
सरकार ने यूपीआई पर शुल्क नहीं लगाया, 14 सितंबर की अधिसूचना ने दो हज़ार से ऊपर की क़ानूनी सुरक्षा हटा दी है
वित्तीय सेवाएँ विभाग की अधिसूचना एस.ओ. 5067(ई) में दो ही भुगतान माध्यमों के नाम हैं, रुपे डेबिट कार्ड और दो हज़ार रुपये तक का यूपीआई। दो हज़ार से ऊपर का यूपीआई उसमें नहीं है, और वह सुरक्षा नाम न होने से गई। 0.4 फ़ीसदी की दर किसी राजपत्र में नहीं है, 15 अक्टूबर की तारीख़ किसी प्रेस विज्ञप्ति में नहीं है, और अभी किसी से कुछ नहीं लिया जा रहा।
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पैसा
रैपिडो पर जुर्माना दस लाख, जबकि आदेश ख़ुद कहता है कि यह दूसरी बार है और दूसरी बार पर धारा 21 पचास लाख तक देती है
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज़ को सवारी से बुकिंग के वक़्त अतिरिक्त पैसे माँगने वाले सारे प्रॉम्प्ट बंद करने को कहा है और 10,00,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। आदेश की तारीख़ 31 अगस्त 2026 है; पत्र सूचना कार्यालय ने इसकी घोषणा 15 सितंबर को की। आदेश का पैराग्राफ़ 55 कहता है कि यह कंपनी का दूसरा उल्लंघन है, और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 21 दूसरी बार पर पचास लाख रुपये तक का जुर्माना देती है।
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समझिए
छूट अब पिछले तीस दिन की सबसे कम क़ीमत से नापी जाएगी, और हेल्पलाइन से जुड़ना ऐच्छिक नहीं रहेगा
उपभोक्ता मामले विभाग ने 10 सितंबर को ई-कॉमर्स नियमावली में संशोधन अधिसूचित किया। सबसे ठोस बदलाव 'पूर्व मूल्य' की परिभाषा है: वह नंबर जिस पर लकीर खिंचती है, अब बीते तीस दिन की सबसे कम पेशकश होगी। 2020 की नियमावली छह साल में सिर्फ़ एक बार बदली थी, और उस बदलाव ने नियम कड़ा नहीं, ढीला किया था।
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काम की बात
उपभोक्ता हेल्पलाइन पंद्रह महीनों में 105 करोड़ रुपये वापस दिला चुकी है, पर वह किसी कंपनी को रिफंड का आदेश नहीं दे सकती
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 35 क्षेत्रों की 1,66,189 रिफंड शिकायतें मुक़दमा-पूर्व चरण में निपटाईं। औसत रिफंड लगभग 6,318 रुपये का बैठता है। यह पूरा रास्ता कंपनियों की स्वैच्छिक भागीदारी पर टिका है, और आदेश देने की शक्ति सिर्फ़ उपभोक्ता आयोग के पास है।
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समझिए
यूआईडीएआई का नया एसडीके चेहरे की जाँच बैंक के अपने ऐप के भीतर ले आया, पर मिलान कहाँ होगा यह विज्ञप्ति नहीं बताती
आधार फ़ेस ऑथेंटिकेशन एसडीके और उसका सैंडबॉक्स मुंबई में जारी हुए। इसके बाद बैंकिंग, बीमा या ब्रोकिंग ऐप के भीतर से ही चेहरा पढ़ा जा सकेगा और फ़ेसआरडी नाम का अलग ऐप बीच से हट जाएगा। यूआईडीएआई की विज्ञप्ति यह नहीं कहती कि चेहरे का मिलान फ़ोन पर होगा या केंद्रीय भंडार में, और दो अख़बारों ने प्राधिकरण के अध्यक्ष के हवाले से जो लिखा है वह विज्ञप्ति में कहीं नहीं है।
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दुनिया उज़्बेकिस्तान में यूपीआई की घोषणा हुई, और उसी विज्ञप्ति की सूची में वह देश नहीं है वित्त मंत्रालय की विज्ञप्ति के नीचे एक शीर्षक है, यूपीआई दस देशों में स्वीकार किया जाता है। उसके नीचे दस नाम गिनाए गए हैं। उज़्बेकिस्तान उनमें नहीं है।
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समझिए भारत में अब एक ही क़ानूनी समय होगा, पर नियम तोड़ने पर सज़ा क्या है, यह लिखा ही नहीं गया उपभोक्ता मामले विभाग के नए नियम कहते हैं कि किसी भी काम के लिए भारतीय मानक समय के अलावा कोई समय इस्तेमाल नहीं होगा। सज़ा के लिए वे मूल क़ानून की तरफ़ भेजते हैं, और उस क़ानून में समय से जुड़ा कोई अपराध है ही नहीं।