उज़्बेकिस्तान में यूपीआई की घोषणा हुई, और उसी विज्ञप्ति की सूची में वह देश नहीं है
वित्त मंत्रालय की विज्ञप्ति के नीचे एक शीर्षक है, यूपीआई दस देशों में स्वीकार किया जाता है। उसके नीचे दस नाम गिनाए गए हैं। उज़्बेकिस्तान उनमें नहीं है।
वित्त मंत्रालय की रविवार शाम वाली विज्ञप्ति का शीर्षक यह है कि एनपीसीआई इंटरनेशनल और उज़्बेकिस्तान के एनआईपीसी ने पूरे उज़्बेकिस्तान में यूपीआई भुगतान चालू करने के लिए साझेदारी की है।
उसी विज्ञप्ति के आख़िरी हिस्से में एक और शीर्षक है।
वह कहता है, यूपीआई दस देशों में स्वीकार किया जाता है।
उसके नीचे नाम गिनाए गए हैं: सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ़्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, क़तर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस।
गिनकर देखिए तो पूरे दस हैं। उज़्बेकिस्तान उनमें नहीं है।
जो 30 अगस्त को हुआ
विज्ञप्ति के मुताबिक़ एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड ने 30 अगस्त 2026 को उज़्बेकिस्तान की राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली एचयूएमओ के संचालक, नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर, के साथ एक वाणिज्यिक समझौते पर दस्तख़त किए।
समझौता यह है कि भारतीय यात्री उज़्बेकिस्तान का राष्ट्रीय क्यूआर कोड, जिसे यूज़ेडक्यूआर कहते हैं, अपने यूपीआई ऐप से स्कैन करके दुकानदार को भुगतान कर सकेंगे। भुगतान व्यक्ति से व्यापारी वाला होगा, यानी किसी को पैसे भेजने का नहीं, दुकान पर चुकाने का।
विज्ञप्ति यह भी बताती है कि यह भारतीय रिज़र्व बैंक और उज़्बेकिस्तान के केंद्रीय बैंक से औपचारिक अनुमोदन मिलने के बाद हुआ, और नियामकों ने एचयूएमओ को सीमा-पार भुगतान के लिए अधिकृत साझेदार नामित किया है।
यूज़ेडक्यूआर उज़्बेकिस्तान के केंद्रीय बैंक का अनिवार्य किया हुआ साझा क्यूआर ढाँचा है। यानी वहाँ हर दुकान का अपना अलग कोड नहीं, एक ही राष्ट्रीय कोड चलता है। जोड़ना उसी एक ढाँचे से होता है, हर बैंक या हर दुकान से अलग-अलग नहीं। विज्ञप्ति के मुताबिक़ इसी वजह से खुदरा, आतिथ्य और सेवा क्षेत्र में स्वीकृति लगभग हर जगह पहुँच सकेगी।
फ़ायदा यह गिनाया गया है कि पर्यटक, कारोबारी यात्री और विद्यार्थी सीधे अपने भारतीय बैंक खाते से चुका सकेंगे, जिससे विदेशी मुद्रा का अतिरिक्त शुल्क और नक़दी या अंतरराष्ट्रीय कार्ड पर निर्भरता घटेगी।
जो विज्ञप्ति में नहीं है
कब से चालू होगा, यह नहीं लिखा।
कोई चरणबद्ध योजना नहीं है, कोई शुल्क नहीं बताया गया, कोई सीमा नहीं दी गई, और यह भी नहीं कि उज़्बेकिस्तान के कितने दुकानदार पहले दिन जुड़े होंगे।
विज्ञप्ति अपनी सूची से पहले "वर्तमान में" शब्द इस्तेमाल करती है। यानी वह ख़ुद जानती है कि सूची अभी वही दस है।
यह पहले भी एक बार गिना जा चुका है
प्रधानमंत्री की उज़्बेकिस्तान यात्रा के नतीजों की जो सूची सरकार ने जारी की थी, उसमें सोलह पंक्तियाँ थीं और उनमें से ग्यारह ऐसे दस्तावेज़ थे जिन पर दस्तख़त हुए। बाक़ी पाँच अलग से घोषणाओं वाले शीर्षक के नीचे रखे गए थे।
उन पाँच में एक दो भुगतान कंपनियों के बीच का कारोबारी क़रार था।
वह क़रार यही है।
तो सरकार की अपनी सूची इसे भी दस्तख़त हुए दस्तावेज़ों में नहीं गिनती थी।
पढ़ते वक़्त
विज्ञप्ति ने कहीं यह नहीं कहा कि उज़्बेकिस्तान में यूपीआई शुरू हो गया। उसने सूची में उस देश का नाम भी नहीं जोड़ा।
दोनों बातें एक ही काग़ज़ पर हैं, बस अलग-अलग हिस्सों में। ऊपर घोषणा है और नीचे गिनती।
एक बात और साफ़ रहे। एनपीसीआई सरकारी संस्था नहीं है। वह भारतीय बैंकों की छत्र संस्था है, जिसे रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ ने मिलकर बनाया था। समझौता उसकी अंतरराष्ट्रीय शाखा और एक विदेशी कंपनी के बीच है, दो सरकारों के बीच नहीं।
जिस दिन उज़्बेकिस्तान उस सूची में ग्यारहवाँ नाम बनकर आएगा, वह ख़बर होगी। यह उससे पहले की सीढ़ी है।
स्रोतवित्त मंत्रालय, विज्ञप्ति, प्रधानमंत्री कार्यालय, उज़्बेकिस्तान यात्रा के नतीजों की सूची