विषय
जनगणना
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समझिए
राष्ट्रीय वयोश्री योजना के नौ वित्त-वर्षों में साढ़े आठ लाख बुज़ुर्गों को उपकरण मिले, आबादी के हिसाब से यह आधे फ़ीसदी से भी कम बैठता है
सामाजिक न्याय मंत्रालय की सोमवार, 21 सितंबर की विज्ञप्ति एक साथ तीन योजनाओं के आंकड़े देती है, पर तीनों की अवधि अलग-अलग है: वयोश्री के नौ वित्त-वर्ष, एल्डरलाइन के पांच और देखभालकर्ता प्रशिक्षण के तीन। जनसंख्या अनुमान से जोड़कर देखने पर 8,53,728 का आंकड़ा 2026 की अनुमानित 17.32 करोड़ बुज़ुर्ग आबादी के आधे फ़ीसदी से भी कम बैठता है, जबकि 2011 की जनगणना में दर्ज दिव्यांग बुज़ुर्गों की 53.76 लाख की संख्या के मुक़ाबले यह लगभग सोलह फ़ीसदी है।
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एनएफ़एचएस-6 ने हीमोग्लोबिन नापा ही नहीं: 131 सूचकांक घटकर 101 रह गए
29 मई 2026 को जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के छठे दौर की 182 पन्नों की फ़ैक्ट शीट में एनीमिया और हीमोग्लोबिन, दोनों शब्द एक बार भी नहीं आते। बायोमार्कर शेड्यूल में ऊँचाई, वज़न, रक्तचाप, रैंडम ब्लड शुगर और उँगली से लिए ख़ून की एचआईवी तथा हेपेटाइटिस जाँच है। ख़ून की कमी उसमें नहीं है। उसी सर्वेक्षण से शिशु मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और पाँच साल से कम उम्र की मृत्यु दर भी ग़ायब हैं।
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इत्मीनान
क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 31 अगस्त 1952 को हटा और पंजाब का अगला क़ानून उसी दिन लागू हो गया
1871 के जिस क़ानून ने पूरी बिरादरियों को जन्म से अपराधी मान लिया था, उसकी अधिसूचनाएँ 31 अगस्त 1952 को ख़त्म हुईं और इन समुदायों को 'विमुक्त' नाम मिला। चौहत्तर साल बाद उस ढाँचे का कितना हिस्सा दूसरे नाम से चल रहा है, यह पंजाब के 1952 के आदतन अपराधी क़ानून में और सुप्रीम कोर्ट की गिनाई तेरह राज्यों की सूची में दर्ज है।
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हिमाचल की साक्षरता 99.55 फ़ीसदी बताई गई, पर यह दर किस आबादी पर निकाली गई है, यह किसी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं है
राज्य की तरफ़ से आए दो आँकड़े, 28,480 निरक्षर और 0.45 फ़ीसदी, आपस में बाँटने पर क़रीब 63 लाख का एक हर देते हैं। उल्लास योजना का पैमाना 15 साल से ऊपर की आबादी का 95 फ़ीसदी है, और 2011 की जनगणना हिमाचल में सात साल से ऊपर के क़रीब 10.47 लाख निरक्षर गिनती थी। घर-घर सर्वे में 94,930 लोग चिह्नित हुए और 59,896 ने इम्तिहान पास किया।
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देश
जनगणना का दसवाँ सवाल 'जाति' है और उसका कॉलम ख़ाली है; तमिलनाडु चाहता है कि वहाँ सूची हो
फ़रवरी 2027 में गणक जो जाति बताई जाएगी वही लिख लेगा, किसी सूची से मिलाए बिना। तमिलनाडु विधानसभा ने 8 सितंबर को प्रस्ताव पास किया कि पिछड़े वर्गों के लिए वही तरीक़ा हो जो अनुसूचित जातियों के लिए है: पहले से लदी सूची, ड्रॉप-डाउन से चुनाव। DMK को मतदान से पहले सदन से बाहर किया गया।
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एम्स के बोर्ड पर आबादी हर सेकंड बदलती है, और भारत की आख़िरी गिनती 2011 में हुई थी
दिल्ली के एम्स में लगा डिजिटल बोर्ड 4 सितंबर को 1,47,92,39,016 दिखा रहा था। यह संख्या किसी बच्चे के जन्म से नहीं बदलती। यह एक सूत्र से बदलती है, जो पंद्रह साल पुरानी गिनती पर टिका है।
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समझिए 81 करोड़ लोग भूखे हैं, यह इस आँकड़े का मतलब नहीं है, और यही सबसे ज़्यादा दोहराया जाता है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम गाँव की 75 फ़ीसदी और शहर की 50 फ़ीसदी आबादी तक जाता है। यह ऊपरी सीमा है, गिनती नहीं। और यह सीमा 2011-12 की आबादी पर बैठाई गई थी।
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समझिए जाति की गिनती परसों से शुरू हो रही है, और खाना खाली छोड़ा गया है जनगणना का दसवाँ सवाल जाति का है। एससी-एसटी के लिए सूची तय है। बाक़ी सबके लिए कोई सूची नहीं, गणक वही लिखेगा जो आप बताएँगे। 2011 में इसी तरीक़े से 46 लाख जातियाँ निकली थीं।