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हिमाचल की साक्षरता 99.55 फ़ीसदी बताई गई, पर यह दर किस आबादी पर निकाली गई है, यह किसी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं है

राज्य की तरफ़ से आए दो आँकड़े, 28,480 निरक्षर और 0.45 फ़ीसदी, आपस में बाँटने पर क़रीब 63 लाख का एक हर देते हैं। उल्लास योजना का पैमाना 15 साल से ऊपर की आबादी का 95 फ़ीसदी है, और 2011 की जनगणना हिमाचल में सात साल से ऊपर के क़रीब 10.47 लाख निरक्षर गिनती थी। घर-घर सर्वे में 94,930 लोग चिह्नित हुए और 59,896 ने इम्तिहान पास किया।

भारत में खुले में लगी महिलाओं की एक साक्षरता कक्षा, 2008 की तस्वीर। यह हिमाचल की नहीं है, पर गिनती जिन लोगों की है वे ऐसी ही कक्षाओं से गुज़रते हैं
तस्वीर: SIM South Asia, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.0

28,480 लोग।

हिमाचल प्रदेश में अब भी इतने लोग निरक्षर गिने जा रहे हैं। राज्य से आई रिपोर्टों में यही संख्या "क़रीब 0.45 फ़ीसदी" बताई गई है, और 0.45 ठीक वही आँकड़ा है जो 100 में से 99.55 घटाने पर बचता है। इन दोनों को आपस में बाँटने पर एक तीसरी संख्या निकलती है, जिसका ज़िक्र किसी सरकारी विज्ञप्ति में नहीं मिलता: वह आबादी, जिस पर यह दर निकाली गई है। 28,480 में 0.0045 का भाग देने पर 63,28,889 आता है। 0.45 को गोल किया हुआ आँकड़ा मानें तो यह हर 62.6 लाख और 64 लाख के बीच कहीं बैठता है।

यह लेख उसी हर की तलाश है।

मंच पर जो कहा गया, और विज्ञप्ति में जो नहीं है

8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का राष्ट्रीय समारोह हुआ। शिक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति संख्या 2308010 में हिमाचल के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का नाम है, अतिथियों की सूची में, उत्तराखंड के धन सिंह रावत, मिज़ोरम के वनलालथलाना और सिक्किम के राजू बासनेत के साथ। उसी विज्ञप्ति में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा की 95.6 फ़ीसदी वाली बात दर्ज है। हिमाचल की 99.55 फ़ीसदी उसमें कहीं नहीं है। किसी पुरस्कार का नाम भी नहीं है। यह आँकड़ा राज्य से आया, केंद्र की विज्ञप्ति से नहीं।

एक साल पहले भी यही हुआ था

8 सितंबर 2025 की विज्ञप्ति संख्या 2164749 में लिखा है कि हिमाचल प्रदेश पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता हासिल करने वाला चौथा राज्य बन गया, त्रिपुरा, मिज़ोरम और गोवा के बाद। उसमें भी हिमाचल का प्रतिशत नहीं है। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वर्चुअल संबोधन में देश का आँकड़ा दिया: 2011 में 74 फ़ीसदी, 2023-24 में 80.9 फ़ीसदी। 99.3 फ़ीसदी की संख्या राज्य के हवाले से चली, केंद्र के दस्तावेज़ से नहीं। दो साल, दो समारोह, और दोनों बार वही चुप्पी उसी जगह पर।

पैमाना क्या है, और किसका है

त्रिपुरा की 23 जून 2025 की विज्ञप्ति में शिक्षा मंत्रालय का पैमाना साफ़ शब्दों में है: राष्ट्रीय स्तर पर तय मानक 15 साल और उससे ऊपर के लोगों में 95 फ़ीसदी साक्षरता का है। यह वाक्य दो काम करता है। पहला, यह बताता है कि "पूर्ण साक्षर" का मतलब सौ फ़ीसदी नहीं, 95 फ़ीसदी है। दूसरा, यह आयु वर्ग तय करता है। उल्लास योजना ख़ुद 15 साल से ऊपर के उन वयस्कों के लिए है जो स्कूल नहीं जा सके, यह राज्यसभा में 29 मार्च 2023 को दिए गए लिखित उत्तर में भी दर्ज है।

लद्दाख की तारीख़ दो सरकारी दस्तावेज़ों में अलग है

मिज़ोरम की 20 मई 2025 की विज्ञप्ति में वही 95 फ़ीसदी है, पर आयु वर्ग का ज़िक्र नहीं। लद्दाख की 25 जून 2024 की विज्ञप्ति कहती है कि वहाँ 97 फ़ीसदी से ज़्यादा साक्षरता हासिल होने के बाद घोषणा हुई। 4 जुलाई 2024 का पत्र सूचना कार्यालय का व्याख्याकार, जिसका आईडी 151922 है, लद्दाख की तारीख़ 25 जून 2024 लिखता है, जबकि लद्दाख की अपनी विज्ञप्ति में घोषणा की तारीख़ 24 जून 2024 है और मिज़ोरम की विज्ञप्ति भी 24.06.2024 ही लिखती है। इन अंतरों को यहाँ सुलझाया नहीं जा रहा, दर्ज किया जा रहा है।

2011 की जनगणना ने हिमाचल में क्या गिना था

पश्चिम सिक्किम में रिनचेनपोंग के पास परेनगाँव में जनगणना 2011 का काम चलता हुआ, मई 2010 की तस्वीर। साक्षरता की दर इसी घर-घर वाली गिनती से निकलती है
तस्वीर: Ministry of Statistics and Programme Implementation GODL-India

जनगणना 2011 में हिमाचल प्रदेश की कुल आबादी 68,64,602 थी और शून्य से छह वर्ष के बच्चे 7,77,898। जनगणना साक्षरता दर सात साल और उससे ऊपर की आबादी पर निकालती है, यानी 68,64,602 में से 7,77,898 घटाकर बचे 60,86,704 लोगों पर। उस आबादी की साक्षरता दर 82.80 फ़ीसदी दर्ज हुई, पुरुषों में 89.53 और महिलाओं में 75.93। इससे साक्षरों की संख्या क़रीब 50,39,791 बनती है और निरक्षरों की क़रीब 10,46,913। यह गुणा-भाग इस लेख का है, आँकड़े जनगणना के संकलन से लिए गए हैं। दस लाख से ऊपर की यह संख्या ही वह गड्ढा है जिसे 2011 के बाद के पंद्रह बरसों में भरा जाना था, और इसी संख्या के सामने उल्लास के आँकड़े रखने पर तस्वीर बदल जाती है।

घर-घर सर्वे ने कितने लोग खोजे

उल्लास हिमाचल में 2023-24 से लागू हुआ और राज्य के सभी 12 ज़िलों में चला। उल्लास पोर्टल पर 94,930 शिक्षार्थी चिह्नित और पंजीकृत हुए। 19,232 स्वयंसेवी शिक्षक पंजीकृत और प्रशिक्षित हुए। यह पूरी योजना स्वयंसेवा पर टिकी है, इसमें कोई वेतनभोगी अध्यापक नहीं है। लाभार्थी मोबाइल ऐप पर सर्वेक्षकों के घर-घर जाकर किए गए सर्वे से पहचाने जाते हैं, और कोई भी निरक्षर सीधे ऐप से ख़ुद को दर्ज करा सकता है। व्याख्याकार 151922 में लिखा है कि योजना की इकाई स्कूल है और सर्वे भी स्कूल के ज़रिए ही होता है। प्राथमिकता वाले इलाक़ों में वे ज़िले गिनाए गए हैं जहाँ 2011 की जनगणना के मुताबिक़ महिला साक्षरता 60 फ़ीसदी से कम थी।

नौ में से एक

2011 की जनगणना से निकले क़रीब 10,46,913 निरक्षरों के सामने घर-घर सर्वे में मिले 94,930 लोग रखिए। यह क़रीब नौ फ़ीसदी है। दस में से नौ लोग, जिन्हें 2011 में निरक्षर गिना गया था, 2023-24 के सर्वे की सूची में नहीं आए। इसकी कई वजहें हो सकती हैं: उम्रदराज़ निरक्षरों का न रहना, 2011 में सात से चौदह साल के जो बच्चे निरक्षर गिने गए थे उनका स्कूल से पढ़कर निकलना, पलायन, और जनगणना के स्वघोषित जवाब तथा सर्वे की पहचान के बीच का फ़र्क़। कोई भी उपलब्ध दस्तावेज़ यह हिसाब नहीं देता कि इनमें से किसका कितना हिस्सा है।

एफ़एलएनएटी क्या चीज़ है

बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान आकलन परीक्षा, यानी एफ़एलएनएटी, स्थानीय स्कूलों में होती है। व्याख्याकार 151922 के मुताबिक़ यह साल में दो बार आयोजित की जाती है और इसका मक़सद असल ज़िंदगी में काम आने वाले पढ़ने-लिखने और गिनती के कौशल को नापना है। पास होने वाले को साक्षरता का प्रमाणपत्र मिलता है, जिस पर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, दोनों के हस्ताक्षर होते हैं। पास होने के लिए कितने अंक चाहिए, यह इन विज्ञप्तियों में नहीं लिखा।

हिमाचल के तीन इम्तिहान

हिमाचल प्रदेश के धरमकोट की राजकीय प्राथमिक पाठशाला, दिसंबर 2011 की तस्वीर। एफ़एलएनएटी की परीक्षा ऐसे ही सरकारी स्कूलों में होती है
तस्वीर: Prateek Rungta from Delhi, India, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.0

सितंबर 2024 के पहले दौर में 15,351 में से 14,516 लोग पास हुए, दर 94.6 फ़ीसदी। मार्च 2025 के दौर में 28,534 में से 28,062 पास हुए, दर 98.3 फ़ीसदी। मार्च 2026 में 17,657 में से 17,318 पास हुए, दर 98.1 फ़ीसदी। तीनों को जोड़िए तो 61,542 लोग बैठे और 59,896 पास हुए, कुल दर 97.3 फ़ीसदी। जोड़ ठीक बैठता है। फेल होने वालों की संख्या तीनों दौर मिलाकर 1,646 है। दूसरे दौर में बैठने वालों की संख्या पहले दौर से लगभग दोगुनी थी और तीसरे दौर में फिर घट गई। योजना का दस्तावेज़ साल में दो बार परीक्षा की बात करता है, पर हिमाचल के लिए सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच तीन ही दौर सार्वजनिक रूप से दर्ज हैं।

जो पंजीकृत हुए और जो प्रमाणित हुए

94,930 चिह्नित शिक्षार्थियों में से 61,542 ही परीक्षा में बैठे। 33,388 लोग किसी भी दौर में नहीं बैठे। पास 59,896 हुए। यानी सूची में दर्ज लोगों में से 35,034 के पास आज तक साक्षरता का प्रमाणपत्र नहीं है। राज्य की तरफ़ से बताई गई बची हुई निरक्षरों की संख्या 28,480 है। दोनों में 6,554 का अंतर है। यह अंतर किस वजह से है, किसी उपलब्ध दस्तावेज़ में नहीं मिला। हो सकता है इनमें से कुछ लोग स्कूल या किसी और रास्ते से साक्षर गिने गए हों, हो सकता है सूची फिर से बनी हो।

16.75 अंक की छलाँग किन लोगों की है

82.80 से 99.55 तक का फ़ासला 16.75 अंक का है। ऊपर निकाले गए क़रीब 63.29 लाख के हर पर 16.75 फ़ीसदी का मतलब है क़रीब 10,60,089 लोग। उल्लास ने हिमाचल में 59,896 लोगों को प्रमाणपत्र दिया है। यह उस संख्या का 5.65 फ़ीसदी है। यहाँ एक चेतावनी ज़रूरी है: 82.80 फ़ीसदी 2011 की आबादी के सात-प्लस हिस्से पर निकली थी और 99.55 फ़ीसदी किस आबादी पर निकली है यह पता नहीं, इसलिए दोनों को सीधे घटाना पूरी तरह ठीक नहीं। फिर भी अंतर का पैमाना यही बताता है कि यह छलाँग पढ़ाए गए लोगों की गिनती से नहीं बनी।

हर कौन-सी आबादी है, यह कहीं नहीं लिखा

निकाला हुआ हर, क़रीब 63.29 लाख, हिमाचल की 2011 की सात साल से ऊपर की पूरी आबादी 60,86,704 से थोड़ा बड़ा है और 2011 की कुल आबादी 68,64,602 से क़रीब आठ फ़ीसदी छोटा। किस साल के आबादी अनुमान का इस्तेमाल हुआ, यह किसी विज्ञप्ति में नहीं है। 15 साल से ऊपर की आबादी का कोई राज्यवार आँकड़ा भी इन दस्तावेज़ों में नहीं दिया गया, जबकि मानक उसी आयु वर्ग पर तय है। जब तक हर सार्वजनिक नहीं होता, 99.55 का मिलान किसी और संख्या से नहीं किया जा सकता।

मिज़ोरम की विज्ञप्ति तरीक़े के सबसे क़रीब जाती है

अगस्त-सितंबर 2023 में क्लस्टर रिसोर्स सेंटर समन्वयकों ने मिज़ोरम में घर-घर सर्वे किया और 3,026 निरक्षर पाए। इनमें से 1,692 पढ़ाई-लिखाई में सक्रिय रूप से जुड़े। विज्ञप्ति का वाक्य इसके बाद आता है: इस हिसाब से मिज़ोरम पूर्ण साक्षरता की रेखा पार कर चुका था। यही उपलब्ध दस्तावेज़ों में तरीक़े का सबसे साफ़ बयान है। हर वह आबादी है जिसका सर्वे हुआ, और अंश उसमें से सर्वे में मिले निरक्षर घटाकर बचा हिस्सा। पूरे राज्य में 292 स्वयंसेवी शिक्षक जुड़े थे।

उत्तराखंड ने अपना आधार बता दिया

19 जून 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर घोषित करने का प्रस्ताव मंज़ूर किया। वहाँ की रिपोर्ट में आधार साफ़ लिखा है: सात साल से कम उम्र के बच्चों को छोड़कर अनुमानित आबादी 1,23,04,601, और निरक्षर 1,31,986। यानी आधार सात-प्लस है, 15-प्लस नहीं, जबकि केंद्र का मानक 15-प्लस पर है। इसी रिपोर्ट में निरक्षरों का हिस्सा 1.3 फ़ीसदी बताया गया है और दर 98.7 फ़ीसदी। इन्हीं दो संख्याओं का भाग 1.07 फ़ीसदी देता है, यानी 98.93 फ़ीसदी। यह अंतर यहाँ दर्ज है, सुलझाया नहीं गया।

गोवा की विज्ञप्ति में दोनों आँकड़े साथ छपे हैं

30 मई 2025 की गोवा वाली विज्ञप्ति में शिक्षा मंत्रालय ने दो संख्याएँ एक ही पैराग्राफ़ में रखीं। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक़ गोवा की साक्षरता दर 93.60 फ़ीसदी है। इसके तुरंत बाद विज्ञप्ति कहती है कि गोवा के अपने सर्वे के मुताबिक़ राज्य इस आँकड़े से आगे निकल चुका है और पूर्ण साक्षरता हासिल कर चुका है। यही ढाँचा हिमाचल पर भी लागू होता है: घोषणा राज्य के अपने सर्वे पर टिकी है, राष्ट्रीय सर्वेक्षण पर नहीं। मिज़ोरम की विज्ञप्ति में यही तुलना 98.20 फ़ीसदी के साथ दी गई है।

घोषणाओं की तारीख़ें

लद्दाख 24 जून 2024, उपराज्यपाल बी. डी. मिश्रा ने लेह के सिंधु सांस्कृतिक केंद्र में घोषणा की। मिज़ोरम 20 मई 2025, आइज़ोल में मुख्यमंत्री लालदुहोमा। गोवा 30 मई 2025, राज्य के 39वें राज्य दिवस पर पणजी में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत। त्रिपुरा 23 जून 2025, अगरतला के रवींद्र शताब्दी भवन में। हिमाचल प्रदेश 8 सितंबर 2025। उत्तराखंड 19 जून 2026। मिज़ोरम को पहला राज्य कहा गया और लद्दाख को पहली प्रशासनिक इकाई, क्योंकि लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश है।

पिछली मुहिम का हिसाब क्या था

व्याख्याकार 151922 के मुताबिक़ 2011 की जनगणना में देश में 15 साल से ऊपर के निरक्षरों की संख्या 25.76 करोड़ थी, जिसमें 9.08 करोड़ पुरुष और 16.68 करोड़ महिलाएँ। साक्षर भारत कार्यक्रम ने 2009-10 से 2017-18 के बीच 7.64 करोड़ लोगों को साक्षर प्रमाणित किया। उसके बाद भी अनुमानित 18.12 करोड़ वयस्क निरक्षर बचे रहे। 2022 में उल्लास इसी बची हुई ज़मीन पर शुरू हुआ था। एक कार्यक्रम की गिनती और अगली गणना के बीच का यह फ़ासला नया नहीं है।

हिमाचल की सीढ़ी 1951 से

राज्य की साक्षरता दर 1951 में 7.98 फ़ीसदी थी। फिर 1961 में 21.03, 1971 में 31.71, 1981 में 42.33, 1991 में 63.75, 2001 में 76.48 और 2011 में 82.80 फ़ीसदी। हर दशक की यह संख्या जनगणना से आई थी, यानी एक ही तरीक़े से, एक ही परिभाषा पर, हर दस साल में एक बार। 2011 के बाद की दो संख्याएँ, 2025 की 99.3 और 2026 की 99.55, इस श्रृंखला से अलग स्रोत की हैं। इसीलिए इन्हें उसी सीढ़ी का अगला डंडा मानकर पढ़ना गुमराह कर सकता है।

योजना पर पैसा कितना है

उल्लास का कुल वित्तीय परिव्यय 1037.90 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र का हिस्सा 700 करोड़ रुपये और राज्यों का 337.90 करोड़ रुपये है। योजना 2022-23 से 2026-27 तक के पाँच वित्त वर्षों के लिए मंज़ूर हुई और इसका लक्ष्य 15 साल से ऊपर के 5 करोड़ निरक्षरों तक पहुँचना है, हर साल एक करोड़। इसके लिए ऑनलाइन टीचिंग, लर्निंग ऐंड असेसमेंट सिस्टम बनाया गया, जिसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने विकसित किया। पढ़ने-पढ़ाने की सामग्री एनसीईआरटी के दीक्षा मंच पर रखी गई है और मोबाइल ऐप से खुलती है।

देश भर के आँकड़े कहाँ पहुँचे

8 सितंबर 2025 की विज्ञप्ति के मुताबिक़ उल्लास में तीन करोड़ से ज़्यादा शिक्षार्थी और 42 लाख स्वयंसेवक जुड़े। क़रीब 1.83 करोड़ लोग बुनियादी साक्षरता परीक्षा दे चुके थे और सफलता दर 90 फ़ीसदी रही। सामग्री 26 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। मई 2025 की मिज़ोरम विज्ञप्ति में ये आँकड़े 1.77 करोड़ परीक्षार्थी, 2.37 करोड़ पंजीकृत शिक्षार्थी और 40.84 लाख स्वयंसेवी शिक्षक थे। जून 2024 तक ऐप पर 1.29 करोड़ शिक्षार्थी और 35 लाख स्वयंसेवक दर्ज थे।

दो विज्ञप्तियाँ, दो अलग संख्याएँ

8 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति कहती है कि अगले दिन राष्ट्रीय बाल भवन में होने वाले उल्लास मेले में 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लोग जुटेंगे। 9 सितंबर की विज्ञप्ति संख्या 2308469 कहती है कि प्रदर्शनी स्टॉल 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने लगाए। एक दिन के अंतर पर छपी दो विज्ञप्तियों में एक की गिनती दूसरी से मेल नहीं खाती। इसी तरह हिमाचल के सम्मान की तारीख़ ज़्यादातर रिपोर्टों में 8 सितंबर है, पर एक रिपोर्ट में 9 सितंबर।

जो इस पड़ताल में स्थापित नहीं हो सका

गणना का सूत्र नहीं मिला। शिक्षा मंत्रालय की कोई ऐसी विज्ञप्ति या दस्तावेज़ इस पड़ताल में उपलब्ध नहीं हुआ जिसमें लिखा हो कि साक्षरता दर का अंश और हर कैसे बनते हैं, किस साल के आबादी अनुमान पर, और जनगणना के साक्षर तथा उल्लास के नव-साक्षर किस तरह जोड़े जाते हैं। शिक्षा विभाग की वेबसाइटें इस मशीन से नहीं खुलतीं, इसलिए यह दावा यहाँ नहीं किया जा रहा कि सूत्र कहीं प्रकाशित ही नहीं है। जो बात इन दस्तावेज़ों के आधार पर तय है वह इतनी है कि जिन विज्ञप्तियों पर ये घोषणाएँ टिकी हैं, उनमें वह सूत्र नहीं है। इस लेख का निष्कर्ष यह नहीं है कि 99.55 ग़लत है; निष्कर्ष यह है कि उसे जाँचने का रास्ता अभी बंद है।

अगली स्वतंत्र गिनती की तारीख़ तय हो चुकी है

लाहौल-स्पीति के किब्बर गाँव में जाड़ा, दिसंबर 2007 की तस्वीर। बर्फ़ से ढके ऐसे ही ग़ैर-समकालिक इलाक़ों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्तूबर 2026 रखी गई है
तस्वीर: Ksuryawanshi, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

4 जून 2025 की विज्ञप्ति संख्या 2133845 के मुताबिक़ जनगणना 2027 दो चरणों में होगी और उसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे है। लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़ से ढके ग़ैर-समकालिक इलाक़ों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्तूबर 2026 की रात 12 बजे रखी गई है। 2011 में भी इन्हीं इलाक़ों की गिनती 11 से 30 सितंबर 2010 के बीच हुई थी। हिमाचल के ऊपरी इलाक़ों के लिए साक्षरता की अगली स्वतंत्र गिनती इस सम्मान के तीन हफ़्ते बाद शुरू होगी।

स्रोतपत्र सूचना कार्यालय, शिक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2308010), अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026 का राष्ट्रीय समारोह, 8 सितंबर 2026, पत्र सूचना कार्यालय, उल्लास मेला के समापन की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2308469), 9 सितंबर 2026, पत्र सूचना कार्यालय, अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2164749), 8 सितंबर 2025, पत्र सूचना कार्यालय, त्रिपुरा के पूर्ण साक्षर घोषित होने की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2139103), 23 जून 2025, पत्र सूचना कार्यालय, मिज़ोरम की पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2130080), 20 मई 2025, पत्र सूचना कार्यालय, गोवा की पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2132893), 30 मई 2025, पत्र सूचना कार्यालय, लद्दाख की पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2028457), 25 जून 2024, पत्र सूचना कार्यालय का व्याख्याकार, उल्लास योजना पर पृष्ठभूमि दस्तावेज़ (व्याख्याकार आईडी 151922), 4 जुलाई 2024, पत्र सूचना कार्यालय, राज्यसभा में शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी का लिखित उत्तर (रिलीज़ आईडी 1911807), 29 मार्च 2023, पत्र सूचना कार्यालय, जनगणना 2027 की संदर्भ तिथियों की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2133845), 4 जून 2025, द ट्रिब्यून, हिमाचल प्रदेश की 99.55 फ़ीसदी साक्षरता पर रिपोर्ट, 8 सितंबर 2026, द लॉजिकल इंडियन, हिमाचल की साक्षरता दर पर रिपोर्ट जिसमें 28,480 निरक्षरों का आँकड़ा दिया गया है, सितंबर 2026, द न्यूज़ हिमाचल, एफ़एलएनएटी के तीनों दौर के नतीजों सहित रिपोर्ट, सितंबर 2026, हिमाचल हेडलाइंस, राष्ट्रीय सम्मान पर रिपोर्ट, सितंबर 2026, द न्यूज़ रडार, हिमाचल की साक्षरता पर रिपोर्ट जिसमें सम्मान की तारीख़ 9 सितंबर बताई गई है, सितंबर 2026, ईटीवी भारत, उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर घोषित होने पर रिपोर्ट, 19 जून 2026, जनगणना 2011 के हिमाचल प्रदेश के आँकड़ों का संकलन: कुल आबादी, शून्य से छह वर्ष की आबादी और साक्षरता दर

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।