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पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से भुगतान प्रणालियाँ जोड़ने को कहा, एक दिन पहले तय हुए वित्त मंत्रियों के बयान में इसके लिए नौ पन्नों में एक पैराग्राफ़ है

शुक्रवार, 11 सितंबर को भारत मंडपम में ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम के उद्घाटन सत्र में वाणिज्य मंत्री ने सदस्य और सहयोगी देशों से कहा कि वे अपने पेमेंट सिस्टम जोड़ें और एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करें। एक दिन पहले मुंबई में ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने जिस संयुक्त बयान पर सहमति बनाई, उसके इकत्तीस पैराग्राफ़ में 'डॉलर' शब्द एक बार भी नहीं आता।

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में भारत मंडपम, पूर्वी गेट की तरफ़ से ली गई फ़रवरी 2026 की तस्वीर; ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम का उद्घाटन सत्र 11 सितंबर को इसी परिसर में हुआ
तस्वीर: Kuldeepburjbhalaike, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

नई दिल्ली के भारत मंडपम में अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का पहला बड़ा आयोजन कारोबारियों का मंच था; नेताओं का सत्र उसके अगले दिन है। शुक्रवार, 11 सितंबर को ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम के उद्घाटन सत्र में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य और सहयोगी देशों से दो चीज़ें माँगीं: अपने भुगतान तंत्र आपस में जोड़ लें, और एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करें।

उससे ठीक एक दिन पहले, 10 सितंबर को मुंबई में, इन्हीं देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर नौ पन्ने के एक संयुक्त बयान पर सहमत हो चुके थे। उस बयान में भुगतान का ज़िक्र एक पैराग्राफ़ में है, और वह पैराग्राफ़ किसी तारीख़, किसी संस्था या किसी मंच का नाम नहीं लेता।

मंच से आया प्रस्ताव और उसके नीचे रखा आँकड़ा

उद्घाटन सत्र में गोयल के साथ मंच पर रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल थे। पत्र सूचना कार्यालय ने इस सत्र की विज्ञप्ति दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर जारी की।

उसमें गोयल का आग्रह इन शब्दों में दर्ज है: वे ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों से कहते हैं कि अपने पेमेंट सिस्टम जोड़ें, एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करें, डिजिटल व्यापार को वैश्विक बनाएँ और उभरती तकनीकों के लिए मिलकर काम करें। द हिंदू ने उसी दिन इस भाषण पर लिखते हुए एक बात नोट की जो विज्ञप्ति में भी दिखती है: गोयल ने किसी एक मुद्रा का नाम नहीं लिया, न किसी एक देश का। "मुद्राओं" बहुवचन में है।

प्रस्ताव के नीचे उन्होंने जो आँकड़ा रखा, वह भारत का अपना था। यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस पर साल में 250 अरब से ज़्यादा लेन-देन होते हैं, जो गिनती के हिसाब से दुनिया भर के आधे से ज़्यादा हैं, और यूपीआई ग्यारह देशों में स्वीकार किया जाता है। बाज़ार खोलने की दलील उन्होंने दूसरे आँकड़े पर टिकाई: 88 फ़ीसदी देशों के लिए निर्यात की लागत शुल्क की तुलना में ग़ैर-शुल्क उपायों से ज़्यादा बढ़ती है।

बाक़ी मंच पर मुद्रा का सवाल इससे तीखे रूप में उठा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि वैश्विक वित्तीय तंत्र का चंद देशों पर निर्भर होना ख़तरनाक है, और ब्रिक्स को स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना चाहिए। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि बीसवीं सदी के आख़िर की बड़ी ताक़तों की जगह नई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ ले रही हैं, और यह होड़ अब सैन्य हमलों तथा गौण प्रतिबंधों की धमकी जैसे "भद्दे रूप" ले रही है। दोनों भाषणों की रिपोर्ट द हिंदू ने 11 सितंबर को दी।

शाम 7 बजकर 5 मिनट पर पत्र सूचना कार्यालय ने इसी फ़ोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा संबोधन जारी किया। उसमें यूपीआई है, व्यापार-बाधाएँ हैं, 2014 के बाद क़रीब 40 देशों से मुक्त व्यापार समझौतों का हवाला है, समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा पर एक पूरा हिस्सा है, और ब्रिक्स बिज़नेस काउंसिल से तीन ठोस माँगें हैं: शीर्ष दस व्यापार-बाधाएँ हटाने पर रिपोर्ट, हर साल सौ स्टार्टअप को दूसरे ब्रिक्स बाज़ारों में पहुँचाना, और कारोबारों के बीच हज़ार नई साझेदारियाँ। स्थानीय मुद्रा में व्यापार या भुगतान तंत्र जोड़ने का आग्रह उस भाषण में नहीं है।

मुंबई का संयुक्त बयान: नौ पन्ने, इकत्तीस पैराग्राफ़, भुगतान पर एक

ब्रिक्स के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर इस साल दो बार मिले: 12 और 13 अगस्त को जयपुर में, फिर 10 सितंबर को मुंबई में। उनका संयुक्त बयान ब्रिक्स इंडिया 2026 की आधिकारिक वेबसाइट पर 11 सितंबर की सुबह चढ़ा। नौ पन्ने, इकत्तीस क्रमांकित पैराग्राफ़।

भुगतान वाला हिस्सा पैराग्राफ़ 25 है। उसका पूरा मज़मून यह है: ब्रिक्स पेमेंट टास्क फ़ोर्स (बीपीटीएफ़) सीमा-पार भुगतान के कारगर तरीक़ों के लिए "व्यावहारिक समाधान" तलाश रही है, और यह काम काज़ान तथा रियो घोषणाओं में नेताओं के दिए मार्गदर्शन पर आधारित है। फिर वह जोड़ता है कि "भुगतान और संदेश-चैनलों की सीमा-पार अंतर-संचालनीयता" का अध्ययन हुआ है और "ब्रिक्स की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार-निपटान तथा निवेश को बढ़ावा देने" पर चर्चा हुई है, "राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए और यह मानते हुए कि सबके लिए एक ही नाप का कोई हल नहीं है।" आख़िरी वाक्य टास्क फ़ोर्स को "चर्चा जारी रखने" के लिए प्रोत्साहित करता है।

पैराग्राफ़ की क्रियाएँ यही तीन हैं: स्वीकार करना, मानना, प्रोत्साहित करना। न कोई समयसीमा है, न कोई संस्था नामज़द है, न कोई प्रणाली।

बयान में क्या नहीं है, यह भी उतना ही दर्ज करने लायक़ है। नौ पन्नों में "डॉलर" शब्द एक बार नहीं आता। "डी-डॉलरीकरण" नहीं आता। सीबीडीसी यानी केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा का ज़िक्र नहीं है, स्विफ़्ट का नहीं है, प्रतिबंधों का नहीं है, और अमेरिका का नाम कहीं नहीं है। "मुद्रा" शब्द पूरे दस्तावेज़ में दो बार आता है: एक बार पैराग्राफ़ 11 में, जहाँ नए विकास बैंक से स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण बढ़ाने को कहा गया है, और एक बार पैराग्राफ़ 25 में।

जिस बात पर बयान खुलकर बोलता है, वह शुल्क है। पैराग्राफ़ 2 कहता है कि "एकतरफ़ा व्यापार और वित्त-संबंधी क़दमों को लेकर हमारी गंभीर चिंताएँ बनी हुई हैं, जिनमें शुल्क और ग़ैर-शुल्क उपाय बढ़ाना शामिल है; ये व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।" अगला वाक्य जोड़ता है कि इनका सबसे भारी बोझ उभरते बाज़ारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। किसी देश का नाम यहाँ भी नहीं है।

बाक़ी दस्तावेज़ का बड़ा हिस्सा वैश्विक वित्तीय संस्थाओं पर है। पैराग्राफ़ 4 अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कोटा की सोलहवीं समीक्षा को बिना और देर किए लागू करने और सत्रहवीं समीक्षा में सार्थक पुनर्संतुलन की माँग करता है। पैराग्राफ़ 5 विश्व बैंक की 2025 की शेयरधारिता समीक्षा पर है। तुलना के लिए: भुगतान को एक पैराग्राफ़ मिला, ब्रेटन वुड्स संस्थाओं के सुधार को तीन।

साल भर की मेहनत का अपना हिसाब पैराग्राफ़ 23 में है। केंद्रीय बैंकों की छह कार्यधाराओं में उन्नीस बैठकें हुईं, चार आमने-सामने के आयोजन हुए, और तेरह रिपोर्टें तथा तकनीकी पर्चे तैयार हुए। पैराग्राफ़ 22, जो निपटान और निक्षेपागार ढाँचे पर है, सिर्फ़ एक तकनीकी कार्यशाला का "संज्ञान लेता" है और आगे "स्वैच्छिक आदान-प्रदान" की बात करता है। पैराग्राफ़ 14 में नए निवेश मंच के लिए एक अध्ययन समूह बनाने की चर्चा दर्ज है, जिसकी संदर्भ-शर्तें अभी सँवारी जा रही हैं, और जिसका तरीक़ा "सर्वसम्मति-आधारित, चरणबद्ध और सदस्य-संचालित" बताया गया है।

जयपुर की सहमति का असली शब्द: 'स्वैच्छिक'

इससे एक महीने पहले, 7 अगस्त को, ब्रिक्स के व्यापार मंत्री जयपुर में मिले थे। उनकी सोलहवीं बैठक का अध्यक्षीय वक्तव्य और परिणाम दस्तावेज़ बीस पन्ने का है, और उसका अनुलग्नक दो एक नाम लेकर आता है जिसका ज़िक्र शुक्रवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी किया: जयपुर कंसेंसस।

पूरा शीर्षक यह है, और इसमें सबसे अहम शब्द पहला क्रिया-रूप है: "ब्रिक्स सदस्यों के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग व्यवस्था की स्थापना का अध्ययन करने पर जयपुर सहमति।" स्थापना नहीं, स्थापना का अध्ययन।

व्यवस्था ख़ुद सीधी है। कोई छोटा निर्यातक माल भेज देता है और भुगतान के लिए साठ या नब्बे दिन इंतज़ार करता है। इनवॉइस डिस्काउंटिंग उसे यह मौक़ा देती है कि वह अपना बिल किसी वित्तपोषक को थोड़ी छूट पर बेचकर पैसा आज ले ले। दस्तावेज़ कहता है कि व्यापार-वित्त की वैश्विक कमी क़रीब 2,500 अरब डॉलर की है, जो उसी बरस के वैश्विक वस्तु व्यापार का 7 से 8 फ़ीसदी बैठता है। इसी दस्तावेज़ का पैराग्राफ़ 3 इस आँकड़े को 2024 का बताता है और जयपुर कंसेंसस की पृष्ठभूमि उसे 2025 का; आँकड़ा वही है, बरस दो लिखे गए हैं।

अध्ययन किन बातों को खंगालेगा, इसकी दस उप-मदें हैं, और उसके बाद नौ "प्रमुख डिज़ाइन विचार" हैं। स्थानीय मुद्रा इन नौ में तीसरे नंबर पर आती है, और उसे दिया गया पूरा वाक्य एक पंक्ति का है: "व्यापार में स्थानीय मुद्रा में निपटान को स्वैच्छिक आधार पर, सदस्यों की आपसी सहमति से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।"

पूरे तंत्र के विकास के बारे में दस्तावेज़ अपनी शर्त पहले ही रख देता है: यह काम "क्रमिक, पारदर्शी, परामर्शी और सर्वसम्मति-आधारित ढंग से" होना चाहिए, सदस्य देशों के विकास के अलग-अलग स्तरों और उनकी राष्ट्रीय नियामक तथा वित्तीय व्यवस्थाओं के अनुसार, और स्वैच्छिक आधार पर।

पहले पन्ने की तलहटी में एक तारांकित टिप्पणी है जिसे पढ़ना छूट जाता है। उसका पाठ यह है कि अनुलग्नकों समेत पूरा दस्तावेज़ सभी ब्रिक्स सदस्यों ने स्वीकार किया, और "एक सदस्य ने जो मुद्दा उठाया, जिस पर सहमति नहीं बन सकी, वह इस दस्तावेज़ में शामिल नहीं है।" कौन-सा सदस्य और कौन-सा मुद्दा, दस्तावेज़ नहीं बताता।

रुपये में व्यापार के चार बरस और पाँच परिपत्र

ब्रिक्स की मेज़ पर यह बहस पहुँचने से पहले भारत अपना प्रयोग शुरू कर चुका था, और उसका पूरा काग़ज़ी रिकॉर्ड रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर है।

शुरुआत 11 जुलाई 2022 के परिपत्र से हुई, ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) संख्या 10, जिस पर मुख्य महाप्रबंधक विवेक श्रीवास्तव के दस्तख़त हैं। ढाँचा यह था: भारतीय आयातक रुपये में भुगतान करेगा, जो साझेदार देश के संवाददाता बैंक के "विशेष रुपया वोस्त्रो खाते" में जमा होगा, और भारतीय निर्यातक को उसी खाते के जमा से रुपये में भुगतान मिलेगा। दोनों मुद्राओं के बीच विनिमय दर बाज़ार तय करेगा।

मुंबई में भारतीय रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय, जून 2018 की तस्वीर; रुपये में व्यापार-निपटान के चार बरस के पाँचों परिपत्र इसी इमारत से निकले
तस्वीर: Pinakpani, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

इसी परिपत्र का पैराग्राफ़ 10 वह शर्त रखता था जो बाद में सबसे ज़्यादा बदली। हर ऐसा खाता खोलने से पहले भारतीय बैंक को रिज़र्व बैंक से मंज़ूरी लेनी होती थी, पूरे इंतज़ाम का ब्योरा देकर, और यह भी देखना होता था कि संवाददाता बैंक एफ़एटीएफ़ के ताज़ा सार्वजनिक वक्तव्य में दर्ज उन उच्च जोखिम वाले क्षेत्राधिकारों का न हो जिन पर एफ़एटीएफ़ ने जवाबी क़दमों की माँग की है।

पैराग्राफ़ 8 बताता है कि खाते में जमा हुए रुपये का क्या किया जा सकता है: परियोजनाओं और निवेश का भुगतान, आयात-निर्यात के अग्रिम का प्रबंधन, और सरकारी ट्रेज़री बिल तथा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश, वह भी "प्रचलित दिशानिर्देशों और निर्धारित सीमाओं के अनुसार"।

जमा क्यों बनता है, यह समझने के लिए अर्थशास्त्र की ज़रूरत नहीं है। यह तंत्र तभी संतुलित रहता है जब दो देश एक-दूसरे से लगभग उतना ही ख़रीदें जितना बेचें। जहाँ भारत बहुत ज़्यादा ख़रीदता है और बहुत कम बेचता है, वहाँ बेचने वाले देश के बैंक के खाते में रुपये जमा होते चले जाते हैं, और उन रुपयों को कुछ न कुछ काम चाहिए।

रिज़र्व बैंक ने 17 जुलाई 2026 को ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र संख्या 19 जारी किया, संदर्भ आरबीआई/2026-27/203, मुख्य महाप्रबंधक एन. सेंथिल कुमार के दस्तख़त से। यह पाँच पुराने परिपत्रों को एक में समेटता है, और साथ में बदलावों की एक अनुसूची देता है जिससे चार बरस की दिशा साफ़ पढ़ी जा सकती है। मंज़ूरी वाली शर्त 5 अगस्त 2025 के परिपत्र से हट चुकी थी; अब अधिकृत डीलर बैंक ऐसा खाता रिज़र्व बैंक को भेजे बिना खोल सकता है। 3 अक्टूबर 2025 के परिपत्र ने जमा रुपये के निवेश का दायरा सरकारी काग़ज़ से बढ़ाकर ग़ैर-परिवर्तनीय डिबेंचर, बॉन्ड और कमर्शियल पेपर तक कर दिया था। नए परिपत्र में यह प्रावधान 2025 के ग़ैर-निवासी ऋण निवेश मास्टर निर्देश के हवाले से चलता है।

2026 का परिपत्र दो और काम करता है। पहला, यह खाते के इस्तेमाल को व्यापार से आगे ले जाता है: फ़ेमा के तहत सभी अनुमेय चालू और पूँजी खाता लेन-देन इसी खाते से निपटाए जा सकते हैं। दूसरा, यह 2022 के तीन पैराग्राफ़ को इस परिपत्र से बाहर कर देता है, निर्यात के बदले अग्रिम, निर्यात प्राप्तियों का आयात देनदारियों से समायोजन, और बैंक गारंटी, यह कहते हुए कि इन पर बैंक प्रचलित निर्देशों से चलेंगे।

एक चीज़ नई जुड़ी। परिपत्र का पैराग्राफ़ 7 कहता है कि भारत में अधिकृत डीलर बैंकों के पास विदेशी संवाददाता बैंकों के जो विशेष रुपया वोस्त्रो खाते हैं, उनका ब्योरा फ़ेडाई की प्रकाशित "एसआरवीए निर्देशिका" में समय-समय पर अपडेट होता रहे।

फ़ेडाई की सूची: रूस के लिए ग्यारह बैंक, चीन के लिए एक

वह निर्देशिका सार्वजनिक है। फ़ॉरेन एक्सचेंज डीलर्स असोसिएशन ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर 11 सितंबर 2026 को यह सूची 36 देशों के लिए 89 प्रविष्टियाँ दिखाती है। हर प्रविष्टि एक देश और भारत के एक अधिकृत डीलर बैंक का जोड़ा है, साथ में उस बैंक का संपर्क पता।

सबसे लंबी क़तार रूस की है। ग्यारह भारतीय बैंक उसके नाम दर्ज हैं: केनरा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफ़सी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बैंक ऑफ़ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, यूको बैंक, इंडसइंड बैंक, ऐक्सिस बैंक, और दो प्रविष्टियाँ जो रूसी बैंकों के अपने भारतीय कामकाज की हैं, स्बरबैंक की भारत शाखा और जेएससी वीटीबी बैंक।

मेरठ में केनरा बैंक की वह शाखा जिसके बोर्ड पर उसे विदेशी विनिमय के लिए अधिकृत लिखा है, अगस्त 2023 की तस्वीर; विशेष रुपया वोस्त्रो खाते ऐसी ही अधिकृत डीलर शाखाओं में खुलते हैं
तस्वीर: Ravi Dwivedi, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

चीन के नाम एक प्रविष्टि है: बैंक ऑफ़ इंडिया।

ब्रिक्स के ग्यारह सदस्यों में से पाँच इस सूची में मिलते हैं, रूस, चीन, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया। ब्राज़ील, दक्षिण अफ़्रीका, ईरान, सऊदी अरब और इथियोपिया सूची में कहीं नहीं हैं।

पड़ोस की गिनती इससे बड़ी है। श्रीलंका के नाम आठ प्रविष्टियाँ हैं और बांग्लादेश के नाम छह, यानी रूस को छोड़कर हर ब्रिक्स सदस्य से ज़्यादा। मॉरीशस और बेलारूस के चार-चार हैं, सिंगापुर और ब्रिटेन के भी चार और पाँच। रुपये में निपटान का जो जाल आज सचमुच खड़ा है, वह पड़ोस और पुराने व्यापारिक रिश्तों का जाल है।

यहाँ एक चेतावनी ज़रूरी है। फ़ेडाई ख़ुद इस पन्ने का मक़सद यह बताती है कि रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार निपटान को अपनाना आसान हो, और ब्योरा वही है जो सदस्य बैंक उसे देते हैं। यह खातों की जनगणना नहीं है, और किसी खाते का सूची में न होना उसके न होने का सबूत नहीं। फिर भी यही वह सूची है जिसे रिज़र्व बैंक ने जुलाई 2026 के अपने परिपत्र में नामज़द किया, और जिसे उसने बैंकों के लिए अद्यतन रखना अनिवार्य किया।

रुपये में निपटे आयात के आँकड़े

अब पैमाना। रुपये में सचमुच कितना व्यापार निपटता है, इसका कोई एक सरकारी पन्ना खुले में नहीं है, और जो आँकड़े 11 सितंबर को छपे वे दो अलग खिड़कियों के हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस ने 11 सितंबर को लिखा कि 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के 8.14 फ़ीसदी आयात रुपये में निपटे, यानी 1.58 लाख करोड़ रुपये के, जो एक बरस पहले उसी तिमाही के 25,402 करोड़ रुपये से छह गुना से ज़्यादा हैं। अख़बार के मुताबिक़ यह उछाल मुख्यतः रूसी तेल के भुगतान से आया है।

रिज़र्व बैंक के आँकड़ों का दूसरा पाठ अर्थशास्त्र की वेबसाइट एकोनीति ने 25 जुलाई 2026 को छापा था। उसके मुताबिक़ मार्च से मई 2026 की खिड़की में 1.38 लाख करोड़ रुपये के आयात रुपये में निपटे, यानी वस्तु आयात का 7.1 फ़ीसदी, जबकि उससे पहले की तीन महीने की खिड़की में, दिसंबर 2025 से फ़रवरी 2026 में, यह 42,506 करोड़ रुपये और 2.4 फ़ीसदी था। दोनों खिड़कियाँ एक नहीं हैं, इसलिए दोनों आँकड़े जैसे छपे वैसे दर्ज हैं, बिना किसी एक को चुने। मूल रिज़र्व बैंक शृंखला किसी खुले सरकारी पन्ने पर इस रिपोर्ट को नहीं मिली।

पैमाना पिछले बरसों से तुलना में खुलता है। उसी रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 के पूरे साल में रुपये में निपटे आयात 99,680 करोड़ रुपये के थे और 2024-25 में 1.13 लाख करोड़ रुपये के। मार्च से मई 2026 की अकेली तिमाही दोनों पूरे बरसों से ऊपर निकल गई। बैंक ऑफ़ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने इस उछाल को रुपये की कमज़ोरी से नहीं जोड़ा; उन्होंने वजह मार्च से रूसी कच्चे तेल की ख़रीद में आई तेज़ी बताई। मार्च 2026 में रुपये में निपटे निर्यात भी उछलकर 41,373 करोड़ रुपये पर पहुँचे और फिर नीचे आ गए; रिपोर्ट इसकी संभावित वजह यह बताती है कि तेल के बदले मिले रुपये रूस ने भारतीय सामान ख़रीदने में लगाए।

पैमाने के दूसरे सिरे पर ब्रिक्स का आपसी व्यापार है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उसी बिज़नेस फ़ोरम में कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार 2003 में 84 अरब डॉलर था और 2024 में क़रीब 1,200 अरब डॉलर पर पहुँच गया। गोयल के अनुसार ब्रिक्स आज वैश्विक व्यापार का लगभग एक-चौथाई है।

और जिस मुद्रा को दूसरे देशों से रखवाने की बात हो रही है, उसका अपना हाल उसी शुक्रवार को दर्ज हुआ। रुपया 5 पैसे गिरकर 95.57 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, लगातार पाँचवें सत्र में नीचे। डॉलर की जगह किसी और मुद्रा में बिल बनाने का फ़ैसला अंततः इसी सवाल पर टिकता है कि सामने वाला उस मुद्रा को कितने दिन रखने को तैयार है।

अध्यक्षता 2027 में चीन के पास जाती है

मुंबई के बयान का आख़िरी पैराग्राफ़, इकत्तीसवाँ, एक वाक्य का है: सदस्य 2026 में अपना काम जारी रखेंगे ताकि "2027 में चीन की अध्यक्षता के तहत सहज संक्रमण और निरंतर गति" बनी रहे। पेमेंट टास्क फ़ोर्स इस साल जो नहीं निपटा पाएगी, वह अगले बरस चीनी अध्यक्षता की मेज़ पर जाएगा।

ब्रिक्स की मुद्राओं में रेनमिनबी अकेली है जिसके पास अपना सीमा-पार भुगतान तंत्र भी है और उसे अंतरराष्ट्रीय बनाने की घोषित नीति भी। इसके बावजूद उसका आकार छोटा है: इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ स्विफ़्ट के जुलाई के आँकड़ों में वैश्विक भुगतान में रेनमिनबी का हिस्सा 3.1 फ़ीसदी था और डॉलर का 50.99 फ़ीसदी।

बीजिंग में चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना का मुख्यालय, नवंबर 2016 की तस्वीर; रेनमिनबी का सीमा-पार भुगतान तंत्र और उसे अंतरराष्ट्रीय बनाने की नीति, दोनों यहीं से चलते हैं
तस्वीर: Max12Max, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

इसी अख़बार में 11 सितंबर को छपे अमित कुमार के स्तंभ ने इस सवाल को सीधे रखा कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार का ब्रिक्स-स्तरीय ढाँचा कहीं रेनमिनबी में व्यापार का दूसरा नाम तो नहीं बन जाएगा। स्तंभ की दलील आँकड़ों पर है: स्थानीय मुद्रा में व्यापार तभी चलता है जब दोनों तरफ़ का व्यापार संतुलित हो, और रूस-भारत का अनुभव यही दिखाता है कि भारत के साथ रूस के भारी व्यापार अधिशेष के चलते रूसी बैंकों के वोस्त्रो खातों में रुपये ऐसे जमा हुए जिन्हें मॉस्को न ख़र्च कर सका, न बदल सका, और दोनों को तीसरी मुद्रा के रूप में रेनमिनबी और दिरहम पर विचार करना पड़ा। रूस-चीन व्यापार का लगभग 99 फ़ीसदी स्थानीय मुद्राओं में पहुँचा तो रूस दुनिया का सबसे बड़ा रेनमिनबी भंडार रखने वाला देश बन गया। ब्रिक्स के भीतर चीन ज़्यादातर सदस्यों के साथ अधिशेष में है, जबकि भारत मिस्र, इथियोपिया और ईरान को छोड़कर सात सदस्यों के साथ घाटे में है, और स्तंभ के अनुसार 2025-26 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का कुल व्यापार घाटा 226 अरब डॉलर रहा।

फ़ेडाई की सूची इसी असंतुलन का दूसरा चेहरा है। रूस के साथ रुपये में निपटान का ढाँचा इसलिए फैला क्योंकि भारत उससे बहुत ज़्यादा ख़रीदता है और उस ख़रीद का भुगतान कहीं न कहीं जमा होना था। चीन के साथ भी भारत घाटे में है, और वहाँ सूची में एक ही बैंक है।

रूस की तरफ़ से इस फ़ोरम में एक और संस्था का प्रस्ताव आया। रेशेतनिकोव ने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया के प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता हैं, फिर भी क़ीमत के जिन मानकों पर चलते हैं वे दूसरे बाज़ारों के हित दर्शाते हैं, और रूस ने ब्रिक्स अनाज विनिमय की विस्तृत योजना तैयार की है। मुंबई के संयुक्त बयान में इस योजना का ज़िक्र नहीं है।

शनिवार की बैठक से पहले जो तय नहीं है

यह रिपोर्ट शुक्रवार रात पर रुकती है। नेताओं का मुख्य सत्र शनिवार, 12 सितंबर को है, और उसका कोई हिस्सा यहाँ दर्ज नहीं है।

शुक्रवार तक जो तय नहीं था, उसकी सूची छोटी और साफ़ है। भुगतान तंत्र जोड़ने की न कोई तारीख़ है, न कोई संस्था, न कोई नामज़द मंच; पेमेंट टास्क फ़ोर्स का काम चर्चा जारी रखना है। नए निवेश मंच के अध्ययन समूह की संदर्भ-शर्तें अभी लिखी जा रही हैं। सीमा शुल्क पर आपसी प्रशासनिक सहायता के समझौते को "जो सदस्य ऐसी स्थिति में हैं" उन्होंने सैद्धांतिक मंज़ूरी दी है, बाक़ी के लिए काम जारी है। और जयपुर में एक सदस्य का उठाया मुद्दा सहमति न बनने पर दस्तावेज़ से बाहर रह गया, बिना नाम लिए।

यह सवाल इसी अध्यक्षता के साथ शुरू नहीं हुआ। मुंबई का पैराग्राफ़ 25 कहता है कि टास्क फ़ोर्स का काम काज़ान और रियो की घोषणाओं पर टिका है, जहाँ नेताओं ने इसे नाम भी दे दिया था, ब्रिक्स क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स इनिशिएटिव। 2024 की रूसी और 2025 की ब्राज़ीलियाई अध्यक्षता के बाद भी वह अध्ययन और चर्चा के दर्जे पर है।

शिखर सम्मेलन का घोषणा-पत्र शनिवार और रविवार की बैठकों के बाद आएगा।

स्रोतब्रिक्स इंडिया 2026 की आधिकारिक वेबसाइट: ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों का संयुक्त बयान, मुंबई, 10 सितंबर 2026 (नौ पन्ने, 31 पैराग्राफ़), संयुक्त बयान की मूल पीडीएफ़ प्रति, 11 सितंबर 2026 को वेबसाइट पर चढ़ाई गई, ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की सोलहवीं बैठक, जयपुर, 7 अगस्त 2026: अध्यक्ष का वक्तव्य और परिणाम दस्तावेज़, बीस पन्ने, अनुलग्नक दो में 'जयपुर कंसेंसस', पत्र सूचना कार्यालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, 11 सितंबर 2026, दोपहर 12:10: ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम के उद्घाटन सत्र में पीयूष गोयल, एस. जयशंकर, जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 11 सितंबर 2026, शाम 7:05: ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम में प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 11 सितंबर 2026, शाम 5:28: प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति की द्विपक्षीय बैठक, भारतीय रिज़र्व बैंक, ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र संख्या 19, RBI/2026-27/203, 17 जुलाई 2026: विशेष रुपया वोस्त्रो खाते, और बदलावों की अनुसूची, भारतीय रिज़र्व बैंक, ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र संख्या 10, RBI/2022-2023/90, 11 जुलाई 2022: भारतीय रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार निपटान का मूल ढाँचा, फ़ॉरेन एक्सचेंज डीलर्स असोसिएशन ऑफ़ इंडिया (फ़ेडाई): विशेष रुपया वोस्त्रो खाता निर्देशिका, 11 सितंबर 2026 को पढ़ी गई, द इंडियन एक्सप्रेस, 11 सितंबर 2026: सीमा-पार भुगतान, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, और रुपये में निपटे आयात के आँकड़े, द इंडियन एक्सप्रेस, 11 सितंबर 2026: एकतरफ़ा शुल्क पर ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों की चिंता, द इंडियन एक्सप्रेस, 11 सितंबर 2026: अमित कुमार का स्तंभ, ब्रिक्स में स्थानीय मुद्रा व्यापार और रेनमिनबी का सवाल, द हिंदू, 11 सितंबर 2026: गोयल ने किसी एक मुद्रा या देश का नाम लिए बिना स्थानीय मुद्रा व्यापार की बात कही; रेशेतनिकोव का अनाज विनिमय का प्रस्ताव, द हिंदू, 11 सितंबर 2026: बिज़नेस फ़ोरम में पुतिन और पेज़ेश्कियान के भाषणों की रिपोर्ट, द हिंदू, 11 सितंबर 2026: ग्लोबल फ़िनटेक फ़ेस्ट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का डिजिटल रुपये पर बयान, बिज़नेस स्टैंडर्ड, 11 सितंबर 2026: रुपया 5 पैसे गिरकर 95.57 पर बंद, लगातार पाँचवें सत्र में गिरावट, एकोनीति डेली ब्रीफ़, 25 जुलाई 2026: रिज़र्व बैंक के आँकड़ों पर आधारित रुपया-निपटान का ब्योरा, बरसवार तुलना और मदन सबनवीस का आकलन

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।