विषय
न्यायपालिका
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समझिए
ट्रांसजेंडर पहचान का क़ानून बदला, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पुराने अधिकार सुरक्षित रहेंगे
3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की तीन-जजों की बेंच ने मौखिक तौर पर कहा कि ट्रांसजेंडर पहचान क़ानून में हुआ बदलाव पहले दिए गए अधिकार नहीं छीन सकता, पर कोई लिखित आदेश नहीं दिया। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई में आई जो मार्च 2026 के संशोधन को चुनौती देती है, जिसने स्वयं-अनुभूत लैंगिक पहचान का अधिकार क़ानून से हटाकर उसकी जगह मेडिकल बोर्ड की सिफ़ारिश ज़रूरी कर दी है।
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देश
तमिलनाडु ने क़ानून-व्यवस्था विभाग को सूचना अधिकार क़ानून से बाहर किया, जिस धारा से यह हुआ वह सिर्फ़ ख़ुफ़िया और सुरक्षा संगठनों के लिए है
इक्कीस सितंबर को जारी जी.ओ. संख्या 57 में एक ही वाक्य है: राज्यपाल ने लोक (क़ानून-व्यवस्था) विभाग को धारा 24(4) के तहत 'ख़ुफ़िया और सुरक्षा संगठन' घोषित कर दिया है। ठीक तीन महीने पहले सुप्रीम कोर्ट उसी धारा पर मध्य प्रदेश की एक अधिसूचना रद्द कर चुका है, यह कहते हुए कि दर्जा अधिकार क्षेत्र से तय होता है, नाम से नहीं।
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काम की बात
सुमित्रा को नौकरी नहीं मिली थी, सुप्रीम कोर्ट ने 38 साल बाद वजह बताई
करनाल ज़िले के गुढ़ा गांव में इंडियन ऑयल के एलपीजी प्लांट ने 1988 में सिफ़ारिश किए गए 49 में से 43 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भेजे, सुमित्रा को नहीं भेजा। निगम के अपने गवाह ने अदालत में माना कि वह सिर्फ़ इसलिए छूटीं क्योंकि वह औरत थीं, जबकि भर्ती अधिसूचना में औरतें पात्र मानी गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को कहा कि उन्हें रोकने वाला कोई क़ानून रिकॉर्ड में कभी नहीं आया, और अनुच्छेद 142 के तहत बारह लाख रुपये मुआवज़ा तय किया। यह लेख उस साल के क़ानून, आज के क़ानून और आज किसी और के साथ ऐसा होने पर जाने के रास्ते बताता है।
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देश
करूर भगदड़ का एक साल: एफ़आईआर तीन नाम पर, चार्जशीट अब तक दाख़िल नहीं
27 सितंबर 2025 को करूर में तमिलगा वेट्टी कषगम की रैली में मची भगदड़ में 41 लोगों की जान गई थी। एक साल बाद जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीबीआई के पास है, राज्य का जांच आयोग दो हफ़्ते में निलंबित हो चुका है, और तीन अलग-अलग मुआवज़ा घोषणाओं का पूरा भुगतान किसी सरकारी दस्तावेज़ में दर्ज नहीं मिलता।
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देश
हाई कोर्ट ने पूछा, यह बस मानकों पर खरी उतरी थी या नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार, 25 सितंबर को ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड पर ख़ुद संज्ञान लिया और मुख्य सचिव, डीजीपी व परिवहन के अपर मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग पर तलब किया। आदेश में अदालत ख़ुद लिखती है कि उसे नहीं पता कि हादसे वाली बस आग-सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरती थी या नहीं, और राज्य से 13 अक्तूबर तक जवाब माँगा है।
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पैसा
सेबी ने अडानी समूह की पाँच कंपनियों से जुड़ी हिंडनबर्ग-संबंधी कार्यवाही निपटाई
मंगलवार, 22 सितंबर को जारी सेबी के एक आदेश ने अडानी एंटरप्राइज़ेज़, अडानी टोटल गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिज़नेस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के ख़िलाफ़ 15 फ़रवरी 2024 का वह कारण-बताओ नोटिस निपटाया, जो हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद हुई जाँच से निकला था। पाँचों कंपनियों ने मिलाकर 1,50,80,000 रुपये चुकाए। सेबी का अपना आदेश दर्ज करता है कि यह निपटारा 'without admitting or denying the findings of facts and conclusions of law' की शर्त पर हुआ, यानी न आरोप मानकर, न नकारकर, और यह ठीक वह हिस्सा नहीं है जिस पर सेबी ख़ुद एक साल पहले फ़ैसला सुना चुका था।
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देश
सुप्रीम कोर्ट: वैवाहिक विवाद के पॉक्सो मामलों में फ़ौरन गिरफ़्तारी नहीं, मनोवैज्ञानिक जांच पहले
गुरुवार, 24 सितंबर को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि जहाँ बच्चे के माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा हो और पॉक्सो का आरोप ख़ुद परिवार के किसी सदस्य पर लगे, वहाँ गिरफ़्तारी से पहले बच्चे का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन ज़रूरी होगा। यह फ़ैसला बेंगलुरु के एक मामले में सीबीआई जांच के बाद आया, जिसमें अदालत ने एफ़आईआर रद्द कर बेटी की क़ानूनी कस्टडी पिता को लौटाई।
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देश
चुनाव आयुक्त नियुक्ति क़ानून पर पीठ बँटी, फ़ैसला अब मुख्य न्यायाधीश पर
बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले 2023 के क़ानून को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं पर बँटा हुआ आदेश दिया। सवाल क़ानून के सही या ग़लत होने का नहीं था, सवाल यह था कि फ़ैसला मौजूदा दो जजों की पीठ करे या पांच जजों की संविधान पीठ। दोनों जज असहमत रहे, इसलिए कितनी बड़ी पीठ बनानी है, यह तय करने के लिए मामला अब मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के पास जाएगा।
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देश
दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार सुबह सात जजों की शपथ है, कॉलेजियम ने आठ नाम भेजे थे; गुरविंदर पाल सिंह का नाम सरकार की विज्ञप्ति में नहीं है
10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्टों के लिए कुल पंद्रह न्यायिक अधिकारियों के नाम भेजे थे। 19 सितंबर को विधि एवं न्याय मंत्रालय ने चौदह नियुक्तियों की विज्ञप्ति जारी की। जो एक नाम छूटा, वह दिल्ली की आठ नामों वाली सूची में पहले नंबर पर था, और उसके रुकने की कोई वजह किसी सार्वजनिक दस्तावेज़ में दर्ज नहीं है।
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काम की बात
पचास रुपये की अर्ज़ी पर सरकारी कर्मचारी का सेवा-विवाद कैट सुनता है, नियम में छह महीने की समय-सीमा दर्ज है
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट में मूल आवेदन की फ़ीस 50 रुपये है, और यही रक़म 1987 के गजट, कैट के ई-फ़ाइलिंग मैनुअल और इस विज्ञप्ति, तीनों में दर्ज है। प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 20 कहती है कि पहले विभाग में प्रतिवेदन दो, धारा 21 कहती है कि उसके बाद एक साल के भीतर अर्ज़ी लगे, और धारा 23 कहती है कि वकील रखना ज़रूरी नहीं। कैट (प्रक्रिया) नियम, 1987 का नियम 14(2) कहता है कि हर आवेदन रजिस्ट्रेशन से छह महीने के भीतर, जहाँ तक हो सके, सुना और तय किया जाए।
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देश
केंद्र ने कर्नाटक हाई कोर्ट से कहा, कर छूट में 'जीवनसाथी' का दायरा बढ़ा तो क़रीब 159 क़ानून नहीं चल पाएँगे
शनिवार, 19 सितंबर को जस्टिस बी एम श्याम प्रसाद की एकल पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बहस की। मामला 14.41 ग्राम के एक सोने के कड़े से शुरू हुआ था और अब आयकर क़ानून के एक परंतुक पर टिका है। अदालत ने कुछ तय नहीं किया। अगली तारीख़ 9 अक्टूबर है।
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देश
चार हाई कोर्टों में चौदह जज नियुक्त, उनमें आठ की नियुक्ति दो साल से ज़्यादा की नहीं है
शनिवार, 19 सितंबर को विधि एवं न्याय मंत्रालय की विज्ञप्ति की तालिका में चौदह नाम हैं और तीसरे ख़ाने में दो अलग वाक्य। छह की नियुक्ति जज के रूप में है, आठ की अपर जज के रूप में। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर को जो चार बयान जारी किए, उनमें से किसी में 'अपर' शब्द नहीं है।
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देश
कर्नाटक की मज़दूरी अधिसूचना 1948 के उस क़ानून से जारी हुई जो 21 नवंबर 2025 को निरस्त हो चुका था
22 मई 2026 की पच्चीस पन्ने की अधिसूचना पहले ही पैराग्राफ़ में न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 की धारा 3(1)(ब) और 5(1)(ब) का हवाला देती है। उसी अधिसूचना के तीसरे पन्ने पर, कन्नड़ पाठ के बीच अंग्रेज़ी में, वेतन संहिता, 2019 की वह धारा 69 छपी है जिसने 1948 के क़ानून को निरस्त किया। शुक्रवार, 18 सितंबर को कर्नाटक हाई कोर्ट ने इसी अधिसूचना को रोकने वाले तीन सरकारी परिपत्रों पर अंतरिम रोक लगाई।
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दुनिया
H-1B पर एक लाख डॉलर की शर्त एक साल और बढ़ी है, जबकि उसे वसूलने वाले दसों सरकारी काग़ज़ 8 जून को अदालत रद्द कर चुकी है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर को सितंबर 2025 के उस हुक्मनामे की मियाद 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दी, जिसके तहत H-1B याचिका के साथ एक लाख डॉलर की अदायगी होने पर ही विशेष पेशे के विदेशी कामगार अमेरिका में दाख़िल हो सकते हैं। उसी दिन इसी कार्यक्रम पर दूसरा आदेश भी निकला, जिस पर ख़बरें लगभग नहीं बनीं।
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देश
झीरम घाटी के दस दोषियों को फांसी; अट्ठाईस आरोपियों पर मुक़दमा अब भी बाक़ी
बुधवार, 16 सितंबर को जगदलपुर की एनआईए विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले के दसों दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई। एनआईए ने कुल 39 लोगों के ख़िलाफ़ चालान पेश किया था, सुनवाई दस पर हुई, और अट्ठाईस अब भी फ़रार की सूची में हैं। उसी हमले पर बने जाँच आयोग की 4,184 पन्नों की रिपोर्ट 6 नवंबर 2021 को राज्यपाल को सौंपी जा चुकी है और विधानसभा के पटल पर आज तक नहीं आई।
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देश
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गोलपाड़ा की तोड़-फोड़ को ग़ैर-क़ानूनी नहीं ठहराया, सवाल 13 अक्टूबर के लिए रख दिया
गोलपाड़ा के मटिया राजस्व सर्कल के अंचल अधिकारी ने 5 सितंबर 2026 को नोटिस जारी किए जिनमें मकान मालिकों से कहा गया था कि अपने घर 24 घंटे में ख़ुद गिरा लें। 7 सितंबर की सुबह, अँधेरा रहते, घर गिरा दिए गए। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उसी दिन और फिर 11 सितंबर को दो अंतरिम आदेश दिए, दोनों में 'प्रथम दृष्टया' लिखकर, और असली सवाल 13 अक्टूबर के लिए टाल दिया।
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समझिए
रात एक बजे ट्रक उठाने पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 लाख का मुआवज़ा दिया
बुधवार, 16 सितंबर को हरि दत्त शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्टीयरिंग लॉक तोड़कर रात में ट्रक उठा ले जाना अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। नया यह नहीं है। अदालत ने साथ ही दर्ज किया कि यही बात वह फ़रवरी 2007 के प्रकाश कौर फ़ैसले में कह चुकी है, और आरबीआई के दिशानिर्देश तब से काग़ज़ पर ही रहे हैं। इसलिए इस बार उसने रिज़र्व बैंक को अमल कराने का निर्देश भी दिया।
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काम की बात
मुक़दमा लंबित हो तो पासपोर्ट अदालत की लिखित अनुमति और एक वचन-पत्र पर मिलता है
पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 6(2)(f) उसी पर लागू होती है जिसका मामला किसी आपराधिक अदालत के सामने लंबित है। 25 अगस्त 1993 की अधिसूचना उससे छूट देती है, बशर्ते आप उसी अदालत का आदेश और सादे काग़ज़ पर लिखा वचन-पत्र साथ लगाएँ। सिर्फ़ एफ़आईआर दर्ज हो और जाँच चल रही हो, तो विदेश मंत्रालय की अपनी हिदायत कहती है कि यह धारा लगती ही नहीं।
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काम की बात
लोक अदालत में अपना मामला कैसे भिजवाएँ, उसमें ख़र्च क्या आता है, और फ़ैसले के बाद कौन सा रास्ता बंद हो जाता है
मुक़दमा अदालत में है तो आवेदन उसी अदालत में, और दायर ही नहीं हुआ तो तालुक, ज़िला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में। फ़ीस कोई नहीं, और पहले जमा की गई अदालती फ़ीस समझौता होने पर वापस मिलती है। बदले में अपील का हक़ ख़त्म हो जाता है।
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समझिए
हाई कोर्टों में अगस्त की 42 नियुक्तियों के बाद ख़ाली कुर्सियाँ 341 से घटकर 304 हुईं
1 जुलाई और 1 अगस्त 2026, न्याय विभाग की दोनों मासिक सूचियों में एक ही संख्या दर्ज है: 1,122 स्वीकृत पद, 781 कार्यरत जज, 341 ख़ाली कुर्सियाँ। 1 सितंबर की सूची में ख़ाली पद 304 हैं। बीच में 7, 20 और 27 अगस्त की छह अधिसूचनाएँ हैं।
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देश
असम से मदुरै भेजी गई हथिनी दुर्गा की फ़ाइल में जाँच, रिपोर्ट और सिफ़ारिश एक ही दिन की हैं
सोमवार, 7 सितंबर की रात पाँच साल की एक हथिनी असम से मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर के लिए चली। तमिलनाडु के वन विभाग का जो काग़ज़ उसके साथ था, उस पर 4 सितंबर की तारीख़ है, और उसी तारीख़ पर मदुरै के ज़िला वन अधिकारी का मुआयना, उनकी रिपोर्ट और राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की सिफ़ारिश, तीनों दर्ज हैं। बंदी हाथी (स्थानांतरण या परिवहन) नियम, 2024 इन तीन पड़ावों के लिए मिलाकर 37 दिन तक का समय देता है।
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काम की बात
रात दस बजे के बाद शोर की शिकायत में डेसिबल नापने की ज़रूरत नहीं
ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 में चार क्षेत्र हैं और हर क्षेत्र की दिन-रात की अलग सीमा। रात दस से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर पर सीधी रोक है, और साल में पंद्रह रातों की जो छूट राज्य सरकार दे सकती है, उसकी तारीख़ें उसे पहले से घोषित करनी होती हैं। शिकायत किसके पास जाती है, उसमें क्या लिखा होना चाहिए, नाप कौन करता है, और लिखित आदेश आने के बाद पुलिस का अधिकार कैसे बदल जाता है, नीचे उसी क्रम में है।
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देश
एक मुक़दमे में बरी, दूसरे में मुक़दमा चल रहा: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोंडा का ज़िला-बदर आदेश रद्द किया
गुरुवार, 10 सितंबर को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने गोंडा के ज़िलाधिकारी का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें ज़ाहिद अली को 'गुंडा' घोषित करके छह महीने के लिए ज़िले से बाहर किया गया था। फ़ैसले में लिखा है कि अदालतें बार-बार टोक चुकी हैं, फिर भी राज्य गुंडा एक्ट को दमन के औज़ार की तरह इस्तेमाल करने पर लगातार बना हुआ है, और यह मामला उसी दुरुपयोग की चमकती मिसाल है।
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काम की बात
ग़लत बेची गई बीमा पॉलिसी पर शिकायत का असल रास्ता: तीस दिन, चौदह दिन और पचास लाख की तीन सीमाएँ
मिस-सेलिंग की परिभाषा नियामक के 2024 के विनियम में लिखी है और उसके चार हिस्से हैं। पॉलिसी लौटाने की अवधि अब तीस दिन की है, कंपनी को जवाब चौदह दिन में देना है, और बीमा लोकपाल पचास लाख रुपये तक का मुआवज़ा तय कर सकता है। नियामक की अपनी वेबसाइट पर यह आख़िरी आँकड़ा आज भी तीस लाख लिखा मिलता है।
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1891 का बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम 1 अक्टूबर को हटेगा, डिजिटल रिकॉर्ड के तीन प्रमाणपत्र घटकर एक होंगे
वित्त मंत्रालय ने 11 सितंबर को बताया कि बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम, 2026 पहली अक्टूबर से लागू होगा। उसी दिन 1891 का अधिनियम रद्द हो जाएगा। बदलाव इस बात में नहीं है कि बैंक का रिकॉर्ड सबूत बनता है या नहीं, बदलाव इस बात में है कि उसके साथ कौन-सा काग़ज़ और किसका दस्तख़त लगेगा।
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इत्मीनान
अदालत का मतलब इमारत नहीं है, वह एक काम का नाम है, और वह काम बराबरी करना है
मुंसिफ़ का मतलब है आधा करने वाला। वकील का मतलब है जिसे सौंपा गया हो। तीनों शब्द अरबी की तीन अलग जड़ों से आए हैं और तीनों इंसाफ़ की तीन अलग तस्वीरें खींचते हैं।
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काम की बात
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने आरक्षित डिब्बे में हुई डकैती को सेवा में कमी माना और रेलवे पर 20,000 रुपये मुआवज़ा तय किया
28 अगस्त 2004 की रात अवध-असम एक्सप्रेस के स्लीपर डिब्बे एस-8 में हथियारबंद लोग घुसे थे। बाईस साल बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने तय किया कि रात में दरवाज़े बंद न रखना और डिब्बे में टीटीई या सुरक्षाकर्मी का न होना सेवा में कमी है। मुआवज़ा 20,000 रुपये, वह भी नुक़सान, मानसिक कष्ट और मुक़दमे के ख़र्च को मिलाकर। इसी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश उलटी दिशा में है, और वह इस फ़ैसले में कहीं नहीं है।
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देश
जिस क़ानून के सहारे कर्नाटक सिनेमा टिकटों पर दो फ़ीसदी उपकर वसूल रहा था, वह क़ानून कभी लागू ही नहीं हुआ
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 10 सितंबर को वे परिपत्र और नोटिस रद्द कर दिए जिनमें सिनेमाघरों से 1 सितंबर से दो फ़ीसदी कल्याण उपकर वसूलने को कहा गया था। राज्य ने ख़ुद अदालत में माना कि 2024 का अधिनियम अब तक चालू ही नहीं हुआ। जिन दिनों यह रक़म टिकट पर जुड़ी, उसका क्या हुआ, यह कोई दस्तावेज़ नहीं बताता।
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समझिए
दिल्ली हवाई अड्डे पर 63 सोशल मीडिया हैंडल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर हुई, पर किन धाराओं में, यह अब तक सार्वजनिक नहीं
डायल ने 9 सितंबर को दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की घोषणा की। कंपनी के बयान में जो अंग्रेज़ी शब्द है, 'public mischief', वह भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 का शीर्षक है; उसकी पहली उपधारा असंज्ञेय है, और मानहानि पर पुलिस अपने आप मुक़दमा चला ही नहीं सकती। हवाई अड्डे ने 4 सितंबर को ख़ुद जो परामर्श जारी किया था, उसमें उड़ानों के विलंब और डायवर्जन दर्ज हैं।
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काम की बात
माँ के दूसरे विवाह से बेटी का पिता की संपत्ति पर हक़ नहीं जाता, मद्रास हाई कोर्ट ने पुरानी धारा 24 का दायरा खोलकर रख दिया
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की जो धारा 2005 में हटाई जा चुकी है, वह अब भी उन बँटवारों में उठती है जहाँ मृत्यु उससे पहले हुई थी। मद्रास हाई कोर्ट ने कोयंबटूर के एक पुराने मुक़दमे में तय किया कि उस धारा की रोक विधवा तक सीमित थी। पिता का हिस्सा उसकी बेटी तक पहुँचने से नहीं रुकता।
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पैसा
पाँच दिन की बैंकिंग पर आईबीए 2024 में मान चुका है, पर बैंक की छुट्टी तय करने का अधिकार उसके पास है ही नहीं
11 सितंबर को यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस की देशव्यापी हड़ताल है। माँग वही ढाई साल पुरानी है जिस पर भारतीय बैंक संघ 8 मार्च 2024 को हामी भर चुका है। बैंक की छुट्टी घोषित करने की ताक़त 1881 के एक क़ानून और 1957 की एक अधिसूचना के रास्ते राज्य सरकारों तक पहुँचती है, और यही वजह है कि सहमति फ़ाइल से आगे नहीं बढ़ी।
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काम की बात
उपभोक्ता हेल्पलाइन पंद्रह महीनों में 105 करोड़ रुपये वापस दिला चुकी है, पर वह किसी कंपनी को रिफंड का आदेश नहीं दे सकती
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 35 क्षेत्रों की 1,66,189 रिफंड शिकायतें मुक़दमा-पूर्व चरण में निपटाईं। औसत रिफंड लगभग 6,318 रुपये का बैठता है। यह पूरा रास्ता कंपनियों की स्वैच्छिक भागीदारी पर टिका है, और आदेश देने की शक्ति सिर्फ़ उपभोक्ता आयोग के पास है।
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देश
किलोकरी में एक संगीतकार शोर की शिकायत करने नीचे उतरा और ज़िंदा नहीं लौटा; बारह साल पहले बनी समिति का क़ानून आज भी नहीं बना है
चोंगथम विक्रम सिंह की मौत के बाद आठ गिरफ़्तारियाँ हुईं और मंत्री ने आठ-नौ दिन में चार्जशीट का भरोसा दिया। पुलिस कहती है कि नस्लीय मक़सद साबित नहीं हुआ। 2014 में निदो तानियम की मौत के बाद जो समिति बनी थी, उसकी सबसे बड़ी सिफ़ारिश आज तक संसद में नहीं पहुँची।
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देश
अदालत ने उसे राहत के लिए न्यायाधिकरण भेजा था, और वह बांग्लादेश में धकेल दी गई
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को मुमताज़ बेगम को दो लाख रुपये देने का आदेश दिया है। यह पहली बार है जब किसी अदालत ने किसी को सीमा पार धकेलने पर राज्य पर ख़र्च डाला हो।
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काम की बात
नशे की लत है और पुलिस का डर भी: क़ानून में एक धारा है जो इलाज कराने पर मुक़दमे से बचाती है
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए कहती है कि जो व्यक्ति ख़ुद इलाज के लिए आगे आता है, उस पर कम मात्रा वाले मामले में मुक़दमा नहीं चलेगा। शर्त एक है, और उसे न जानने पर यह छूट वापस ली जा सकती है।
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देश
जिस जज के सामने आपका मुक़दमा है, वह साठ पर रिटायर होता है, और यह उम्र 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुद तय की थी
अब वही अदालत चाहती है कि यह बासठ हो। सात राज्य मान गए हैं, तेईस को दो हफ़्ते का समय मिला है। बीच में ज़िला अदालतों के 5.18 करोड़ मुक़दमे खड़े हैं।
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देश
बार काउंसिल ने एक पूरे बैच को वकील बनने से रोक दिया था, और सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह अधिकार आया कहाँ से
अधिवक्ता अधिनियम 1961 में वह धारा है ही नहीं। तीन जजों की पीठ ने कहा कि बार काउंसिल का अनुशासन तब शुरू होता है जब कोई वकील बन जाए, उससे पहले नहीं। जिन जजों ने यह कहा, उनमें वही मुख्य न्यायाधीश थे जिनके विरोध से यह सब शुरू हुआ था।
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समझिए जेल में बंद हर चार में से तीन लोगों पर मुक़दमा अभी चल ही रहा है, दो में से तीन नहीं एनसीआरबी की ताज़ा कारागार रिपोर्ट कहती है कि 72.6 फ़ीसदी क़ैदी विचाराधीन हैं। जो आँकड़ा हर जगह दोहराया जाता है, दो-तिहाई वाला, वह 2005 का है।
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समझिए अदालतें पहले से तेज़ चल रही हैं, और मुक़दमों का ढेर फिर भी बढ़ रहा है जुलाई 2026 में ज़िला अदालतों में हर दिन औसतन 94,386 मुक़दमे दायर हुए और 77,431 निपटे। 2018 के बाद निपटान दायर होने से तेज़ बढ़ा है। रेखा फिर भी पार नहीं हुई।