कक्षा 6 का यही बैच तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देगा, और सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से इसी बैच को छूट देने पर विचार करने को कहा
9 सितंबर को तीन जजों की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि इस साल की कक्षा 6 को तीन-भाषा नीति से कुछ रियायत देने पर सोचा जाए। सीबीएसई के अपने परिपत्रों में यही वह अकेला बैच है जिसे कक्षा 10 में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी है। बाक़ी सभी बैचों के लिए बोर्ड ने यह परीक्षा स्कूल के भीतर की आंतरिक जाँच तक सीमित रखी है।

अप्रैल में जब सीबीएसई ने अपने स्कूलों से कहा कि कक्षा 6 में तीसरी भाषा पढ़ाना अभी शुरू करें, तब उस भाषा की किताब छपी नहीं थी। यह बात बोर्ड ने परिपत्र में ख़ुद लिखी। पाठ्यपुस्तकें "शीघ्र उपलब्ध करा दी जाएँगी", और तब तक स्कूल "स्थानीय रूप से उपलब्ध किताबों या सामग्री" से पढ़ाना तुरंत चालू करें। तामील के लिए सात दिन दिए गए।
पाँच महीने बाद वही कक्षा 6 सुप्रीम कोर्ट में है।
9 सितंबर, बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, "इस साल के लिए कक्षा 6 पर विचार कीजिए… अगर उन्हें कुछ रियायत दी जा सके।" पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी थे। सुनवाई 17 सितंबर तक टल गई।
अदालत ने क्या कहा और किस बैच के लिए
अदालत ने कोई रोक नहीं लगाई।
उसने बोर्ड से एक बात पर विचार करने को कहा है: चालू सत्र में जो बच्चे कक्षा 6 में हैं, उन्हें तीन-भाषा नीति से कुछ छूट मिल सकती है या नहीं। सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया, क्योंकि अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं। पीटीआई के अनुसार उन्होंने भरोसा दिया, "हम सब बैठकर आपके सामने वापस आएँगे।" एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामला और न टले, क्योंकि बच्चों को अंततः परीक्षा देनी है और अभिभावकों में घबराहट है।
20 अगस्त की वह टिप्पणी जिससे यह सुझाव निकला
कक्षा 6 वाला विचार 9 सितंबर को पहली बार नहीं आया। 20 अगस्त की सुनवाई में जस्टिस बागची ने विस्तार से यही बात कही थी। लाइव लॉ में दर्ज उनके शब्द हैं: "अगर आपने शुरुआत का बिंदु कक्षा 6 चुना है, तो इस साल के कक्षा 6 के विद्यार्थियों को राहत देने पर विचार कीजिए। आप इसे अगले साल से लागू कर सकते हैं।" उन्होंने जोड़ा कि जिन बच्चों ने किसी एक भाषा के लिए ख़ुद को पहले ही बाँध लिया है, उन्हें राहत मिल जाए तो याचिकाकर्ताओं की तात्कालिक चिंता हल हो जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बोर्ड से कहा, "इस पर फिर से विचार कीजिए। इसमें कोई शक नहीं कि आख़िरकार इसे लागू होना ही है।"
अंग्रेज़ी को 'ग़ैर-देशी' कहने पर पीठ का सवाल
उसी सुनवाई में पीठ ने नीति की एक शब्दावली पर सवाल उठाया। सीबीएसई की योजना अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश को "ग़ैर-देशी" भाषाओं के उदाहरण के तौर पर रखती है। जस्टिस बागची ने कहा कि उन्हें "नेटिव" शब्द पर आपत्ति है, उसमें औपनिवेशिक ध्वनि है, और "इंडिजिनस" कहना बेहतर होगा। अंग्रेज़ी की भारतीय समाज में जड़ें कितनी गहरी हैं और कई राज्यों में वह राजभाषा है, इसलिए इस सवाल का संवैधानिक पहलू देखना होगा। 14 जुलाई को उन्होंने पूछा था कि क्या भारत अंग्रेज़ी को देशी भाषा मान सकता है, और यह भी कि आठवीं अनुसूची में वह दर्ज नहीं है।
सीबीएसई की अधिसूचना में तीसरी भाषा कब से अनिवार्य है
सीबीएसई की पुरानी योजना में भी तीन भाषाएँ कक्षा 8 तक अनिवार्य थीं। माध्यमिक पाठ्यचर्या 2026-27 में यह वाक्य दर्ज है कि पुरानी योजना वाले बच्चों के लिए "यह अनिवार्य है कि सभी विद्यार्थियों ने कक्षा 8 तक तीन भाषाएँ पढ़ी हों।" नया क्या है, यह परिपत्र शैक्षणिक-25/2026 की पाँचवीं शर्त से साफ़ होता है: जिन स्कूलों ने "आर1, आर2, आर3 प्रारूप के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाएँ" पढ़ाना शुरू नहीं किया है, वे 1 जुलाई 2026 से बिना चूके शुरू करें।
शर्त तीसरी भाषा की नहीं, दो भारतीय भाषाओं की है।
सात दिन, ओएसिस का ख़ाना और 31 मई की तारीख़
तारीख़ें एक के बाद एक आईं। 9 अप्रैल के परिपत्र शैक्षणिक-17/2026 में स्कूलों को सात दिन में अनुपालन का निर्देश मिला, चुनी हुई आर3 भाषा क्षेत्रीय कार्यालय को बतानी थी और ओएसिस पोर्टल पर दर्ज करनी थी। उसी परिपत्र में यह भी लिखा है कि कक्षा 6 में जो आर3 भाषा स्कूल शुरू करेगा, कक्षा 9 और 10 में उसी स्कूल के लिए वही विकल्प उपलब्ध रहेगा। 4 मई के अनुवर्ती परिपत्र में बोर्ड ने माना कि कुछ स्कूलों ने प्रविष्टि नहीं की और कुछ ने "नीति की संस्तुति के विपरीत" विकल्प भर दिए। सुधार के लिए 31 मई तक का मौक़ा दिया गया।
किताबें उन्नीस भाषाओं की, अनुसूची में बाईस

15 मई के परिपत्र शैक्षणिक-33/2026 के साथ एक अनुलग्नक लगा है जिसका शीर्षक है, कक्षा 6 की आर3 पाठ्यपुस्तकें जिन भाषाओं में तैयार हो रही हैं। उस सूची में उन्नीस प्रविष्टियाँ हैं: असमिया, बांग्ला, बोडो, डोगरी, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संताली, सिंधी, तमिल और तेलुगु, जिसमें तेलुगु के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना वाले दो संस्करण एक ही प्रविष्टि में हैं। आठवीं अनुसूची में भाषाएँ बाईस हैं; सूची में हिंदी, संस्कृत और उर्दू नहीं हैं, जिनके पाठ्यक्रम बोर्ड के पास पहले से हैं। 10 जुलाई के परिपत्र में बोर्ड ने बाईस अनुसूचित भाषाओं की किताबें एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की बात लिखी।
बोर्ड परीक्षा किस बैच को देनी होगी
अदालत ने कक्षा 6 का ही नाम क्यों लिया, इसका जवाब परिपत्र शैक्षणिक-49/2026 के खंड 'घ' में है। उसमें लिखा है कि 2026-27 की कक्षा 6 और उसके बाद के बैचों के लिए तीन में से दो भाषाएँ भारतीय होंगी, और "जब यह बैच और उसके बाद की कक्षा 6 की टोलियाँ कक्षा 10 तक पहुँचेंगी, वे आर3 की बोर्ड परीक्षा देंगी।" उसी परिपत्र में कक्षा 9, 8 और 7 के मौजूदा बैचों के लिए साफ़ लिखा है कि आर3 की जाँच स्कूल के भीतर आंतरिक रहेगी और इनके कक्षा 10 पहुँचने पर आर3 की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
छूट का सुझाव जिस बैच के लिए है, बोर्ड परीक्षा भी उसी के लिए है।
अगर तीसरी भाषा में पास न हुए
नीति में तीसरी भाषा को नंबरों से नहीं, प्रमाणपत्र से बाँधा गया है। माध्यमिक पाठ्यचर्या का वाक्य है कि कोई विद्यार्थी सीबीएसई की माध्यमिक परीक्षा का उत्तीर्ण प्रमाणपत्र पाने का पात्र नहीं होगा जब तक वह तीसरी भाषा में पास न हो। यह भी दर्ज है कि प्रवेश-पत्र बाँटते समय आर3 में उत्तीर्ण न होना बाक़ी विषयों की बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोकेगा, और जो बच्चे कक्षा 10 में आर3 पास नहीं कर पाएँगे उनकी दोबारा जाँच स्कूल करेगा। बोर्ड ने सुझाव दिया कि अंकतालिका में आर3 के आगे "उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण" लिखा जाए।
1968, 1986 और 2020: एक ही सूत्र, तीन नीतियाँ
2020 की नीति सूत्र को "जारी रखने" की भाषा में लिखती है, यानी वह उससे पहले का है। 1986 की नीति ने उसे अपने शब्दों में दोहराया तक नहीं, सिर्फ़ 1968 की नीति की ओर लौट गई। उसके "भाषाएँ" शीर्षक वाले खंड में कुल तीन वाक्य हैं: "1968 की शिक्षा नीति ने भाषाओं के विकास के प्रश्न की विस्तार से पड़ताल की थी; उसके मूल प्रावधानों में सुधार की गुंजाइश शायद ही है और वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। पर 1968 की नीति के इस हिस्से का क्रियान्वयन असमान रहा है। नीति को अब ज़्यादा ऊर्जा और उद्देश्य के साथ लागू किया जाएगा।" अठारह साल बाद नीति ने जो एक शिकायत दर्ज की, वह क्रियान्वयन की थी।
'किसी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी'
एनईपी 2020 का पैरा 4.13 सूत्र को जारी रखता है और उसके साथ एक शर्त जोड़ता है। मूल पाठ में लिखा है कि तीन-भाषा सूत्र में "ज़्यादा लचीलापन होगा, और किसी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी।" आगे: "बच्चों की तीनों भाषाएँ राज्यों, क्षेत्रों और ख़ुद विद्यार्थियों की पसंद होंगी, बशर्ते तीन में से कम से कम दो भाषाएँ भारत की मूल भाषाएँ हों।" पैरा 4.12 में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से भाषा शिक्षकों में बड़े पैमाने पर निवेश करने को कहा गया है, और यह सुझाव भी है कि राज्य आपस में द्विपक्षीय समझौते करके एक-दूसरे से शिक्षक भर्ती करें।
कक्षा 6 का बच्चा बीच सत्र में भाषा कैसे बदले
पैरा 4.13 का आख़िरी वाक्य इसी उम्र के बारे में है। उसमें लिखा है कि जो विद्यार्थी अपनी तीन में से एक या ज़्यादा भाषाएँ बदलना चाहें, वे कक्षा 6 या 7 में ऐसा कर सकते हैं, बशर्ते माध्यमिक शिक्षा ख़त्म होने तक तीनों में बुनियादी दक्षता दिखा सकें, जिसमें भारत की एक भाषा साहित्य के स्तर पर हो। सीबीएसई की योजना में यह चुनाव बच्चे के हाथ में नहीं है। पाठ्यचर्या का नियम है कि एक भाषा एक से ज़्यादा स्तर पर नहीं रखी जा सकती, आर3 आर1 और आर2 से अलग होगी, और स्कूल कौन सी आर3 देगा यह ओएसिस पोर्टल की उसकी अपनी प्रविष्टि से तय होता है।
जिन स्कूलों में तीसरी भाषा का शिक्षक ही नहीं है

बोर्ड ने इस कमी को छिपाया नहीं, उसका विकल्प लिख दिया। 15 मई के परिपत्र का वाक्य है कि जिन स्कूलों के पास पर्याप्त योग्यता वाले भारतीय भाषा शिक्षक नहीं हैं, वे अंतरिम व्यवस्था के तौर पर दूसरे विषयों के ऐसे शिक्षकों को लगा सकते हैं जिन्हें उस भाषा की "कामचलाऊ दक्षता" हो। उसी परिपत्र में सहोदय समूहों से संसाधन साझा करने, आभासी पढ़ाई, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों और उस भाषा के स्नातकोत्तर लोगों को लगाने की छूट है। माध्यमिक पाठ्यचर्या में "शिक्षक की कमी" नाम की एक पंक्ति है और उसके सामने यही उपाय दोहराए गए हैं, साथ में यह कि आर3 का कोर्स हफ़्ते में दो या तीन कालांश का है।
प्राक्कलन समिति की दसवीं रिपोर्ट में दर्ज बात
13 अगस्त 2026 को लोकसभा में प्राक्कलन समिति की दसवीं रिपोर्ट रखी गई, जिसका विषय सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बजट तथा नीतिगत पहलू थे और जिसमें सीबीएसई की समीक्षा शामिल थी। पीटीआई के अनुसार समिति ने दर्ज किया, "कक्षा 6 से तीसरी भाषा का सूत्र लागू किया गया है, पर स्कूलों को तैयारी का पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जैसे भाषा कर्मचारियों की भर्ती, अध्ययन सामग्री की उपलब्धता और भाषा के चयन पर स्पष्टता, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और संबंधित स्कूल प्रशासन पर तनाव पड़ा।" समिति ने पाठ्यपुस्तकों के अनुवाद में तेज़ी लाने और राज्यों को भाषा शिक्षकों की भर्ती में मदद देने की सिफ़ारिश की।
अदालत ने बोर्ड से गिनती माँगी है
20 अगस्त को पीठ ने एक सीधा आँकड़ा माँगा। जस्टिस बागची के शब्द थे, "सीबीएसई को हमें बताना होगा कि उसके कितने स्कूलों के पास वाक़ई इतनी भाषाएँ पढ़ाने की क्षमता और सीखने के साधन हैं।" उन्होंने अपर सॉलिसिटर जनरल से शिक्षकों और सामग्री की उपलब्धता का रोडमैप देने को कहा। उन्होंने यह भी दर्ज किया कि सीबीएसई के अधीन देश के लगभग 4 फ़ीसदी स्कूल हैं और 96 फ़ीसदी राज्य बोर्डों के अधीन, और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानकों के पालन में विषमताएँ हैं। 14 जुलाई को वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था कि बाईस में से सिर्फ़ तीन भाषाओं की किताबें उपलब्ध हैं।
23 भाषाएँ या 44, यह भी साफ़ नहीं
अदालत के सामने विकल्पों की जो संख्या रखी गई वह बोर्ड के अपने दस्तावेज़ से मेल नहीं खाती। जस्टिस बागची ने 20 अगस्त को कहा, "सिद्धांत में विकल्प 23 भाषाओं का है," और अपर सॉलिसिटर जनरल से "सीबीएसई स्कूलों में दी जा रही 23 के आसपास भाषाओं" का रोडमैप माँगा। सीबीएसई की माध्यमिक पाठ्यचर्या 2026-27 अपने भाषा खंड में लिखती है कि इसमें "भारत की दो राजभाषाएँ, यानी हिंदी और अंग्रेज़ी, तथा 42 अन्य भाषाएँ" शामिल हैं। कक्षा 9 की सूची में भोटी, कोकबोरोक, लेपचा, लिंबू, मिज़ो, शेरपा और तांगखुल जैसी ग़ैर-अनुसूचित भारतीय भाषाएँ हैं, अरबी, जापानी, फ़ारसी, रूसी और स्पेनिश भी। दोनों संख्याएँ जैसी दर्ज हैं वैसी यहाँ हैं।
पाठ्यक्रम बनाने का अधिकार किसका है
याचिकाकर्ताओं ने अधिकार-क्षेत्र का सवाल भी उठाया है। पीटीआई के अनुसार एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने कहा कि कक्षा 6 से 8 तक का पाठ्यक्रम बनाने का अधिकार सीबीएसई के पास नहीं है, यह काम एनसीईआरटी का है। 14 जुलाई को वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने तर्क रखा कि परिपत्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम के विरुद्ध है और भाषाएँ बिना किसी विकल्प के थोपी जा रही हैं। 27 मई को अदालत ने याचिका पर विचार मंज़ूर किया और केंद्र, सीबीएसई तथा एनसीईआरटी को नोटिस जारी किए। मुक़दमा यशिका भंडारी बनाम भारत संघ, रिट याचिका (सिविल) संख्या 694/2026 के नाम से दर्ज है।
राज्य बोर्डों पर यह लागू है या नहीं
चारों परिपत्र एक ही पते पर भेजे गए हैं: सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों के प्रमुख। प्रतिलिपि केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, सैनिक स्कूल सोसाइटी और दिल्ली, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, लद्दाख तथा चंडीगढ़ के शिक्षा निदेशालयों को गई है, इस अनुरोध के साथ कि वे अपने अधीनस्थ स्कूलों तक सूचना पहुँचाएँ। शिक्षा 1976 के 42वें संविधान संशोधन की धारा 57 से समवर्ती सूची की प्रविष्टि 25 में आई, जो 3 जनवरी 1977 से प्रभावी हुई। राज्य बोर्ड अपनी योजना ख़ुद बनाते हैं, और एनईपी का पैरा 4.13 चुनाव राज्यों, क्षेत्रों और विद्यार्थियों पर छोड़ता है।
अनुच्छेद 350क और आठवीं अनुसूची
संविधान भाषा और स्कूल को एक ही जगह जोड़ता है। अनुच्छेद 350क कहता है कि हर राज्य और राज्य के भीतर हर स्थानीय प्राधिकारी का यह प्रयास होगा कि भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएँ मिलें, और राष्ट्रपति ऐसी सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए किसी राज्य को निर्देश दे सकते हैं। यह अनुच्छेद 1956 के सातवें संशोधन से जोड़ा गया था और 1 नवंबर 1956 से लागू हुआ। आठवीं अनुसूची में इस समय बाईस भाषाएँ हैं; बोडो, डोगरी, मैथिली और संताली 2003 के 92वें संशोधन से जुड़ीं, जो 7 जनवरी 2004 से प्रभावी हुआ।
तमिलनाडु का विरोध किस बात पर है

तमिलनाडु ने एनईपी 2020 को नहीं अपनाया और राज्य अपनी दो-भाषा नीति पर क़ायम है। सीबीएसई की 2026-27 की पाठ्यचर्या आने पर मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने उसे "भाषाई थोपे जाने की सोची-समझी कोशिश" कहा और सवाल किया, "दक्षिणी राज्यों के विद्यार्थियों के लिए इसका मतलब अनिवार्य हिंदी सीखना है। पर क्या उत्तरी राज्यों के विद्यार्थियों से तमिल, तेलुगु, कन्नड़ या मलयालम सीखने को कहा जाएगा?" उन्होंने यह भी कहा कि नीति "बिना योजना, बिना संसाधन और बिना जवाबदेही के घोषित" जान पड़ती है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी ने कहा कि तमिलनाडु ने केंद्र के ढाँचे से जुड़े 3,458 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन लेने से इनकार किया है। ये बयान 4 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट में दर्ज हैं।
एक और पीठ ने उल्टी दिशा में कहा था
इसी बरस जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की एक दूसरी पीठ ने कक्षा 6 के बारे में ठीक विपरीत बात कही थी, और वह मामला भी अलग था। 16 जुलाई को जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें हर ज़िले में नवोदय विद्यालय खोलने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। बात सीबीएसई स्कूलों तक चली गई। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "नौवीं में नई भाषा मत रखिए। पाँचवीं या छठी में तीसरी भाषा शुरू कर सकते हैं। और नौवीं तक वह ख़त्म हो जानी चाहिए। देखिए बच्चों पर कितना तनाव है।"
छूट किन बच्चों को मिली है
परिपत्र शैक्षणिक-49/2026 में तीन श्रेणियाँ आम छूट में रखी गई हैं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 17(i) के तहत विशिष्ट अधिगम अक्षमता वाले प्रमाणित बच्चों को दूसरी और तीसरी भाषा से छूट मिल सकती है, परीक्षा उपनियमों में तय मानकों के अनुसार। भारत से बाहर स्थित सीबीएसई स्कूलों को भारतीय भाषा को तीसरी भाषा रखने की शर्त से पूरी छूट है, और विदेश से लौटने वाले विद्यार्थी भी छूट पाते हैं। एक प्रावधान उन परिवारों के लिए है जो दूसरे राज्य में जाते हैं: बच्चा मध्य स्तर की अपनी भाषा-संयोजना कक्षा 9 में जारी रख सकता है, और स्कूल को उसके लिए संसाधन जुटाने होंगे।
शिक्षकों पर कार्रवाई हुई तो अदालत रोकेगी
14 जुलाई की सुनवाई में एक अलग तरह की आशंका सामने रखी गई थी। वकीलों ने कहा कि जो शिक्षक तीन-भाषा नीति के अनुसार पढ़ाना शुरू नहीं करेंगे उन पर कार्रवाई हो सकती है। बार एंड बेंच के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जवाब दिया, "हमारे पास आइए, हम उन बर्ख़ास्तगियों पर रोक लगा देंगे।" यह पीठ की मौखिक टिप्पणी के रूप में दर्ज है। उसी दिन अदालत ने सीबीएसई को याचिका पर जवाब दाख़िल करने का निर्देश दिया और अपर सॉलिसिटर जनरल ने दो हफ़्ते में जवाब देने की बात कही।
अगली सुनवाई तक क्या रहेगा
अदालत ने अब तक किसी परिपत्र पर रोक नहीं लगाई है। इसका अर्थ यह है कि 9 अप्रैल, 4 मई, 15 मई और 10 जुलाई के चारों परिपत्र इस समय चालू हैं और कक्षा 6 तथा कक्षा 9 दोनों में आर3 अनिवार्य बना हुआ है। बोर्ड ने कक्षा 9 के लिए आर3 का आकलन ढाँचा और नमूना प्रश्नपत्र जारी करने की बात परिपत्र शैक्षणिक-46/2026 में लिखी है। जिस बैच पर अदालत ने बोर्ड का ध्यान खींचा है, वह 2026-27 की कक्षा 6 है और वह कक्षा 10 में 2030-31 में पहुँचेगा। पीठ ने सुनवाई 17 सितंबर के लिए सूचीबद्ध की है।
स्रोतसीबीएसई, परिपत्र संख्या शैक्षणिक-17/2026, 9 अप्रैल 2026, कक्षा 6 में आर3 की शुरुआत, सीबीएसई, परिपत्र संख्या शैक्षणिक-25/2026, 4 मई 2026, कक्षा 6 में आर3 के अनुपालन पर अनुवर्ती परिपत्र, सीबीएसई, परिपत्र संख्या शैक्षणिक-33/2026, 15 मई 2026, कक्षा 9 और 10 की भाषा अध्ययन योजना, साथ में अनुलग्नक-1 की भाषा-सूची, सीबीएसई, परिपत्र संख्या शैक्षणिक-49/2026, 10 जुलाई 2026, तीन-भाषा योजना के क्रियान्वयन के दिशानिर्देश, सीबीएसई, माध्यमिक पाठ्यचर्या 2026-27, भाग-1, आर3 की चरणबद्ध तालिका और अध्ययन योजना, भारत सरकार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पैरा 4.11 से 4.16 (पीआईबी पर उपलब्ध मूल पाठ), एनसीईआरटी, स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023, मई 2026 संस्करण, भारत सरकार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986, 'भाषाएँ' खंड (एनसीईआरटी पर उपलब्ध स्कैन), विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधायी विभाग, भारत का संविधान, 1 मई 2024 तक अद्यतन, लाइव लॉ, 20 अगस्त 2026 की सुनवाई की रिपोर्ट, जस्टिस बागची की टिप्पणियाँ, बार एंड बेंच, 14 जुलाई 2026 की सुनवाई की रिपोर्ट, बार एंड बेंच, 16 जुलाई 2026, नवोदय विद्यालय मामले में जस्टिस नागरत्ना की टिप्पणी, इंडियन एक्सप्रेस, 10 सितंबर 2026, पीटीआई की रिपोर्ट, कश्मीर रीडर, 10 सितंबर 2026, पीटीआई की पूरी कॉपी, वर्डिक्टम, 27 मई 2026, याचिका संख्या और नोटिस जारी होने का विवरण, फ़्री प्रेस जर्नल, लोकसभा की प्राक्कलन समिति की दसवीं रिपोर्ट पर पीटीआई की ख़बर, करियर्स360, 4 अप्रैल 2026, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान