विषय
संविधान
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समझिए
ट्रांसजेंडर पहचान का क़ानून बदला, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पुराने अधिकार सुरक्षित रहेंगे
3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की तीन-जजों की बेंच ने मौखिक तौर पर कहा कि ट्रांसजेंडर पहचान क़ानून में हुआ बदलाव पहले दिए गए अधिकार नहीं छीन सकता, पर कोई लिखित आदेश नहीं दिया। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई में आई जो मार्च 2026 के संशोधन को चुनौती देती है, जिसने स्वयं-अनुभूत लैंगिक पहचान का अधिकार क़ानून से हटाकर उसकी जगह मेडिकल बोर्ड की सिफ़ारिश ज़रूरी कर दी है।
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काम की बात
सुमित्रा को नौकरी नहीं मिली थी, सुप्रीम कोर्ट ने 38 साल बाद वजह बताई
करनाल ज़िले के गुढ़ा गांव में इंडियन ऑयल के एलपीजी प्लांट ने 1988 में सिफ़ारिश किए गए 49 में से 43 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भेजे, सुमित्रा को नहीं भेजा। निगम के अपने गवाह ने अदालत में माना कि वह सिर्फ़ इसलिए छूटीं क्योंकि वह औरत थीं, जबकि भर्ती अधिसूचना में औरतें पात्र मानी गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को कहा कि उन्हें रोकने वाला कोई क़ानून रिकॉर्ड में कभी नहीं आया, और अनुच्छेद 142 के तहत बारह लाख रुपये मुआवज़ा तय किया। यह लेख उस साल के क़ानून, आज के क़ानून और आज किसी और के साथ ऐसा होने पर जाने के रास्ते बताता है।
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देश
'ज़मीर की पुकार' पर कॉलम अशोक लवासा ने लिखा, जो अगस्त 2020 में आयुक्त पद छोड़ चुके हैं, मौजूदा विवाद के संधू या जोशी नहीं
रविवार, 27 सितंबर की सुबह 10:53 बजे इंडियन एक्सप्रेस में छपे इस कॉलम की सुर्ख़ी लेखक को 'असहमति लिखने वाला आयुक्त' बताती है। कॉलम की आख़िरी पंक्ति ख़ुद कहती है कि लेखक एक पूर्व निर्वाचन आयुक्त हैं, जो मौजूदा विवाद के केंद्र में मौजूद दोनों सेवारत आयुक्तों में से कोई नहीं। क़रीब ग्यारह सौ शब्दों के इस निबंध में मौजूदा विवाद का ज़िक्र सिर्फ़ एक वाक्य में है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का रास्ता जज वाला, बाक़ी आयुक्तों का बिल्कुल अलग
6 अप्रैल 2026 को लोकसभा और राज्यसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के दो नोटिस बिना कोई वजह बताए ठुकरा दिए थे, आज़ाद भारत में किसी बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ यह पहला औपचारिक प्रयास था। पाँच महीने बाद कांग्रेस और वाम दल एक नई कोशिश की तैयारी में हैं। संविधान का अनुच्छेद 324(5) मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी सुरक्षा देता है, पर उसी अनुच्छेद का अगला हिस्सा बाक़ी निर्वाचन आयुक्तों को महज़ मुख्य आयुक्त की सिफ़ारिश पर हटाने लायक़ बना देता है। यह लेख उसी प्रक्रिया, उसकी शर्तों और अब तक के इतिहास को खोलता है।
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देश
आयोग की विज्ञप्ति की सुर्ख़ी 'सर्वसम्मत' कहती है, उसी का मत्न दस महीने के आंतरिक नोट मानता है
बुधवार, 23 सितंबर को दोपहर 3:29 बजे जारी विज्ञप्ति (PRID 2313958) में निर्वाचन आयोग लिखता है कि एसआईआर सहित पिछले एक साल के सभी फ़ैसले सर्वसम्मत हैं। उसी विज्ञप्ति में यह भी दर्ज़ है कि दस महीनों में फैले कुछ आंतरिक नोट मौजूद हैं, इंडियन एक्सप्रेस की उस पड़ताल के कुछ घंटे बाद जिसका दावा है कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने चौदह बार लिखित आपत्ति दर्ज की।
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देश
चुनाव आयुक्त नियुक्ति क़ानून पर पीठ बँटी, फ़ैसला अब मुख्य न्यायाधीश पर
बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले 2023 के क़ानून को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं पर बँटा हुआ आदेश दिया। सवाल क़ानून के सही या ग़लत होने का नहीं था, सवाल यह था कि फ़ैसला मौजूदा दो जजों की पीठ करे या पांच जजों की संविधान पीठ। दोनों जज असहमत रहे, इसलिए कितनी बड़ी पीठ बनानी है, यह तय करने के लिए मामला अब मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के पास जाएगा।
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देश
दिल्ली एसआईआर नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई को नोटिस भेजा, रिपोर्ट माँगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को अंजलि भारद्वाज की याचिका पर नोटिस जारी किया और चुनाव आयोग से पहली स्टेटस रिपोर्ट माँगी। सुनवाई की एक टिप्पणी को लाइव लॉ, बार एंड बेंच, वर्डिक्टम और द डेली गार्जियन, चारों ने अलग-अलग शब्दों में छापा। अदालत का अपना आदेश सार्वजनिक तौर पर पढ़ा नहीं जा सका, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की केस-स्टेटस और डेली-ऑर्डर खोजें दोनों कैप्चा माँगती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की आज की सूची में दिल्ली की नोटिस-याचिका मद 13 पर, बंगाल की अपील-याचिका मद 22 पर
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की अदालत आज सुबह साढ़े दस बजे बैठी, और उसकी आज की सूची में अंजलि भारद्वाज बनाम निर्वाचन आयोग तथा मोस्तरी बानू बनाम निर्वाचन आयोग के बारह जुड़े मुक़दमे दर्ज थे। भारद्वाज की याचिका के 33,12,919 नोटिस मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली के अपने प्रेस नोट के 31,63,930 से 1,48,989 ज़्यादा हैं, और यह फ़र्क़ किसी दस्तावेज़ में मिलता नहीं। पीठ ने इन दो मद पर क्या किया, वह सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक दर्ज नहीं हुआ था।
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दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार सुबह सात जजों की शपथ है, कॉलेजियम ने आठ नाम भेजे थे; गुरविंदर पाल सिंह का नाम सरकार की विज्ञप्ति में नहीं है
10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्टों के लिए कुल पंद्रह न्यायिक अधिकारियों के नाम भेजे थे। 19 सितंबर को विधि एवं न्याय मंत्रालय ने चौदह नियुक्तियों की विज्ञप्ति जारी की। जो एक नाम छूटा, वह दिल्ली की आठ नामों वाली सूची में पहले नंबर पर था, और उसके रुकने की कोई वजह किसी सार्वजनिक दस्तावेज़ में दर्ज नहीं है।
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देश
दिल्ली में 31,63,930 नोटिस निकले, जवाब की मियाद सात दिन, सुनवाई मंगलवार को
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली के 19 सितंबर के प्रेस नोट में लिखा है कि अब तक 31,63,930 नोटिस बने हैं और मतदाताओं तक पहुँचाए जा रहे हैं। अख़बारों में चल रही संख्या 33,12,919 है, जो प्रशांत भूषण की दाख़िल की याचिका से आई है। फ़र्क़ 1,48,989 का है और इसे मिलाने वाला कोई काग़ज़ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की 22 सितंबर की वाद-सूची में दिल्ली मद 13 पर है और बंगाल मद 22 पर।
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काम की बात
पचास रुपये की अर्ज़ी पर सरकारी कर्मचारी का सेवा-विवाद कैट सुनता है, नियम में छह महीने की समय-सीमा दर्ज है
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट में मूल आवेदन की फ़ीस 50 रुपये है, और यही रक़म 1987 के गजट, कैट के ई-फ़ाइलिंग मैनुअल और इस विज्ञप्ति, तीनों में दर्ज है। प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 20 कहती है कि पहले विभाग में प्रतिवेदन दो, धारा 21 कहती है कि उसके बाद एक साल के भीतर अर्ज़ी लगे, और धारा 23 कहती है कि वकील रखना ज़रूरी नहीं। कैट (प्रक्रिया) नियम, 1987 का नियम 14(2) कहता है कि हर आवेदन रजिस्ट्रेशन से छह महीने के भीतर, जहाँ तक हो सके, सुना और तय किया जाए।
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देश
केंद्र ने कर्नाटक हाई कोर्ट से कहा, कर छूट में 'जीवनसाथी' का दायरा बढ़ा तो क़रीब 159 क़ानून नहीं चल पाएँगे
शनिवार, 19 सितंबर को जस्टिस बी एम श्याम प्रसाद की एकल पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बहस की। मामला 14.41 ग्राम के एक सोने के कड़े से शुरू हुआ था और अब आयकर क़ानून के एक परंतुक पर टिका है। अदालत ने कुछ तय नहीं किया। अगली तारीख़ 9 अक्टूबर है।
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देश
चार हाई कोर्टों में चौदह जज नियुक्त, उनमें आठ की नियुक्ति दो साल से ज़्यादा की नहीं है
शनिवार, 19 सितंबर को विधि एवं न्याय मंत्रालय की विज्ञप्ति की तालिका में चौदह नाम हैं और तीसरे ख़ाने में दो अलग वाक्य। छह की नियुक्ति जज के रूप में है, आठ की अपर जज के रूप में। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर को जो चार बयान जारी किए, उनमें से किसी में 'अपर' शब्द नहीं है।
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पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची पर दाख़िल 38 लाख अपीलों में से 1,02,231 पाँच महीने में निपटी हैं
चुनाव आयोग ने 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में जो हलफ़नामा दाख़िल किया, उसमें 24 ज़िलों की तालिका है और जोड़ है 38,20,683 अपीलें, 1,02,231 निपटान, 37,18,452 लंबित। दर 2.68 फ़ीसदी बैठती है। अदालत ने 25 अगस्त को चार सवाल पूछे थे और उनमें दूसरा सवाल यह था कि इन अपीलों में कितनी उन लोगों की हैं जिनके नाम कटे और कितनी किसी और का नाम कटवाने के लिए हैं। तालिका में वह ख़ाना नहीं है।
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देश
बिहार में समान नागरिक संहिता लागू करने से जद(यू) विधायक का इनकार
सोमवार, 14 सितंबर को पटना में जद(यू) विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि बिहार में समान नागरिक संहिता किसी क़ीमत पर लागू नहीं होगी। उसी दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर के शीत सत्र में विधेयक लाने की बात कही। ऐसा विधेयक अपनी विधानसभा से होकर राज्यपाल के पास जाता है और इस विषय पर वहाँ से राष्ट्रपति के पास, और अनुच्छेद 201 में राष्ट्रपति के लिए कोई समय-सीमा नहीं है।
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केरल के मुख्यमंत्री का एआई वीडियो भारत में रोका गया, किस आधार पर यह अब तक किसी ने नहीं बताया
त्रिशूर की एक कंपनी के बनाए व्यंग्य वीडियो को 1 करोड़ 78 लाख लोग देख चुके थे। रविवार, 13 सितंबर को मेटा ने उसे भारत में बंद कर दिया और बनाने वाले को एक वाक्य का संदेश भेजा, जिसमें भारत सरकार की सूचना का ज़िक्र है और कारण का नहीं। भारत में किसी की पोस्ट रुकने पर उसे क़ानूनन कितना जानने को मिलता है, यह दो अलग प्रक्रियाओं और एक अदालती फ़ैसले में लिखा है।
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इत्मीनान
139 धाराओं का हिंदू कोड बिल चार साल में चार धाराएँ ही पार कर सका, और उसे काटकर छोटा करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री का था
अंबेडकर के अपने इस्तीफ़ा-बयान में हिंदू कोड पाँचवें नंबर पर है। उससे पहले वे क़ानून मंत्रालय को 'ख़ाली साबुन की डिबिया' कहते हैं, अनुसूचित जातियों की हालत गिनाते हैं, विदेश नीति पर सवाल उठाते हैं और मंत्रिमंडल की समितियों को 'लोहे के परदे के पीछे' बताते हैं। वह बयान लोकसभा में पढ़ा भी नहीं जा सका।
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इत्मीनान
क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 31 अगस्त 1952 को हटा और पंजाब का अगला क़ानून उसी दिन लागू हो गया
1871 के जिस क़ानून ने पूरी बिरादरियों को जन्म से अपराधी मान लिया था, उसकी अधिसूचनाएँ 31 अगस्त 1952 को ख़त्म हुईं और इन समुदायों को 'विमुक्त' नाम मिला। चौहत्तर साल बाद उस ढाँचे का कितना हिस्सा दूसरे नाम से चल रहा है, यह पंजाब के 1952 के आदतन अपराधी क़ानून में और सुप्रीम कोर्ट की गिनाई तेरह राज्यों की सूची में दर्ज है।
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अमित शाह ने 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता का भरोसा जताया; चार विधानसभाएँ उसे पारित कर चुकी हैं और अमल में वह एक ही राज्य में है
रविवार, 13 सितंबर को मुंबई में गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा-राजग की सरकारों वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लाई जाएगी। उत्तराखंड की संहिता 27 जनवरी 2025 से लागू है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं ने अपनी-अपनी संहिता पारित कर दी है, और तीनों में से कोई अभी अमल में नहीं आई।
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हाई कोर्टों में अगस्त की 42 नियुक्तियों के बाद ख़ाली कुर्सियाँ 341 से घटकर 304 हुईं
1 जुलाई और 1 अगस्त 2026, न्याय विभाग की दोनों मासिक सूचियों में एक ही संख्या दर्ज है: 1,122 स्वीकृत पद, 781 कार्यरत जज, 341 ख़ाली कुर्सियाँ। 1 सितंबर की सूची में ख़ाली पद 304 हैं। बीच में 7, 20 और 27 अगस्त की छह अधिसूचनाएँ हैं।
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एक मुक़दमे में बरी, दूसरे में मुक़दमा चल रहा: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोंडा का ज़िला-बदर आदेश रद्द किया
गुरुवार, 10 सितंबर को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने गोंडा के ज़िलाधिकारी का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें ज़ाहिद अली को 'गुंडा' घोषित करके छह महीने के लिए ज़िले से बाहर किया गया था। फ़ैसले में लिखा है कि अदालतें बार-बार टोक चुकी हैं, फिर भी राज्य गुंडा एक्ट को दमन के औज़ार की तरह इस्तेमाल करने पर लगातार बना हुआ है, और यह मामला उसी दुरुपयोग की चमकती मिसाल है।
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सहयोग पोर्टल का पूरा झगड़ा धारा 79(3)(b) की एक पंक्ति पर टिका है
X कॉर्प ने गुजरात हाई कोर्ट में दाख़िल हलफ़नामे में गृह मंत्रालय पर आरोप लगाया है कि वह 'बैकडोर' से ऐसा आदेश चाहता है जो कंपनी को सहयोग पोर्टल से जोड़ दे। इंडियन एक्सप्रेस ने यह 11 सितंबर को छापा। जड़ में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की दो अलग धाराएँ हैं, और दोनों में से एक के साथ कोई लिखी हुई प्रक्रिया नहीं जुड़ी है।
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कांग्रेस ने सत्रावसान की 29 दिन की देरी को रिकॉर्ड कहा, राज्यसभा के अपने दस्तावेज़ में 71 दिन का अंतराल दर्ज है
मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था। शुक्रवार को उस स्थगन के 29 दिन पूरे हो गए और सत्रावसान का आदेश अब भी नहीं निकला। राज्यसभा सचिवालय की अपनी पुस्तक में इससे लंबी चार देरियाँ दर्ज हैं, और चारों में सदन दोबारा बुलाया गया था।
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देश
लद्दाख के लिए सरकार ने नया निर्वाचित निकाय प्रस्तावित किया, राज्य का दर्जा नहीं
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने 10 सितंबर को कहा कि जो ढाँचा बनेगा वह न राज्य होगा, न विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश। जिस माँग का यह जवाब है उसमें दो अलग चीज़ें थीं, और उनमें से एक, छठी अनुसूची, किसी क्षेत्र को विधायिका देती ही नहीं।
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कर्नाटक ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के दो अंतरे तय किए, जबकि 2026 के क़ानून में कहीं नहीं लिखा कि राष्ट्रगीत कितने अंतरों का है
8 सितंबर को मंत्रिमंडल के फ़ैसले के बाद कर्नाटक ने आदेश निकाला कि राज्य के कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे गाए जाएँगे। केंद्र का 6 फ़रवरी 2026 का निर्देश छहों अंतरे माँगता है। अगस्त में बना नया क़ानून 'राष्ट्रगीत' शब्द का इस्तेमाल करता है, पर उसे परिभाषित कहीं नहीं करता।
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तेलंगाना विधानसभा ने बीआरएस के 22 विधायक निलंबित किए, सूची में एक नाम उस सदस्य का भी जो सदन में मौजूद नहीं था
9 सितंबर को विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू का प्रस्ताव पारित होते ही मुख्य विपक्षी दल की पूरी उपस्थित बेंच सत्र के बाक़ी हिस्से के लिए बाहर हो गई। सत्र 11 सितंबर को ख़त्म हो रहा है, यानी निलंबन तीन बैठकों का है। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में महाराष्ट्र के 12 विधायकों के मामले में तय किया था कि सत्र से आगे का निलंबन अवैध है, और सत्र तक का निलंबन सदन के अधिकार में आता है।
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लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव रखा गया है, पर विधानसभा के बिना विधायी अधिकार किसके पास होगा यह अभी लिखा नहीं गया
9 सितंबर को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय ने लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सामने अनुच्छेद 371 में एक नया खंड रखा। इसमें न राज्य का दर्जा है, न छठी अनुसूची, न विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश। जिस मसौदे की उम्मीद थी वह नहीं मिला।
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देश
कक्षा 6 का यही बैच तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देगा, और सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से इसी बैच को छूट देने पर विचार करने को कहा
9 सितंबर को तीन जजों की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि इस साल की कक्षा 6 को तीन-भाषा नीति से कुछ रियायत देने पर सोचा जाए। सीबीएसई के अपने परिपत्रों में यही वह अकेला बैच है जिसे कक्षा 10 में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी है। बाक़ी सभी बैचों के लिए बोर्ड ने यह परीक्षा स्कूल के भीतर की आंतरिक जाँच तक सीमित रखी है।
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इत्मीनान
जिस गृह मंत्री के कार्यकाल में भारत का नक्शा भाषा के आधार पर बदला, संविधान सभा की भाषा-बहस के तीनों दिन उसका अपना कोई भाषण दर्ज नहीं है
गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को अल्मोड़ा ज़िले के खूँट गाँव में हुआ। उनके नाम के साथ दो काम जुड़े हैं: राज्यों का भाषाई पुनर्गठन और हिंदी को राजभाषा बनाने का अभियान। हमने संविधान सभा की चार बहसें, राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट का एक वाक्य और कुली-बेगार आंदोलन पर इतिहासकार शेखर पाठक का लेखा पढ़कर देखा कि रिकॉर्ड में क्या है और क्या नहीं।
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इत्मीनान
सरकारिया आयोग ने 1988 में अनुच्छेद 356 पर जो लगाम माँगी थी, वह सरकार ने नहीं, 1994 में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने लगाई; और उसकी अंतर-राज्य परिषद 36 साल में बारह बार से ज़्यादा नहीं बैठी
'सरकारिया आयोग' नाम के दो आयोग हुए। 7 सितंबर को तमिलनाडु विधानसभा में जिसका हवाला दिया गया, वह 1976 की जाँच है; केंद्र-राज्य संबंधों वाला आयोग 1983 में बना और उसकी 247 सिफ़ारिशों में से सरकार 180 को 'स्वीकृत' गिनती है। हमने आयोग के अपने अध्याय, 1990 का राष्ट्रपति-आदेश, परिषद की अपनी बैठक-सूची और लोकसभा का उत्तर पढ़कर मिलाया कि क्या सिफ़ारिश हुआ था और क्या हुआ।
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जनगणना का दसवाँ सवाल 'जाति' है और उसका कॉलम ख़ाली है; तमिलनाडु चाहता है कि वहाँ सूची हो
फ़रवरी 2027 में गणक जो जाति बताई जाएगी वही लिख लेगा, किसी सूची से मिलाए बिना। तमिलनाडु विधानसभा ने 8 सितंबर को प्रस्ताव पास किया कि पिछड़े वर्गों के लिए वही तरीक़ा हो जो अनुसूचित जातियों के लिए है: पहले से लदी सूची, ड्रॉप-डाउन से चुनाव। DMK को मतदान से पहले सदन से बाहर किया गया।
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देश
मणिपुर की अंतिम मतदाता सूची छप गई, और कितने नाम कटे इसकी तीन अलग गिनतियाँ छपी हैं
एक रिपोर्ट कहती है 1.32 लाख, दूसरी 1.89 लाख, तीसरी कहती है मसौदे से पहले 1.58 लाख बाहर हुए और उसके बाद 30,650 और। अंतिम सूची में कुल मतदाता 19,60,620 हैं।
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मानसून सत्र पच्चीस दिन से बंद नहीं हुआ, और इसका मतलब यह है कि अध्यक्ष कभी भी सदन बुला सकते हैं
कांग्रेस कह रही है सत्र इसलिए खुला रखा गया है ताकि परिसीमन विधेयक दोबारा लाया जा सके। सत्रावसान आम तौर पर तीन-चार दिन में होता है। 2015 में यह अट्ठाईस दिन बाद हुआ था।
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इत्मीनान
7 सितंबर 1931: गांधी अकेले लंदन गए, और जिस सरकार से बात करनी थी वह ख़ुद बिखर रही थी
दूसरा गोलमेज़ सम्मेलन आज ठीक 95 साल पहले शुरू हुआ। कराची अधिवेशन के प्रस्ताव के बाद गांधी कांग्रेस के इकलौते प्रतिनिधि के रूप में गए थे। सम्मेलन के दो हफ़्ते बाद ब्रिटेन ने स्वर्ण मानक छोड़ दिया।
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देश
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद सोमवार को अपनी अट्ठाईसवीं बैठक करेगी, और वह पहली बैठक से सत्तर साल बाद हो रही है
नेहरू ने 1956 में यह सुझाव तब दिया था जब भाषा के आधार पर राज्यों के बँटवारे की कड़वाहट चरम पर थी। मक़सद था कि राज्यों में मिलकर काम करने की आदत बने। परिषदें सलाहकार हैं, उनके फ़ैसले बाध्यकारी नहीं।
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देश
जिस जज के सामने आपका मुक़दमा है, वह साठ पर रिटायर होता है, और यह उम्र 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुद तय की थी
अब वही अदालत चाहती है कि यह बासठ हो। सात राज्य मान गए हैं, तेईस को दो हफ़्ते का समय मिला है। बीच में ज़िला अदालतों के 5.18 करोड़ मुक़दमे खड़े हैं।
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देश
बार काउंसिल ने एक पूरे बैच को वकील बनने से रोक दिया था, और सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह अधिकार आया कहाँ से
अधिवक्ता अधिनियम 1961 में वह धारा है ही नहीं। तीन जजों की पीठ ने कहा कि बार काउंसिल का अनुशासन तब शुरू होता है जब कोई वकील बन जाए, उससे पहले नहीं। जिन जजों ने यह कहा, उनमें वही मुख्य न्यायाधीश थे जिनके विरोध से यह सब शुरू हुआ था।
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देश हर अक्टूबर सरकार अपने दफ़्तर साफ़ करती है, और उसी सूची में संसद के आश्वासन सबसे नीचे रहते हैं विशेष अभियान 6.0 की तैयारी 15 सितंबर से शुरू होगी। पिछली बार न्याय विभाग ने महीने भर की मेहनत के बाद 93,000 रुपये का कबाड़ बेचा और 300 वर्ग फुट जगह ख़ाली की।
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इत्मीनान पहला आम चुनाव: हर उम्मीदवार का अपना मतपेटी थी, और वोटर को कुछ लिखना नहीं था सुकुमार सेन की अपनी रिपोर्ट कहती है कि देश में साक्षरता सिर्फ़ 16.6 फ़ीसदी थी, इसलिए मतपत्र पर नाम छापने का कोई मतलब नहीं था। जो तरीक़ा निकाला गया, उसमें पचीस लाख से ज़्यादा पेटियाँ लगीं।
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इत्मीनान 565 रियासतों वाला आँकड़ा सरकार का नहीं है, और उनमें से 327 रियासतें थीं ही नहीं यह संख्या माउंटबेटन ने 25 जुलाई 1947 के भाषण में 'लगभग' कहकर बोली थी। सरकार के अपने श्वेत पत्र में वह एक ही बार छपी है, उसी भाषण के हवाले में। विभाग का अपना आँकड़ा 552 है।