धुबरी के चापर में 3,200 मेगावाट की नींव रखी गई, कंपनी की नवंबर 2025 की फ़ाइलिंग में पूरा संयंत्र दिसंबर 2032 में चालू होना लिखा है
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को धुबरी ज़िले के चापर में अदाणी पावर लिमिटेड के 3,200 मेगावाट के कोयला बिजलीघर का शिलान्यास किया। चार इकाइयाँ, आठ सौ मेगावाट हर एक, और कंपनी के मुताबिक़ चरणों में दिसंबर 2030 से चालू होना। यह पहली इकाई की तारीख़ है। पूरे संयंत्र की तारीख़ कंपनी की अपनी उस सूचना में दर्ज है जो उसने 14 नवंबर 2025 को बीएसई और एनएसई में दाख़िल की थी, और वह दिसंबर 2032 है।

असम के धुबरी ज़िले के चापर में रविवार, 20 सितंबर 2026 को जिस बिजलीघर की नींव रखी गई, वह बनकर कब तैयार होगा? उस दिन जितनी ख़बरें छपीं, सबमें एक ही तारीख़ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अदाणी पावर लिमिटेड के 3,200 मेगावाट के कोयला बिजलीघर का शिलान्यास किया, समारोह में अदाणी समूह के निदेशक जीत अदाणी मौजूद थे, और कंपनी की उसी दिन जारी विज्ञप्ति कहती है कि चार इकाइयाँ होंगी, हर एक आठ सौ मेगावाट की, और संयंत्र चरणों में दिसंबर 2030 से चालू होगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने रात आठ बजे यही तारीख़ छापी।
दिसंबर 2030 पूरा होने की तारीख़ नहीं है।
कंपनी ने 14 नवंबर 2025 को बीएसई और एनएसई में जो सूचना दाख़िल की थी, उसके अनुलग्नक-ए में ठेके की अवधि वाले ख़ाने में लिखा है, "The project shall be commissioned in a phased manner starting December 2030 with full commissioning by December 2032." रविवार के किसी काग़ज़ में दिसंबर 2032 नहीं है।
शिलान्यास से दस महीने पहले एपीडीसीएल ने लेटर ऑफ़ अवॉर्ड दे दिया था
14 नवंबर 2025 की वह सूचना कंपनी सचिव दीपक एस पंड्या की है, और डिजिटल दस्तख़त पर समय 07:42:53 दर्ज है। उसमें लिखा है कि असम पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी एपीडीसीएल ने 13 नवंबर 2025 को शाम 4:19 बजे ईमेल से कंपनी को लेटर ऑफ़ अवॉर्ड की जानकारी दी। सूचना के अपने शब्दों में यह अवॉर्ड "for supply of power on a long-term basis, comprising the entire capacity of a 3,200 MW (4X800 MW) greenfield Ultra-supercritical thermal power plant to be developed in Assam" के लिए है। आगे उसी वाक्य में ढाँचा "Design, Build, Finance, Own and Operate" लिखा है और ईंधन "from the allocated coal linkage arranged by the Utility under the SHAKTI Policy" आना तय है।
इसमें तीन बातें एक साथ तय हो जाती हैं। बिजली कौन ख़रीदेगा, कितनी ख़रीदेगा, और कोयला कहाँ से आएगा। ख़रीदार राज्य की अपनी वितरण कंपनी है। वह पूरी क्षमता की बिजली लंबी अवधि के लिए लेगी। कोयला शक्ति नीति के तहत आएगा, यानी उस केंद्रीय व्यवस्था से जिसके ज़रिए बिजलीघरों को कोयले की तयशुदा आपूर्ति दी जाती है, और वह आवंटन एपीडीसीएल ने कराया है।
उसी दिन कंपनी ने एक मीडिया विज्ञप्ति भी एक्सचेंज में दाख़िल की, जिसका शीर्षक था "Adani to Invest Rs ~63,000 Cr in Two Transformative Energy Projects in Assam"। उसमें बोली का आँकड़ा है: "Adani Power emerged as the successful bidder, offering the lowest tariff of Rs 6.30 per kWh, through a tightly contested bidding process." यानी दर 6.30 रुपये प्रति यूनिट है, और वह सबसे कम बोली थी।
उसी विज्ञप्ति में एक और वाक्य है, जो परियोजना की क़ानूनी हैसियत बताता है। "APL has received the requisite approvals from the Assam Electricity Regulatory Commission and the Power Supply Agreement (PSA) with APDCL is expected to be executed in due course." लेटर ऑफ़ अवॉर्ड मिल चुका था। पावर सप्लाई एग्रीमेंट पर दस्तख़त नहीं हुए थे। इस रिपोर्ट के लिए एक्सचेंज की जितनी सूचनाएँ पढ़ी गईं, उनमें से किसी में यह दर्ज नहीं मिला कि बाद में दस्तख़त हो गए।
रविवार को एक्सचेंज बंद थे और शिलान्यास पर कोई फ़ाइलिंग नहीं हुई। 48,000 करोड़ रुपये का आँकड़ा किसी रेगुलेशन 30 सूचना से नहीं आया है। 14 नवंबर 2025 की लेटर ऑफ़ अवॉर्ड वाली सूचना में रुपये का कोई आँकड़ा है ही नहीं, न ठेके के आकार वाले ख़ाने में, न कहीं और।
दिसंबर 2030 पहली इकाई की तारीख़ है, पूरा संयंत्र दिसंबर 2032 का
अनुलग्नक-ए की छठी पंक्ति का सवाल है, ठेका कितने समय में पूरा होना है। जवाब में दो तारीख़ें हैं, दिसंबर 2030 और दिसंबर 2032। रविवार की कंपनी विज्ञप्ति में सिर्फ़ पहली है। बिज़नेस स्टैंडर्ड में सिर्फ़ पहली है। 14 नवंबर 2025 की मीडिया विज्ञप्ति में भी सिर्फ़ पहली है, इन शब्दों में कि संयंत्र "will be commissioned in a phased manner from December 2030"।
दूसरी तारीख़ एक ही जगह है। वह जगह शेयर बाज़ार का नियामकीय रिकॉर्ड है।
फ़र्क़ महीनों में नापिए। लेटर ऑफ़ अवॉर्ड 13 नवंबर 2025 का है। वहाँ से दिसंबर 2030 इकसठ महीने दूर है और दिसंबर 2032 पचासी महीने दूर। रविवार के शिलान्यास से गिनें तो पहली इकाई इक्यावन महीने दूर है और आख़िरी पचहत्तर महीने। चार इकाइयों वाले संयंत्र में चरणों का मतलब यही होता है कि पहली और आख़िरी के बीच बरस पड़ते हैं।
शिलान्यास अपने आप में किसी मंज़ूरी का नाम नहीं है। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने दिसंबर 2025 में सिर्फ़ टर्म्स ऑफ़ रेफ़रेंस की सिफ़ारिश की थी, यानी पर्यावरण अध्ययन की शर्तें तय की थीं। मंत्रालय ने वे शर्तें 19 जनवरी 2026 को जारी कीं, फ़ाइल संख्या J-13012/10/2025-IA.I(T) पर। 23 अप्रैल 2026 को चारुआबाखरा में असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जनसुनवाई की, जिसकी रिपोर्ट प्रतिदिन टाइम ने उसी रात छापी। पावर पीक डाइजेस्ट की 26 जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक़ समिति ने अपनी 46वीं बैठक में, 18 जून 2026 को, पर्यावरण मंज़ूरी देने की सिफ़ारिश की। स्क्रोल की रविवार की रिपोर्ट यही सिफ़ारिश 14 जुलाई की बताती है। दोनों तारीख़ें एक ही काम की हैं और आपस में नहीं मिलतीं; 46वीं बैठक का मूल विवरण इस डेस्क को नहीं मिला, इसलिए इनमें से कोई तय नहीं की जा रही। सिफ़ारिश और मंज़ूरी भी एक चीज़ नहीं हैं, और मंत्रालय का मंज़ूरी पत्र भी नहीं पढ़ा जा सका।
दिसंबर 2025 की बैठक के जिस विवरण में इस परियोजना का पूरा ब्योरा दर्ज है, उसमें चालू होने की कोई तारीख़ नहीं है। उस मद में कोयला, पानी, राख, चिमनी, भूकंप क्षेत्र और काटे जाने वाले पेड़ों तक की गिनती है। चालू होने का बरस नहीं है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की जुलाई 2026 की ब्रॉड स्टेटस रिपोर्ट में देश की निर्माणाधीन तापीय परियोजनाएँ गिनी गई हैं। 31 जुलाई 2026 तक ऐसी 31 परियोजनाएँ हैं, 56 इकाइयाँ, कुल 42,700 मेगावाट। चापर उस सूची में नहीं है।
अदाणी पावर की पाँच और आठ सौ मेगावाट की परियोजनाएँ सीईए के रजिस्टर में
उसी रिपोर्ट में इसी कंपनी की पाँच परियोजनाएँ दर्ज हैं, और पाँचों आठ सौ मेगावाट की इकाइयों वाली हैं। हर एक के लिए सीईए दो तारीख़ें छापता है: मूल ट्रायल रन तारीख़ और अनुमानित तारीख़।
अनूपपुर, मध्य प्रदेश: तीन इकाइयाँ, लेटर ऑफ़ अवॉर्ड नवंबर 2024, पहली इकाई मई 2029। रायपुर एक्सटेंशन, छत्तीसगढ़: दो इकाइयाँ, अवॉर्ड जून 2024, पहली इकाई जनवरी 2028। रायगढ़, छत्तीसगढ़: दो इकाइयाँ, अवॉर्ड अक्टूबर 2024, पहली इकाई जनवरी 2028। मिर्ज़ापुर, उत्तर प्रदेश: दो इकाइयाँ, अवॉर्ड नवंबर 2024, पहली इकाई मार्च 2029। पीरपैंती, बिहार: तीन इकाइयाँ, अवॉर्ड जून 2025, पहली इकाई 30 जून 2029।
अवॉर्ड से पहली इकाई तक का फ़ासला इनमें उनतालीस से चौवन महीने का है। चापर का फ़ासला इकसठ महीने का है। इसी कंपनी की इन छह परियोजनाओं में यह सबसे लंबा है।

और पाँचों में अनुमानित तारीख़ मूल तारीख़ के बराबर है। सीईए ने इनमें से किसी में अब तक कोई फिसलन दर्ज नहीं की। एक आम धारणा यहाँ नहीं टिकती। ऐसी हर ख़बर पर देरी मान लेना आसान होता है, और यह रजिस्टर वह नहीं कहता। इस रजिस्टर में, 31 जुलाई 2026 तक, इन पाँच परियोजनाओं की एक भी इकाई अपनी मूल तारीख़ से पीछे नहीं चल रही।
देश का कुल रिकॉर्ड अलग है, और वह भी उसी रिपोर्ट में है। पिछले पाँच बरसों में तापीय क्षमता जोड़ने का लक्ष्य और हासिल यों रहा: 2021-22 में 10,285 के मुक़ाबले 4,485 मेगावाट, 2022-23 में 6,350 के मुक़ाबले 1,460, 2023-24 में 14,700 के मुक़ाबले 5,404, 2024-25 में 15,360 के मुक़ाबले 4,530 और 2025-26 में 12,860 के मुक़ाबले 9,470। पाँच बरस का जोड़ 59,555 मेगावाट का लक्ष्य और 25,349 मेगावाट का हासिल है। यानी बयालीस फ़ीसदी।
अकेली परियोजनाओं में यह कैसा दिखता है, इसके दो नमूने उसी रिपोर्ट में हैं। झारखंड के पटरातू में पीवीयूएनएल की तीन इकाइयों का अवॉर्ड मार्च 2018 का है; पहली इकाई की मूल तारीख़ जनवरी 2022 थी और वह 16 अक्टूबर 2025 को चली, दूसरी की जुलाई 2022 थी और वह 11 मई 2026 को, तीसरी की जनवरी 2023 थी और अब अनुमान मार्च 2027 का है। तेलंगाना के यादाद्री में पाँच इकाइयों का अवॉर्ड अक्टूबर 2017 का है, और वहाँ लागत भी बदली: मूल अनुमान 29,965 करोड़ रुपये था, ताज़ा अनुमान 37,781.18 करोड़ रुपये है।
ये दूसरी परियोजनाएँ हैं और चापर के बारे में कुछ साबित नहीं करतीं। ये सिर्फ़ वह पैमाना देती हैं जिस पर 2030 और 2032 को पढ़ा जाए।
चार गुणा आठ सौ मेगावाट: कोयला, पानी, राख और चिमनी के आँकड़े
मेगावाट क्षमता की इकाई है। वह बताता है कि किसी पल में बिजली किस रफ़्तार से बन सकती है, न कि बरस भर में कितनी बनेगी। बिजली की मात्रा मेगावाट-घंटे में गिनी जाती है, और चापर के किसी सार्वजनिक काग़ज़ में वह आँकड़ा नहीं है। 3,200 मेगावाट संयंत्र का नाप है, उसका उत्पादन नहीं।
दिसंबर 2025 की समिति फ़ाइल में जो आँकड़े हैं, वे नाप के इर्द-गिर्द के हैं। कोयला 13.27 मिलियन टन सालाना, एमसीएल, ईसीएल और एनईसीएल की खदानों तथा ई-नीलामी से, 350 से 690 किलोमीटर दूर से, और पूरा का पूरा रेल से। फ़ाइल में कोयले की सबसे ख़राब हालत भी लिखी है: राख 40 फ़ीसदी से कम, गंधक 0.5 फ़ीसदी से कम, नमी 13 फ़ीसदी, ऊष्मा मूल्य 3,200 से 4,300 किलोकैलोरी प्रति किलो। डीज़ल और हल्का तेल 24,000 किलोलीटर सालाना, वह सड़क से आएगा।
पानी ब्रह्मपुत्र से लिया जाएगा, रोज़ 1,53,600 घन मीटर, यानी बरस में 56 मिलियन घन मीटर। कंपनी ने जल संसाधन विभाग को 27 नवंबर 2025 को पत्र संख्या APL/ASSAM/WRD/006 से अर्ज़ी दी थी। फ़ाइल में एक और आँकड़ा है। प्रति मेगावाट-घंटा पानी की खपत 2.5 घन मीटर से कम रहेगी। यह आँकड़ा ऊर्जा के हिसाब से है, क्षमता के हिसाब से नहीं, और दोनों को एक मान लेना सबसे आम ग़लती है।
राख सालाना 53.1 लाख टन बनेगी, जिसमें 42.5 लाख टन उड़ने वाली और 10.6 लाख टन नीचे बैठने वाली। कंपनी ने शत-प्रतिशत इस्तेमाल का दावा किया है, सीमेंट, ईंट और खदानों की भराई में। राख का तालाब 70 हेक्टेयर का होगा, बाँध पंद्रह मीटर ऊँचा और एचडीपीई अस्तर के साथ। उसकी उम्र बीस बरस आँकी गई है। धूल-कणों के लिए इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर लगेंगे, यानी बिजली के आवेश से राख पकड़ने वाले यंत्र। नाइट्रोजन ऑक्साइड घटाने के लिए एससीआर है और गंधक के लिए 275 मीटर ऊँची चिमनी। संयंत्र ख़ुद 176 मेगावाट बिजली खाएगा, जो पास के सबस्टेशन से आएगी।
अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल का मतलब इतना है कि भाप का दाब और तापमान पहले की मशीनों से ऊँचा रखा जाता है, और उसी कोयले से ज़्यादा बिजली निकलती है। जो नहीं बदलता वह यह है कि ईंधन कोयला ही रहता है। कोयला 13.27 मिलियन टन ही आएगा, राख 53.1 लाख टन ही बनेगी, और चिमनी 275 मीटर की ही रहेगी।
फ़ाइल में समिति का एक और वाक्य है जिसे किसी रिपोर्ट ने नहीं उठाया। "the proposed project site lies in an Earthquake-sensitive zone-v as per IS 1893 (Indian Seismic Code), indicating the highest seismic risk area (Very Severe Intensity)"। समिति ने किसी प्रतिष्ठित संस्थान से भूकंप अध्ययन कराने को कहा।
585 हेक्टेयर ज़मीन, और फ़ाइल में लिखा "No R & R is involved"
समिति की फ़ाइल में ज़मीन का ख़ाना सबसे सीधा है। कुल 585 हेक्टेयर, जिसमें निजी 118.7 हेक्टेयर और सरकारी 466.3 हेक्टेयर। भू-उपयोग औद्योगिक, और टिप्पणी में लिखा है कि ज़मीन एपीडीसीएल ने आवंटित की है। पट्टे का दस्तावेज़ अर्ज़ी के साथ जमा हुआ था। समिति ने ख़ुद दर्ज किया कि कंपनी ने कोई वैकल्पिक जगह नहीं देखी, क्योंकि यह ज़मीन इसी परियोजना के लिए आवंटित थी।
उसी पन्ने पर पुनर्वास वाला ख़ाना है। परियोजना स्थल में चारुआबाखरा, चिराकुटा एक और दो, तथा संतोषपुर गाँव लिखे हैं। टिप्पणी में लिखा है, "No R & R is involved." उसी ख़ाने की तालिका में बस्तियों की सूची है, और उसकी पहली चार पंक्तियाँ वही चार नाम हैं, दूरी के ख़ाने में "Adjacent"। एक ही दस्तावेज़ में वे गाँव परियोजना स्थल भी हैं और सटी हुई बस्तियाँ भी। यह सब एक ही पन्ने पर है।
स्क्रोल ने रविवार रात 8:25 बजे रोकिबुज़ ज़मान की रिपोर्ट छापी, शीर्षक "Assam CM lays foundation for Adani power project on land cleared by evicting 1,400 Muslim families"। रिपोर्ट कहती है कि जुलाई 2025 में असम सरकार ने इन्हीं गाँवों में 1,400 से ज़्यादा बांग्ला भाषी मुस्लिम परिवारों के घर गिराए, ज़मीन क़रीब 1,157 एकड़ सरकारी थी, वह पहले एपीडीसीएल को और फिर अदाणी पावर को दी गई, और तीस-चालीस बरस से वहाँ रह रहे क़रीब दस हज़ार लोग हटे। बिज़नेस स्टैंडर्ड की उसी समारोह की रिपोर्ट में बेदख़ली का ज़िक्र एक बार भी नहीं है।

एक हिसाब मिल जाता है। 466.3 हेक्टेयर 1,152 एकड़ बनती है, और स्क्रोल का आँकड़ा 1,157 एकड़ है। यह लगभग वही ज़मीन है।
दूसरे हिसाब नहीं मिलते। स्क्रोल से निवासी अब्दुर रशीद शेख़ ने कहा, "Apart from the 3,500 bighas of government land that was taken forcibly, there were 1,700 bighas of land where people with land titles lived that were also taken." स्क्रोल के अपने दो आँकड़े, 1,157 एकड़ और 3,500 बीघा, एक बीघे को 14,400 वर्ग फुट का ठहराते हैं, जो असम का चलन है। उसी नाप पर समिति की फ़ाइल के 585 हेक्टेयर क़रीब 4,370 बीघा बनते हैं। शेख़ के दोनों आँकड़े जोड़ें तो 5,200 बीघा होते हैं। प्रतिदिन टाइम ने 23 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई की अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि सूत्रों के मुताबिक़ बेदख़ली अभियान से क़रीब 5,000 बीघा ज़मीन ख़ाली कराई गई। तीनों गिनतियाँ एक ही जगह की हैं, और तीनों अलग हैं। इनमें से कोई भी इस रिपोर्ट में तय नहीं की जा रही।
मुआवज़े पर शेख़ का कहा भी दर्ज है: "About 50% of the landowners with land titles have not received compensation yet though their paperwork is done." स्क्रोल के मुताबिक़ प्रशासन ने बैज़ार आलगा गाँव में 300 बीघा पुनर्वास के लिए रखी और सामान ढोने के लिए पचास हज़ार रुपये की एकमुश्त मदद तय की, और कुछ लोगों ने वहाँ जाने से इनकार किया क्योंकि वह ब्रह्मपुत्र के बीच का नीचा इलाक़ा है।
एक तारीख़ और है। समिति की फ़ाइल में आधार-रेखा आँकड़े जुटाने की अवधि अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 लिखी है, और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण उसी अवधि का है। घर जुलाई 2025 में गिरे थे। सर्वेक्षण उसके बाद शुरू हुआ।
धुबरी ज़िला प्रशासन की बेदख़ली नोटिस और 2 अप्रैल 2025 की ज़िला भूमि सलाहकार बैठक का विवरण, जिनका हवाला स्क्रोल देता है, इस डेस्क को नहीं मिले; ज़िले की वेबसाइट दस्तावेज़ों की सूची स्क्रिप्ट से देती है जो यहाँ नहीं चली। इस ज़मीन पर गुवाहाटी हाई कोर्ट की कोई कार्यवाही भी नहीं मिली। समिति की फ़ाइल कहती है कि परियोजना के ख़िलाफ़ कोई अदालती मामला नहीं है, और वह दिसंबर 2025 की स्थिति है।
एक ही कंपनी के तीन काग़ज़ों में लागत और नौकरियों के तीन आँकड़े
लागत का आँकड़ा दो जगह 48,000 करोड़ रुपये है: 14 नवंबर 2025 की मीडिया विज्ञप्ति में और रविवार की विज्ञप्ति में। समिति की फ़ाइल में वह 36,600 करोड़ रुपये है, और साथ में पर्यावरण उपायों की पूँजीगत लागत 2,608 करोड़ तथा सालाना आवर्ती ख़र्च 26 करोड़ रुपये। फ़र्क़ 11,400 करोड़ रुपये का है।
फ़ाइल का ख़ाना "capital cost of the proposed project" कहता है और विज्ञप्तियाँ निवेश की बात करती हैं। ये दो अलग चीज़ें हो सकती हैं। जिन काग़ज़ों तक इस डेस्क की पहुँच रही, उनमें से कोई यह नहीं कहता कि अंतर किस मद का है, इसलिए दोनों आँकड़े यहाँ जैसे हैं वैसे दर्ज हैं।
प्रति मेगावाट का हिसाब इतना है। 48,000 करोड़ पर 3,200 मेगावाट का मतलब 15 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट है, और 36,600 करोड़ पर 11.44 करोड़। सीईए के रजिस्टर में इसी कंपनी की पाँच परियोजनाएँ किस दर पर हैं, यह भी छपा हुआ है: अनूपपुर 28,500 करोड़ में 2,400 मेगावाट, रायपुर एक्सटेंशन 16,000 करोड़ में 1,600, रायगढ़ 16,000 करोड़ में 1,600, मिर्ज़ापुर 18,300 करोड़ में 1,600 और पीरपैंती 28,851 करोड़ में 2,400। सबसे नीचे रायपुर और रायगढ़ हैं, दस करोड़ रुपये प्रति मेगावाट पर, और सबसे ऊपर पीरपैंती, 12.02 करोड़ पर। 36,600 करोड़ वाला आँकड़ा इस पट्टी के भीतर बैठता है। 48,000 करोड़ वाला बाहर।
नौकरियों के आँकड़े तीन काग़ज़ों में तीन हैं। 14 नवंबर 2025 की विज्ञप्ति कहती है कि निर्माण के दौर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मिलाकर क़रीब बीस से पचीस हज़ार लोगों को काम मिलेगा और चलने के दौर में क़रीब 3,500 नौकरियाँ रहेंगी। समिति की 24 दिसंबर 2025 की फ़ाइल में वही कंपनी लिखती है: निर्माण में 400 स्थायी और 8,000 ठेके पर, चलने पर 500 स्थायी और 2,000 ठेके पर। रविवार की विज्ञप्ति कहती है कि निर्माण में बीस हज़ार तक और चलने पर क़रीब पाँच हज़ार। तीनों काग़ज़ों पर एक ही कंपनी का नाम है।
चलने के दौर के तीन आँकड़े हैं, 3,500, 2,500 और 5,000। इनमें से एक ही आँकड़ा ऐसा है जो पर्यावरण अधिसूचना 2006 के तहत मंत्रालय को दिया गया है, और वह 2,500 वाला है। निर्माण के आँकड़े की परिभाषा अलग है, क्योंकि विज्ञप्ति प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों गिनती है और फ़ाइल सिर्फ़ सिर गिनती है।
पूर्वोत्तर की कुल क्षमता 6,611 मेगावाट है, असम की सबसे ऊँची माँग 2,948
सीईए की 31 अगस्त 2026 की स्थापित क्षमता रिपोर्ट में पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की कुल क्षमता 6,611.49 मेगावाट है। उसमें कोयले से 1,118.57 मेगावाट है, और वह पूरा का पूरा केंद्रीय क्षेत्र का है। गैस से 1,649.96, जल से 2,472.01, नवीकरणीय से 1,334.96 और डीज़ल से 36 मेगावाट। देश की कुल क्षमता उसी दिन 5,54,544.23 मेगावाट थी।
असम की पंक्ति में, केंद्रीय संयंत्रों में मिले हिस्से समेत, कुल 2,953.54 मेगावाट है। कोयले से 695.52, गैस से 726.92, जल से 634.10 और नवीकरणीय से 897.01।
चापर अकेले 3,200 मेगावाट का है। यह असम को आज उपलब्ध पूरी क्षमता से बड़ा है।

माँग की तरफ़ से देखिए। सीईए की अगस्त 2026 की अधिकतम विद्युत आपूर्ति रिपोर्ट में असम की उस महीने की सबसे ऊँची माँग 2,948 मेगावाट थी, उतनी ही पूरी हुई, और न पूरी हो सकी माँग शून्य रही। अप्रैल से अगस्त 2026 तक का आँकड़ा भी यही है। मुख्यमंत्री ने रविवार को अपनी पोस्ट में लिखा, "The 3,200MW Thermal Power project in western Assam will generate enough electricity to meet the State's entire power needs." नाप के हिसाब से 3,200 मेगावाट 2,948 से बड़ा है। संयंत्र की अपनी खपत 176 मेगावाट है, और ग्रिड तक वही पहुँचता है जो उसके बाद बचे।
एक दावा और है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अपनी कॉपी में चापर को पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी बिजली परिसंपत्ति कहा और जीत अदाणी के हवाले से यह वाक्य छापा, "In just a few years, the Chapar project will become the largest power generation asset in the Northeast." कंपनी की उसी दिन की अपनी विज्ञप्ति में यह वाक्य नहीं है; उसमें जीत अदाणी के नाम से दूसरा उद्धरण है। दावा भविष्य का है। सीईए की तालिका इतना बताती है कि आज इस क्षेत्र में इतना बड़ा कोई एक संयंत्र नहीं है, क्योंकि पूरे पूर्वोत्तर का कोयला बेड़ा ही 1,118.57 मेगावाट का है।
पंप-स्टोरेज वाला हिस्सा: 2,700 मेगावाट की घोषणा, 500 मेगावाट का ठेका
63,000 करोड़ रुपये की घोषणा का दूसरा हिस्सा हर रिपोर्ट में एक पंक्ति का रहा। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड असम में दो पंप-स्टोरेज संयंत्र लगाएगी, कुल क्षमता 2,700 मेगावाट, निवेश क़रीब 15,000 करोड़ रुपये।
14 नवंबर 2025 की विज्ञप्ति में इसके नीचे एक और वाक्य है। "AGEL has received an LoA for 500 MW of energy storage capacity, which will be catered from the above PSPs." आगे यह भी लिखा है कि कंपनी 500 मेगावाट भंडारण क्षमता के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली रही। 2,700 मेगावाट दोनों संयंत्रों का नाप है। ठेका 500 मेगावाट भंडारण का है।
सीईए जिस सूची में 25 मेगावाट से बड़ी निर्माणाधीन पंप-स्टोरेज परियोजनाएँ गिनता है, उसमें ग्यारह परियोजनाएँ और 15,870 मेगावाट दर्ज हैं। असम की कोई परियोजना उसमें नहीं है। इसी समूह की तीन उस सूची में हैं: चित्रावती 500 मेगावाट और गंडिकोटा 1,000 मेगावाट, दोनों आंध्र प्रदेश में, और तराली 1,500 मेगावाट महाराष्ट्र में। असम के दोनों संयंत्रों की जगह, ज़िला और तारीख़ किसी पढ़े गए काग़ज़ में नहीं है।
स्रोतअदाणी पावर लिमिटेड, बीएसई और एनएसई को रेगुलेशन 30 के तहत सूचना, 14 नवंबर 2025: एपीडीसीएल से 3,200 मेगावाट परियोजना का लेटर ऑफ़ अवॉर्ड मिलने की जानकारी और अनुलग्नक-ए, जिसमें दिसंबर 2030 से दिसंबर 2032 की अवधि दर्ज है, अदाणी पावर लिमिटेड, बीएसई और एनएसई को दाख़िल मीडिया विज्ञप्ति, 14 नवंबर 2025: 'Adani to Invest Rs ~63,000 Cr in Two Transformative Energy Projects in Assam', जिसमें 6.30 रुपये प्रति यूनिट की बोली, पीएसए और 500 मेगावाट भंडारण का ज़िक्र है, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, आईए डिवीज़न (थर्मल प्रोजेक्ट्स): विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 35वीं बैठक का विवरण, बैठक 24 दिसंबर 2025, विवरण 2 जनवरी 2026 को जारी, एजेंडा मद 35.4, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, 19 जनवरी 2026: प्रस्ताव संख्या IA/AS/THE/560845/2025 पर टर्म्स ऑफ़ रेफ़रेंस, फ़ाइल संख्या J-13012/10/2025-IA.I(T), अदाणी समूह, मीडिया विज्ञप्ति, गुवाहाटी और अहमदाबाद, 20 सितंबर 2026: शिलान्यास, 20,000 और 5,000 नौकरियाँ, और अक्टूबर 2025 की बोली तथा नवंबर 2025 के लेटर ऑफ़ अवॉर्ड का ज़िक्र, बिज़नेस स्टैंडर्ड, सुधीर पाल सिंह, 20 सितंबर 2026 रात 8:00 बजे: शिलान्यास की रिपोर्ट, 48,000 और 63,000 करोड़ रुपये, और पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी परिसंपत्ति वाला दावा, स्क्रोल, रोकिबुज़ ज़मान, 20 सितंबर 2026 रात 8:25 बजे: जुलाई 2025 की बेदख़ली, 1,157 एकड़, और निवासी अब्दुर रशीद शेख़ का बयान, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, 31 अगस्त 2026 की स्थापित क्षमता रिपोर्ट: पूर्वोत्तर क्षेत्र और असम की क्षेत्रवार तथा राज्यवार तालिकाएँ, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, थर्मल प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग डिवीज़न: निर्माणाधीन तापीय परियोजनाओं की ब्रॉड स्टेटस रिपोर्ट, जुलाई 2026, स्थिति 31 जुलाई 2026, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, अगस्त 2026 की अनंतिम अधिकतम विद्युत आपूर्ति स्थिति रिपोर्ट: असम की अधिकतम माँग और उपलब्धि, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, जलविद्युत निगरानी रिपोर्ट का अनुलग्नक-1बी: 25 मेगावाट से बड़ी निर्माणाधीन पंप-स्टोरेज परियोजनाओं की सूची, प्रतिदिन टाइम, 23 अप्रैल 2026 रात 10:48: चारुआबाखरा में असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जनसुनवाई और 5,000 बीघा का आँकड़ा, पावर पीक डाइजेस्ट, 26 जून 2026: विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 46वीं बैठक, 18 जून 2026, और पर्यावरण मंज़ूरी की सिफ़ारिश