विषय
जलवायु परिवर्तन
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समझिए
भारत मंडपम में मंगलवार को नौवां अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह शुरू हुआ, और केंद्रीय जल आयोग के अपने आंकड़े में देश 2021 से जल-तनाव की सीमा से नीचे है
मंगलवार, 22 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में जल शक्ति मंत्रालय का नौवां भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह शुरू हुआ, जिसका विषय जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन है। सम्मेलन की तैयारी-रिपोर्टों में कहीं नहीं छपा वह आंकड़ा जो केंद्रीय जल आयोग की जून 2019 की अपनी रिपोर्ट में दर्ज है: 2021 में देश की प्रति-व्यक्ति जल उपलब्धता 1,486 घन मीटर सालाना आंकी गई, और यह 1,700 घन मीटर की उस सीमा से नीचे है जिसे फ़ॉकेनमार्क सूचक जल-तनाव की शुरुआत मानता है।
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देश
मॉनसून 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौटा, और उस दिन के 695.6 मिलीमीटर मौसम विभाग की किसी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं हैं
शनिवार, 19 सितंबर 2026 को भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दोपहर 2:20 बजे अंग्रेज़ी में और 2:25 बजे हिंदी में जो विज्ञप्ति जारी की, उसमें लिखा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौट गया है, जबकि उसकी सामान्य वापसी की तारीख़ 17 सितंबर थी। उसी दस्तावेज़ में अगला सिस्टम भी दर्ज है — उसी शाम उत्तरी अंडमान सागर पर बनने वाला निम्न दाब क्षेत्र। और उस दिन हर जगह छपा मौसम का हिसाब, 695.6 मिलीमीटर, उन सत्ताईस पन्नों में कहीं नहीं है।
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दुनिया
भारत-यूरोपीय संघ समझौते का इस्पात कोटा 16,41,470 टन का है, यूरोपीय आयोग 1 जुलाई से भारत को 19,43,527 टन दे रहा है, और कार्बन शुल्क दोनों पर बराबर चलेगा
शुक्रवार, 11 सितंबर को ब्रसेल्स में समझौते का इस्पात अनुलग्नक सार्वजनिक हुआ। उसमें भारत के लिए सोलह उत्पाद समूहों में देश-विशिष्ट कोटा है, जिसमें 6,94,853 टन समझौते वाला हिस्सा है। उसी यूरोपीय संघ का एक क्रियान्वयन विनियम 1 जुलाई से लागू है और उन्हीं सोलह समूहों में भारत को इससे 3,02,057 टन ज़्यादा दे रहा है। वह विनियम 31 दिसंबर को ख़त्म हो जाएगा, और दोनों दस्तावेज़ों में से कौन-सा आँकड़ा 1 जनवरी 2027 से चलेगा, यह किसी पाठ में लिखा नहीं है।
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समझिए
इसरो के उपग्रह ने जो गिरावट नापी वह प्रशांत महासागर की है, और सीएमएफ़आरआई के हिसाब से भारतीय तट तक उसकी बारी अप्रैल-मई 2027 में आएगी
10 सितंबर को इसरो ने बताया कि ओशनसैट-3 ने भूमध्यरेखीय प्रशांत में जून 2026 की सतही क्लोरोफ़िल-ए में साफ़ कमी देखी है। विज्ञप्ति में न कोई प्रतिशत है, न कोई मछली, न भारत का नाम। जो नाप ली गई वह एक दूसरे महासागर की है।
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दुनिया
यूरोपीय आयोग ने 11 सितंबर को काउंसिल से दस्तख़त की इजाज़त माँगी है, जो न दस्तख़त है न मंज़ूरी, और जिस पाठ को जनवरी में पूरा बताया गया था उसका इस्पात वाला अनुलग्नक जून की एक नई यूरोपीय विनियमावली का हवाला देता है
भारत और यूरोपीय संघ की बातचीत 2007 में शुरू हुई, 2013 में टूटी, 2022 में तीन अलग पटरियों पर फिर चली और 27 जनवरी 2026 को पूरी घोषित हुई। साढ़े सात महीने बाद यूरोपीय आयोग ने काउंसिल को दो प्रस्ताव भेजे हैं। इसके बाद भी तीन पड़ाव बाक़ी हैं, और उनमें से एक पर यूरोपीय संसद के पास इनकार का अधिकार है।
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देश
गोडावण के प्राथमिकता क्षेत्र से 1.77 किलोमीटर दूर चूना-पत्थर खदान की मंज़ूरी टली, पर समिति ने जो सात चीज़ें माँगीं उनमें पक्षी का ज़िक्र नहीं
पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने 24-25 अगस्त 2026 की बैठक में जैसलमेर के रामगढ़ ब्लॉक की 256 हेक्टेयर खदान को टाल दिया। कार्यवृत्त में यह दर्ज है कि खदान से निकले इस्पात-श्रेणी के चूना-पत्थर का रास्ता गोडावण के प्राथमिकता क्षेत्र से होकर गुज़रता है। समिति ने इस पर शर्त नहीं लगाई, सुझाव दिया।
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दुनिया
नेपाल की जो 40 मेगावाट बिजली भारत से होकर बांग्लादेश जाती थी, वह बाढ़ के बाद शून्य है और नया रास्ता दिल्ली की मंज़ूरी पर अटका है
26 अगस्त की बाढ़ ने चिलिमे और त्रिशूली को बंद किया, और उसी के साथ नेपाल का पहला तीसरे देश को बिजली बेचने वाला सौदा रुक गया। नेपाल अब चाहता है कि किसी दूसरी परियोजना की बिजली उसी लाइन से भेजी जाए। इसके लिए मंज़ूरी काठमांडू या ढाका से नहीं, भारत के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से आनी है।
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लखनऊ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पहले नंबर पर आया, और उसकी हवा राष्ट्रीय मानक से तीन गुना गंदी है
पंद्रहवें स्थान से पहले स्थान पर, और डेढ़ करोड़ का इनाम। सर्वेक्षण के आठ में से ज़्यादातर मानक यह नापते हैं कि शहर ने क्या किया, यह नहीं कि हवा में क्या है।
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गिद्ध लौट रहे हैं, पर सरकारी विज्ञप्ति उस दवा का नाम एक बार भी नहीं लेती
पंचकूला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस मना। पिंजौर के केंद्र ने 2025-26 में 356 गिद्ध रखे और 35 चूज़े पैदा किए। जिस दवा ने भारत के गिद्ध ख़त्म किए, उसका नाम डाइक्लोफ़ेनाक है।
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समझिए भारत की भूतापीय क्षमता 10.6 गीगावाट आँकी गई है, पूरी दुनिया के ऐसे संयंत्र 15.67 गीगावाट के हैं पहली संख्या ज़मीन के नीचे की गर्मी का अनुमान है। दूसरी संख्या दुनिया भर में लगी हुई मशीनों की है। सरकार की अपनी पृष्ठभूमि सामग्री मानती है कि भारत में व्यावसायिक भूतापीय बिजली अभी शुरू नहीं हुई।
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देश हिमनद झीलों पर बैठक पाँच राज्यों के साथ हुई, और सबसे ज़्यादा झीलें जहाँ हैं वह लद्दाख बुलाया ही नहीं गया गृह सचिव ने उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल और जम्मू-कश्मीर के साथ तैयारी की समीक्षा की। विज्ञप्ति में झीलों की गिनती नहीं है, पैसा नहीं है, और कोई समयसीमा नहीं है।
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दुनिया जिस झील ने 550 लोगों को बहाया, वह उससे पिछली शाम तक थी ही नहीं रसुवा की बाढ़ हिमनद झील के फटने से नहीं आई। पहाड़ का एक हिस्सा नदी में गिरा, नदी रुकी, और वह अस्थायी बाँध टूट गया। दुनिया की किसी ख़तरा-सूची में यह झील दर्ज नहीं थी।