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पाँच दिन की बैंकिंग पर आईबीए 2024 में मान चुका है, पर बैंक की छुट्टी तय करने का अधिकार उसके पास है ही नहीं

11 सितंबर को यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस की देशव्यापी हड़ताल है। माँग वही ढाई साल पुरानी है जिस पर भारतीय बैंक संघ 8 मार्च 2024 को हामी भर चुका है। बैंक की छुट्टी घोषित करने की ताक़त 1881 के एक क़ानून और 1957 की एक अधिसूचना के रास्ते राज्य सरकारों तक पहुँचती है, और यही वजह है कि सहमति फ़ाइल से आगे नहीं बढ़ी।

नागपुर के सिविल लाइंस में इलाहाबाद बैंक की शाखा के गेट पर लगे हड़ताल के बैनर; यह तस्वीर 23 अगस्त 2012 की है, जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वेतन पुनरीक्षण और दूसरी माँगों पर एक दिन की हड़ताल की थी
तस्वीर: Ganesh Dhamodkar from Nagpur, India, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 2.0

जयपुर में शुक्रवार को बैंक शाखाएँ वैसे भी बंद रहेंगी, और उसकी वजह हड़ताल नहीं है। नगर निगम के 150 वार्डों में उसी दिन दूसरे चरण का मतदान है, 723 उम्मीदवार मैदान में हैं, और राजस्थान के वित्त (बजट) विभाग की 24 अगस्त 2026 की अधिसूचना ने 9 तथा 11 सितंबर को संबंधित चुनाव क्षेत्रों में सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। भारतीय रिज़र्व बैंक की सितंबर 2026 की शहरवार तालिका में जयपुर के सामने 11 तारीख़ पर वही प्रविष्टि दर्ज है जो हर बैंक अवकाश पर दर्ज होती है: परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत अवकाश।

बाक़ी देश में 11 सितंबर यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस की एक दिन की हड़ताल का दिन है।

दोनों बंदियों का फ़र्क़ छोटा नहीं है। एक क़ानून के रास्ते आई है, दूसरी विरोध के।

बैंक का शनिवार बंद करने का अधिकार न भारतीय बैंक संघ के पास है, न यूनियन के, न ख़ुद बैंक के।

11 से 14 सितंबर: चार दिन कहाँ, तीन कहाँ, पाँच कहाँ

रिज़र्व बैंक की सितंबर 2026 की तालिका पढ़िए तो "चार दिन" वाली बात हर शहर पर लागू नहीं होती। 12 सितंबर दूसरा शनिवार है और पूरे देश में बंदी है, 13 रविवार है। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का अवकाश केवल नौ केंद्रों में है: मुंबई, बेलापुर, नागपुर, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, विजयवाड़ा, भुवनेश्वर और पणजी। भुवनेश्वर तथा पणजी में 15 सितंबर को भी अवकाश है, यानी वहाँ 11 से 15 तक लगातार पाँच दिन शाखा नहीं खुलेगी। नई दिल्ली के सामने सितंबर की पूरी पंक्ति ख़ाली है, तो राजधानी में सोमवार को बैंक सामान्य रूप से खुलेंगे और बंदी तीन दिन की रहेगी।

हड़ताल के दिन क्या चलता है और क्या रुकता है

तेलंगाना की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने 10 सितंबर को जो सलाह जारी की, उसमें ठीक-ठीक लिखा है कि क्या रुकेगा। शाखा में चेक जमा करना, काउंटर से नक़दी निकालना और मकान, वाहन या सोने के क़र्ज़ की प्रक्रिया शुक्रवार को होने की उम्मीद नहीं है। समिति ने ग्राहकों से एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई इस्तेमाल करने को कहा और यह भी माना कि शाखाओं में सीमित सेवाएँ देने की कोशिश रहेगी। समिति के संयोजक भारतीय स्टेट बैंक हैं। जिस काम में शाखा के किसी कर्मचारी का दस्तख़त या सत्यापन ज़रूरी है, वह टलेगा।

यूपीआई, एटीएम और चेक का अलग-अलग हिसाब

उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल की एक मिठाई की दुकान, सितंबर 2025 की तस्वीर, जिसके काउंटर पर भुगतान का क्यूआर कोड लगा है; ऐसा हर लेन-देन बैंक के कोर सिस्टम और एनपीसीआई के बीच होता है, शाखा के काउंटर से नहीं
तस्वीर: Yooktashree barai, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

यूपीआई का लेन-देन बैंक के कोर सिस्टम और एनपीसीआई के बीच होता है, शाखा के काउंटर से नहीं, इसलिए हड़ताल उसे नहीं रोकती। एटीएम भी चलते रहते हैं, पर उनमें नक़दी भरने का काम शाखा या नक़दी एजेंसी करती है, तो लंबी बंदी में मशीन ख़ाली मिल सकती है। चेक अलग मामला है। कागज़ी चेक चेक ट्रंकेशन सिस्टम की क्लियरिंग से गुज़रता है, और वह क्लियरिंग बैंक कार्यदिवसों पर ही होती है। रिज़र्व बैंक ने 28 अगस्त 2015 की प्रेस प्रकाशनी में साफ़ लिखा था कि दूसरे और चौथे शनिवार को क्लियरिंग हाउस, जिसमें ग्रिड आधारित सीटीएस शामिल है, संचालित नहीं होंगे।

एनईएफ़टी और आरटीजीएस अब उस पुराने नियम में नहीं आते

उसी 2015 की प्रेस प्रकाशनी में आरटीजीएस और एनईएफ़टी को भी उन्हीं भुगतान प्रणालियों में गिना गया था जो दूसरे और चौथे शनिवार को नहीं चलेंगी। वह पंक्ति अब पुरानी पड़ चुकी है। रिज़र्व बैंक की अपनी प्रश्नोत्तरी कहती है कि एनईएफ़टी "साल भर, सभी दिन, यानी 24x7x365 आधार पर" उपलब्ध है और आधे-आधे घंटे के बैच में चलती रहती है। आरटीजीएस के बारे में रिज़र्व बैंक का उत्तर उतना ही सीधा है: "आरटीजीएस 14 दिसंबर 2020 से 24x7x365 उपलब्ध है।" यानी 12 और 13 सितंबर को शाखा बंद रहते हुए भी बड़ी रक़म का हस्तांतरण होता रहेगा।

एनएसीएच: तनख़्वाह और ईएमआई हड़ताल नहीं देखतीं

तीसरी प्रणाली एनएसीएच है, जिससे तनख़्वाह, पेंशन, लाभांश, बिजली और गैस के बिल, बीमा प्रीमियम तथा क़र्ज़ की मासिक किस्तें कटती हैं। यह भी पहले बैंक कार्यदिवसों तक सीमित थी। रिज़र्व बैंक ने जुलाई 2021 में इसे बदला और 1 अगस्त 2021 से एनएसीएच सातों दिन उपलब्ध हो गई। तत्कालीन गवर्नर शक्तिकांत दास ने घोषणा में कहा था कि ग्राहक की सुविधा के लिए और आरटीजीएस की साल भर उपलब्धता का लाभ उठाने के लिए यह प्रस्ताव है। जिनकी किस्त 12 या 13 तारीख़ को कटती है, उनका खाता उसी दिन डेबिट होगा।

जिनकी ईएमआई या चेक इन तारीख़ों पर हैं

इसका सीधा नतीजा यह है कि खाते में पैसा रखने की ज़िम्मेदारी हड़ताल से कम नहीं होती। एनएसीएच की किस्त शनिवार-रविवार को भी कटेगी, और शेष न होने पर बैंक अपना शुल्क वैसे ही लगाएगा। कागज़ी चेक का हिसाब उल्टा है: 11 को जमा किया चेक क्लियरिंग में तभी जाएगा जब क्लियरिंग हाउस चलेगा, और 12, 13 तथा नौ केंद्रों में 14 को वह नहीं चलेगा। तेलंगाना समिति की सलाह यही है कि लेन-देन पहले पूरा कर लिया जाए।

8 मार्च 2024 को आईबीए ने जो माना, वह आज तक लागू क्यों नहीं

भारतीय बैंक संघ ने 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त ज्ञापन में, जिन पर 8 मार्च 2024 को दस्तख़त हुए, पाँच दिन की बैंकिंग पर सहमति दी और उसे सरकार को सिफ़ारिश के रूप में भेजा। इससे पहले 7 दिसंबर 2023 का समझौता ज्ञापन भी यही समझ दर्ज करता है, जिसमें साप्ताहिक अवकाश के बदले काम के घंटों का समायोजन शामिल था। यूएफ़बीयू का 23 अगस्त 2026 का परिपत्र कहता है कि दो साल से ज़्यादा बीत चुके और मामला सरकार के पास लंबित है। संघ की सिफ़ारिश अपने आप में आदेश नहीं है।

बैंक का कार्यदिवस कौन तय करता है

नई दिल्ली में केंद्रीय सचिवालय का नॉर्थ ब्लॉक, जहाँ गृह मंत्रालय बैठता है; धारा 25 का स्पष्टीकरण अवकाश घोषित करने की ताक़त केंद्र सरकार को देता है और 8 जून 1957 की वह अधिसूचना इसी मंत्रालय से निकली थी
तस्वीर: मुकुलफ़ैज़, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 25 का मूल वाक्य यह है कि जिस दिन कोई वचन-पत्र या विनिमय-पत्र परिपक्व हो और वह दिन सार्वजनिक अवकाश हो, तो वह लिखत उससे ठीक पिछले कारोबारी दिन देय मानी जाएगी। असली ताक़त इस धारा के स्पष्टीकरण में है, जिसके अनुसार "सार्वजनिक अवकाश" में रविवार तथा कोई भी अन्य दिन शामिल है जिसे केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना से सार्वजनिक अवकाश घोषित करे। बैंक अपने ग्राहकों के लिए दरवाज़ा बंद कर सकता है, पर उस दिन को क़ानूनी अर्थ में अवकाश केवल यह अधिसूचना बनाती है।

1957 की वह अधिसूचना जो हर राज्य के आदेश में छपती है

केंद्र सरकार ने यह अधिकार राज्यों को सौंप रखा है, और सौंपने का काग़ज़ हर राज्य के वार्षिक अवकाश आदेश की पहली पंक्ति में छपा मिलता है। पश्चिम बंगाल के वित्त (लेखा परीक्षा) विभाग की 22 नवंबर 2024 की अधिसूचना क्रमांक 4712-F(P2) इसे इन शब्दों में लिखती है: "परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 25 के स्पष्टीकरण द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, भारत सरकार, गृह मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 20/25/56-Pub(I) दिनांक 8 जून 1957 के साथ पठित।" 1957 की वह अधिसूचना ही वह पुल है जिस पर हर बैंक अवकाश खड़ा है।

दूसरे और चौथे शनिवार 2015 में इसी रास्ते से आए

यही रास्ता ग्यारह साल पहले एक बार पूरा तय किया जा चुका है। भारत सरकार की 20 अगस्त 2015 की अधिसूचना ने हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को धारा 25 के तहत सार्वजनिक अवकाश घोषित किया, और 1 सितंबर 2015 से यह लागू हुआ। रिज़र्व बैंक की 28 अगस्त 2015 की प्रेस प्रकाशनी बताती है कि यह अवकाश सभी अनुसूचित और ग़ैर-अनुसूचित बैंकों पर लागू होगा, यानी सरकारी, निजी, विदेशी, सहकारी, क्षेत्रीय ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्र बैंक सब पर। बचे हुए शनिवार के लिए ठीक ऐसी ही एक अधिसूचना चाहिए।

पाँच दिन का हफ़्ता माने चालीस मिनट लंबा दिन

यूनियनों का प्रस्ताव मुफ़्त की छुट्टी नहीं है। 8 मार्च 2024 के ज्ञापन में तय हुआ था कि सोमवार से शुक्रवार तक रोज़ 40 मिनट अतिरिक्त काम होगा, ताकि साप्ताहिक घंटे कम न हों। यूएफ़बीयू ने 9 सितंबर की सुलह बैठक में यही दोहराया कि ग्राहकों के कारोबारी घंटों में कोई कटौती नहीं होगी क्योंकि यूनियनें रोज़ 40 मिनट अतिरिक्त कारोबारी समय पर सहमत हैं। इस हिसाब में महीने के दो शनिवार शाखा खुलती है, और उनके बदले बीस-बाईस कार्यदिवसों पर तेरह-चौदह घंटे बँट जाते हैं। विवाद घंटों का नहीं, अधिसूचना का है।

पीएलआई का झगड़ा असल में किस बात का है

दूसरी माँग कार्य-निष्पादन आधारित प्रोत्साहन की है। 2020 में शुरू हुई योजना में प्रोत्साहन पूरे बैंक के प्रदर्शन से जुड़ा था और सफ़ाईकर्मी से लेकर स्केल VII तक के अधिकारी तक सबको एक ही पैमाने पर मिलता था। डीएफ़एस ने ख़ुद अपने पत्र में दर्ज किया है कि उस योजना में "पीएलआई केवल बैंक के समग्र प्रदर्शन के आधार पर तय होता है और सभी कर्मचारियों पर एक-सा लागू होता है, व्यक्तिगत प्रदर्शन से निरपेक्ष।" यूनियनों का कहना है कि यह एकरूपता संयोग नहीं, सौदे का हिस्सा थी, क्योंकि 11वाँ द्विपक्षीय समझौता और 8वाँ संयुक्त ज्ञापन एक ही मेज़ पर हुए थे।

पंद्रह दिन बनाम तीन सौ पैंसठ दिन

फ़र्क़ की माप यूएफ़बीयू के परिपत्र में साफ़ है। पुरानी योजना में अधिकतम प्रोत्साहन 15 दिन के मूल वेतन और महँगाई भत्ते के बराबर था। डीएफ़एस की नई योजना स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिन तक का मूल वेतन दे सकती है। बैंकों में लगभग 8 लाख कर्मचारियों-अधिकारियों में स्केल IV और उससे ऊपर के लोग क़रीब 40,000 हैं, यानी लगभग 5 फ़ीसदी। यूनियनों की गणना यह है कि जब बाक़ी सबको अधिकतम 15 दिन मिलेंगे, तब इस पाँच फ़ीसदी को उसका बीस गुना से ज़्यादा मिलेगा।

नीचे के बीस फ़ीसदी को शून्य

एआईबीओसी के 10 सितंबर के परिपत्र में नई योजना का वह हिस्सा है जो पैसे से आगे जाता है। ढाँचा सापेक्ष प्रदर्शन का है: अधिकारियों को तय श्रेणियों में बाँटा जाता है और सबसे नीचे के 20 फ़ीसदी को शून्य प्रोत्साहन मिलता है, चाहे बैंक का अपना अंक 80 से ऊपर क्यों न हो। बैंक का अंक 40 से नीचे गया तो सबको शून्य। परिपत्र यह भी दर्ज करता है कि प्रोत्साहन न पाने वाले अधिकारियों की सेवा-वृद्धि पर असर पड़ सकता है, और "ग़ैर-निष्पादक" का ठप्पा तैनाती और पदोन्नति तक साथ चलता है।

7 सितंबर की चिट्ठी: वापसी नहीं, स्थगन

इस हफ़्ते कई जगह यह छपा कि सरकार ने पीएलआई योजना वापस ले ली। दस्तावेज़ यह नहीं कहता। एआईबीओसी का परिपत्र लिखता है कि डीएफ़एस के 7 सितंबर 2026 के पत्र ने 19 नवंबर 2024 की पीएलआई योजना का क्रियान्वयन वित्त वर्ष 2025-26 के लिए स्थगित रखा है और सुझाया है कि मामला चल रहे द्विपक्षीय समझौते की चर्चा में उठाया जाए। द हिंदू की 10 सितंबर की व्याख्या भी शीर्षक में "वापस ली" लिखकर पहली ही पंक्ति में कहती है कि सरकार ने योजना को "रोक दिया" है। स्थगन एक वर्ष का है, वापसी स्थायी होती।

8 और 9 सितंबर: तीन बैठकें, कोई तारीख़ नहीं

8 सितंबर को उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) निरंजन कुमार ने सुलह बैठक बुलाई, जिसमें सरकारी और निजी दोनों तरह के बैंकों के प्रबंधन तथा डीएफ़एस के प्रतिनिधि मौजूद थे। 9 सितंबर की सुबह डीएफ़एस की संयुक्त सचिव शालिनी पंडित ने ऑनलाइन बैठक की और यूनियनों से कहा कि सरकार को दूसरे पक्षों का भी ध्यान रखना है, इसलिए पाँच दिन की बैंकिंग में समय लगेगा और कोई समय-सीमा नहीं दी जा सकती। उसी दोपहर मुख्य श्रम आयुक्त सोनल मिश्रा की अध्यक्षता में स्थगित सुलह कार्यवाही फिर बैठी।

यूएफ़बीयू में सात यूनियनें हैं

हड़ताल की ख़बरों में घटक यूनियनों की संख्या नौ भी छपी है और सात भी। द हिंदू की तेलंगाना रिपोर्ट में 10 सितंबर को "नौ यूनियनें" लिखा गया, उसी दिन उसी अख़बार की चेन्नई रिपोर्ट में "सात यूनियनों और संघों" का प्रतिनिधित्व। मूल दस्तावेज़ इसे तय कर देता है। 26 अगस्त 2026 के हड़ताल नोटिस में नाम गिनाए गए हैं: एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफ़आई, आईएनबीईएफ़ और आईएनबीओसी। नोटिस ख़ुद कहता है कि यूएफ़बीयू की सात घटक यूनियनों के सदस्य हड़ताल पर जा रहे हैं।

हड़ताल का नोटिस किस फ़ॉर्म पर दिया गया

नोटिस औद्योगिक संबंध (केंद्रीय) नियम, 2026 के नियम 25 के अंतर्गत फ़ॉर्म XI पर है और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 62 की उपधारा (1) का हवाला देता है। वह भारतीय बैंक संघ के अध्यक्ष और मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) दोनों को संबोधित है। नोटिस में सात प्रतिनिधियों के नाम हैं, जिनमें एआईबीईए के सी.एच. वेंकटचलम और एआईबीओसी के रूपम रॉय शामिल हैं। तीनों कार्यक्रम एक ही काग़ज़ पर दर्ज हैं: 11 सितंबर, फिर 28, 29 और 30 सितंबर, फिर 26 अक्टूबर से लगातार हड़ताल।

12 सितंबर की लोक अदालत पर यूनियनों की चिट्ठी

मोहाली, पंजाब का ज़िला अदालत परिसर; राष्ट्रीय लोक अदालत ऐसे ही परिसरों में लगती है, और 12 सितंबर की बैठक दूसरे शनिवार पर पड़ रही है
तस्वीर: हरविंदर चंडीगढ़, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

चेन्नई के लिंगी चेट्टी स्ट्रीट से 4 सितंबर को यूएफ़बीयू ने आईबीए के मुख्य कार्यकारी को एक पत्र भेजा, जिस पर सातों महासचिवों के दस्तख़त हैं। विषय था 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत, जो दूसरे शनिवार को पड़ती है। पत्र कहता है कि यूएफ़बीयू ने लोक अदालत की संस्था का हमेशा समर्थन किया है, पर उस दिन अधिकारियों को बुलाना "घोषित अवकाश पर सरकारी काम कराने" जैसा होगा, ठीक उस समय जब कर्मचारी इसी चलन के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं। पत्र में यह भी लिखा है कि यह रुख़ न्यायपालिका या नालसा के विरुद्ध नहीं है।

28 से 30 सितंबर: बंदी पाँच दिन की बन जाएगी

अगली हड़ताल की तारीख़ें कैलेंडर के साथ मिलाकर देखिए तो असर सितंबर 11 से बड़ा है। 26 सितंबर महीने का चौथा शनिवार है और 2015 की अधिसूचना से बंद है, 27 रविवार है, और 28, 29 तथा 30 को हड़ताल का नोटिस दिया जा चुका है। यह लगातार पाँच दिन बनते हैं, और आख़िरी दिन बैंकों के वित्त वर्ष की पहली छमाही का अंतिम दिन है, जिस पर छमाही खाता-बंदी होती है। तिमाही और छमाही के आँकड़े उसी तारीख़ की स्थिति पर बनते हैं।

26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन

नोटिस का तीसरा चरण अनिश्चितकालीन हड़ताल है, जो 26 अक्टूबर से शुरू होनी है। एआईबीओसी के महासचिव रूपम रॉय के परिपत्र में उससे पहले का पूरा क्रम तालिका की शक्ल में दर्ज है: 14 से 24 सितंबर तक सभी राज्य राजधानियों में धरना, 25 को राजधानियों में प्रेस विज्ञप्ति, 7 और 22 अक्टूबर को प्रदर्शन। 24 अगस्त से 10 सितंबर तक सदस्यों को नियम से काम करने और अतिरिक्त सहयोग वापस लेने को कहा गया था, जिसमें दफ़्तरी व्हाट्सऐप समूहों से बाहर निकलना भी शामिल था।

तेलंगाना के आँकड़े बताते हैं असर कहाँ पड़ेगा

एक राज्य का ब्योरा पैमाना दे देता है। 30 जून 2026 तक तेलंगाना में सरकारी और निजी बैंकों की कुल 6,801 शाखाएँ थीं, जिनमें 3,324 सार्वजनिक क्षेत्र की हैं। शहरी शाखाएँ 1,615 हैं और बाक़ी ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी इलाक़ों में लगभग बराबर बँटी हैं। अकेले भारतीय स्टेट बैंक की 1,301 शाखाएँ हैं, यानी राज्य की क़रीब 40 फ़ीसदी। यूएफ़बीयू की सदस्यता का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से आता है, इसलिए असर उन्हीं 3,324 शाखाओं पर सबसे गहरा पड़ेगा।

निजी बैंकों के कर्मचारी इसमें कहाँ हैं

एआईबीईए और बीईएफ़आई की इकाइयाँ निजी, विदेशी, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी हैं, और 8 सितंबर की सुलह बैठक में निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रबंधन प्रतिनिधि भी बुलाए गए थे। यूएफ़बीयू की लंबित माँगों की सूची में एक मद "सभी निजी बैंकों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनुग्रह राशि" है, जो बताती है कि मंच का दायरा सरकारी बैंकों तक सीमित नहीं है। इसके बावजूद बड़े निजी बैंकों की शाखाएँ आम तौर पर खुली रहती हैं, क्योंकि वहाँ यूनियन सदस्यता पतली है।

बीमा कर्मचारियों का समर्थन

अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ ने 10 सितंबर को विशाखापत्तनम से बयान जारी कर हड़ताल के साथ एकजुटता जताई। संघ के महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि हड़ताल बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच बढ़ती नाराज़गी की अभिव्यक्ति है, और यह बैंकिंग क्षेत्र में उद्योग-स्तरीय सामूहिक सौदेबाज़ी को कमज़ोर करने की कोशिशों का प्रतिरोध है। उन्होंने जोड़ा कि बीमा कर्मचारियों का आंदोलन भी एकतरफ़ा फ़ैसलों और स्थापित प्रथाओं के क्षरण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहा है।

मामला दो जगह एक साथ चल रहा है

पीएलआई का विवाद केवल मेज़ पर नहीं है। यूएफ़बीयू के 23 अगस्त 2026 के पत्र के अनुसार यह मुद्दा एक ओर मुख्य श्रम आयुक्त के सामने सुलह में लंबित है और दूसरी ओर दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उसी पत्र में यूनियनों ने डीएफ़एस के 26 मई 2026 के पत्र क्रमांक 15/6/2024-BO.I पर आपत्ति दर्ज की, जिसे मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय ने 14 अगस्त 2026 के पत्र क्रमांक 21(17)/2025-IR के साथ टिप्पणी के लिए भेजा था। यूनियनों का तर्क सीधा है: विवाद का एक पक्ष अपने ही मामले का न्यायाधीश नहीं बन सकता।

जनवरी की हड़ताल के बाद सुलह-कार्यवाही में जो दर्ज हुआ

इसी साल 27 जनवरी को भी यूएफ़बीयू ने हड़ताल की थी। उससे पहले कुछ बैंकों ने स्केल IV और V के अधिकारियों को अलग से पत्र भेजे थे। 22 जनवरी 2026 की सुलह-कार्यवाही के विवरण में सुलह अधिकारी ने प्रबंधनों को सलाह दी कि हर कर्मचारी और अधिकारी को संगठन बनाने तथा वैध ट्रेड यूनियन गतिविधि में भाग लेने का क़ानूनी अधिकार है, कि ऐसे डराने वाले पत्र औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25(U) के दायरे में आ सकते हैं, और यह कि वे तुरंत वापस लिए जाएँ। 8 सितंबर की बैठक में सरकार की ओर से दावा किया गया कि यूनियनों की लगभग आधी माँगें पूरी की जा चुकी हैं।

स्रोतएआईबीओसी परिपत्र 2026/54: यूएफ़बीयू का 26 अगस्त 2026 का हड़ताल नोटिस, फ़ॉर्म XI, एआईबीओसी परिपत्र 2026/60, 9 सितंबर 2026: 8 और 9 सितंबर की सुलह बैठकों का ब्योरा, एआईबीओसी परिपत्र 2026/61, 10 सितंबर 2026: पीएलआई ढाँचे और 22 जनवरी 2026 की सुलह-कार्यवाही पर, एआईबीओसी परिपत्र 2026/59: 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत पर यूएफ़बीयू का आईबीए को 4 सितंबर 2026 का पत्र, एआईबीओसी परिपत्र 2026/51, 23 अगस्त 2026: पीएलआई योजनाओं की तुलना और आंदोलन कार्यक्रम, एआईबीओसी परिपत्र 2026/50: मुख्य श्रम आयुक्त को यूएफ़बीयू का 23 अगस्त 2026 का पत्र, भारतीय रिज़र्व बैंक, सितंबर 2026 की शहरवार बैंक अवकाश तालिका, पश्चिम बंगाल वित्त (लेखा परीक्षा) विभाग, अधिसूचना क्रमांक 4712-F(P2), 22 नवंबर 2024, भारतीय रिज़र्व बैंक की 28 अगस्त 2015 की प्रेस प्रकाशनी: दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी, रिज़र्व बैंक, आरटीजीएस पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, रिज़र्व बैंक, एनईएफ़टी पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 25 का पाठ, इंडियन कानून, द हिंदू, 10 सितंबर 2026: तेलंगाना में शाखाओं के आँकड़े और एसएलबीसी की सलाह, द हिंदू, 10 सितंबर 2026: सी.एच. वेंकटचलम का बयान और लंबित माँगों की सूची, द हिंदू, 10 सितंबर 2026: पीएलआई योजना के स्थगन पर व्याख्या, द हिंदू, 10 सितंबर 2026: एआईआईईए का समर्थन बयान, बिज़नेस टुडे, 8 सितंबर 2026: सुलह बैठक में डीएफ़एस का दावा, राजस्थान वित्त (बजट) विभाग की 24 अगस्त 2026 की अवकाश अधिसूचना का सार, द हंस इंडिया, 10 सितंबर 2026: जयपुर नगर निगम चुनाव के आँकड़े, गुडरिटर्न्स: एनएसीएच को सातों दिन उपलब्ध कराने की रिज़र्व बैंक घोषणा, जुलाई 2021, मनीलाइफ़, 10 सितंबर 2026: यूएफ़बीयू की घटक यूनियनें और माँगों का ब्योरा

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