उपकर के 9,222 करोड़ रुपये तय कोषों में नहीं गए, और तेल उपकर के 2,94,150 करोड़ रुपये संचित निधि में पड़े हैं
कैग की रिपोर्ट संख्या 6 (2026) के पैरा 3.3.1 में चार आरक्षित कोषों का हिसाब है: वित्त वर्ष 2024-25 में उनके नाम पर 82,321 करोड़ रुपये वसूले गए और 73,099 करोड़ रुपये ही उन तक पहुँचे। लोक लेखा समिति ने 8 सितंबर को इसी पैरा पर वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सुना। उसी रिपोर्ट के दूसरे हिस्सों में इसी वित्त वर्ष के कुछ और आँकड़े हैं, जिन्हें पैरा 3.3.1 अपने साथ नहीं जोड़ता।

क्रूड ऑयल पर लगे उपकर से सरकार ने वित्त वर्ष 1974-75 से अब तक 3,12,782 करोड़ रुपये वसूले हैं, और जिस बोर्ड के लिए यह उपकर बनाया गया था उस तक 902 करोड़ रुपये पहुँचे।
वे 902 करोड़ रुपये भी 1974-75 से 1991-92 के बीच भेजे गए थे। 1992-93 से 2023-24 तक तेल उद्योग विकास बोर्ड को उपकर का एक रुपया नहीं गया, जबकि वसूली हर साल चलती रही। 31 मार्च 2025 को 2,94,150 करोड़ रुपये भारत की संचित निधि में ही पड़े थे। यह हिसाब भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट संख्या 6 (2026) के पैरा 3.3.1 में दर्ज है।
उसी पैरा में चार आरक्षित कोषों की एक तालिका है। वित्त वर्ष 2024-25 में इन चार के नाम पर 82,321 करोड़ रुपये वसूले गए, कोषों में 73,099 करोड़ रुपये भेजे गए, और 9,222 करोड़ रुपये नहीं भेजे गए।
8 सितंबर को लोक लेखा समिति ने इसी पैरा पर वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधियों की गवाही ली। समिति के अध्यक्ष, कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने बाद में समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि उपकर किसी एक काम के लिए वसूला जाता है और आरक्षित कोष में जाकर उसी काम पर ख़र्च होना चाहिए। उनके शब्द थे: "लेकिन यहाँ उन्होंने इसे संचित निधि में जमा कर दिया। तो लोक लेखा समिति ने उस पर परीक्षण किया है।"
तालिका में चार नाम, चार मंत्रालय
पैरा 3.3.1 की तालिका (चित्र 3.8) में हर कोष के सामने उसका मंत्रालय और मक़सद लिखा है। निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, मक़सद निवेशकों की शिक्षा, जागरूकता और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियाँ। प्रारंभिक शिक्षा कोष, शिक्षा मंत्रालय का स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, मक़सद समग्र शिक्षा और पीएम पोषण जैसी राष्ट्रीय शिक्षा मिशन की योजनाएँ। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, मक़सद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाएँ। तेल उद्योग विकास कोष, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, मक़सद तेल उद्योग का विकास। चारों एक ही पन्ने पर हैं।
सबसे बड़ी कमी स्वास्थ्य के खाते में

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि के नाम पर 2024-25 में 21,085 करोड़ रुपये वसूले गए और निधि में 14,439 करोड़ रुपये गए। कमी 6,646 करोड़ रुपये की रही, यानी वसूली का लगभग 31 फ़ीसदी। यह 9,222 करोड़ में से अकेले 72 फ़ीसदी हिस्सा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जनवरी 2026 में लेखा-परीक्षकों को जवाब दिया कि उपकर वसूलने और उसे संबंधित आरक्षित कोषों में बाँटने के लिए नोडल मंत्रालय वित्त मंत्रालय है। कम अंतरण पर कोई विशिष्ट उत्तर अब भी नहीं आया है।
निवेशकों के कोष को तीस करोड़ रुपये मिले
निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष का आँकड़ा अनुपात में सबसे तीखा है। इसके नाम पर 1,135 करोड़ रुपये वसूले गए और कोष में 30 करोड़ रुपये भेजे गए। कमी 1,105 करोड़ रुपये की है, यानी वसूली का लगभग 97 फ़ीसदी। इस कोष का काम कैग की तालिका में एक पंक्ति में लिखा है: निवेशकों की शिक्षा, जागरूकता और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियाँ। रिपोर्ट इस कोष पर कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय का कोई जवाब दर्ज नहीं करती, न ही कमी की कोई वजह।
एक कोष, दो अलग-अलग कमियाँ

प्रारंभिक शिक्षा कोष के नाम पर 42,170 करोड़ रुपये वसूले गए और 40,900 करोड़ रुपये भेजे गए, कमी 1,270 करोड़ रुपये। लेकिन उसी रिपोर्ट के विनियोग लेखों में इसी अंतरण का दूसरा हिसाब है। लेखा शीर्ष 3601.06.797.01, "प्रारंभिक शिक्षा कोष को अंतरण के लिए निधियाँ", पर संसद ने 43,000 करोड़ रुपये मंज़ूर किए थे और ख़र्च 40,900 करोड़ रुपये हुआ। वहाँ बचत 2,100 करोड़ रुपये दर्ज है, 4.88 फ़ीसदी। एक ही कोष के दो कमी-आँकड़े, क्योंकि एक वसूली से नापी गई है और दूसरी संसद की मंज़ूरी से। रिपोर्ट दोनों को जोड़कर नहीं दिखाती।
तेल उपकर का पचास साल का हिसाब
तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 तेल उद्योग विकास बोर्ड की स्थापना का प्रावधान करता है और उसी काम के लिए क्रूड ऑयल तथा प्राकृतिक गैस पर उत्पाद शुल्क के रूप में उपकर लगाने की अनुमति देता है। कैग के अनुसार 1974-75 से अब तक इस उपकर से 3,12,782 करोड़ रुपये आए, जिसमें 2024-25 का 17,931 करोड़ रुपये शामिल है। बोर्ड को 1974-75 से 1991-92 तक 902 करोड़ रुपये गए, और 1992-93 से 2023-24 तक कोई अंतरण नहीं हुआ। 2024-25 की वसूली में से 17,730 करोड़ रुपये कोष में गए, कमी 201 करोड़ रुपये। नतीजा यह कि 31 मार्च 2025 को 2,94,150 करोड़ रुपये संचित निधि में रुके रहे। मामला सितंबर 2025 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजा गया था; उत्तर की प्रतीक्षा है।
कोष जो पहली बार खाते में खुला
रिपोर्ट का दूसरा अध्याय बताता है कि लोक लेखे में कुल 59 आरक्षित कोष हैं, जिनमें 19 ब्याज वाले और 40 बिना ब्याज के। 2024-25 में ब्याज वाले कोषों पर 1,230 करोड़ रुपये ब्याज दिया गया। इन 59 में से 10 कोष उस साल चले ही नहीं। दो कोष उसी साल पहली बार संघ सरकार के वित्त लेखों में सक्रिय हुए: तेल उद्योग विकास कोष और सरकारी कर्मचारियों के लिए एकीकृत पेंशन योजना। यानी जिस कोष में 1992-93 से पैसा नहीं जा रहा था, वह लेखों में 2024-25 में जाकर खुला।
पैसा किस रास्ते चलता है
संचित निधि सरकार का मुख्य खाता है, जिसमें सारा राजस्व और उधार आता है और जिससे ख़र्च होता है। संविधान के अनुच्छेद 266 के खंड (2) के तहत जो सार्वजनिक धन संचित निधि में जमा नहीं होता, वह लोक लेखे में जाता है, और आरक्षित कोष इसी लोक लेखे का हिस्सा हैं। रिपोर्ट के शब्दों में, उपकर वसूली पर पहले संचित निधि में जमा होता है और फिर संसद की मंज़ूरी से तय आरक्षित कोष में अंतरित होता है। दूसरे क़दम के न उठने का नाम ही "कम अंतरण" है। 31 मार्च 2025 को लोक लेखे की कुल देनदारी 17,38,251 करोड़ रुपये थी।
उपकर राज्यों के हिस्से में नहीं जाता
रिपोर्ट उपकर और अधिभार में फ़र्क़ साफ़ करती है। उपकर किसी ख़ास मक़सद के लिए लगाया गया अतिरिक्त कर है; अधिभार कर पर कर है और किसी काम के लिए आरक्षित नहीं होता। संविधान के अनुसार इनमें से कोई भी राज्यों के साथ बाँटा नहीं जाता, सिवाय जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के, जो माल एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को देय है। तुलना के लिए, 2024-25 में अनुच्छेद 270 के तहत राज्यों को सौंपे गए कर 12,86,885 करोड़ रुपये के थे, जो केंद्र के कर राजस्व में गिने नहीं जाते।
एक ही रिपोर्ट में दो कुल जोड़
पैरा 3.3.1 कहता है कि 2024-25 में उपकर, प्रभार और शुल्क के रूप में 3,89,220 करोड़ रुपये वसूले गए, जो सकल कर राजस्व का 10.25 फ़ीसदी है। उसी रिपोर्ट के दूसरे अध्याय की तालिका में उसी साल का कुल उपकर संग्रह 3,72,982 करोड़ रुपये दिखता है, और उपकर तथा अधिभार मिलाकर 5,29,357 करोड़ रुपये, यानी 13.94 फ़ीसदी। दोनों उपकर आँकड़ों में 16,238 करोड़ रुपये का अंतर है। पाद-टिप्पणी 28 इस पर केवल इतना कहती है कि इसमें दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से वसूला गया सार्वभौमिक पहुँच शुल्क शामिल है। शेष अंतर का ब्योरा रिपोर्ट में नहीं है।
किस उपकर से कितना आया
2024-25 के उपकरवार आँकड़े रिपोर्ट के चित्र 2.10 में हैं। जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर 1,50,570 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर 84,339 करोड़ रुपये, कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर 75,455 करोड़ रुपये, सड़क एवं अवसंरचना उपकर 44,680 करोड़ रुपये, क्रूड ऑयल पर उपकर 17,931 करोड़ रुपये। पिछले साल के मुक़ाबले स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर 18.52 फ़ीसदी बढ़ा, कृषि उपकर 6.76 फ़ीसदी घटा और क्रूड ऑयल उपकर 4.64 फ़ीसदी घटा। जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर अकेले कुल संग्रह का 28.44 फ़ीसदी है और रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक समाप्त होना है।
स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर का बचा हुआ हिस्सा
स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर से 84,339 करोड़ रुपये आए। पैरा 3.3.1 की तालिका में इसी परिवार के दो कोष हैं: प्रारंभिक शिक्षा कोष के नाम पर 42,170 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि के नाम पर 21,085 करोड़ रुपये। दोनों जोड़कर 63,255 करोड़ रुपये होते हैं। बाक़ी 21,084 करोड़ रुपये किस कोष के खाते में गिने गए, यह तालिका नहीं बताती और पैरा में इसका कोई उल्लेख नहीं है। लेखा-परीक्षा का यह हिस्सा नमूना जाँच पर आधारित है, पूरे उपकर पर नहीं।
एक पाँचवाँ कोष, जो पैरा में नहीं है
विनियोग लेखों में एक और शिक्षा कोष है, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा कोष। शिक्षा मंत्रालय के दो विभागों के तीन लेखा शीर्षों पर उसे भेजी जाने वाली रक़म का हिसाब अनुबंध 4.5ए में है। शीर्ष 3601.06.797.09 पर 6,000 करोड़ रुपये मंज़ूर, 5,010 करोड़ रुपये ख़र्च, बचत 990 करोड़ रुपये यानी 16.50 फ़ीसदी। शीर्ष 2202.03.797.03 पर 7,000 करोड़ रुपये मंज़ूर, 6,500 करोड़ रुपये ख़र्च, बचत 500 करोड़ रुपये। शीर्ष 2202.80.797.02 पर 1,558 करोड़ रुपये मंज़ूर, 1,000 करोड़ रुपये ख़र्च, बचत 558 करोड़ रुपये यानी 35.82 फ़ीसदी। तीनों मिलाकर 2,048 करोड़ रुपये मंज़ूरी से कम गए। यह कोष पैरा 3.3.1 की सूची में नहीं आता।
दूरसंचार का कोष और 3,300 करोड़ रुपये
जिस सार्वभौमिक पहुँच शुल्क का ज़िक्र पैरा 3.3.1 की पाद-टिप्पणी में है, उसका कोष भी विनियोग लेखों में कम भरा दिखता है। दूरसंचार विभाग के शीर्ष 3275.00.797.01, "सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष को अंतरण", पर 10,500 करोड़ रुपये मंज़ूर थे और 7,200 करोड़ रुपये गए, बचत 3,300 करोड़ रुपये यानी 31.43 फ़ीसदी। पूरे अनुदान संख्या 13 पर विभाग की बचत 23,245.20 करोड़ रुपये रही, जो 1,55,104.67 करोड़ रुपये के मंज़ूर प्रावधान का 14.99 फ़ीसदी है। इसमें से 11,898.55 करोड़ रुपये सरेंडर ही नहीं किए गए और लैप्स हो गए। कैग ने इस एक विभाग को अलग से दर्ज किया है।
जहाँ प्रावधान से ज़्यादा भेजा गया
एक कोष में उलटा हुआ। राजस्व विभाग के शीर्ष 3602.08.797.02, "माल एवं सेवा कर क्षतिपूर्ति कोष को अंतरण", पर 5,000 करोड़ रुपये मंज़ूर थे और 6,370.24 करोड़ रुपये भेजे गए, यानी 1,370.24 करोड़ रुपये अधिक, 27.40 फ़ीसदी। विभाग ने अगस्त 2025 में जवाब दिया कि संशोधित अनुमान के समय प्रावधान 6,500 करोड़ रुपये कर दिया गया था, क्योंकि ज़्यादा उपकर आने की उम्मीद थी। कैग की टिप्पणी है कि विनियोग लेखों के लिहाज़ से प्रावधान न अनुपूरक माँग से बदला गया, न पुनर्विनियोग से। एक और शीर्ष पर इसी कोष को 1,45,000 करोड़ में से 1,44,006.69 करोड़ रुपये गए।
समिति यह 2023 में लिख चुकी है
पैरा 3.3.1 ख़ुद बताता है कि यह शिकायत नई नहीं। सत्रहवीं लोकसभा की लोक लेखा समिति ने अगस्त 2023 की अपनी 69वीं रिपोर्ट में कम अंतरण का संज्ञान लिया था। समिति की सिफ़ारिश थी कि कोई शुल्क लगाने से पहले वैज्ञानिक अध्ययन हो कि कितनी रक़म चाहिए और वह कितने समय में जुटेगी। समिति ने यह भी कहा था कि बोझ आख़िर आम आदमी पर पड़ता है, इसलिए समय-समय पर यह जाँचा जाए कि उपकर अपना मक़सद कितना पूरा कर रहा है, और उसकी आय नियमित रूप से आरक्षित कोषों में जमा हो।
बैठक के दिन की दूसरी फ़ाइल
उसी बैठक के एजेंडे में दो और चीज़ें थीं। वर्ष 2026-27 के लिए समिति की जाँच के अतिरिक्त विषयों का चयन, जिस पर वेणुगोपाल ने कहा कि बड़े मुद्दे उठाए जाएँगे और उनकी सूची बाँटी जाएगी। दूसरी, सीमा सड़क संगठन द्वारा भारत-चीन सीमा सड़कों के निर्माण पर मसौदा रिपोर्ट, जो कैग की 2017 की रिपोर्ट संख्या 5 पर आधारित है; वेणुगोपाल के अनुसार यह संसद में रखी जाएगी। तारीख़ पर स्रोतों में फ़र्क़ है: एएनआई की कॉपी की तिथि-रेखा 9 सितंबर की है, जबकि उसी कॉपी में बैठक का दिन मंगलवार लिखा है, जो 8 सितंबर था।
निष्क्रिय कोष: 844.93 करोड़ रुपये
अगला पैरा 3.3.2 उन खातों का है जो चलते ही नहीं। कैग ने पाया कि 10 आरक्षित कोष और 21 जमा खाते कम से कम तीन वित्त वर्षों से निष्क्रिय हैं, जिनमें कुल शुद्ध जमा शेष 844.93 करोड़ रुपये है। सबसे पुराना खाता 2002-03 से निष्क्रिय है। पाद-टिप्पणियों में ब्योरा है: आठ आरक्षित कोषों में 363.72 करोड़ रुपये और दो में 0.23 करोड़ रुपये का विपरीत शेष; अठारह जमा खातों में 678.98 करोड़ रुपये और तीन में 197.54 करोड़ रुपये का विपरीत शेष। रिपोर्ट लिखती है कि निष्क्रिय होने का मतलब है, ये अपना मक़सद पूरा कर चुके होंगे।
पाकिस्तान चले गए लोगों के दावों वाला खाता

अनुबंध 3.5 में इन जमा खातों के नाम हैं, और नाम ही उनकी उम्र बता देते हैं। "टेलीफ़ोन आवेदन जमा" में 223.99 करोड़ रुपये, "टेलेक्स आवेदन जमा" में 7.93 करोड़ रुपये, दोनों 2002-03 से निष्क्रिय। "सीमेंट विनियमन खाता" में 57.64 करोड़ रुपये, 2020-21 से। "औषधि मूल्य समकरण कोष" में 299.69 करोड़ रुपये, 2019-20 से। और एक खाता है "स्थानीय निकायों की जमा, उन ठेकेदारों, कर्मचारियों, पेंशनरों आदि के दावों के निपटान के लिए जो पाकिस्तान चले गए", जिसमें 21.06 लाख रुपये पड़े हैं, 2002-03 से।
शिक्षा और चिकित्सा के दो पुराने कोष
निष्क्रिय आरक्षित कोषों की सूची में दो नाम इस पूरी कहानी के बग़ल में बैठते हैं: "शैक्षिक प्रयोजनों के लिए विकास निधि", जिसमें 7,000 रुपये हैं, और "चिकित्सा तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोजनों के लिए विकास निधि", जिसमें 60,000 रुपये हैं। दोनों 2002-03 से निष्क्रिय हैं। इसी सूची में स्वर्ण जयंती छात्रवृत्ति आरक्षित कोष है, 55.49 करोड़ रुपये, 2022-23 से निष्क्रिय। पाद-टिप्पणी बताती है कि 2022-23 से 2024-25 तक इसमें से एक भी संवितरण नहीं हुआ और उसमें आई एकमात्र रक़म 5.23 करोड़ रुपये का ब्याज थी। मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा कि स्वर्ण जयंती फ़ेलोशिप योजना 2021-22 के बाद बंद हो गई थी।
आयकर कर्मचारियों का सौ करोड़
100 करोड़ रुपये से बड़े दो निष्क्रिय जमा अलग से दर्ज हैं। पहला, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के मुख्य लेखा नियंत्रक कार्यालय में "आयकर कल्याण कोष" (शीर्ष 8336.00.800.09) में 100 करोड़ रुपये, जो 2008-09 से पड़े हैं। यह कोष आयकर विभाग के कर्मचारियों के कल्याण के लिए था। पूछे जाने पर विभाग ने अक्टूबर 2025 में कहा कि वह इसे समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। कैग की टिप्पणी एक वाक्य की है: तथ्य यह है कि यह कोष पिछले 16 साल से बेकार पड़ा है। दूसरा, उच्चतर शिक्षा विभाग के खाते में राष्ट्रीय निवेश कोष का 236.59 करोड़ रुपये, 2022-23 से निष्क्रिय।
जिन विभागों का कोष कम भरा, उन्होंने पैसा लौटाया
उसी वित्त वर्ष में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अनुदान में 9,890.71 करोड़ रुपये की बचत रही और उसमें से 9,792.90 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए गए। यह बचत लगातार तीसरे साल थी: 2022-23 में 14,659.28 करोड़ रुपये और 2023-24 में 5,148.41 करोड़ रुपये। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 1,09,551.41 करोड़ रुपये के अनुदान में 3,428.56 करोड़ रुपये बचे, जिनमें से 3,371.34 करोड़ रुपये सरेंडर हुए। कैग की टिप्पणी है कि लगातार बचत इसके बावजूद दर्ज हुई कि लोक लेखा समिति के निर्देश पर वित्त मंत्रालय यथार्थवादी बजट बनाने की सलाह जारी कर चुका है।
सरेंडर की तारीख़ और लैप्स हुआ पैसा
सामान्य वित्तीय नियम 2017 के नियम 62(2) के तहत जो रक़म ख़र्च नहीं होनी है, वह साल के अंत का इंतज़ार किए बिना तुरंत लौटानी होती है। वित्त मंत्रालय ने अपने कार्यालय ज्ञापन एफ़.एन.2(15)-बी(डी)/2025 (11 मार्च 2025) से इसकी अंतिम तारीख़ 19 मार्च 2025 तय की थी। कैग ने पाया कि 102 अनुदानों की कुल 4,91,302.81 करोड़ रुपये की बचत में से 36,766.60 करोड़ रुपये, यानी 7.48 फ़ीसदी, सरेंडर ही नहीं किए गए और 64 अनुदानों में लैप्स हो गए। तीन अनुदानों में उपलब्ध बचत से 622.55 करोड़ रुपये ज़्यादा सरेंडर कर दिए गए।
9,222 करोड़ रुपये आख़िरी आँकड़ा नहीं है
पैरा 3.3.1 अपनी सीमा ख़ुद बताता है: यह 2024-25 में वसूले गए उपकर और शुल्क की नमूना जाँच है, और उसमें चार कोषों के मामले सामने आए। लोक लेखे में आरक्षित कोष 59 हैं। रिपोर्ट यह नहीं लिखती कि कम अंतरण से किस योजना का कौन-सा काम रुका, न किसी योजना पर पड़े असर का आकलन देती है। संघ के वित्त तथा विनियोग लेखों को कैग ने 4 दिसंबर 2025 को प्रमाणित किया, वे 18 दिसंबर 2025 को संसद में रखे गए, मंत्रालयों के उत्तर फ़रवरी 2026 तक लिए गए, और यह रिपोर्ट 2 अप्रैल 2026 को संसद में रखी गई। पेट्रोलियम मंत्रालय का उत्तर उस दिन तक नहीं आया था।
स्रोतभारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, संघ सरकार के लेखों पर प्रतिवेदन संख्या 6, वर्ष 2026 (वित्त वर्ष 2024-25 का वित्तीय लेखा-परीक्षण), पूरा पाठ, कैग कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति, नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2026, प्रतिवेदन संख्या 6 (2026) के संसद में रखे जाने पर, एएनआई की रिपोर्ट (लेटेस्टली पर प्रकाशित), लोक लेखा समिति की बैठक, बैठक का एजेंडा और के. सी. वेणुगोपाल के कथन, 9 सितंबर 2026, द ट्रिब्यून, वही एएनआई रिपोर्ट, बैठक का ब्योरा और कैग पैरा 3.3.1 का हवाला, द वायर, कैग रिपोर्ट पर विश्लेषण, कोषवार आँकड़े और तेल उपकर का ब्योरा