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संसद
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समझिए
ट्रांसजेंडर पहचान का क़ानून बदला, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पुराने अधिकार सुरक्षित रहेंगे
3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की तीन-जजों की बेंच ने मौखिक तौर पर कहा कि ट्रांसजेंडर पहचान क़ानून में हुआ बदलाव पहले दिए गए अधिकार नहीं छीन सकता, पर कोई लिखित आदेश नहीं दिया। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई में आई जो मार्च 2026 के संशोधन को चुनौती देती है, जिसने स्वयं-अनुभूत लैंगिक पहचान का अधिकार क़ानून से हटाकर उसकी जगह मेडिकल बोर्ड की सिफ़ारिश ज़रूरी कर दी है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का रास्ता जज वाला, बाक़ी आयुक्तों का बिल्कुल अलग
6 अप्रैल 2026 को लोकसभा और राज्यसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के दो नोटिस बिना कोई वजह बताए ठुकरा दिए थे, आज़ाद भारत में किसी बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ यह पहला औपचारिक प्रयास था। पाँच महीने बाद कांग्रेस और वाम दल एक नई कोशिश की तैयारी में हैं। संविधान का अनुच्छेद 324(5) मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी सुरक्षा देता है, पर उसी अनुच्छेद का अगला हिस्सा बाक़ी निर्वाचन आयुक्तों को महज़ मुख्य आयुक्त की सिफ़ारिश पर हटाने लायक़ बना देता है। यह लेख उसी प्रक्रिया, उसकी शर्तों और अब तक के इतिहास को खोलता है।
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देश
चुनाव आयुक्त नियुक्ति क़ानून पर पीठ बँटी, फ़ैसला अब मुख्य न्यायाधीश पर
बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले 2023 के क़ानून को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं पर बँटा हुआ आदेश दिया। सवाल क़ानून के सही या ग़लत होने का नहीं था, सवाल यह था कि फ़ैसला मौजूदा दो जजों की पीठ करे या पांच जजों की संविधान पीठ। दोनों जज असहमत रहे, इसलिए कितनी बड़ी पीठ बनानी है, यह तय करने के लिए मामला अब मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के पास जाएगा।
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इत्मीनान
रुपया एक झटके में 4.7619 से 7.50 प्रति डॉलर हुआ, 6 जून 1966 को, और एक अमेरिकी दस्तावेज़ ख़ुद अपनी दी हुई तारीख़ पर बँटा हुआ है
अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व बोर्ड की अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट, 27 जुलाई 1966 की, इसी घटना की तारीख़ एक जगह 5 जून लिखती है और दो जगह 6 जून, एक ही दस्तावेज़ में। भारतीय रिज़र्व बैंक की अपनी आधिकारिक इतिहास-पुस्तक और उस हफ़्ते की लोकसभा-राज्यसभा बहस का पूरा पाठ यह लेख खोल नहीं सका; जो खुला और जो नहीं खुला, दोनों दर्ज हैं।
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इत्मीनान
139 धाराओं का हिंदू कोड बिल चार साल में चार धाराएँ ही पार कर सका, और उसे काटकर छोटा करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री का था
अंबेडकर के अपने इस्तीफ़ा-बयान में हिंदू कोड पाँचवें नंबर पर है। उससे पहले वे क़ानून मंत्रालय को 'ख़ाली साबुन की डिबिया' कहते हैं, अनुसूचित जातियों की हालत गिनाते हैं, विदेश नीति पर सवाल उठाते हैं और मंत्रिमंडल की समितियों को 'लोहे के परदे के पीछे' बताते हैं। वह बयान लोकसभा में पढ़ा भी नहीं जा सका।
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देश
कांग्रेस ने सत्रावसान की 29 दिन की देरी को रिकॉर्ड कहा, राज्यसभा के अपने दस्तावेज़ में 71 दिन का अंतराल दर्ज है
मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था। शुक्रवार को उस स्थगन के 29 दिन पूरे हो गए और सत्रावसान का आदेश अब भी नहीं निकला। राज्यसभा सचिवालय की अपनी पुस्तक में इससे लंबी चार देरियाँ दर्ज हैं, और चारों में सदन दोबारा बुलाया गया था।
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देश
लद्दाख के लिए सरकार ने नया निर्वाचित निकाय प्रस्तावित किया, राज्य का दर्जा नहीं
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने 10 सितंबर को कहा कि जो ढाँचा बनेगा वह न राज्य होगा, न विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश। जिस माँग का यह जवाब है उसमें दो अलग चीज़ें थीं, और उनमें से एक, छठी अनुसूची, किसी क्षेत्र को विधायिका देती ही नहीं।
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1891 का बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम 1 अक्टूबर को हटेगा, डिजिटल रिकॉर्ड के तीन प्रमाणपत्र घटकर एक होंगे
वित्त मंत्रालय ने 11 सितंबर को बताया कि बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम, 2026 पहली अक्टूबर से लागू होगा। उसी दिन 1891 का अधिनियम रद्द हो जाएगा। बदलाव इस बात में नहीं है कि बैंक का रिकॉर्ड सबूत बनता है या नहीं, बदलाव इस बात में है कि उसके साथ कौन-सा काग़ज़ और किसका दस्तख़त लगेगा।
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देश
कर्नाटक ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के दो अंतरे तय किए, जबकि 2026 के क़ानून में कहीं नहीं लिखा कि राष्ट्रगीत कितने अंतरों का है
8 सितंबर को मंत्रिमंडल के फ़ैसले के बाद कर्नाटक ने आदेश निकाला कि राज्य के कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे गाए जाएँगे। केंद्र का 6 फ़रवरी 2026 का निर्देश छहों अंतरे माँगता है। अगस्त में बना नया क़ानून 'राष्ट्रगीत' शब्द का इस्तेमाल करता है, पर उसे परिभाषित कहीं नहीं करता।
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तेलंगाना विधानसभा ने बीआरएस के 22 विधायक निलंबित किए, सूची में एक नाम उस सदस्य का भी जो सदन में मौजूद नहीं था
9 सितंबर को विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू का प्रस्ताव पारित होते ही मुख्य विपक्षी दल की पूरी उपस्थित बेंच सत्र के बाक़ी हिस्से के लिए बाहर हो गई। सत्र 11 सितंबर को ख़त्म हो रहा है, यानी निलंबन तीन बैठकों का है। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में महाराष्ट्र के 12 विधायकों के मामले में तय किया था कि सत्र से आगे का निलंबन अवैध है, और सत्र तक का निलंबन सदन के अधिकार में आता है।
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लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव रखा गया है, पर विधानसभा के बिना विधायी अधिकार किसके पास होगा यह अभी लिखा नहीं गया
9 सितंबर को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय ने लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सामने अनुच्छेद 371 में एक नया खंड रखा। इसमें न राज्य का दर्जा है, न छठी अनुसूची, न विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश। जिस मसौदे की उम्मीद थी वह नहीं मिला।
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पैसा
उपकर के 9,222 करोड़ रुपये तय कोषों में नहीं गए, और तेल उपकर के 2,94,150 करोड़ रुपये संचित निधि में पड़े हैं
कैग की रिपोर्ट संख्या 6 (2026) के पैरा 3.3.1 में चार आरक्षित कोषों का हिसाब है: वित्त वर्ष 2024-25 में उनके नाम पर 82,321 करोड़ रुपये वसूले गए और 73,099 करोड़ रुपये ही उन तक पहुँचे। लोक लेखा समिति ने 8 सितंबर को इसी पैरा पर वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सुना। उसी रिपोर्ट के दूसरे हिस्सों में इसी वित्त वर्ष के कुछ और आँकड़े हैं, जिन्हें पैरा 3.3.1 अपने साथ नहीं जोड़ता।
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देश
बीज अधिनियम 1966 में पहला जुर्माना पाँच सौ रुपये है और नए मसौदे में तीस लाख तक, 10 सितंबर को किसान संगठनों से राय ली जाएगी
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 10 सितंबर को अपराह्न 4 बजे कृषि भवन में किसान संगठनों के साथ नए सीड एक्ट के मसौदे पर बैठेंगे। जिस अधिनियम की जगह यह मसौदा लेगा, उसमें पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना पाँच सौ रुपये तक है। पर उसी के साथ चलने वाले 1983 के आदेश में सज़ा तीन महीने से सात साल तक की है, यानी नए मसौदे की तीन साल की अधिकतम क़ैद से ज़्यादा।
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देश
मंत्रिमंडल ने 20,804 करोड़ की आठ रेल परियोजनाएँ मंज़ूर कीं, पर मंज़ूर 35,966 किलोमीटर में से 12,769 ही चालू हुए हैं
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 9 सितंबर को आठ मिनट के अंतर पर दो विज्ञप्तियाँ जारी कीं: नौ राज्यों की आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ, 1,196 किलोमीटर, 2029-30 की समयसीमा। रेल मंत्रालय के अपने संसदीय जवाबों में मंज़ूरी और चालू होने के बीच का फ़ासला दर्ज है। दक्षिण वाली विज्ञप्ति हर परियोजना की लंबाई छापती है, पूरब वाली एक भी नहीं। और कार्बन बचत को पेड़ों में बदलने का गुणा दोनों में एक जैसा नहीं है।
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इत्मीनान
सरकारिया आयोग ने 1988 में अनुच्छेद 356 पर जो लगाम माँगी थी, वह सरकार ने नहीं, 1994 में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने लगाई; और उसकी अंतर-राज्य परिषद 36 साल में बारह बार से ज़्यादा नहीं बैठी
'सरकारिया आयोग' नाम के दो आयोग हुए। 7 सितंबर को तमिलनाडु विधानसभा में जिसका हवाला दिया गया, वह 1976 की जाँच है; केंद्र-राज्य संबंधों वाला आयोग 1983 में बना और उसकी 247 सिफ़ारिशों में से सरकार 180 को 'स्वीकृत' गिनती है। हमने आयोग के अपने अध्याय, 1990 का राष्ट्रपति-आदेश, परिषद की अपनी बैठक-सूची और लोकसभा का उत्तर पढ़कर मिलाया कि क्या सिफ़ारिश हुआ था और क्या हुआ।
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देश
जनगणना का दसवाँ सवाल 'जाति' है और उसका कॉलम ख़ाली है; तमिलनाडु चाहता है कि वहाँ सूची हो
फ़रवरी 2027 में गणक जो जाति बताई जाएगी वही लिख लेगा, किसी सूची से मिलाए बिना। तमिलनाडु विधानसभा ने 8 सितंबर को प्रस्ताव पास किया कि पिछड़े वर्गों के लिए वही तरीक़ा हो जो अनुसूचित जातियों के लिए है: पहले से लदी सूची, ड्रॉप-डाउन से चुनाव। DMK को मतदान से पहले सदन से बाहर किया गया।
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देश
मंत्रालय ने एक ही दिन दो विज्ञप्तियाँ जारी कीं कि छात्रवृत्ति समय पर मिल रही है, और दोनों में एक भी संख्या नहीं है
सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 7 सितंबर को अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति पर दो अलग विज्ञप्तियाँ निकालीं। मिलाकर क़रीब दस हज़ार अक्षर। न छात्रों की गिनती, न रक़म, न देरी के दिन।
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मानसून सत्र पच्चीस दिन से बंद नहीं हुआ, और इसका मतलब यह है कि अध्यक्ष कभी भी सदन बुला सकते हैं
कांग्रेस कह रही है सत्र इसलिए खुला रखा गया है ताकि परिसीमन विधेयक दोबारा लाया जा सके। सत्रावसान आम तौर पर तीन-चार दिन में होता है। 2015 में यह अट्ठाईस दिन बाद हुआ था।
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देश हर अक्टूबर सरकार अपने दफ़्तर साफ़ करती है, और उसी सूची में संसद के आश्वासन सबसे नीचे रहते हैं विशेष अभियान 6.0 की तैयारी 15 सितंबर से शुरू होगी। पिछली बार न्याय विभाग ने महीने भर की मेहनत के बाद 93,000 रुपये का कबाड़ बेचा और 300 वर्ग फुट जगह ख़ाली की।