गरियाबंद के अधूरे पुल पर आयोग की विज्ञप्ति छह साल की देरी गिनाती है, विभाग का इंजीनियर तीन साल
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मैनपुर ब्लॉक में बच्चों के नदी पार करने पर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। उसकी विज्ञप्ति में पुल क़रीब छह साल से निर्माणाधीन है। उसी 3 सितंबर को छपी एक दूसरी रिपोर्ट में विभाग का इंजीनियर काम की शुरुआत सितंबर 2023 बताता है और जून 2025 तक दिए गए विस्तार का ज़िक्र करता है।

पैरी नदी के बीच खड़े कंक्रीट के एक पिलर पर लोहे की छड़ों से बनी सीढ़ी बाँधी गई है। सीढ़ी के सिरे पर लगभग दो फ़ीट चौड़ी लकड़ी की प्लाई रखी है।
बरसात के महीनों में मैनपुर के जिन बच्चों को नदी के दूसरी तरफ़ स्कूल पहुँचना है, उनका रास्ता यही है।
सीढ़ी की ऊँचाई क़रीब 20 फ़ीट बताई गई है। कंधे पर बस्ता होता है और नीचे नदी बहती है। अधूरे ढाँचे में जगह-जगह सरिए खुले पड़े हैं। पुल की लंबाई लगभग 300 मीटर है और वह अब तक बना नहीं है।
आयोग ने क्या माँगा है
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की 9 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति कहती है कि गरियाबंद ज़िले के मैनपुर ब्लॉक में खंभाथा और निकटवर्ती बस्तियों के दर्जनों बच्चों को स्कूल तक पहुँचने के लिए अधूरे पुल से जुड़ी संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी चढ़कर पैरी नदी पार करनी पड़ती है। विज्ञप्ति में आयोग की शर्त साफ़ लिखी है: यदि मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं, तो यह मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। रिलीज़ आईडी 2308366 है, प्रविष्टि का समय शाम 4:43 दर्ज है।
छह साल का आँकड़ा कहाँ से आया
विज्ञप्ति 3 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देती है और उसी के आधार पर लिखती है कि देहरगुडा और खंभाथा के बीच का यह पुल लगभग छह वर्षों से निर्माणाधीन है। अमर उजाला ने 3 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में यही अवधि "करीब पांच-छह साल" लिखी, जबकि उसी पन्ने पर दिए सार में "5 साल से अधूरा पुल" छपा। लल्लूराम की रिपोर्ट में अवधि "करीब 5-6 सालों" है। इन तीनों में से कोई भी निर्माण शुरू होने का महीना या वर्ष नहीं बताता। संख्या ग्रामीणों के अनुमान से आई है, किसी विभागीय दस्तावेज़ से नहीं। लल्लूराम के पन्ने में दर्ज प्रकाशन तारीख़ 1 सितंबर 2026 है, यानी आयोग जिस 3 सितंबर की रिपोर्ट का हवाला देता है, उससे दो दिन पहले की।
उसी दिन छपी दूसरी तारीख़
राष्ट्र चंडिका ने 3 सितंबर को ब्रिज कंस्ट्रक्शन विभाग के इंजीनियर फागुलाल कुर्रे के हवाले से लिखा कि यह पुल सितंबर 2023 से निर्माणाधीन है और उसे महज़ 10 महीने की निर्धारित समयावधि में बनकर तैयार होना था। उसी रिपोर्ट में कुर्रे यह भी कहते हैं कि काम वर्ष 2024 में पूरा होना था, जिसे जून 2025 तक का विस्तार दिया गया था। इस हिसाब से निर्माण को तीन साल हुए हैं, छह नहीं। दोनों आँकड़े एक ही दिन, एक ही मामले पर छपे। आयोग की विज्ञप्ति ने इनमें से बड़ा आँकड़ा उठाया और अपने नोटिस की उपशीर्षक-पंक्ति में रख दिया।
पाँच करोड़ की स्वीकृति 2022 की है
राष्ट्र चंडिका की उसी रिपोर्ट में बिंद्रानवागढ़ के विधायक जनक लाल ध्रुव कहते हैं कि पैरी नदी का यह पुल वर्ष 2022 से 5 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत है। स्वीकृति 2022 की और काम की शुरुआत सितंबर 2023 की मानें तो दोनों के बीच लगभग एक साल बैठता है, जो सरकारी निर्माण में असामान्य नहीं। पर अगर छह साल वाली अवधि सही है, तो निर्माण अपनी स्वीकृति से लगभग तीन साल पहले शुरू हुआ होगा। इस विसंगति पर किसी रिपोर्ट में सवाल नहीं पूछा गया, और आयोग की विज्ञप्ति में लागत या स्वीकृति का कोई ज़िक्र नहीं है।
स्लैब पूरा है, पहुँच मार्ग नहीं

इंजीनियर कुर्रे के मुताबिक़ मुख्य पुल के स्लैब की ढलाई का कार्य पूरा हो चुका है और केवल दोनों किनारों के एप्रोच रोड का निर्माण शेष है। एप्रोच रोड वह चढ़ाई है जो पुल के दोनों सिरों को ज़मीन की सड़क से जोड़ती है। उसके बिना ढला हुआ पूरा स्लैब भी बेकार पड़ा रहता है, क्योंकि उस पर चढ़ने का कोई रास्ता नहीं बनता। बच्चों की लोहे की सीढ़ी ठीक इसी अधूरेपन की जगह पर लगी है: ऊपर स्लैब तैयार, नीचे उस तक पहुँचने का कोई ढाल नहीं।
बच्चे किस किनारे के हैं
आयोग की विज्ञप्ति कहती है कि खंभाथा और निकटवर्ती बस्तियों के बच्चे अपने स्कूलों तक पहुँचने के लिए नदी पार करते हैं। लल्लूराम की रिपोर्ट भी नदी के दूसरी तरफ़ खामभाठा और आसपास के मोहल्लों से आने वाले प्राथमिक से हाईस्कूल तक के छात्र-छात्राओं की बात करती है। राष्ट्र चंडिका इसका उलटा लिखती है: देहारगुड़ा गाँव में उच्च प्राथमिक शाला न होने के कारण बच्चों को रोज़ाना नदी पार कर खामभाठा स्थित स्कूल जाना पड़ता है। एक विवरण में स्कूल जिस किनारे पर है, दूसरे में बच्चे उसी किनारे के हैं। किस गाँव में कौन-सी शाला है, यह किसी रिपोर्ट में दर्ज नहीं।
गाँवों और विधायक के नाम की वर्तनी
पीआईबी की हिंदी विज्ञप्ति में गाँवों के नाम देहरगुडा और खंभाथा हैं। अमर उजाला और लल्लूराम में वही नाम देहारगुड़ा और खामभाठा लिखे गए। एनपीजी न्यूज़ की 9 सितंबर की रिपोर्ट में देहरगुड़ा और खंभाथा हैं। विधायक का नाम राष्ट्र चंडिका में जनक लाल ध्रुव है, अमर उजाला और लल्लूराम में जनक ध्रुव, और विकिपीडिया के अंग्रेज़ी पन्ने पर जनक राम ध्रुव। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को दो हफ़्ते में जो रिपोर्ट भेजनी है, उसे इन्हीं नामों में से किसी एक वर्तनी पर टिकना होगा।
स्वतः संज्ञान की क़ानूनी जड़
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 आयोग के कामों की सूची है। उसका पहला खंड आयोग को यह शक्ति देता है कि वह स्वतः, या पीड़ित अथवा उसकी ओर से किसी व्यक्ति की याचिका पर, मानवाधिकार के उल्लंघन की या किसी लोक सेवक द्वारा ऐसे उल्लंघन को रोकने में हुई उपेक्षा की शिकायत की जाँच करे। मूल पाठ में यह "inquire, suo motu or on a petition presented to it by a victim or any person on his behalf" के रूप में दर्ज है। वर्ष 2006 के संशोधन ने इसमें किसी अदालत के निर्देश या आदेश पर जाँच का रास्ता भी जोड़ा।
एक साल की दीवार
उसी अधिनियम की धारा 36(2) कहती है कि आयोग या राज्य आयोग किसी मामले की जाँच उस तारीख़ से एक वर्ष बीत जाने के बाद नहीं करेगा, जिस दिन मानवाधिकार के उल्लंघन का कथित कृत्य किया गया बताया जाता है। पुल की देरी तीन साल पुरानी हो या छह, दोनों अवधियाँ इस एक वर्ष की सीमा से बाहर पड़ती हैं। आयोग की विज्ञप्ति देरी को घटना की तरह दर्ज नहीं करती। वह मानसून में रोज़ दोहराई जा रही नदी-पार को दर्ज करती है, जो अभी की स्थिति है। यह फ़र्क़ नोटिस के टिके रहने के लिए मामूली नहीं है।
दो सप्ताह कहाँ से आते हैं
अधिनियम की धारा 18 में एक महीने की समय-सीमा है, दो हफ़्ते की नहीं। उस धारा का खंड (ङ) कहता है कि आयोग अपनी जाँच रिपोर्ट सिफ़ारिशों के साथ संबंधित सरकार या प्राधिकारी को भेजेगा, और वह सरकार एक महीने के भीतर, या आयोग की दी हुई अतिरिक्त मोहलत में, रिपोर्ट पर अपनी टिप्पणी तथा की गई या प्रस्तावित कार्रवाई आयोग को लौटाएगी। यह घड़ी जाँच पूरी होने के बाद चलती है। मुख्य सचिव को मिले दो सप्ताह अधिनियम की समय-सीमा नहीं हैं, वे आयोग के अपने आदेश से आते हैं।
सिफ़ारिश के बाद आयोग क्या कर सकता है
धारा 18 का खंड (ख) आयोग को यह रास्ता देता है कि वह ज़रूरी निर्देश, आदेश या रिट के लिए उच्चतम न्यायालय या संबंधित उच्च न्यायालय के पास जाए। खंड (च) के अनुसार आयोग अपनी जाँच रिपोर्ट को सरकार की टिप्पणी और उस पर हुई कार्रवाई के साथ प्रकाशित करेगा। अधिनियम इन जगहों पर आयोग के लिए "recommend" शब्द इस्तेमाल करता है। मुआवज़े या कार्रवाई की सिफ़ारिश मानने की बाध्यता पर अदालतों में अलग-अलग राय दर्ज है, और अधिनियम स्वयं उसे इन दो खंडों से आगे नहीं ले जाता।
विदिशा का मामला ठीक एक महीने पुराना है
7 अगस्त 2026 को इसी आयोग ने मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले का एक मामला स्वतः संज्ञान में लिया था। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार वहाँ बेतवा नदी पर बने एक चेक डैम के खुले पिलरों पर कूदते हुए बच्चे स्कूल पहुँचते हैं। सड़क का रास्ता 13 किलोमीटर लंबा है और यह छोटा रास्ता डेढ़ किलोमीटर का। बच्चों का वीडियो 4 अगस्त को फैला था। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर दो हफ़्ते में विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी।
दोनों नोटिसों में क्या अलग है
विदिशा वाले मामले में आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 21क और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का हवाला दिया। द ट्रिब्यून के अनुसार आयोग ने कहा कि बच्चों के स्कूल पहुँचने के लिए सुरक्षित परिवहन का न होना उनके सम्मान के साथ शिक्षा के मौलिक अधिकार का निषेध है। गरियाबंद वाली हिंदी विज्ञप्ति में न अनुच्छेद 21क है, न शिक्षा का अधिकार अधिनियम, न कोई ऐसी पंक्ति। दोनों में मुख्य सचिव को नोटिस है और दोनों में दो हफ़्ते की मोहलत।
नवा रायपुर में सात दिन पहले

2 सितंबर 2026 को नवा रायपुर के पीडब्ल्यूडी मुख्यालय "निर्माण भवन" में लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में सभी निर्माण स्थलों पर काम होते हुए दिखना चाहिए, और एक सप्ताह के भीतर ठेकेदारों के साथ हर निर्माणाधीन काम का स्थल निरीक्षण करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव और सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी के साथ सेतु परिक्षेत्र के सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता मौजूद थे।
गतिशक्ति पोर्टल की तारीख़ 10 सितंबर थी
उसी बैठक में बंसल ने भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर प्रदेश के सभी पुल-पुलियों की जानकारी 10 सितंबर तक अपलोड करने के निर्देश दिए, और तय समय में जानकारी न देने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा। आयोग का नोटिस मुख्य सचिव के पास 9 सितंबर को पहुँचा। मैनपुर का यह पुल विभाग की अपनी समय-सीमा के हिसाब से उसके अगले दिन केंद्र के पोर्टल पर दर्ज हो जाना था। बैठक की सरकारी ख़बर में गरियाबंद का नाम कहीं नहीं है।
धीमे ठेकेदारों पर कार्रवाई की बात
बंसल ने उसी समीक्षा में काम में लापरवाही बरतने या कार्य की गति धीमी रखने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कार्यपालन और अधीक्षण अभियंताओं को हफ़्ते में दो दिन अनिवार्य रूप से निर्माण स्थलों पर जाने के निर्देश दिए। ठेकेदारों को हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने की बात भी हुई, ताकि कामों की भौतिक और वित्तीय प्रगति प्रभावित न हो। काम पूरा होने के तीन महीने के भीतर अनुबंध बंद करने का आदेश भी उसी बैठक का है।
पुल किस विभाग का है
राष्ट्र चंडिका इस पुल को ब्रिज कंस्ट्रक्शन विभाग का बताती है और उसी विभाग के इंजीनियर को उद्धृत करती है। एनपीजी न्यूज़ की रिपोर्ट लिखती है कि क़रीब एक वर्ष पहले लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने छह महीने में काम पूरा कराने की बात कही थी। अमर उजाला और लल्लूराम "संबंधित विभाग" तथा "निर्माण एजेंसी" लिखकर रुक जाते हैं और किसी का नाम नहीं लेते। छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग में पुलों का काम सेतु परिक्षेत्र के ज़िम्मे है, जिसके मुख्य अभियंता एस.के. कोरी हैं। आयोग की विज्ञप्ति किसी विभाग का नाम नहीं लेती, केवल मुख्य सचिव को लिखती है।
विधायक और तत्कालीन कलेक्टर का निरीक्षण
ग्रामीणों के हवाले से अमर उजाला और लल्लूराम दोनों लिखते हैं कि क़रीब एक वर्ष पहले क्षेत्रीय विधायक जनक ध्रुव और तत्कालीन गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को काम में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए। उसी मौक़े पर बारिश से पहले, क़रीब छह महीने में, पुल पूरा करने की बात कही गई थी। पीआईबी की विज्ञप्ति इसी आश्वासन को दोहराती है और उसे भी क़रीब एक साल पुराना बताती है।
विधायक विपक्ष के हैं
विकिपीडिया के अनुसार जनक राम ध्रुव 2023 में बिंद्रानवागढ़ की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर जीते। उन्हें 92,639 वोट मिले और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के गोवर्धन सिंह मांझी को 816 वोट के अंतर से हराया। इस पुल पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखने वाले इदरीस गांधी छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के अध्यक्ष हैं, यानी राज्य सरकार के ही एक निकाय के प्रमुख। शिकायत सत्ता और विपक्ष, दोनों तरफ़ से एक ही सप्ताह में दर्ज हुई।
उर्दू अकादमी के अध्यक्ष का पत्र
लल्लूराम की 3 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार इदरीस गांधी ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। पत्र में उन्होंने पुल पूरा होने तक बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता और निर्माण कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा कराने की बात रखी। उनकी उद्धृत पंक्ति है: "बच्चों की शिक्षा उनकी जान की कीमत पर नहीं हो सकती।" यह पत्र आयोग के संज्ञान से छह दिन पहले का है। रिपोर्ट यह भी दर्ज करती है कि सोशल मीडिया पर आए वीडियो और तस्वीरों के बाद मामला स्थानीय दायरे से बाहर निकला।
ज़िला शिक्षा अधिकारी का सुझाव
राष्ट्र चंडिका के अनुसार गरियाबंद के ज़िला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने बताया कि उन्होंने मामले की गंभीरता से एसडीएम को अवगत कराया है, ताकि निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को काम तेज़ी से पूरा करने का निर्देश दिया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि फ़िलहाल परिजन और शिक्षक बच्चों को सावधानी से पुल पार कराने में मदद कर रहे हैं। इसके साथ उन्होंने यह सुझाव भी रखा कि नदी का जलस्तर कम होने तक बच्चे जिस गाँव में पढ़ने जाते हैं, उसी गाँव में किसी रिश्तेदार के घर रुककर पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
पड़ोस के स्कूल की दूरी नदी नहीं नापती
शिक्षा के अधिकार पर काम करने वाले राइट टु एजुकेशन फ़ोरम की वेबसाइट पड़ोस के स्कूल को इस तरह परिभाषित करती है: प्राथमिक स्तर पर बच्चे की बस्ती से एक किलोमीटर की पैदल दूरी, और उच्च प्राथमिक स्तर पर तीन किलोमीटर। वह पन्ना यह नहीं बताता कि परिभाषा किस नियम या धारा से आती है। मैनपुर तहसील मुख्यालय इस जगह से क़रीब पाँच किलोमीटर दूर है। कागज़ पर दूरी नापी जाती है, पर यहाँ रुकावट दूरी नहीं है। रुकावट बरसात में चढ़ आया पानी है, जिसे कोई भी दूरी-मानक दर्ज नहीं करता।
ग्रामीणों के नाम और चेतावनी

अमर उजाला और लल्लूराम, दोनों ने नाराज़गी दर्ज कराने वालों के नाम छापे हैं: ग्राम पंचायत के सरपंच महेश दीवान, जनपद सदस्य प्रताप सिंह मरकाम, पूर्व उपसरपंच पवन दीवान, लोकेश साण्डे, लीलाधर, रामप्रसाद, सोहन नागेश, बुधराम साण्डे, हितराम, देवन सिंह नेताम और पूर्व सरपंच डिकेश्वरी साण्डे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सुरक्षित रास्ता नहीं बना तो वे छात्र-छात्राओं के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग 130सी पर चक्काजाम करेंगे। सरपंच महेश दीवान का सवाल राष्ट्र चंडिका में दर्ज है कि सीढ़ी चढ़ते वक़्त कोई बच्चा नीचे गिर गया तो ज़िम्मेदारी किसकी होगी।
गरियाबंद किस सूची में है
गृह मंत्रालय की वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित ज़िलों की सूची में गरियाबंद "अन्य प्रभावित" श्रेणी में आता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हवाले से जारी पीआईबी विज्ञप्ति के अनुसार यह श्रेणी 17 ज़िलों से घटकर 6 रह गई है, जिनमें छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, गरियाबंद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी शामिल हैं। सबसे प्रभावित 6 ज़िलों की सूची में छत्तीसगढ़ के बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा हैं, गरियाबंद नहीं। "चिंता वाले" 6 ज़िलों की सूची में भी यह नहीं है। 2011 की जनगणना में ज़िले की आबादी 5,97,653 थी, जिसमें अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी 36.14 फ़ीसदी और साक्षरता 68.26 फ़ीसदी दर्ज हुई।
अधूरे कामों का राज्यव्यापी आँकड़ा नहीं मिला
छत्तीसगढ़ में कितने पुल अपनी निर्धारित पूर्णता तिथि पार कर चुके हैं, इसका कोई सार्वजनिक आँकड़ा इस रिपोर्ट के लिए नहीं मिला। सबसे नज़दीकी उपलब्ध लेखा-परीक्षा आँकड़ा दूसरे क्षेत्र का है। डाउन टु अर्थ के अनुसार 21 जुलाई 2023 को विधानसभा में रखी सीएजी रिपोर्ट में नौ ज़िलों के भीतर 2016 से 2019 के बीच शुरू हुए 1,436 काम अधूरे मिले, और 219.31 करोड़ रुपये दो से चार साल तक अटके रहे। रिपोर्ट ने देरी की वजहों में काम शुरू करने का विलंब और प्राक्कलन का संशोधन गिनाया। उन नौ ज़िलों की सूची में गरियाबंद नहीं है।
स्रोतपीआईबी, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की हिंदी विज्ञप्ति, रिलीज़ आईडी 2308366, 9 सितंबर 2026, राष्ट्र चंडिका, अखिलेश दुबे की रिपोर्ट, 3 सितंबर 2026, लल्लूराम, पुरुषोत्तम पात्र की गरियाबंद से रिपोर्ट, 1 सितंबर 2026, अमर उजाला, गरियाबंद से फ़ीचर रिपोर्ट, 3 सितंबर 2026, एनपीजी न्यूज़, रायपुर, आयोग के नोटिस पर रिपोर्ट, 9 सितंबर 2026, लल्लूराम, छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के अध्यक्ष के पत्र पर रिपोर्ट, 3 सितंबर 2026, प्राइम टीवी इंडिया, छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की ख़बर, 2 सितंबर 2026, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की वेबसाइट पर मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 का पूर्ण पाठ, द ट्रिब्यून, विदिशा में बेतवा के चेक डैम पर आयोग के नोटिस की रिपोर्ट, अगस्त 2026, फ़्री प्रेस जर्नल, आयोग के संज्ञान और उसके स्रोत पर रिपोर्ट, 9 सितंबर 2026, विकिपीडिया, गरियाबंद ज़िले का पन्ना, जनगणना 2011 के आँकड़े, विकिपीडिया, बिंद्रानवागढ़ के विधायक का पन्ना, 2023 चुनाव परिणाम, पीआईबी, गृह मंत्रालय, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों की नई श्रेणियों पर विज्ञप्ति, रिलीज़ आईडी 2117140, डाउन टु अर्थ, छत्तीसगढ़ में ज़िला खनिज न्यास के कामों पर सीएजी रिपोर्ट का विवरण, राइट टु एजुकेशन फ़ोरम की वेबसाइट, पड़ोस के स्कूल की परिभाषा वाला पन्ना