बिहार के चार हज़ार से ज़्यादा सरकारी स्कूल पानी में हैं और अर्धवार्षिक परीक्षा 15 सितंबर से तय है
आपदा प्रबंधन विभाग के 9 सितंबर के बुलेटिन में पूरे राज्य के लिए 15 राहत शिविर दर्ज हैं, जिनमें 13,446 लोग हैं। स्कूल शिविर बनकर ख़ाली नहीं हुए, वे डूबकर ख़ाली हुए हैं। परीक्षा का कार्यक्रम नहीं बदला, और बच्चों से घर से चटाई और पॉलीथीन लाने को कहा गया है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की अनुसूची स्कूल भवन के लिए पहली शर्त यही रखती है कि वह हर मौसम का हो। अंग्रेज़ी मूल में शब्द है, All-weather building। बिहार के 14 बाढ़-प्रभावित ज़िलों में इस समय चार हज़ार से ज़्यादा सरकारी स्कूल पानी में हैं।
द हिंदू ने 9 सितंबर को यह संख्या छापी और लिखा कि तीन लाख से ज़्यादा बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। उसी रिपोर्ट में यह भी है कि शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से बारह तक की अर्धवार्षिक परीक्षा 15 सितंबर से कराने का कार्यक्रम जारी कर दिया है।
परीक्षा का पूरा कैलेंडर पहले ही जारी हो चुका है
प्रभात ख़बर की छपरा से आई रिपोर्ट के अनुसार कक्षा एक से आठ तक की परीक्षा 15 से 20 सितंबर तक चलेगी। 15 सितंबर को हिंदी, उर्दू, बांग्ला और विज्ञान की परीक्षा है; 16 को अंग्रेज़ी और पर्यावरण अध्ययन या सामाजिक विज्ञान; 17 को गणित और संस्कृत; 19 को हिंदी द्वितीय भाषा का मूल्यांकन। कक्षा नौ और दस की परीक्षा 21 से 23 सितंबर तक है, कक्षा ग्यारह और बारह की 18 से 26 सितंबर तक। दो पालियाँ तय हैं, सुबह दस से बारह और दोपहर एक से तीन।
उत्तर पुस्तिका विभाग भेजेगा, प्रश्नपत्र पोर्टल से उतरेगा
कक्षा एक और दो के बच्चों की परीक्षा मौखिक होगी; सवाल ई-शिक्षाकोष पोर्टल से मिलेंगे। कक्षा तीन से आठ तक की उत्तर पुस्तिकाएँ शिक्षा विभाग देगा, जबकि हर विद्यालय को प्रश्नपत्र उसी पोर्टल से डाउनलोड करने होंगे। कॉपियों की जाँच 21 से 25 सितंबर के बीच संकुल स्तर पर होगी। 26 सितंबर को विद्यालयों में अभिभावक-शिक्षक बैठक रखी गई है और उसी दिन नतीजे दिए जाएँगे। यह पूरी व्यवस्था एक पोर्टल पर टिकी है, जिस तक पहुँचने के लिए बिजली और इंटरनेट चाहिए।
घर से चटाई और पॉलीथीन लाने का निर्देश

द हिंदू के अनुसार शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों से कहा है कि वे अपनी चटाई और पॉलीथीन शीट घर से लाएँ, क्योंकि परीक्षा गाँव के पंचायत भवनों और खुली जगहों पर होनी है। भागलपुर के नवगछिया के हरिशंकर मंडल, जिनका बेटा कक्षा बारह में है, ने अख़बार से कहा कि यह उनके लिए हैरानी की बात थी: जब शिक्षक बाढ़ की वजह से पाठ्यक्रम ही पूरा नहीं कर सके, तो विभाग बच्चों से घर से चटाई कैसे मँगवा सकता है। विद्यार्थियों का कहना है कि पाठ्यक्रम का एक-तिहाई भी नहीं हुआ।
शिक्षक संघ ने विभाग से कार्रवाई माँगी है
बिहार के प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों के संगठन के नेता आनंद मिश्रा ने द हिंदू से कहा कि एक दर्जन से ज़्यादा ज़िलों के स्कूल बाढ़ में डूबे हैं, जलजमाव बना है और पहुँच-पथ टूटे हैं, इसलिए परीक्षा देने में विद्यार्थियों को बड़ी दिक़्क़त होगी; शिक्षा विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसी रिपोर्ट में कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा उनकी पहली चिंता है और वैकल्पिक इंतज़ाम की प्रक्रिया चल रही है। इंतज़ाम किस तरह के होंगे, यह नहीं बताया गया।
चार हज़ार किस पैमाने पर बड़ा है
यूडाइस प्लस के 2024-25 के आँकड़ों के एक विश्लेषण के अनुसार बिहार में कुल 94,339 स्कूल हैं और उनमें 80.90 फ़ीसदी सरकारी प्रबंधन में हैं। इस अनुपात से राज्य में लगभग 76,300 सरकारी स्कूल बनते हैं, यानी चार हज़ार का मतलब हुआ हर उन्नीस में से क़रीब एक। इसी विश्लेषण में दर्ज है कि प्रति स्कूल औसत नामांकन 224 है और राज्य का कुल नामांकन 2024-25 में 2.11 करोड़ था, जो 2021-22 के 2.75 करोड़ से 23 फ़ीसदी कम है।
तीन लाख बच्चे, या नौ लाख
द हिंदू की रिपोर्ट में डूबे स्कूल चार हज़ार से ज़्यादा हैं और प्रभावित विद्यार्थी तीन लाख से ज़्यादा। इन दोनों संख्याओं को आपस में बाँटने पर प्रति स्कूल 75 बच्चे बैठते हैं। यूडाइस प्लस के विश्लेषण में दर्ज 224 के औसत से वही चार हज़ार स्कूल लगभग 8.96 लाख बच्चों के होंगे। दोनों आँकड़े अलग स्रोतों से हैं और गिनने का आधार भी अलग हो सकता है, पर फ़र्क़ तीन गुना का है। डूबे स्कूलों की कोई संख्या किसी सरकारी बुलेटिन में नहीं मिली।
प्रभावित ज़िलों की गिनती हर जगह अलग
9 सितंबर को छपी रिपोर्टों में बाढ़-प्रभावित ज़िलों की संख्या एक नहीं है। देशज टाइम्स ने उसी दिन दोपहर 12:13 बजे की रिपोर्ट में 12 ज़िलों में क़रीब 27 लाख लोग प्रभावित लिखे। स्क्रॉल ने 13 ज़िलों में 34 लाख से ज़्यादा बताए। रोज़ाना स्पोक्समैन ने 14 ज़िलों की 491 ग्राम पंचायतों में 35.89 लाख लिखा। पीटीआई ने आपदा प्रबंधन विभाग के बुलेटिन के हवाले से 14 ज़िलों की 514 ग्राम पंचायतों और 84 प्रखंडों में 40.21 लाख दर्ज किए। चारों संख्याएँ एक ही तारीख़ की हैं।
विभाग की सूची में ये चौदह ज़िले हैं
बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपी पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार आपदा प्रबंधन विभाग की सूची में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, ख़गड़िया, पूर्णिया और अरवल हैं। द हिंदू ने भी यही चौदह नाम दिए हैं। सूची में गंगा और उसकी सहायक नदियों की पूरी पट्टी है, कोसी और सीमांचल का हिस्सा है, और दक्षिण बिहार का सोन-पुनपुन इलाक़ा भी। इन्हीं ज़िलों के स्कूलों को 15 सितंबर से परीक्षा करानी है।
सूची से बाहर का एक स्कूल, जुलाई से बंद
पश्चिमी चंपारण के योगापट्टी प्रखंड के सिसवा गाँव का एक मध्य विद्यालय 15 जुलाई से बंद है। देशज टाइम्स के अनुसार परिसर में बाढ़ का पानी घुसने के बाद उसे बंद करना पड़ा। पश्चिमी चंपारण आपदा प्रबंधन विभाग की 9 सितंबर वाली चौदह ज़िलों की सूची में नहीं है। राज्य की दैनिक गिनती जिस दिन का चित्र देती है, उसके बाहर भी बंद स्कूल हैं और वे किसी बुलेटिन में नहीं आते। बेगूसराय में पिछले महीने अस्सी से ज़्यादा स्कूल एक हफ़्ते से ज़्यादा बंद रहे।
ज़िलों की अपनी-अपनी गिनती जोड़ पर नहीं आती
देशज टाइम्स ने ज़िलेवार आँकड़े दिए हैं। भोजपुर में अधिकारियों ने सात प्रखंडों के 187 बाढ़-प्रभावित स्कूल चिह्नित किए और निर्देश दिया कि इनके विद्यार्थियों का दाख़िला पास के उन स्कूलों में कराया जाए जो प्रभावित नहीं हैं। समस्तीपुर में 45 स्कूलों की पढ़ाई ठप है, जहाँ रोज़ाना स्पोक्समैन के अनुसार 2.33 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हैं। भागलपुर के नवगछिया प्रखंड में 26 स्कूल हैं, पटना के मनेर प्रखंड में क़रीब 41, मोकामा में सात, दानापुर और फतुहा में लगभग एक दर्जन। इन सबका जोड़ तीन सौ से कुछ ऊपर बैठता है, चार हज़ार से बहुत दूर।
स्कूल बंद करने का अधिकार किसके पास है
अगस्त 2024 में शिक्षा विभाग के तत्कालीन सचिव बैद्यनाथ यादव ने ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिया था कि आपदा प्रबंधन नियमों के तहत बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर वे स्कूल बंद करने का फ़ैसला ले सकते हैं। उसी निर्देश में कहा गया कि शिक्षकों और विद्यार्थियों को सिर्फ़ पंजीकृत नावों से ले जाया जाए, सवारियाँ लाइफ़ जैकेट पहनें और बड़े घाटों पर पर्याप्त जैकेट रखी जाएँ। निर्देश नसरीगंज घाट की उस घटना के बाद आया था जिसमें सरकारी स्कूल के शिक्षक अविनाश कुमार उफनती गंगा में गिर गए थे।
फ़ैसला ज़िले का है, इसलिए राज्य का जोड़ नहीं है
बंदी का फ़ैसला हर ज़िलाधिकारी अपने स्तर पर लेता है, इसलिए राज्य के पास एक जगह यह दर्ज नहीं होता कि किस ज़िले में कितने दिन पढ़ाई नहीं हुई। आपदा प्रबंधन विभाग का रोज़ का बुलेटिन प्रभावित आबादी, ग्राम पंचायत, प्रखंड, नाव, पॉलीथीन शीट, सूखा राशन और पशु चारा गिनता है। बंद स्कूलों या खोए कार्यदिवसों की एक भी पंक्ति उसमें नहीं है। इस मॉनसून में कितने पढ़ाई-दिन गए, इसका कोई सरकारी आँकड़ा इसीलिए नहीं है।
पूरे राज्य में राहत शिविर पंद्रह हैं

9 सितंबर के बुलेटिन में पूरे बिहार के लिए 15 राहत शिविर दर्ज हैं, जिनमें 13,446 बाढ़-विस्थापितों के ठहरने, भोजन और चिकित्सा का इंतज़ाम बताया गया है। उसी बुलेटिन में प्रभावित आबादी 40.21 लाख है, सामुदायिक रसोइयाँ 723। राहत का ढाँचा लोगों को शिविर में लाने के बजाय उन्हें उनकी जगह पर खाना पहुँचाने पर टिका है। नतीजा यह है कि चार हज़ार स्कूल इसलिए ख़ाली नहीं हैं कि उनमें शिविर लग गए हैं।
वे इसलिए ख़ाली हैं कि उनमें पानी है।
शिविर और रसोई की गिनती भी एक जैसी नहीं
8 सितंबर के बुलेटिन के हवाले से सियासत ने 432 सामुदायिक रसोई, 14 राहत शिविर और 1,832 नावें छापी थीं। रोज़ाना स्पोक्समैन ने 9 सितंबर को 456 रसोइयाँ, 14 शिविर, बारह हज़ार से ज़्यादा लोग और 1,876 नावें लिखीं। पीटीआई और द हिंदू ने उसी दिन 723 रसोइयाँ, 15 शिविर, 13,446 लोग और 1,979 नावें दर्ज कीं। पॉलीथीन शीट 1.29 लाख से बढ़कर 1.94 लाख हुई, सूखा राशन पैकेट 22,900 से 29,400, और पशु चारा 3,142 क्विंटल से 5,178 क्विंटल।
नाव से स्कूल, किराया पाँच सौ रुपये

एएनआई की 4 सितंबर को कटिहार से भेजी रिपोर्ट में प्रतापगंज के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के क़रीब तीन सौ बच्चों का स्कूल-दिन नाव से शुरू होता है, क्योंकि परिसर चारों ओर से पानी में है और मुख्य रास्ता डूबा हुआ है। शिक्षक अब्दुल बारिक ने एजेंसी से कहा कि नाव पर चढ़ते हुए डर लगता है, पास से निजी नाव बुलानी पड़ती है, और वहाँ कोई सरकारी नाव सेवा नहीं है। नाव चलाने वाले आबेद अली ने कहा कि वे बच्चों को सँभालकर बिठाते और सुरक्षित पहुँचाते हैं, और इसके पाँच सौ रुपये लेते हैं। अभिभावक अंजली देवी ने कहा कि कुछ समय पहले इसी पानी में एक नाव डूबी थी। अगस्त 2024 का विभागीय निर्देश पंजीकृत नाव और लाइफ़ जैकेट की बात करता है; यहाँ नाव निजी है।
पुनपुन के पानी में धनकी गाँव का स्कूल
पटना ज़िले के बाहरी इलाक़े के धनकी गाँव का सरकारी स्कूल पुनपुन नदी के पानी में डूबा है। द हिंदू के अनुसार अभिभावकों ने माँग की कि ज़िला प्रशासन बच्चों के स्कूल पहुँचने का वैकल्पिक इंतज़ाम करे; कुछ दिन पहले बच्चों को रस्सी के सहारे नाव से स्कूल पहुँचने की कोशिश करते देखा गया था। भागलपुर के नवगछिया के जिस सरकारी स्कूल में सुबोध मंडल पढ़ते हैं, वहाँ दस दिन से कमर तक पानी भरा है और कक्षाएँ स्थगित हैं।
दो सौ दिन और दो सौ बीस दिन
शिक्षा का अधिकार अधिनियम की अनुसूची में शैक्षणिक वर्ष के न्यूनतम कार्यदिवस तय हैं: कक्षा एक से पाँच के लिए दो सौ कार्यदिवस और आठ सौ शिक्षण घंटे, कक्षा छह से आठ के लिए दो सौ बीस कार्यदिवस और एक हज़ार घंटे। इसी अनुसूची में भवन की शर्त हर मौसम वाले भवन से शुरू होती है, और उसके नीचे हर शिक्षक के लिए एक कक्षा-कक्ष, बाधा-रहित पहुँच, अलग शौचालय, पीने का पानी, रसोई, खेल का मैदान और चारदीवारी गिनाई गई है। बाढ़ में टूटे कार्यदिवस कैसे पूरे होंगे, अनुसूची चुप है।
शिक्षक, और आपदा राहत का अपवाद
उसी अधिनियम की धारा 27 कहती है कि किसी शिक्षक को ग़ैर-शैक्षणिक काम में नहीं लगाया जाएगा, सिवाय दस-वर्षीय जनगणना, आपदा राहत ड्यूटी, और स्थानीय निकाय, राज्य विधानमंडल या संसद के चुनाव से जुड़े काम के। पढ़ाई का समय बचाने के लिए बनी इस धारा में आपदा राहत ख़ुद एक दर्ज अपवाद है। बिहार में शैक्षणिक सत्र और मॉनसून एक ही महीनों में पड़ते हैं। धारा में ऐसी ड्यूटी के दिनों की कोई ऊपरी सीमा नहीं है।
मध्याह्न भोजन: मार्गदर्शिका के पेज 33 पर
पीएम पोषण योजना की 140 पृष्ठ की मार्गदर्शिका, जो 21 दिसंबर 2022 के पत्र के साथ जारी हुई, उसमें एक उपशीर्षक है, क्रमांक 3.10: सूखा प्रभावित क्षेत्रों में गर्मी की छुट्टियों के दौरान और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल बंद रहने के दौरान भोजन का प्रावधान। पेज 33 पर यह उपशीर्षक है और उसके नीचे एक भी वाक्य नहीं है; अगली इबारत सीधे अध्याय चार का शीर्षक है। बाढ़ में स्कूल बंद होने पर बच्चे का खाना किस नियम से चलेगा, इसके लिए योजना ने जगह बनाई और भरी नहीं।
जो प्रावधान लिखा गया, वह सूखे के नाम से चलता है
उसी मार्गदर्शिका के पैरा 17.2 में लिखा है कि आपदा के समय और गर्मी की छुट्टियों में उन क्षेत्रों के स्कूलों को केंद्रीय सहायता दी जाएगी जिन्हें राज्य सरकार अपनी स्थापित प्रक्रिया से औपचारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित करे, और यह अधिसूचना एक वर्ष के लिए मान्य रहती है। पैरा के अंत में एक पंक्ति जुड़ी है कि यही व्यवस्थाएँ आपदा प्रभावित क्षेत्रों पर भी लागू होंगी। बाढ़-प्रभावित क्षेत्र को इस उद्देश्य से अधिसूचित करने की अलग प्रक्रिया मार्गदर्शिका में दर्ज नहीं है।
एक बच्चे के भोजन की तय क़ीमत
मार्गदर्शिका के पैरा 3.1 और 3.2 के अनुसार बाल वाटिका और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे के लिए रोज़ 100 ग्राम अनाज और 5.45 रुपये की पकाने की लागत तय है; उच्च प्राथमिक के लिए 150 ग्राम और 8.17 रुपये। ये दरें 1 अक्टूबर 2022 से लागू हैं। एक भोजन में प्राथमिक बच्चे के लिए 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन का मानक है, उच्च प्राथमिक के लिए 700 कैलोरी और 20 ग्राम। रसोइया-सह-सहायक का न्यूनतम मानदेय एक हज़ार रुपये महीना है।
पूरी शर्त स्कूल दिवस शब्द पर टिकी है
मार्गदर्शिका के पैरा 4.6 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 का हवाला देकर लिखा गया है कि पात्र संस्थान के हर बच्चे को हर स्कूल दिवस पर गर्म पका भोजन मिलेगा, या जहाँ लागू हो, खाद्य सुरक्षा भत्ता। पूरी शर्त की धुरी स्कूल दिवस शब्द है। जिस दिन ज़िलाधिकारी के आदेश पर स्कूल बंद है, वह दिन इस परिभाषा में आता है या नहीं, इसका उत्तर उसी उपशीर्षक 3.10 में होना चाहिए था जो ख़ाली है।
सारण अकेले में कितने स्कूल हैं
सारण उन चौदह ज़िलों में शामिल है। प्रभात ख़बर के अनुसार इस एक ज़िले में 2,750 प्रारंभिक और चार सौ से ज़्यादा प्लस टू स्कूल हैं, और सबको तय कार्यक्रम पर परीक्षा करानी है; सभी प्रखंडों को कदाचार-मुक्त परीक्षा के निर्देश जारी हो चुके हैं। देशज टाइम्स के अनुसार सारण के ही दिघवारा प्रखंड में गंगा चढ़ने के बाद कई स्कूल पानी में डूब गए हैं। एक ही ज़िले में परीक्षा की तैयारी और स्कूलों का डूबना साथ चल रहा है।
प्रश्नपत्र कहाँ तक पहुँचने हैं
मोतिहारी से प्रभात ख़बर की रिपोर्ट के अनुसार कक्षा नौ और दस की गोपनीय सामग्री और प्रश्नपत्र 7 से 15 सितंबर 2026 के बीच ज़िला मुख्यालयों के चिह्नित वितरण केंद्रों पर पहुँचाए जाने हैं, और विद्यालय प्रधानों को परीक्षा से पहले उन्हें लेना है। परीक्षा के सात दिनों के भीतर उन्हें परिणाम तैयार करना है। ज़िला शिक्षा पदाधिकारी राज कुमार गिरी ने कहा कि बोर्ड के निर्देश के अनुसार परीक्षा कराई जाएगी। द हिंदू के अनुसार उत्तर पुस्तिकाओं की आपूर्ति 12 सितंबर से शुरू होनी है।
नदियाँ और बराज इस समय कहाँ हैं
9 सितंबर की सुबह नौ बजे भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा 36.78 मीटर पर थी, जो 17 अगस्त 2021 के 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर है। एक दिन पहले सुबह आठ बजे यही गेज 36.80 मीटर था, जिस पर हमने 9 सितंबर के अंक में लिखा था। सोन के इंद्रपुरी बराज पर उसी सुबह 80,785 क्यूसेक दर्ज हुआ और प्रवृत्ति बढ़ती हुई थी; इस साल का शिखर 2 सितंबर को 5,63,654 क्यूसेक रहा। भोजपुर, बक्सर और अरवल इसी पट्टी में हैं।
मौतों की संख्या पर भी दो अलग आँकड़े
रोज़ाना स्पोक्समैन ने पटना ज़िले के दानापुर और मनेर में पाँच लोगों के डूबने की ख़बर दी और लिखा कि हर परिवार को चार लाख रुपये मुआवज़े की प्रक्रिया चल रही है। देशज टाइम्स ने उसी 9 सितंबर को पूरे राज्य के लिए इस बाढ़-दौर में बीस मौतें लिखीं। दोनों रिपोर्टों का दायरा अलग है और इन्हें मिलाकर एक संख्या निकालना मुमकिन नहीं। पीटीआई ने आपदा प्रबंधन विभाग के जिस बुलेटिन को उद्धृत किया, उसमें मृतकों की संख्या नहीं है।
तैनाती और बारिश
राज्य में एसडीआरएफ़ की 27 और एनडीआरएफ़ की 10 टीमें तैनात हैं, और यह संख्या 8 तथा 9 सितंबर दोनों दिन के बुलेटिनों में एक जैसी रही। सियासत की रिपोर्ट में बिहार मौसम सेवा केंद्र के हवाले से दर्ज है कि सितंबर में अब तक 79.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 31 फ़ीसदी ज़्यादा है। कक्षा एक और दो की मौखिक परीक्षा 15 सितंबर से उनके कक्षा शिक्षक लेंगे।
स्रोतद हिंदू, 9 सितंबर 2026 की रिपोर्ट: 14 बाढ़-प्रभावित ज़िलों में चार हज़ार से ज़्यादा सरकारी स्कूल जलमग्न, अर्धवार्षिक परीक्षा का कार्यक्रम, अभिभावकों और शिक्षक संघ के बयान, बिज़नेस स्टैंडर्ड, 9 सितंबर 2026: बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के उसी दिन के बुलेटिन पर पीटीआई की रिपोर्ट, ज़िलों की सूची, शिविर, रसोई, गेज और बराज डिस्चार्ज, देशज टाइम्स, 9 सितंबर 2026 (12:13 बजे प्रकाशित): बाढ़ से प्रभावित स्कूलों की ज़िलेवार गिनती और ज़िलाधिकारियों के अधिकार पर हिंदी रिपोर्ट, रोज़ाना स्पोक्समैन, 9 सितंबर 2026: पटना ज़िले में पाँच मौतें, मुआवज़ा, मुंगेर और समस्तीपुर की स्थिति, 14 ज़िलों में 35.89 लाख प्रभावित, सियासत डेली, 8 सितंबर 2026 के बुलेटिन पर आधारित रिपोर्ट: 13 ज़िले, 34.31 लाख प्रभावित, 432 सामुदायिक रसोई, 14 शिविर, प्रभात ख़बर, छपरा: सारण ज़िले में अर्धवार्षिक परीक्षा का कक्षावार कार्यक्रम, स्कूलों की संख्या, मूल्यांकन और अभिभावक-शिक्षक बैठक की तारीख़, प्रभात ख़बर, मोतिहारी: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का कक्षा 9 और 10 का कार्यक्रम, गोपनीय सामग्री पहुँचाने की तारीख़ें, ज़िला शिक्षा पदाधिकारी का बयान, एएनआई, कटिहार, 4 सितंबर 2026: प्रतापगंज के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के बच्चों का नाव से स्कूल पहुँचना, शिक्षक, नाविक और अभिभावक के बयान, शिक्षा मंत्रालय, पीएम पोषण योजना की मार्गदर्शिका (21 दिसंबर 2022 का पत्र), 140 पृष्ठ: पैरा 3.1, 3.2, 3.10, 4.6 और 17.2, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की अनुसूची का मूल पाठ: भवन की शर्त और न्यूनतम कार्यदिवस-शिक्षण घंटे, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 का मूल पाठ: शिक्षकों की ग़ैर-शैक्षणिक तैनाती पर रोक और उसके अपवाद, करियर्स360, 24 अगस्त 2024: बिहार शिक्षा विभाग का ज़िलाधिकारियों को स्कूल बंद करने का अधिकार देने वाला निर्देश और तत्कालीन सचिव का बयान, यूडाइस प्लस 2021-22 से 2024-25 के आँकड़ों का विश्लेषण: बिहार में कुल स्कूल, सरकारी प्रबंधन का हिस्सा, प्रति स्कूल औसत नामांकन