विषय
बाढ़
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समझिए
निलंबूर ब्लॉक के लिए 20 सितंबर का ब्लॉक-स्तरीय पूर्वानुमान 3.6 मिलीमीटर बारिश का था; उसी शाम कोट्टापुषा चढ़ गई
रविवार शाम क़रीब पाँच बजे मलप्पुरम के पूक्कोट्टुंपाडम में नदी अचानक ऊपर आई और लोगों को बहा ले गई। घटनास्थल पर बारिश नहीं हो रही थी। पानी ऊपर के जंगल से आया, और जिस तरफ़ से आया उस तरफ़ की सीमा तमिलनाडु है।
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देश
नेपाल को बिजली भेजने की मंज़ूरी में 600 और 54 मेगावाट के साथ एक घड़ी भी लिखी है: रात 12 से शाम 6 बजे तक
विद्युत मंत्रालय ने सोमवार, 14 सितंबर को नेपाल विद्युत प्राधिकरण के लिए 13 सितंबर से 31 दिसंबर तक बिजली निर्यात की मंज़ूरी दी। विज्ञप्ति में दो लाइनों के नाम हैं, दो आँकड़े हैं और दिन के अठारह घंटे तय हैं। शाम छह से रात बारह बजे तक के छह घंटे उन अठारह में नहीं आते, और भारतीय बिजली बाज़ार में बेचने वालों की सबसे बड़ी कमी इन्हीं घंटों में रहती है।
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दुनिया
नेपाल की जो 40 मेगावाट बिजली भारत से होकर बांग्लादेश जाती थी, वह बाढ़ के बाद शून्य है और नया रास्ता दिल्ली की मंज़ूरी पर अटका है
26 अगस्त की बाढ़ ने चिलिमे और त्रिशूली को बंद किया, और उसी के साथ नेपाल का पहला तीसरे देश को बिजली बेचने वाला सौदा रुक गया। नेपाल अब चाहता है कि किसी दूसरी परियोजना की बिजली उसी लाइन से भेजी जाए। इसके लिए मंज़ूरी काठमांडू या ढाका से नहीं, भारत के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से आनी है।
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देश
बिहार के चार हज़ार से ज़्यादा सरकारी स्कूल पानी में हैं और अर्धवार्षिक परीक्षा 15 सितंबर से तय है
आपदा प्रबंधन विभाग के 9 सितंबर के बुलेटिन में पूरे राज्य के लिए 15 राहत शिविर दर्ज हैं, जिनमें 13,446 लोग हैं। स्कूल शिविर बनकर ख़ाली नहीं हुए, वे डूबकर ख़ाली हुए हैं। परीक्षा का कार्यक्रम नहीं बदला, और बच्चों से घर से चटाई और पॉलीथीन लाने को कहा गया है।
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देश
भागलपुर में गंगा 2021 के रिकॉर्ड से ऊपर है और भागलपुर की अपनी बारिश 61 फ़ीसदी कम; एक ही मानसून ने बिहार को डुबोया और कर्नाटक को सुखाया
बिहार में 34 लाख लोग बाढ़ में हैं, जबकि राज्य के अपने आसमान से सामान्य से बहुत कम पानी गिरा। पानी नेपाल से आया, उस हिमनद से जो 26 अगस्त को लांगतांग लिरुंग पर ढहा। कर्नाटक में 31 में से 30 ज़िले सूखे हैं और 126 तालुक सूखाग्रस्त होने वाले हैं। बुंदेलखंड में खेत-तालाब ख़ाली हैं।
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समझिए भारत का पहला उपग्रह जो ऊपर से गुज़रेगा नहीं, एक ही जगह टिककर देखता रहेगा ईओएस-05 शुक्रवार तड़के 2 बजकर 55 मिनट पर छोड़ा गया। अब तक के भारतीय निगरानी उपग्रह ज़मीन से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर चक्कर लगाते हैं और किसी जगह के ऊपर से कुछ-कुछ दिन में गुज़रते हैं।
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देश हिमनद झीलों पर बैठक पाँच राज्यों के साथ हुई, और सबसे ज़्यादा झीलें जहाँ हैं वह लद्दाख बुलाया ही नहीं गया गृह सचिव ने उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल और जम्मू-कश्मीर के साथ तैयारी की समीक्षा की। विज्ञप्ति में झीलों की गिनती नहीं है, पैसा नहीं है, और कोई समयसीमा नहीं है।
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देश गंडक में जितना पानी आया, बैराज उससे छह गुना झेलने के लिए बना है 27 अगस्त की रात वाल्मीकि नगर पर बहाव 1,50,200 क्यूसेक था। डिज़ाइन क्षमता 8,50,000 है। 2008 में कुसहा का तटबंध इससे भी कम पानी पर टूटा था।
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दुनिया जिस झील ने 550 लोगों को बहाया, वह उससे पिछली शाम तक थी ही नहीं रसुवा की बाढ़ हिमनद झील के फटने से नहीं आई। पहाड़ का एक हिस्सा नदी में गिरा, नदी रुकी, और वह अस्थायी बाँध टूट गया। दुनिया की किसी ख़तरा-सूची में यह झील दर्ज नहीं थी।