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सीए, सीएस और लागत लेखाकार के नीचे एक नया दर्जा बन रहा है, पहले बैच में 2,879 लोग हैं

कॉरपोरेट मित्र पाठ्यक्रम बारह महीने का है। छह महीने रिकॉर्ड किए गए व्याख्यान, फिर छह महीने किसी पेशेवर फ़र्म में काम। घोषणा बजट 2026-27 में हुई थी।

सीए, सीएस और लागत लेखाकार के नीचे एक नया दर्जा बन रहा है, पहले बैच में 2,879 लोग हैं

अगर आप कोई छोटा कारख़ाना, दुकान या सेवा-कारोबार चलाते हैं, तो आपका सबसे महँगा ख़र्च अक्सर वह नहीं होता जो आप बनाते हैं।

वह काग़ज़ होता है।

जीएसटी की विवरणी, टीडीएस, कंपनी की सालाना फ़ाइलिंग, पीएफ़ और ईएसआई का हिसाब, दुकान का लाइसेंस। हर चीज़ की एक तारीख़ है और चूकने पर जुर्माना है। और यह सब करवाने के लिए सीए या कंपनी सचिव की फ़ीस देनी पड़ती है, जो कई छोटे कारोबारों के बस की नहीं।

सरकार ने इसी जगह एक नया दर्जा बनाने की कोशिश शुरू की है।

हुआ क्या

कॉरपोरेट मित्र पाठ्यक्रम का पहला बैच शुरू हो गया है। पंजीकरण 2,879 लोगों ने कराया है।

यह पाठ्यक्रम तीन संस्थान मिलकर चला रहे हैं। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान और भारतीय लागत लेखाकार संस्थान। दिशा कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की है।

तकनीकी और शैक्षणिक साथ आईआईटी मद्रास, आईआईटी मद्रास प्रवर्तक और स्वयं प्लस का है।

इस पहल की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में हुई थी।

2,879पहले बैच में पंजीकृत शिक्षार्थी

पढ़ाई कैसी है

कुल अवधि बारह महीने की है और वह दो हिस्सों में बँटी है।

पहले छह महीने पढ़ाई के हैं। लगभग 150 घंटे के रिकॉर्ड किए गए वीडियो व्याख्यान, संदर्भ सामग्री, मूल्यांकन और चर्चा मंच, सब एक ऑनलाइन मंच पर।

अगले छह महीने काम के हैं। शिक्षार्थी इन तीनों संस्थानों के सदस्यों की पेशेवर फ़र्मों में जाकर काम करेगा।

यानी ढाँचा वही है जो सीए की पढ़ाई का है, बस छोटा किया हुआ। पहले पाठ, फिर व्यावहारिक प्रशिक्षण।

असम के तेज़पुर में एक पारंपरिक हथकरघे पर काम करती बुनकर। इसी आकार के उद्यमों को यह पाठ्यक्रम मदद देने की बात करता है
तस्वीर: दीपराज, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.5

मक़सद क्या बताया गया

मंत्रालय की संयुक्त सचिव अनीता शाह अकेला ने कार्यक्रम में कहा कि कॉरपोरेट मित्र का उद्देश्य अनुपालन को कम जटिल और उद्यमियों के लिए ज्ञान को अधिक सुलभ बनाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि पहल का इरादा अनुपालन को बोझ के बजाय भरोसे, पारदर्शिता, जवाबदेही और सुव्यवस्थित विकास का ज़रिया बनाना है।

शुभारंभ नई दिल्ली में आईसीएआई के मुख्यालय में हुआ।

और वह सवाल जिसका जवाब नहीं है

पेशेवर योग्यता की क़ीमत एक ही चीज़ से तय होती है। उस काग़ज़ पर किसके दस्तख़त चलते हैं।

सीए की ऑडिट रिपोर्ट इसलिए मायने रखती है कि क़ानून उसे मान्यता देता है। कंपनी सचिव का प्रमाणपत्र इसलिए मायने रखता है कि कंपनी अधिनियम उसे माँगता है।

विज्ञप्ति में यह नहीं लिखा कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कॉरपोरेट मित्र किस विवरणी या किस प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर कर सकेगा।

अगर वह किसी काग़ज़ पर दस्तख़त नहीं कर सकता, तो वह सहायक है, पेशेवर नहीं। यह अपने आप में ग़लत नहीं है, क्योंकि छोटे कारोबार को अक्सर दस्तख़त से ज़्यादा यह जानने की ज़रूरत होती है कि कौन-सी तारीख़ कब आती है और कौन-सा फ़ॉर्म कहाँ भरा जाता है।

पर यह बात साफ़ लिखी जानी चाहिए थी, क्योंकि 2,879 लोगों ने एक साल इसमें लगाया है।

बाक़ी जो नहीं बताया गया

पात्रता क्या है, यानी कौन दाख़िला ले सकता है और किस पढ़ाई के बाद।

शुल्क कितना है।

और छह महीने के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए शिक्षार्थी को फ़र्म कौन दिलाएगा, यह पंजीकरण करने वाले को ख़ुद ढूँढ़ना होगा या संस्थान बाँटेंगे।

तीनों सवालों के जवाब पाठ्यक्रम की अपनी वेबसाइट पर होने चाहिए। विज्ञप्ति में तीनों नहीं हैं।

स्रोतकॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, विज्ञप्ति, भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।