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सुप्रीम कोर्ट: वैवाहिक विवाद के पॉक्सो मामलों में फ़ौरन गिरफ़्तारी नहीं, मनोवैज्ञानिक जांच पहले
गुरुवार, 24 सितंबर को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि जहाँ बच्चे के माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा हो और पॉक्सो का आरोप ख़ुद परिवार के किसी सदस्य पर लगे, वहाँ गिरफ़्तारी से पहले बच्चे का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन ज़रूरी होगा। यह फ़ैसला बेंगलुरु के एक मामले में सीबीआई जांच के बाद आया, जिसमें अदालत ने एफ़आईआर रद्द कर बेटी की क़ानूनी कस्टडी पिता को लौटाई।
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कर्नाटक में हर किसान को ढाई हज़ार का ऐलान, सरकारी आदेश अभी जारी नहीं
गुरुवार रात विधानसभा में उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने हर सूखा-प्रभावित किसान को ढाई हज़ार रुपये और कर्ज़ पर बारह महीने की मोहलत का ऐलान किया। दो असली सरकारी आदेश मिलते हैं, दोनों ताल्लुक़ों की सूखा-घोषणा के हैं, दोनों में ढाई हज़ार रुपये का कोई ज़िक्र नहीं। उधर महाराष्ट्र सूखा घोषित करने से पहले अक्तूबर का इंतज़ार कर रहा है, क्योंकि केंद्र की नियमावली का हिसाब मॉनसून सीज़न ख़त्म हुए बिना पूरा नहीं होता।
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चार शहरों के कचरे के पहाड़, सरकारी आँकड़ों में सिर्फ़ एक ही ख़त्म
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की 21 सितंबर की बैकग्राउंडर गोरखपुर, दिल्ली, नागपुर और रायचूर को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की चार कामयाबी बताती है। मंत्रालय की अपनी वार्षिक रिपोर्ट और भलस्वा पर बाद की विज्ञप्तियाँ जोड़ने पर पता चलता है कि इनमें से सिर्फ़ गोरखपुर की डंपसाइट पूरी तरह ख़त्म हुई है, और भलस्वा में बायोमाइंड कचरे का एक आँकड़ा मंत्रालय के दो दस्तावेज़ों में आपस में मेल भी नहीं खाता।
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दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार सुबह सात जजों की शपथ है, कॉलेजियम ने आठ नाम भेजे थे; गुरविंदर पाल सिंह का नाम सरकार की विज्ञप्ति में नहीं है
10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्टों के लिए कुल पंद्रह न्यायिक अधिकारियों के नाम भेजे थे। 19 सितंबर को विधि एवं न्याय मंत्रालय ने चौदह नियुक्तियों की विज्ञप्ति जारी की। जो एक नाम छूटा, वह दिल्ली की आठ नामों वाली सूची में पहले नंबर पर था, और उसके रुकने की कोई वजह किसी सार्वजनिक दस्तावेज़ में दर्ज नहीं है।
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केंद्र ने कर्नाटक हाई कोर्ट से कहा, कर छूट में 'जीवनसाथी' का दायरा बढ़ा तो क़रीब 159 क़ानून नहीं चल पाएँगे
शनिवार, 19 सितंबर को जस्टिस बी एम श्याम प्रसाद की एकल पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बहस की। मामला 14.41 ग्राम के एक सोने के कड़े से शुरू हुआ था और अब आयकर क़ानून के एक परंतुक पर टिका है। अदालत ने कुछ तय नहीं किया। अगली तारीख़ 9 अक्टूबर है।
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चार हाई कोर्टों में चौदह जज नियुक्त, उनमें आठ की नियुक्ति दो साल से ज़्यादा की नहीं है
शनिवार, 19 सितंबर को विधि एवं न्याय मंत्रालय की विज्ञप्ति की तालिका में चौदह नाम हैं और तीसरे ख़ाने में दो अलग वाक्य। छह की नियुक्ति जज के रूप में है, आठ की अपर जज के रूप में। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर को जो चार बयान जारी किए, उनमें से किसी में 'अपर' शब्द नहीं है।
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कर्नाटक की मज़दूरी अधिसूचना 1948 के उस क़ानून से जारी हुई जो 21 नवंबर 2025 को निरस्त हो चुका था
22 मई 2026 की पच्चीस पन्ने की अधिसूचना पहले ही पैराग्राफ़ में न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 की धारा 3(1)(ब) और 5(1)(ब) का हवाला देती है। उसी अधिसूचना के तीसरे पन्ने पर, कन्नड़ पाठ के बीच अंग्रेज़ी में, वेतन संहिता, 2019 की वह धारा 69 छपी है जिसने 1948 के क़ानून को निरस्त किया। शुक्रवार, 18 सितंबर को कर्नाटक हाई कोर्ट ने इसी अधिसूचना को रोकने वाले तीन सरकारी परिपत्रों पर अंतरिम रोक लगाई।
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नक़ली दवा के आरोप में बेंगलुरु की कृपा हेल्थकेयर पर छापा, मालिक गिरफ़्तार
शनिवार, 12 सितंबर को बेंगलुरु पुलिस की विशेष जाँच टीम और कर्नाटक के औषधि नियंत्रण विभाग ने मिनर्वा सर्कल के पास एक थोक दवा कारोबार के दफ़्तर और गोदाम की तलाशी ली और मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ़्तार किया। जाँच अधिकारियों का कहना है कि कैंसर की दवाएँ, जीवन रक्षक दवाएँ और आईसीयू के इंजेक्शन एमआरपी से क़रीब आधे दाम पर 90 से ज़्यादा अस्पतालों, क्लीनिकों और दवा दुकानों तक पहुँचे। यह संख्या जाँच एजेंसी का आकलन है और नमूने अभी प्रयोगशालाओं में हैं।
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कर्नाटक ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के दो अंतरे तय किए, जबकि 2026 के क़ानून में कहीं नहीं लिखा कि राष्ट्रगीत कितने अंतरों का है
8 सितंबर को मंत्रिमंडल के फ़ैसले के बाद कर्नाटक ने आदेश निकाला कि राज्य के कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे गाए जाएँगे। केंद्र का 6 फ़रवरी 2026 का निर्देश छहों अंतरे माँगता है। अगस्त में बना नया क़ानून 'राष्ट्रगीत' शब्द का इस्तेमाल करता है, पर उसे परिभाषित कहीं नहीं करता।
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समझिए
मतदाता सूची में नाम पर निशान लगना नाम कटना नहीं है, पर सफ़ाई देने की बारी मतदाता की ही है
कर्नाटक की विसंगति-सूची में नंदन नीलेकणि, सी.एन.आर. राव और कामथ भाइयों के नाम आने के बाद यह सवाल बड़ा हो गया कि 'अनमैप्ड' श्रेणी का मतलब क्या है। चुनाव आयोग की अपनी विज्ञप्तियाँ बताती हैं कि यह क़वायद इस समय 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है और इसके दायरे में 36.73 करोड़ मतदाता हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली और झारखंड से आ रहे आँकड़े और आरोप अलग-अलग दिशाओं में इशारा करते हैं।
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जिस क़ानून के सहारे कर्नाटक सिनेमा टिकटों पर दो फ़ीसदी उपकर वसूल रहा था, वह क़ानून कभी लागू ही नहीं हुआ
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 10 सितंबर को वे परिपत्र और नोटिस रद्द कर दिए जिनमें सिनेमाघरों से 1 सितंबर से दो फ़ीसदी कल्याण उपकर वसूलने को कहा गया था। राज्य ने ख़ुद अदालत में माना कि 2024 का अधिनियम अब तक चालू ही नहीं हुआ। जिन दिनों यह रक़म टिकट पर जुड़ी, उसका क्या हुआ, यह कोई दस्तावेज़ नहीं बताता।
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कर्नाटक की सरकारी गाड़ियों पर 19.23 करोड़ रुपये का जुर्माना बाक़ी है, उतनी रक़म बेंगलुरु ने आम लोगों से 14 दिन में वसूल ली
मैसूरु की एक आपात गश्ती गाड़ी पर सिर्फ़ सीट बेल्ट के 71 चालान चढ़े। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने पूछा कि सरकारी गाड़ी का जुर्माना आख़िर भरता कौन है। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीट बेल्ट का क़ानून साफ़ है और झगड़ा पालन का है।
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भागलपुर में गंगा 2021 के रिकॉर्ड से ऊपर है और भागलपुर की अपनी बारिश 61 फ़ीसदी कम; एक ही मानसून ने बिहार को डुबोया और कर्नाटक को सुखाया
बिहार में 34 लाख लोग बाढ़ में हैं, जबकि राज्य के अपने आसमान से सामान्य से बहुत कम पानी गिरा। पानी नेपाल से आया, उस हिमनद से जो 26 अगस्त को लांगतांग लिरुंग पर ढहा। कर्नाटक में 31 में से 30 ज़िले सूखे हैं और 126 तालुक सूखाग्रस्त होने वाले हैं। बुंदेलखंड में खेत-तालाब ख़ाली हैं।
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दो राज्यों के लोक सेवा आयोगों में जो गिरफ़्तार हुए, वे बाहर के लोग नहीं थे
कर्नाटक में परीक्षा नियंत्रक पद पर तैनात रहे एक आईएएस अधिकारी हिरासत में हैं। महाराष्ट्र में आयोग के अवर सचिव गिरफ़्तार हैं। दोनों जगह पर्चा उन्हीं के पास था जिनके पास होना चाहिए था।
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जिस जज के सामने आपका मुक़दमा है, वह साठ पर रिटायर होता है, और यह उम्र 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुद तय की थी
अब वही अदालत चाहती है कि यह बासठ हो। सात राज्य मान गए हैं, तेईस को दो हफ़्ते का समय मिला है। बीच में ज़िला अदालतों के 5.18 करोड़ मुक़दमे खड़े हैं।